परिवार हो तो ऐसा – Update 35 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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दिन मस्ती मे गुज़रता गया… प्रीति ने तो कुछ ज़्यादा ही ड्रिंक ले ली

थी.. उसे थोड़ा नशा चढ़ गया था और उसकी चूत मे जोरों की

खुजली मच रही थी… जब उसे ये एहसास होता कि कोई उसकी तरफ नही

देख रहा है तो वो अपने गरम बदन को या तो राज के बदन से रगड़

मसल्ति या फिर स्वीटी के बदन से मसल देती. एक बार तो उसने सभी

से नज़रे बचा अपने चाच्चा के लंड को उनकी शॉर्ट्स के उपर से पकड़

मसल दिया… इससे उसकी चूत मे तो तेज़ी से चिंतियाँ रेगञे लगी…

तभी प्रीति को जोरों से पेशाब लगी तो वो बेडरूम मे बने बाथरूम

की ओर बढ़ी तो देखा कि राज बाथरूम से बाहर निकल रहा है.. उसने

उसकी छाती पर धक्का मार उसे वापस बाथरूम मे धकेला और खुद

अंदर आकर बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लिया…. फिर उसके सामने

घुटनो के बल बैठ गयी और राज से कहा कि वो अपने लंड को अपनी

शॉर्ट्स से बाहर निकाले….

राज ने भी ललचाई नज़रों से अपनी बेहन को देखा और अपने लंड को

शॉर्ट्स की क़ैद से आज़ाद कर दिया… प्रीति किसी भूके बच्चे की

तरह उसके लंड पर टूट पड़ी और उसे अपने मुँह मे पूरा निगलते हुए

चूसने लगी…

“प्रीति खड़ी हो जाओ” राज ने अपने बेहन से कहा… प्रीति खड़ी हुई

तो राज ने उसे दरवाज़े के सहारे झुका दिया.. प्रीति भी दरवाज़े पर

अपने हाथ रख झुक गयी.. राज ने उसकी बिकनी की साइड से हटा दिया..

और अपने लंड को पीछे से उसकी चूत पर घिसने लगा… प्रीति ने

अपनी टाँगे फैला उसके लंड के लिए जगह बनाई… और राज ने अपने

लंड को अपनी बेहन की चूत मे घुसा दिया…

“ऑश आअहह हाआँ राज चोदो मुझे कस कस के चोदो ऑश हाआँ कितने

दिन हो गये तुम्हारा लंड चूत मे लिए… ओह में तो तड़प गयी

तुम्हारे लंड के बिना हाां और अंदर तक घुसा के चूओडूओ. हाआँ

ऐसे ही फाड़ के रख दो मेरी चूत को” प्रीति अपने कुल्हों को पीछे

कर बड़बड़ाने लगी..

तभी प्रीति ने अपने एक हाथ को नीचे से अपनी चूत के करीब किया

और चूत के अंदर बाहर लंड को सहलाने लगी.. फिर उसने अपनी दो

उंगलियाँ राज के लंड के साथ अपनी चूत मे डाल उन्हे अपनी चूत मे

बहते रस से गीला किया और फिर अपनी गंद के छेद मे घुसा अंदर

बाहर करने लगी… तभी दरवाज़े पर किसी ने दस्तक डी…

“क्या कोई अंदर है?” स्वीटी ने बाहर से दरवाज़े को खाट . हुए

पूछा.

“कम्बख़्त को भी इसी वक्त आना था” प्रीति ने अपनी उंगलियाँ गंद मे

से निकाली और राज के लंड को अपनी चूत से बाहर निकाल खड़ी हो

गयी..

“दो मिनिट रूको स्वीटी” प्रीति ने अपनी बिकनी को ठीक करते हुए

कहा. जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला तो स्वीटी उन दोनो को देख हँसने

लगी…

“भगवान का शुक्रा मनाओ कि ये तो में थी वरना अगर कोई और होता

तो आज तुम दोनो ज़रूर पकड़े जाते” स्वीटी ने कहा.

“पकड़े जाते तब देखी जाती.. में क्या करती मेरी चूत मे आग लगी

हुई थी और जब में यहाँ पेशाब करने के लिए आई तो देखा कि राज

यहीं है तो बस मेने इसके लंड को अपनी चूत मे लेने का मन बना

लिया” प्रीति ने जवाब दिया..

“ठीक है अब तुम आराम से पेशाब करो” राज ने कहा, “और इसके पहले

कि यहाँ और कोई आए में यहाँ से जाता हूँ”

“क्या तुम थोड़ी देर रुक कर अपने लंड को शांत नही करना चाहोगे”

स्वीटी ने उसकी शॉर्ट्स मे उसके तने लंड की ओर देख हंसते हुए कहा.

“हां शायद मे किचन मे जाकर इंतेज़ार करता हूँ वरना तुम दोनो

लड़कियाँ के रहते तो ये शांत होने से रहा” राज ने दोनो लड़कियों के

एक एक चुचि को पकड़ मसल्ते हुए वहाँ से चला गया..

राज किचन मे आकर अपने लिए ग्लास मे बियर भर रहा था कि तभी

उसकी चाची नेहा वहाँ किसी काम से आ गयी….

“क्यों राज एंजाय कर रहे हो ना?” नेहा ने अपने भतीजे के खड़े लंड

पर निगाह जमाते हुए कहा.

“हां बहुत अच्छा लग रहा है… बहुत कम ऐसे मौके आते है जब

पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होता है.. बहुत अच्छा लग रहा

है.. “राज ने अपनी निगाह अपनी चाची के पतले गाउन से छलकती

चुचियों पर गढ़ाते हुए कहा.

“पर कभी कभी एकांत और तन्हाई भी अच्छी लगती है” नेहा ने राज के

करीब आते हुए धीरे से कहा, और फिर उसकी शॉर्ट्स के उपर से उसके

लंड को पकड़ मसल्ने लगी.. राज का लंड एक बार फिर पूरी तरह तन

कर खड़ा हो गया..”काश आज एकांत और तन्हाई होती तो में यहीं

फ्रिड्ज के सहारे झुक जाती और तुम्हे मेरी चूत चोद्ने को कहती… ”

“हां अच्छा तो मुझे भी बहुत लगता लेकिन फिलहाल ये सही मौका नही

है” राज ने कहा तो नेहा ने उसके लंड को छोड़ दिया और फिर अलमारी से

नॅपकिन्स निकालने लगी जिसके लिए वो किचिन मे आई थी… फिर राज की

ओर मुस्कुरा कर देखते हुए वो हंसते हुए किचन से चली गयी.

अपनी हालत पर काबू पाने मे राज को थोड़ा वक्त लगा.. और जब उसका

लंड थोड़ा शांत हुआ तो वापस लिविंग रूम मे आ गया.

राज ने देखा कि तीनो लड़कियों ने महीन बिकनी पहन रखी है और सब बाहर वारंडे मे धूप का मज़ा ले रही है.. रवि वहीं एक कुर्सी पर बैठा बियर के घूँट ले रहा था. राज जैसे ही सोनिया और स्वीटी के बगल से निकला तो सोनिया की आँखे तो उसकी जांघों के बीच ही ठहर गयी. “स्वीटी क्या तुम्हे भी वही दीखाई दिया जो मैने देखा?” सोनिया ने धीरे से स्वीटी के कान मे कहा. “तुम्हारा कहने का मतलब क्या है?” स्वीटी ने पूछा. “यार राज के लंड का उभार देखा… अब ये मत कहना कि तुम्हारी निगाह वहाँ नही पड़ी” सोनिया ने खिलखिलाते हुए कहा. “अच्छा तो वो” सच मे मेने भी देखा…. सही मे बहुत ही मोटा और लंबा है” स्वीटी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया. “आज बहुत दिनो के बाद मुझे किसी के लंड की तमन्ना हो रही है.. और राज का लंड देखने के बाद तो दिल मे हलचल मचने लगी है” सोनिया ने कहा. “सच कह रही हो.. वरना क्या तुम्हे लड़के पसंद नही है क्या?” स्वीटी ने पूछा. “हां सच मे.. वरना मुझे लड़कों मे कम ही दिलचस्पी रहती है… लेकिन आज ना जाने क्या हो गया.. लेकिन राज मेरा भाई है में उसके लिए इस तरह नही सोच सकती” सोनिया ने जवाब दिया. स्वीटी सोनिया को देखे जा रही थी और सोच रही थी कि क्या उसे प्रीति राज और खुद के रिश्ते के बारे मे इसे बताना चाहिए या फिर समय का इंतेज़ार करना चाहिए. शमा राज के बगल मे एक कोने मे बैठी अपनी ड्रिंक से सीप ले रही थी, “क्या बात है राज इतने सुस्त क्यों हो?” शमा ने पूछा… “सुस्त नही रहूं तो क्या करूँ… इतनी चूते मेरे अगल बगल मे है और में हूँ की अपने इस लंड को शांत करने के लिए कुछ नही कर पा रहा हूँ.” राज ने अपने खड़े लंड पर हाथ रखते हुए कहा. “ओह तो ये तो बहुत बुरी बात है” कहते हुए शमा ने उसके खड़े लंड को अपनी मुट्ठी मे पकड़ा और मसल्ने लगी. “तुम्हे पता है ना राज मुझे कितने दिन हो गये इस लंड को अपनी चूत मे लिए.. ” कहकर शमा उसके लंड को और जोरों से मसल्ने लगी.. राज का लंड अब और तन कर खड़ा हो गया था.. “हां शमा तुम सच कह रही हो.. और मुझे लगता है कि हमे कुछ करना चाहिए.” राज ने कहा और चारों तरफ निगाह घूमा सबसे बचकर उसकी चुचियों को मसल दिया. तभी राज ने देखा कि उसके मामा अश्विन और रवि उन्ही की ओर आ रहे है तो उसने झट से शमा के हाथ को अपने लंड से अलग किया और अपना हाथ भी उसकी चुचियों से हटा दिया. रात को सभी ने मिलकर साथ मे खाना खाया और अब इस बात पर बहस होने लगी कि कौन कहाँ सोएगा…. आख़िर ये तय हुआ कि सोनिया स्वीटी के साथ, प्रीति शमा के साथ, राज और रवि लिविंग रूम मे सोएंगे.. और देव और वसुंधरा मोहन और नेहा के रूम मे ज़मीन पर सोएंगे और अश्विन और नीता मोहन के स्टडी रूम मे. प्रीति तो दौड़ कर शमा के रूम मे गयी और बिस्तर पर चढ़ लेट गयी.. उसकी तो चूत मे दोपहर से ही आग लगी हुई थी और आज वो अपनी इस अगन को शमा के साथ बुझाना चाहती थी… जैसे ही शमा उसके बगल मे बिस्तर पर आई तो प्रीति अपने हाथ को उसके बदन पर फिराने लगी. दोनो लड़कियाँ अपने सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर थी और जैसे ही प्रीति की उंगीयों ने शमा के नंगे बदन को छुआ तो उसे शरीर मे एक सिरहन से दौड़ गयी… “उम्म्म तुम्हारे निपल कितने टाइट और खड़े है…” प्रीति ने उसकी निपल को भीचते हुए उसके कान मे कहा… शमा ने भी उसका साथ देते हुए उसकी नंगी चुचियों को सहलाने लगी और अपने होठों को उसके होठों पर रख अपनी जीब उसके मुँह मे दे दी… प्रीति भी अपनी उंगलियों को उसके बदन पर घूमते हुए नीचे की ओर ले जाकर उसकी गरम चूत पर फिराने लगी फिर धीरे से उसकी चूत का मुँह खोल उसने अपनी दो उंगलियाँ शमा की चूत मे घुसा घूमाने लगी… “उम्म्म ऑश हाां” शमा सिसक पड़ी.. वहीं स्वीटी के कमरे मे स्वीटी सोनिया से पूछ रही थी कि उसे लड़कों मे दिलचस्पी क्यों कम थी और लड़कियों के साथ उसे क्यों मज़ा आता है… सोनिया उसकी बातों का जवाब दे रही थी और स्वीटी खुद अपनी चुचियों को मसल्ते हुए बड़े ध्यान से उसकी बात सुन रही थी. “स्वीटी अब तुम अपने बारे मे बताओ… क्या तुमने भी कभी किसी लकड़ी के साथ सेक्स किया है या फिर सिर्फ़ उत्सुकता वश मुझसे पूछ रही हो?’ सोनिया ने अपनी बात ख़तम कर स्वीटी से पूछा. “मज़ा ही नही लिया बल्कि मुझे तो लड़कियों का साथ बहुत अच्छा लगता है..” स्वीटी ने जवाब दिया… “ये तो बहुत अच्छी बात है.. फिर तो तुम्हे मेरे साथ सेक्स का खेल खेलने मे कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए.. तुम तो जानती हो कि में यहाँ एक हफ़्ता रुकने वाली हूँ और एक हफ़्ता बिना सेक्स के गुज़ारना मेरे लिए तोड़ा मुश्किल है.. प्लीज़ मेरी मदद करोगी ना?” सोनिया ने पूछा. “अरे सोनिया मुझे तो बहुत खुशी होगी.. तुम्हे पता है जब हॉल मे तुम कुर्सी पर अपनी टाँगे फैलाए बैठी थी मेरा दिल मे तो उसी वक्त आया था कि तुम्हारी टॅंगो के बीच आ कर तुम्हारी चूत खूब जोरों से चूस लूँ.” स्वीटी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया. स्वीटी की बात सुनकर सोनिया तुरंत उस पर चढ़ गयी और अपनी टाँगे आगल बगल मे डाल उसने अपने होंठ स्वीटी के होठों पर रख दिए और उन्हे चूसने लगी… स्वीटी ने भी उसका साथ दिया और अपनी जीब को उसके मुँहे मे घुसा दी… सोनिया अब अपनी खुद की जीब उससे मिला चूसने लगी… स्वीटी के हाथ सोनिया के बदन पर रेंगने लगे…उसने उसकी कठोर चुचियों को अपनी हथेली मे भर मसल दिया… “ओह आआआः ऊऊऊऊहह” सोनिया सिसक पड़ी. स्वीटी दिल खोल कर सोनिया के चुचियों से खेलने लगी…सोनिया की चुचियों भी प्रीति की चुचियों की तरह काफ़ी कसी और कठोर थी… वो उसके निपल को भींचने लगी फिर अपने होठों को सोनिया के मुँह से अलग कर वो उसके निपल को चुलबुलाने लगी… सोनिया ने अपनी चुचि को और उसके मुँहे मे घुसेड दी… लिविंग रूम मे राज की आँखो से नींद कोसों दूर थी.. उसका लंड पूरी तरह तन्नाया हुआ था और उसकी आँखों के आगे बार बार कभी प्रीति का चेहरा तो कभी स्वीटी का और फिर कभी उसकी प्यारी ममेरी बेहन सोनिया का.. इस परिवार मे सिर्फ़ उसकी मामी और सोनिया ही थी जिसे उसने नही चोदा था… शायद तकदीर उसका साथ दे और उसे ये करने का मौका मिल जाए..

राज ने देखा कि रवि उसके बगल मे लेटा गहरी नींद मे सोया हुआ

है.. उसे समझ मे नही आ रहा था कि अपने लंड की गर्मी को कैसे

शांत करे…सोनिया स्वीटी के साथ थी इसलिए उसकी तरफ बढ़ने का

प्रश्न ही नही उठता था हां फिर एक ही रास्ता था.. प्रीति शमा

के साथ थी और वो दोनो को चोद चुका था इसलिए उनके कमरे की ओर

जाने मे कोई रिस्क नही था…. पर उसे शक था कि शायद ही प्रीति

के कमरे मे होते हुए शमा उसे चोद्ने दे.. वो सोच मे पड़ गया..

शमा के कमरे मे अब प्रीति उसकी टांगो के बीच आ गयी थी और अपनी

जीब शमा की चिकनी और मुलायम चूत पर घूमा रही थी.. किसी

बच्चे की तरह वो अपनी जीब को उसकी चूत पर उपर से नीचे चला

चाट रही थी.. उन्माद मे शमा ने प्रीति के सिर को अपने हाथों से

दबा रखा था…और सिसक रही थी…

“ओह प्रीति ऑश हाआँ ऑश प्रीत अपनी जीब को अंदर घुसा श

चूस ले मेरी चूओत को ऑश ”

अपनी कमर को उपर उठा शमा अपनी चूत को प्रीति के मुँह मे

थून्स्ती तो प्रीति अपनी जीब को और उसकी चूत के अंदर तक थेल

देती…

थोड़ी देर बाद शमा का दिल भी प्रीति की चूत का चूसने को हुआ तो

उसने प्रीति को पलट कर घूमने को कहा.. प्रीति घड़ी की सुई की

तरह घूम गयी और अब उसकी चूत शमा के मुँह पर थी… दोनो

ठीक 69 की अवस्था मे हो गयी.

खिड़की से आती हल्की रोशनी मे शमा ने उसकी बिना बालों की चूत को

देखा और निहारने लगी… उसने अपनी जीब को उसकी चूत पर फिराया

और वहीं उसकी बेहन दूसरे कमरे मे सोनिया की चूत के साथ ठीक

वैसे ही कर रही थी..

स्वीटी की जीब ने जैसे ही सोनिया की चूत के किनारों को छुआ…

“ऑश हाआँ ऑश जबसे घर छोड़ा में इस एहसास के लिए तरस गयी..

ऑश हाआँ चॅटो मेरी चूत को ऑश चूवसो….” सोनिया धीरे से

स्वीटी से बोली और अपनी उंगलियो को उसके बालों मे घूमाने लगी..

स्वेती ने अब सोनिया की चूत की फांको को थोड़ा फैलाया और अपनी जीब

को उसकी चूत मे घूसा गोल गोल घूमा चाटने लगी…

सोनिया का बदन खुशी और उत्तेना मे फड़फड़ने लगा..उसने कस के

स्वीटी के सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और थोड़ी ही देर मे उसकी

चूत से रस की धारा बहने लगी…

“ऑश स्वीटी मज़ा आ गया और अब में भी तुम्हे इस खुशी की चरम

सीमा तक पहुँचाना चाहती हूँ” सोनिया ने अपने रस से भीगे स्वीटी

के होठों को चूस्ते हुए कहा.

अब स्वीटी बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी और सोनिया उसकी टांगों के

बीच आ गयी और अपनी कला का प्रदर्शन स्वीटी की चूत पर करने लगी…

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