परिवार हो तो ऐसा – Update 36 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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स्वीटी की बिना बालों की चूत पर जीब फिराते हुए सोनिया ने अपनी दो

उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसा दी.. स्वीटी ने अपनी टाँगे हवा मे उठा

दी जिससे उसकी चूत सोनिया के मुँह के सामने हो गयी…

‘स्वीटी अब बताओ तुमने अपनी चूत की झांते किसके लिए सॉफ की है”

सोनिया ने अपनी उग्लियाँ उसकी चूत के अंदर बाहर करते हुए पूछा.

“तुम्हे ऐसा क्यों लगा कि मेने अपनी चूत के बाल किसी के लिए साफ

किए है?” स्वीटी ने पलट कर पूछा.

“ऐसा है ना स्वीटी मेने अपनी जिंदगी मे कई लड़कियों के साथ सेक्स

किया है और उसमे मे सिर्फ़ पाँच लड़कियों ने अपनी चूत के बाल साफ

किए थे और सभी ने ये काम किसी दूसरे के लिए किया था. ” सोनिया

ने उसकी चूत मे और तेज़ी से उंलगियों को अंदर बाहर करते हुए

कहा. .. “अब सच सच बताना तुमने भी क्या किसी के लिए ऐसा किया

है?”

“झूठ नही बोलूँगी.. हां” स्वीटी ने जवाब दिया.

“वो लड़का हा या फिर कोई प्यारी लकड़ी?” सोनिया ने पूछा.

“एम्म्म ऐसा समझ लो कि दोनो ही है” स्वीटी ने जवाब दिया.

“मेरी कुछ समझ मे नही आया”

“सोनिया मेने एक लड़की के साथ सेक्स किया था तो देखा कि उसकी चूत

चिकनी और बिना बालों के थी..जब मेने उससे पूछा कि ऐसा क्यों है

तो उसने बताया कि वो उसने एक लड़के के लिए किया था.. और फिर में

भी उसी लड़के साथ सोई और मेने उस लड़के लिए अपनी चूत के बाल

साफ कर लिए उस लड़की की मदद से ” स्वीटी ने जवाब दिया.

“वो लड़की उस लड़के से चुदवाति है और उसने ही तुम्हे ऐसा करने के

लिए कहा.?” सोनिया ने चौंकते हुए कहा.

“हां और तो और हम कई बार सामूहिक चुदाई भी कर चुके हैं ‘…

तुम्हे हैरत हो रही है ना सुनकर?” स्वीटी ने कहा.

स्वीटी की बात सुनकर सोनिया हँसने लगी और बोली, “नही हैरत नही

हो रही में भी दो लड़कियों के साथ सामूहिक सेक्स कर चुकी हूँ”

कहकर उसने अपनी उंलगियाँ उसकी चूत से बाहर निकाल चूसने लगी और

फिर अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगी चूसने लगी..

“ओह हाआँ ऐसे ही ऑश हाां” स्वीटी ने अपनी टाँगे हवा मे उठा दी

और अपनी चूत को और सोनिया के मुँह पर दबा डी… उसकी चूत मे तो

जैसे और आग सी लग गयी थी…

वहीं बलदेव अपने भाई के कमरे मे ज़मीन पर लेटा अपने हाथों को

अपनी पत्नी वसुंधरा के बदन पर फिरा रहा था…. फिर उसने अपनी

फिर पीछे से उसने अपने हाथ को उसकी पॅंटी के अंदर घुसा वासू के

चूतदों को सहलने लगा… उसने महसूस किया कि वासू ने थोड़ा हिल

कर उसके हाथों को सही जगह दी. तो उसने पीछे से उसके टाँगो को

थोड़ा फैलाया और अपनी उंगलियो से उसकी चूत सहलाने लगा… उसने

महसूस किया कि वासू की चूत उत्तेजना मे पूरी तरह गीली हो चुकी

थी..

बलदेव ने अपनी एक उंगली वासू की चूत मे घुसा अंदर बाहर करने

लगा और थोड़ी ही देर मे उसे दूसरी उंगली भी उसकी चूत मे घुसा

दी… वासू उत्तेजना मे अपने चूतदों को पीछे धकेल उसकी उंगलिया

का मज़ा अपनी चूत मे लेने लगी… फिर अपनी गर्दन को घूमा उसने

अपने होठों को देव के होठों पर रख चूसने लगी.. देव ने उसकी

कठोर चुचयों को अपनी मुट्ठी मे पकड़ा और मसल्ने लगा..

वासू बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारियों को रोक रही थी… कमरे मे

वहीं बेड पर उसका देवर मोहन और देवरानी नेहा सोई हुई थी.. वो

उन्हे जगाना नही चाहती थी..देव अब उसके निपल को भेंचने लगा और

नोचने लगा…

“देव प्लीज़ मुझे चोदो ना अब नही सहन होता… ” वासू धीरे से

अपने पति से फुश्पुसाइ… देव अपनी उंगलियों को अपनी पत्नी की चूत

से बाहर निकाला और उसकी पॅंटी को नीचे खिसका दिया… और फिर अपने

पंजे के सहारे उसे उसके पैरों के बाहर निकाल दिया…

देव अब वासू के पीछे आ गया और पीछे से अपनी पत्नी की चूत पर

घिस कर अपने लंड को गीला करने लगा… इस तरह लेटे लेटे देव को

अपना लंड चूत मे घुसाने मे तकलीफ़ हो रही थी.. तब वासू ने अपनी

टाँगो को थोड़ा और फैलाया और हाथ से उसके लंड को पकड़ अपनी चूत

के मुँह पर लगा दिया.. और देव ने आगे की ओर धकेल अपने लंड को

उसकी चूत मे घुसा दिया…

वासू ने अपनी टाँगो को छाती पर कर लिया जिससे देव आसानी से अपने

लंड को अंदर बाहर कर सके.. देव अब लेटे लेटे अपने पत्नी की चुदाई

करने लगा.. दोनो बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ पर काबू पा रहे थे..

दोनो अब बड़े आराम से चुदाई मे लग गये और थोड़ी ही देर मे दोनो

झाड़ कर शांत हो गये.

नेहा को अपने जेठ और जेठानी की चुदाई की आवाज़े आ रही थी और

उनकी चुदाई का मज़ा लेते हुए वो अपनी उंगली से अपनी चूत को चोद

रही थी…. उसका दिल तो कर रहा था कि वो भी उनके साथ शामिल हो

जाए.. पर वो अपने जेठ के सामने बेशरम नही होना चाहती थी.. और

तभी उसका बदन काँपा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

आधी रात को जब अचानक किसी ने राज की बॉक्सर शॉर्ट्स मे हाथ डाल

कर उसके लंड को बाहर निकाला तो उसकी आँख खुल गयी… एक बार तो

वो चौंक पड़ा… उसने कुछ कहना चाहा कि तभी उसके होंठो को किसी

ने अपने होंठो से जाकड़ लिया.. राज ने तिर्छि नज़रों से देखा कि रवि

कहाँ है तो उसने देखा कि वो उसकी बगल मे गहरी नींद मे सोया

खर्राटे ले रहा है…

तभी जो भी उस पर चढ़ा था उसने नीचे की और खिसकते हुए उसके

खड़े लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी… राज का लंड और

अकड़ने लगा… वो अब उसके लंड को उपर से नीचे तक चाटते हुए ज़ोर

ज़ोर से चूस रही थी… तभी उसने अपनी छाती पर उसकी चुचियों

का दबाव महसूस किया और समझ गया कि ये उसकी प्यारी बेहन प्रीति

ही है…

“राज ये मैं हूँ” प्रीति ने राज के होठों को चूमते हुए कहा…

“हाई प्रीति… क्या बात है बहुत गरमा रही हो?” राज ने उसके होठों

को अपने होठों के बीच दबाते हुए कहा…

“पता है क्या हुआ?” प्रीति ने पूछा.

“एम्म्म नही” राज ने अपने हाथो को उसके पीठ से नीचे खिसकाते हुए

उसकी भारी और मुआलायम गंद को भींचते हुए जवाब दिया….

“तुम्हे विश्वास नही होगा मैने अभी अभी शमा की चूत का मज़ा लिया

है” प्रीति ने जवाब दिया.

“क्या सच कह रही हो? मुझे उम्मीद नही थी कि वो तुम्हे ऐसा करने

देगी” राज ने कहा.

“हां मुझे ऐसा ही लग रहा था लेकिन लगता है कि आज वो कुछ

ज़रूरत से ज़्यादा ही उत्तेजित थी और उसने मुझे सब कुछ करने

दिया.” प्रीति ने कहा.

“मुझे खुशी है तुम्हारे लिए…. वरना मैं तो अपने खड़े लंड को

पकड़े तन्हाई में सो रहा था..” राज ने जवाब दिया.

“ऑश मेरा बेचारा भाई…. क्या में कुछ मदद करूँ तुम्हारी?”

प्रीति ने हाथ नीचे कर एक बार फिर उसके लंड को पकड़ते हुए कहा.

“ऑश हां प्रीति” राज ने कहा…

प्रीति उसके बदन से नीचे उतारी और अपनी पॅंटी को अपने बदन से

उतार दी.. और फिर वापस उसके उपर चढ़ गयी और बिना कोई आवाज़

किए उसने अपनी कमर को उचका राज के लंड को अपनी चूत से लगाया

और उस पर बैठते हुए उसके लंड को अपनी चूत मे ले लिया… उसपर

झुकते हुए वो आगे पीछे होकर उसके लंड को अंदर बाहर करने

लगी… राज ने उसकी दोनो चुचियों को अपनी हथेली मे भर लिया और

हौले हौले मसल्ने लगा…

थोड़ी देर बाद प्रीति उसके बदन पर घूम गयी और अब उसके भारी

चूतड़ राज की नज़रों के सामने थे.. प्रीति राज के लंड पर आगे

पीछे हो रही थी और राज की नज़रें अपनी बेहन की गंद पर टीकी

थी और साथ ही वो देख रहा था कि किस तरह उसका खड़ा लंड उसकी

अपनी बेहन की चूत मे अंदर बाहर हो रहा है…

प्रीति ने अपने हाथो को अपनी चूत पर रखा जहाँ से उसका चूत से

रस बह रहा था.. उसने अपनी उंगलियों को अपने ही रस से गीला किया

और फिर अपने हाथ को पीछे लेजाकर उसने अपनी उंगली अपनी गंद मे

छेद मे घुसा दी…

“ऑश राज बहुत अच्छा लग रहा है..” प्रीति फुसफुसा… राज हैरत

से अपनी बेहन को अपनी चूत मे और गंद मे मज़ा लेते देख रहा

था…

“राज अब तुम अपनी उंगली मेरी गंद मे घुसा उसे अंदर बाहर करो”

प्रीति ने अपनी उंगलियों को अपनी गंद से बाहर निकालते हुए कहा.

रवि किसी पुतले की तरह चुप चुप लेटा हुआ था…जो कुछ प्रीति और

राज आपस मे बात कर रहे थे उसे वो सब कुछ सॉफ सॉफ सुनाई दे

रहा था…उसने अपनी गर्दन राज की तरफ घुमाई और ये देख के

चौंक पड़ा कि किस तरह प्रीति अपने ही सगे भाई पर चढ़ उसके

लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही राज की

उंगलयों का मज़ा अपनी गंद मे ले रही थी…

रवि बिना कोई आवाज़ किए राज और प्रीति की चुदाई देख रहा था..

उसका लंड भी किसी ख़ुंते की तरह तन कर खड़ा था… उसने अपने

लंड को पकड़ लिया और धीरे धीरे मसल्ने लगा…

“प्रीति की सिसकारियाँ उसे सुनाई पड़ रही थी…

“ओ राज हाआँ चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो हाआँ आज पूरे दिन

तदपि हूँ तुम्हारे लंड के लिए… ऑश हाां ऑश अया” …. और

तभी रवि के लंड ने पानी छोड़ दिया…

प्रीति अब तेज़ी से आगे पीछे हो राज के लंड को अपन चूत मे ले रही

थी और राज जोरों से अपनी उंगली को उसकी गंद के अंदर बाहर कर रहा

था …. कि तभी राज के लंड ने प्रीति की चूत मे पानी छोड़

दिया… प्रीति थोड़ी देर तो आगे पीछे होती रही फिर उसके लंड को

अपनी चूत से निकाल अपने मुँह मे ले चूसने लगी…

जो कुछ रवि ने देखा उसे तो विश्वास ही नही हो रहा था.. वो हैरत

से देख रहा था कि किस तरह प्रीति अपनी चूत के रस से भीगे

अपने भाई के लंड को चटकारे ले लेकर चूस रही थी.. ठीक किसी

छीनाल रांड की तरह…

प्रीति राज के लंड को चूस्ति रही चूस्ति रही.. और जब राज के

लंड से आखरी बूँद भी नीचूड़ गयी तो उसने अपनी चूत को राज के

मुँह से सटा दिया और राज ने उसकी चूत को अपनी मुँह मे भर चूस

चूस कर दूसरी बार उसकी चूत का पानी छुड़ा दिया… प्रीति ने अपनी

पॅंटी उठाई और अपने भाई को अलविदा कह वापस शमा के कमरे मे आ

गयी…

रवि अपने ख़यालों मे खोया रहा.. भाई बेहन के इस नए रिश्ते को

देख वो सोच रहा था और कब नींद ने उसे आ घेरा उसे पता भी

नही चला…

प्रीति बाथरूम मे दीवार के सहारे खड़ी हो अपने बदन को रगड़

रगड़ कर नहा रही थी… उसकी निगाह अपनी चूत पर टिकी हुई थी

जहाँ छोटी छोटी झांते उग्ग आई थी.. उसने अपनी झांते साफ करने

के लिए शेल्फ से शेविंग गेल की ट्यूब और रेज़र उठा लिया… और

नीचे ज़मीन पर बैठ गयी…

प्रीति को हमेशा अपनी झांते सॉफ करने मे बहुत मज़ा आता था.. वो

ध्यान से अपनी चूत के बाल सॉफ करने मे जुट गयी..झांटेट सॉफ

करते करते वो अपनी चूत से खेलती रही… आज घर पर कोई नही

था सभी बाहर गये थे लेकिन उसे क्या पता कि रवि घर पर ही

था…..

बाथरूम के दरवाज़े के बाहर खड़ा रवि सोच रहा था कि क्या उसे

अपने प्लान के मुताबिक काम करना चाहिए.. जबसे उसने प्रीति को राज

के लंड पर चढ़ चुदाई करते देखा था उसके दिल मे प्रीति को

चोद्ने की तमन्ना जाग उठी थी…

रवि वैसे तो राज के साथ घूमने के लिए जाने वाला था.. पूरा

परिवार घूमने फिरने गया था.. लेकिन प्रीति की तमन्ना ने उसे

पीछे ही रोक लिया था… उसे विश्वास था कि अकेले मे वो प्रीति को

फुसलाने मे कामयाब हो जाएगा और इसीलिए वो बाथरूम के बाहर खड़ा

सोच रहा था कि उसे किस तरह आगे बढ़ना चाहिए…

संजोग से बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद था.. प्रीति की चूत के

ख़याल से ही रवि का लंड पूरी तरह तन कर खड़ा था… अपने लंड

को सहलाते हुए उसने दरवाज़े को धीरे से खाट खता दिया… ..

दरवाज़े की आहट से प्रीति चौंक पड़ी.. शॅमपू से भरे बॉल उसके

चेहरे के आगे थे इसलिए वो देख नही पा रही थी… इसलिए उसने

ज़ोर से पूछा.. “कौन है?”

“प्रीति ये मैं हूँ.. में तुम्हे नंगी देखना चाहता था.. ” प्रीति

को रवि की आवाज़ सुनाई पड़ी..

“तुम्हारा दिमाग़ तो खराब नही हो गया है?” प्रीति अपने चेहरे के

आगे से बालों को हटाते हुए ज़ोर से चिल्लाई… “अब दफ़ा हो जाओ यहाँ

से”

“नही प्रीति में तुम्हे अच्छी तरह नंगी देखे बिना यहाँ से नही

जाउन्गा… ” रवि ने धृड़ता से कहा.

“तुम जाते हो यहाँ से या में जोरों से शोर मचाऊ?” प्रीति फिर

चिल्लाई..

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