परिवार हो तो ऐसा – Update 33 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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थोड़ी देर बाद उसने देखा कि उसकी चाची नेहा सबसे पहले हॉल मे

आई और उसे अपनी बाहों मे भर उसके होठों को चूमने लगी और साथ

ही पॅंट के उपर से उसके लंड को मसल्ने लगी..

“थॅंक यू राज… आज तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया… ”

“हां चाची आप भी किसी जवान लौंडिया से कम नही हो..मुझे भी

बहुत अच्छा लगा.. ” राज ने अपनी चाची की चुचियों को मसल्ते हुए

कहा.

“हो सका तो हम फिर से ये मज़ा लेंगे” नेहा ने अपने भतीजे से कहा.

“हां चाची मुझे भी इंतेज़ार रहेगा”

“चलो राज में तय्यार हूँ” शमा ने हॉल मे आते हुए कहा..

“हां चलो.. ठीक चाची फिर मिलेंगे” राज ने अपनी चाची से विदा

ली और शमा के साथ घर के बाहर आ गया..

शमा और राज रात भर पब मे डॅन्स करते रहे और पार्टी मनाते

रहे…

घर लौटते वक्त शमा गाड़ी के अंदर आगे की सीट पर बैठे हुए

राज की तरफ झुक गयी और उसकी पॅंट की ज़िप खोल उसने उसके लंड को

बाहर निकाल लिया.. और अपने होठों मे ले चूसने लगी…. राज को

गाड़ी चलाने मे दिक्कत हो रही थी इसलिए उसने गाड़ी को एक सुनसान

सड़क के किनारे खड़ी कर दिया..

गाड़ी के रुकते ही शमा ने अपनी जीन्स और पॅंटी उतार दी.. राज ने

गाड़ी की सीट को पीछे कर उसे रिलॅक्स कर दिया… अब शमा अच्छी तरह

झुक उसके लंड को चूसने लगी..

राज ने शमा को उठा गाड़ी की पिछली सीट पर लिटा दिया और खुद

उसकी टाँगो के बीच आ अपने लंड को अच्छी तरह उसके मुँह मे दे

दिया…

‘हां अब अच्छा लग रहा है.. हां अब मेरे मुँह को अपने लंड से भर

दो.. ” कहकर शमा अपने चचेरे भाई के लंड को चूसने लगी.. उसे

ये नही पता था कि थोड़ी देर पहले इसी लंड को उसकी मा नेहा ने

बड़े प्यार से चूसा था..

राज के लंड को चूस्ते हुए शमा अपनी चूत से खेलने लगी.. थोड़ी ही

देर मे उसकी चूत गीली हो लंड के लिए तय्यार हो गयी..

“अब नही रुका जाता राज चोदो मुझे अपने इस मोटे लंड से” शमा ने

राज को नीचे खिसकाते हुए कहा..

राज ने अपनी बेहन की टाँगो को फैलाया और अपना लंड उसकी चूत के

मुँह से लगा एक ही धक्के मे पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया..

‘ऑश हाआँ और अंदर तक घुसा चोदो बहुत अच्छा लग रहा है..

श हां और चोदो थोड़ा तेज़ी से लंड को अंदर बाहर करो.. ” शमा

सिसक पड़ी..

राज तेज़ी से अपने लंड को शमा की चूत के अंदर बाहर करने लगा…

थोड़ी ही देर मे शमा की चूत ने पानी छोड़ दिया..

“राज अब मेरे मुँह को अपने इस रस से भर दो में तुम्हारा पानी पीना

चाहती हूँ” शमा ने एक बार फिर उसके लंड को अपने मुँह मे लेते हुए कहा.
राज ने अपना लंड फिर उसके मुँहे मे दिया जिसे शमा गले तक लेकर

चूसने लगी… और राज के लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ी जिसे

शमा बड़े प्यार से गटाकने लगी.. दोनो थक कर शांत हो गये..

“थॅंक्स राज तुम बहुत अच्छे हो अब हम घर जा सकते है” शमा ने

कहा..

वसुंधरा, बलदेव, प्रीति और राज एरपोर्ट के वेटिंग लाउंज मे

आपने आने वाले रिश्तेदारों का इंतेज़ार कर रहे थे… वासू आज

बहुत खुश थी काफ़ी दीनो बाद वो अपने भाई और भाभी एवम बच्चो

से मिलने वाली थी… वहीं प्रीति और राज भी उत्सुक थे अपने ममेरे

भाइयों और बेहन से मिलने के लिए..

जैसे ही वो सब गेट के बाहर आए तो प्रीति काफ़ी खुश हो गयी….

रवि बहुत ही हॅंडसम हो गया था.. लंबा कद.. चौड़ी छाती..

उसके बॉल किसी मिलिटरी मॅन की तरह छोटे छोटे कटे हुए थे.. उसकी

निगाह तुरंत ही अपने ममरे भाई की जाँघो के बीच जाकर ठहर

गयी और सोचने लगी कि क्या उसका लंड भी उसके भाई राज की तरह ही

होगा कि नही… लेकिन उसे विवेक कही नही दीखाई दिया

“ममाजी क्या विवेक नही आया” प्रीति ने अपने मामा आस्विन से पूछा.

“हां प्रीति बेटी वो क्या है लास्ट वक्त मे उसकी एक बहुत ही अच्छी जॉब

लग गयी इसलिए वो नही आ सका” अश्विन ने अपनी भांजी को जवाब दिया.

जहाँ प्रीति की निगाहें रवि और विवेक पर टीकी हुई थी वहीं राज

अपनी ममेरी बेहन सोनिया की बदन को निरख रहा था.. सोनिया दीखने

मे काफ़ी सुंदर लग रही थी.. गोल चेहरा… करीब 5’6 का कद..

कंधे तक झूलते बॉल और और सुडौल बदन.. सोनिया ने टाइट जीन्स

पहन रखी थी जो उसकी लंबी टाँगो..पर चिपकी हुई थी.. और उसके

कुल्हों का उभार सॉफ दीखाई दे रहा था… उसकी चुचिया प्रीति से

छोटी लेकिन स्वीटी से बड़ी थी और काफ़ी भारी भारी लग रही थी..

राज के तो उसकी चुचियों की गोलैईयों को देख मुँह मे पानी आ गया..

सभी एक दूसरे से गले मिल रहे थे और हालचाल पूछ रहे थे….

कहने को तो प्रीति ने अपने भाई को स्वभाविक रूप से गले लगाया

लेकिन अपनी छाती को उसकी छाती से रगड़ दिया और वहीं राज ने अपनी

बेहन सोनिया को गले लगा उसकी चुचियों का एहसास किया… उसे लगा जैसे

की सोनिया की चुचियाँ फूल रही है तो उसने उसे तुरंत छोड़ दिया..

गाड़ी मे घर लौटते वक्त सब आपस मे बातें कर रहे थे और सोनिया

अपने इपॉड पर गाने सुन रही थी.. प्रीति को ये देख खुशी हुई कि

सोनिया की आदतें उसे मिलती जुलती थी. और उसे लगने लगा कि एक

महीना सोनिया के साथ एक ही कमरे मे रहना उसे आखरेगा नही. बल्कि हो

सकता है कि मज़ा आए…

रात के खाने बाद सभी हाल मे बैठे बातें कर रहे थे..राज रवि से बातें कर रहा था तो प्रीति और सोनिया प्रीति के कमरे मे

थी.. प्रीति उसका समान खोल उसके कपड़ों को अलमारी मे लगाने मे उसकी

मदद कर रही थी..

जब सोनिया का समान लग गया तो प्रीति ने उसे कुरेदने की सोची…

“सोनिया तुम्हारा भाई तो काफ़ी हॅंडसम है क्या उसके दोस्त भी उतने ही

हॅंडसम है?” प्रीति ने सोनिया से पूछा.

“हो सकते है.. सच कहूँ तो प्रीति में उसके दोस्तों की तरफ ध्यान

ही नही देती” सोनिया ने कहा. “पता नही क्यों मुझे मर्द अच्छे नही

लगते”

“क्या कह रही हो? तो इसका मतलब हुआ कि तुम्हे लड़कियों का साथ

पसंद है?” प्रीति ने पूछा..

“हां” सोनिया ने जवाब दिया.. “मेरी बात सुन तुम्हे बुरा तो नही लग रहा ना?”

“नही सोनिया मुझे बिल्कुल भी बुरा नही लगा.. ” प्रीति ने अपने

नीचले होठों पर अपनी ज़ुबान फिराते हुए कहा, “वो क्या है लड़की के

साथ मज़ा लेने मे कोई बुराई नही है.. कभी कभी इसका भी मज़ा

लेना चाहिए”

“अच्छा सच सच बताना सोनिया क्या तुम्हे सिर्फ़ लड़कियाँ पसंद है या

फिर कभी कभी लड़कों के साथ भी मज़ा लेती हो?” प्रीति ने उसे और

कुरेदते हुए पूछा.

“सच कहूँ प्रीति तो मेने दो चार लड़कों से चुदवाया लेकिन उतना

मज़ा नही आया जो मुझे किसी लड़की की चुचि और चूत से मिलता

है.. हां अगर भविश्य मे ऐसा लड़का मिला जो मुझे खुश कर सके

तो बात अलग है” सोनिया ने जवाब दिया. “तुम बताओ तुम्हारा क्या चल

रहा है”

“अपना भी हाल कुछ ऐसा ही है.. ना तो कोई पर्मनॅंट लड़की मिली और

ना ही ऐसा लड़का मिला जिसे मैं पर्मनॅंट बना सकूँ.. हां

भविय्श्य का किसी को पता नही” प्रीति ने कहा..

“तुम सच कहती हो प्रीति भविश्य किसने देखा है.. ” सोनिया ने

अपना आखरी कपड़ा अलमारी मे रखते हुए कहा.

आगले दिन रात के खाने के वक्त वसुंधरा ने अपने पति से कहा..

“देव तुम मोहन को फोन क्यों नही करते कि इस साप्ताह के एंड मे हम

उनके साथ बिताएँ.. इस तरह से मेरे भाई और भाभी का उनसे मिलना

भी हो जाएगा और मस्ती भी खूब होगी”

“दीदी वैसे तुम बात तो सही कर रही हो.. मुझे भी मोहन से मिले

काफ़ी वक्त हो गया है” अश्विन ने कहा.. “वैसे जीजाजी आपके भाई के

क्या हाल चाल है आज कल”

“हाल चाल तो बहुत अच्छे है साले साहब.. मोहन का बिजनेस अच्छा

चल रहा है और लड़कियाँ भी जवान हो गयी है” देव ने जवाब

दिया.. वो आगे कुछ कहता कि फोन की घंटी बजी और प्रीति ने दौड़

कर फोन उठा लिया..

“मम्मी स्वीटी का फोन है वो चाहती है कि आज की रात मैं उसके

साथ रहूं.. उससे मुझसे कुछ काम है” प्रीति ने अपनी मम्मी से

पूछा..

“बेटा मुझे तो कोई ऐतराज़ नही है लेकिन सोनिया हमारी मेहमान है

उससे पूछो कहीं उसे ये ना लगे कि तुमने उसे अकेला छोड़ दिया”

वसुंधरा ने अपनी बेटी से कहा..

“तुम जाओ प्रीति मुझे बुरा नही लगेगा.. मुझे वैसे भी अकेले

रहने की आदत है” सोनिया ने जवाब दिया.

“ठीक है फिर में आ रही हूँ” प्रीति ने फोन पर स्वीटी से

कहा.

“प्रीति ज़रा स्वीटी से कहना कि मुझे मोहन से बात करनी है” देव

ने अपनी बेटी से कहा..

प्रीति ने फोन अपने पिताजी को पकड़ा दिया और देव मोहन से साप्ताह के

आख़िर मे उसके घर आने के विषय मे बात करने लगा…..

“मोहन से बात हो गयी है और हम सब वीक एंड के लिए उसके घर

जा रहे है” देव ने फोन रखते हुए कहा..

रात मे प्रीति अपनी चचेरी बेहन के कमरे मे थी.. उसकी चूत मे

आग लगी हुई थी.. कई दिनो से वो चुदवा नही पाई थी और उसका दिल

कर रहा था कि आज वो अपनी बेहन से अपनी चूत चटवाए और उसकी

चूत को चूसे….

स्वीटी के कमरे के बाहर मोहन दबे पाँव छुपे खड़ा था इस उमीद मे

कि क्या प्रीति और उसकी बेटी सेक्स का खेल खेलते है… नेहा अपनी

सहेली के यहाँ गयी हुई थी और वो प्रीति द्वारा लिखी गयी कहानी

को अपनी आँखों से देखना चाहता था… इस ख्याल से ही उसका लंड

तन कर खड़ा था..

पलंग पर दोनो नंगी लेटी हुई थी और प्रीति उसके निपल को अपनी

जीब की नोक से छेड़ते हुए उसने अपनी जीब स्वीटी के मुँह मे दे दी..

जिसे स्वीटी ने अपनी जीब से मिलाया और दोनो एक दूसरे की जीब को

चूसने लगी.. प्रीति साथ ही अब स्वीटी की चुचियों को मसल रही

थी…

फिर मोहन ने अपनी भतीजी की उंगलियों को अपनी बेटी की टाँगो के बीच

फिसलते देखा… स्वीटी ने अपनी टाँगे फैला दी थी और प्रीति अब

उसकी चूत को सहला रही थी… फिर उसने अपनी उंगली उसकी चूत मे

घुसा दी.. स्वीटी के मुँह से एक सिसकरी निकल गयी..

मोहन वहाँ से हट जाना चाहता था. इस तरह अपनी ही बेटी की

कर्तूते देखने मे उसे शरम सी आ रही थी कि तभी उसे कमरे के

अंदर से सिसकने की आवाज़ आई…

“ऑश हां प्रीति ऑश हां अपनी उंगली और तेज़ी से चूत के अंदर

बाहर करो.. श हां बहुत अच्छा लग रहा है ऑश आआआः”

सिसकियाँ सुन मोहन के लंड ने ज़ोर की फूँकार भरी और वो और तन कर

उसके पयज़ामे के अंदर उछलने लगा… वो वापस घूम अपनी बेटी के

कमरे मे झाँकने लगा..

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