परिवार हो तो ऐसा – Update 27 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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मोहन ने जब देखा कि प्रीति उसकी भतीजी ने उसे ईमेल भेजा है तो वो समझ गया कि उसने कहानी मे कोई नया नुस्ख़ा भेजा हो गा वो ईमेल खोल पढ़ने लगा.. और अपने लंड को अपनी पॅंट से आज़ाद कर लिया.. मोहन अपने खड़े लंड को मसल्ते हुए कहानी के उस हिस्से पर पहुँचता है जहाँ भतीजी अपने चाचा और चाची के पास रहने आती है और और रात वो अपनी चचेरी बहन के बदन को छूती है.. मोहन ये पढ़ कर चौंक जाता है. आज से पहेल प्रीति ने थोड़ा भी इशारा नही किया था कि उसे ये सब भी पसंद है.. और उसने कहानी मे लिखा था कि किस तरह दोनो चचेरी बहने एक दूसरे की चूत से खेल सेक्स का मज़ा लेते है.. उसे विश्वास नही हो रहा था कि दो लड़कियों के सेक्स संबंध को लेकर प्रीति इतनी तरह लिख सकती है… उसने उस हिस्से को कई बार पढ़ा और आख़िर ज़ोर ज़ोर से मूठ मारते हुए उसने अपने लंड का पानी छुड़ा लिया… प्रीति की कहानी को पढ़ मोहन सोचने पर मजबूर हो गया कि क्या प्रीति और उसकी बेटियों के बीच भी ऐसा ही संबंध है.. क्या वो तीनो भी कहानी ही की तरह सेक्स का मज़ा लेते है.. उसका ख़याल अपनी ही बेटियों पर आकर ठहर गया.. कितनी जवान और सुंदर हो गयी थी दोनो यही सोचते हुए उसने कहानी का आगे का भाग लिखा और उसे प्रीति को मैल कर दिया..
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राज अपने कंप्यूटर पर बैठा कुछ काम कर रहा था कि प्रीति ने उसके कमरे मे कदम रखा.. उसने सफेद रंग का टॉप और डेनिम की स्कर्ट पहन रखी थी..

“क्या बात है भाई आज तो कुछ ज़्यादा ही मस्ती छाई हुई है?” प्रीति ने अपने भाई के खड़े लंड को देख कर कहा…

“कुछ खास नही बस ऐसे ही कंप्यूटर पर कुछ तस्वीरें देख रहा था.. ” राज ने अपने लंड को मसल्ते हुए कहा..

“राज तुम्हे पता है दो दिन पहले क्या हुआ?” प्रीति ने पूछा..

“नही क्यों.. क्या कुछ खास हुआ था..?” राज ने पलट कर पूछा.

“हां कुछ खास ही समझो… उस दिन मेरी चूत मे बहोत खुजली मच रही थी.. तुम्हे देखा पर तुम घर पर नही थे … और उत्तेजना मे हुआ ये कि में पापा को ही उत्तेजित करने लगी.. ” प्रीति ने कहा..

“क्या? ज़रा खुल कर बताओ क्या हुआ? राज ने पूछा.

“तुम थोड़ी देर बैठो मे टाय्लेट जाकर आती हूँ” कहकर प्रीति टाय्लेट चली गई और सोचने लगी कि राज को कैसे बताए.. बाथरूम मे आकर उसने अपनी पॅंटी उतार दी.. और वापस राज के कमरे मे आ गयी.. प्रीति वापस कमरे मे आकर राज के सामने अपनी स्क्रिट उठा कर बैठ गयी अब उसकी नंगी चूत राज के सामने थी….
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“ओह्ह्ह तो अब समझा तुमने कैसे पापा को चीढ़या .. ऐसे ही ना?

“हां” प्रीति मुस्कुराते हुए बोली.

“और पापा ने कुछ नही कहा.. ” राज ने पूछा…

“नही.. कहा तो कुछ नही बस थोड़ी देर मेरी चूत को देखते रहे फिर वापस अपने कमरे मे चले गये ”

“क्या तुम सच मे पापा से चुदवाना चाहती थी.? राज ने पूछा…

“हां.. उस दिन में इतना जयदा उत्तेजित थी कि में किसी से भी चुदवा लेती.. और उस समय सिर्फ़ पापा ही घर पर थे.. तुम्हे मेरी बात सुनकर बुरा तो नही लग रहा ना?” प्रीति ने पूछा.

“और फिर तुमने भी तो कहा कि अगर मौका मिले तो मम्मी को भी चोदना चाहते हो”
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“नही मुझे बिल्कुल भी बुरा नही लगा.. में जानता हूँ कि चुदाई के मामले मे जितना में हरामी हूँ तुम उससे भी बड़ी छिनाल हो.. हम दोनो चुदाई के लिए कुछ भी कर सकते है” राज ने कहा..

“और क्या लेकिन उन्होने कुछ किया ही नही ” प्रीति ने कहा..

“और ना ही तुम्हे पापा का लंड चूसने को मिला है ना? राज ने हंसते हुए कहा..

“अब जब तुमने लंड चूसने की बात कर ही दी है तो लाओ मुझे तुम्हारा लंड चूसने दो.. मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम्हारा लंड किसी के स्पर्श के लिए तड़प रहा है” प्रीति ने कहा.

“मुझे तो ऐसा लग रहा था कि तुम आज पूछोगी ही नही” राज ने हंसते हुए कहा और अपनी पॅंट उतारने लगा..

प्रीति ने उसे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद अपने सिर को उसके पेट पर रख लेट गयी.. राज का लंड उसके मुँह मे था और वो उसे अपनी मुट्ठी मे उपर नीचे कर मसल्ते हुए चूस रही थी… “अब तुम मुझे बताओ क्या तुमने गीली चूत के साथ वापस मज़ा लिया” प्रीति ने उसके लंड को थोड़ी देर के लिए बाहर निकाल पूछा.
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“जब तुमने पूछ ही लिया है तो झूट नही बोलूँगा हां मेने उसे फिर से चोदा था..” राज ने जवाब दिया..

“क्या तुमने देखा की वो कौन है?” प्रीति ने फिर पूछा..

“नही में उसे नही देख पाया” राज ने अपनी बहन से कहा.. लेकिन उसने उसे ये नही बताया कि वो जान चुका है कि सही मे गीली चूत कौन है.

“ठीक है में तुम्हारा लंड चूस्ती हूँ तब तक तुम मुझे बताओ कि तुमने उसके साथ क्या क्या किया?” प्रीति ने उससे कहा.

राज उसे विस्तार से बताने लगा कि किस तरह गीली चूत इस बार अपने साथ अपनी सहेली को लेकर आई जिससे वो पहले भी नेट पर मिल चुका था.. प्रीति अपने भाई के लंड को जोरों से चूस्ते हुए उसकी कहानी सुन रही थी…

“तुम बहोत खुश नसीब हो राज कि तुम्हे दो दो औरते एक साथ चोद्ने के लिए मिल जाती है… और एक में हूँ कि इस अनुभव के लिए कब से तड़प रही हूँ मेरा भी दिल करता है कि एक लंड मेरी चूत मे हो और दूसरे को में अपने मुँह मे ले चूस रही हूँ” प्रीति ने कहा और फिर उसके लंड को चूसने लगी…
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तब राज ने उसे आगे बताया की किस तरह उसने गीली चूत की सहेली की गंद मे अपना लंड घुसा उसकी गंद मारी थी और फिर उसकी गंद को अपने वीर्य से भर दिया था..

“तुम्हे गंद मारनी बहोत पसंद है.. है ना?” प्रीति ने पूछा.

“हां बहोत ज़्यादा.. क्या है ना प्रीति चूत के मुक़ाबले गंद बहोत ज़्यादा कसी हुई होती और जब लंड उसकी दीवारों को चीरते हुए घुसता है तो मज़ा आ जाता है.. ” राज ने कहा.

“क्या अपनी बेहन की भी गंद मारना चाहोगे?” प्रीति ने उसे चिढ़ाते हुए कहा और अपनी जीब उसके लंड के छेद पर फिराने लगी…

“हां अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ ना हो ” राज ने हंसते हुए जवाब दिया..

“तो तुम मेरी गंद मे तुम्हारे इस मोटे लंबे लंड को घुसा मज़ा लेना चाहते हो.. ” प्रीति ने फिर उसे चीढ़या और उसके लंड को और जोरों से चूसने लगी… मसल्ने लगी…

“हां हाआँ” राज सिसक पड़ा उससे सहन नही हो रहा था
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“ठीक है मुझे मंजूर है.. में भी कई दिनो से तुम्हारे लंड को अपनी गंद मे महसूस करना चाहती थी.. ” कहकर प्रीति उसके लंड को और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… अपने मुँह को तेज़ी से उपर नीचे कर उसके लंड को अपने गले तक ले रही थी… आख़िर राज से सहन नही हुआ और उसके लंड ने लावा उगल दिया.. जिसे प्रीति पी गयी और उसके लंड से छूटी हर बूँद को चाटने लगी..

“अब क्या विचार है क्या मुझे तुम्हारी गंद मे लंड घुसाने का मौका मिलेगा?” राज ने पूछा..

हां लेकिन आज नही आज तो में तुम्हारे लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती हूँ” प्रीति ने कहा..

“ठीक है में टाय्लेट होकर आता हूँ” राज ये कहते हुए बाथरूम मे घुस गया.. राज के जाते ही प्रीति ने अपना टॉप उतार दिया और उसके पलंग पर सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और स्कर्ट मे लेट गयी.. उसकी स्कर्ट उपर को उठी हुई थी और उसने अपनी टाँगे फैला अपनी चूत को खोल दिया था..
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बाथरूम से वापस आ कर राज पलंग के किनारे पर बैठ गया और उसकी खुली चूत पर उंगली फिराने लगा.. फिर अपने चेहरे को झुका उसने अपनी जीब उसकी बिना बालों की त्वचा पर चूत के चारों और फिराई और फिर उसकी चूत को खोल अपनी जीब अंदर घुसा दी… और जीब को अंदर बाहर कर उसकी चूत को चाटने और चूसने लगा..

प्रीति अपनी कमर को उठा कर उसके मुँह मे दे रही थी.. और राज अपना मुँह खोल उसकी चूत को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मुँह मे ले लेता…. प्रीति की चूत से पानी बहने लगा… उससे अब सहन नही हो रहा था..

“राज अब मुझे चोदो” प्रीति सिसक पड़ी.
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राज उसकी टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी चूत के मुँह लगा उसने एक ज़ोर का धक्का मारा.. लंड गॅप से अंदर घुस गया…

“ज़रा धीरे राज तुम्हे मालूम है तुम्हारा लंड कितना लंबा और मोटा है…. थोड़ा प्यार से चोदो ना” प्रीति ने कराहते हुए कहा.
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राज ने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और धीरे से अंदर घुसा दिया और फिर अंदर बाहर कर उसने अपना पूरा लंड अपनी बेहन की चूत मे घुसा दिया…

“ऑश हां अब अच्छा लग रहा है.. कितने दिन हो गये तुम्हे मेरी चूत को अपने इस मूसल लंड से भरे हुए… श हाआँ अब चोदो मुझे अब थोड़ा ज़ोर ज़ोर से चोदो”

“में समझ रहा हूँ तुम क्या कहना चाहती हो… मेने भी तुम्हारी इस मुलायम और कसी चूत को बहोत मिस किया है.. ” कहकर राज अपनी बेहन की चूत को ज़ोर ज़ोर के धक्कों से चोद्ने लगा…

प्रीति ने अपनी टाँगे उसकी कमर से लपेट ली. और अपनी कमर को उठा उसका साथ देने लगी..
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“राज मेने आज तक तुम्हारे लंड के रस को अपनी चूत मे नही लिया है लेकिन लगता है कि मुझे अब गोलियाँ खानी शुरू करनी पड़ेगी जिससे में तुम्हारे इस मदन रस से अपनी चूत को लबालब भर सकूँ” प्रीति ने अपनी कमर को और तेज़ी से हिलाते हुए कहा..

“सच प्रीति तब तो और मज़ा आ जाएगा… चूत के अंदर पानी छोड़ने का मज़ा ही कुछ और होता है” राज ने ज़ोर ज़ोर के धक्के मारकर कहा.. और जब उसके लंड ने उबाल खाया तो उसने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसकी चूत और पेट पर अपना पानी छोड़ दिया..

प्रीति ने अपनी पेट पर छूटे राज के लंड के पानी को अपनी उंगलियो मे लिया और चाटने लगी.. “एम्म्म बोहोत टेस्टी ठीक पापा के पानी की तरह” प्रीति ने उसके पानी को चाटते हुए कहा..

“क्या?” राज जोरों से चौक्ते हुए बोला.

“असल मे मेने तुम्हे पूरी बात नही बताई.. जब उस दिन पापा मुझे हॉल मे छोड़ अपने कमरे मे चले गये तो मेने पापा को अपने कमरे मे कुछ पॉर्न मॅगज़ीन दीखते हुए मूठ मारते पकड़ लिया और जब उनके लंड ने पानी छोड़ा तो मेने उनके सामने से एक मॅगज़ीन उठा उनके रस को चखा था.. और वो देखते रहे.. मेने उनसे कहा था कि में बाद मे वो मॅगज़ीन लौटा दूँगी.. ” प्रीति ने बताया..

“मुझे लगता है कि तुम्हारी चूत की खुजली ने तुम्हे ज़रूरत से ज़्यादा ही छिनाल बना दिया है” राज ने हंसते हुए कहा..

“अब में क्या कहूँ में जो कुछ भी सीखा है तुम्ही से तो सीखा है” प्रीति ने जवाब दिया.. और अपना टॉप पहन राज के कमरे से बाहर चली गयी.

 

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