नेहा ने अपनी पॅंटी पैरों से निकाल दिया और अपने पति के चेहरे पर
अपनी चूत को रख बैठ गयी.. उसकी चूत मोहन के मुँह मे धँस सी
गयी थी… मोहन ने अपनी जीब बाहर निकाली और उसकी चूत को चारों
और से चाटने लगा… बिना बालों की त्वचा आज उसे बहोत अछी लग
रही थी.. उसने दोनो हाथों से नेहा की चुचियों को पकड़ा और अपने
मुँह को और उसकी चूत मे घुसा दिया…
मोहन ने उसकी चुचियों को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी पीठ पर रख
सहलाने लगा और फिर हाथों को नीचे कर उसकी दोनो कुल्हों को पकड़
और अपने नज़दीक कर लिया जिससे उसकी जीब उसकी चूत की गहराइयों
तक चली गयी.. नेहा ने भी अपनी चूत को और दबा दिया और सिसक
पड़ी…
“ऑश माआअ बहोइत अछा लग रहा है.. ऑश हाआँ चूसो ओ हां
चूसो और ज़ोर ज़ोर से चूसो ऑश अपनी जीब को और अंदर तक घुसा
दो… ”
मोहन और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को अपना पूरा मुँह खोल चूसने
लगा.. कभी जीब को अंदर घुसा गोल गोल घुमाता तो कभी उसे बाहर
निकाल उपर से नीचे चाटता थोड़ी ही देर मे नेहा की चूत पानी
छोड़ने लगी…
“क्या तुम अपने लंड का भी इतना ही सही तरह इस्तेमाल करते हो जितनी
अछी तरह अपनी जीब का करते हो?” नेहा ने उसे चिढ़ाते और उकसाते
हुए पूछा…
“क्यों इतने सालों मे तुम्हे अभी तक यकीन नही हुआ?” मोहन ने भी
उसे चिढ़ाया और अपने लंड को सहलाने लगा जो एक बार फिर तन कर
खड़ा हो चुका था..
“तो फिर सोच क्या रहे हो अब उठो और मेरी चूत की जम कर चुदाई
करो.. बड़ी खुजली मच रही है.” नेहा ने कहा.
मोहन उठा और नेहा की टाँगो के बीच आ आगेया फिर अपने लंड को अपनी
बीवी की तरो ताज़ा सॉफ हुई चूत के मुँह पर रखा और एक ज़ोर का
धक्का मारा घाप से उसका लंड नेहा की चूत मे घुस गया..
“ओ मार गयी.. ज़रा धीरे धीरे प्यार से करो” नेहा इस अचानक के
हमले से कराह उठी..
मोहन ने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और इस बार ज़रा प्यार से
धीरे धीरे पूरा अंदर घुसा दिया.. फिर उसकी टाँगो को पकड़ वो
धक्के लगाने लगा.. अब उसका लंड किसी पिस्टन की तरह नेहा की चूत
के अंदर बाहर हो रहा था.. नेहा भी अपनी कमर को उठा उससे ताल से
ताल मिला उसके लंड को अपनी चूत की गहराइयों तक लेने लगी और
बड़बड़ा उठी…
“हाआँ ऐसे चोदो मेरे चोदु राजा.. हां ऐसे प्यार से अंदर तक
घुसा घुसा कर चोदो ऑश हां अब ज़ोर ज़ोर से चोदो ऑश मज़ा आ
गया.. ”
मोहन ने उसकी टाँगो को उठा अपने कंधों पर रख दिया और अब उसकी
जांघों को पकड़ कस कस के धक्के मार उसे चोदने लगा.. उसके लंड
मे फिर से उबाल आने लगा था… वो और ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा
था और नेहा थी की सिसक रही थी..
“हां….ओह हाां ओह ओह अयाया और कस के”
मोहन की नसे तनी और उसके लंड ने वीर्य की पिचकारी ठीक नेहा की
बच्चे दानी पर छोड़ दी…
जब उसके लंड से एक एक बूँद वीर्य की चूत गयी तो वो अपनी बीवी के
पसीने से भरे बदन पर ले गया और उसकी होठों को चूमने
लगा… नेहा प्यार से अपने पति के बालों मे उंगली फिराने लगी…
नेहा ने उसको धीरे से धकेल अपने बगल मे किया और अपनी उंगली को
उसकी छाती के बालों मे फिराते हुए बोली.. “मोहन औरत के जिस्म मे
तीन छेद होते है और तुम मेरे जिस्म के दो छेद मे अपने लंड का
झंडा गाढ चुके हो अब सिर्फ़ एक बाकी है और अगर उसमे भी हो जाए
तो कैसा रहेगा… ?” नेहा ने पूछा..
“क्या कहा तुमने?” मोहन चौंकते हुए अपनी बीवी को देखने लगा..
“और नही तो क्या.. तुम मेरे मुँह और चूत को अपने वीर्य से भर
चुके हो तो तुम्हे नही लगता कि मेरी गंद को प्यासा क्यों रखा जाए?”
“मेरी समझ मे नही आ रहा कि आख़िर आज तुम्हे हुआ क्या है.. लेकिन
अगर तुम मेरे लंड को फिर से खड़ा कर सको तो में खुशी खुशी
तुम्हारी गंद को भी भर दूँगा” मोहन ने कहा.
“अरे तुम अभी मेरी कला को नही जानते.. में तो नमर्दों के लंड को
भी खड़ा कर दूं फिर तुम तो आछे ख़ासे मर्द हो” नेहा ने मोहन के
मुरझाए लंड को अपने हाथों मे ले सहलाते हुए बोली…
“पता नही में कर पाउन्गा की नही.. फिर भी देखते है तुम क्या
करती हो? मोहन ने कहा.
नेहा ने मोहन के लंड को एक बार फिर अपने मुँह मे लिया और ज़ोर ज़ोर से
चूसने लगी.. साथ ही वो उसके अंडकोषों को अपनी मुट्ठी मे दबा
सहलाने लगी.. नेहा के मुँह की गर्मी ने जैसे किसी मुर्दे के शरीर
मे जान डाल दी हो उसी तरह मोहन का मुरझाया लंड झंझणा कर
खड़ा होने लगा….
अपने पति के लंड को अपने मुँह मे फड़फदते देख नेहा और जोश मे आ
गयी और ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को अपने गले तक लेकर चूसने लगी…
थोड़ी ही देर मे उसका लंड और ज़्यादा तन कर खड़ा हो गया.. नेहा पर
तो जैसे मस्ती छा गयी उसके दीमाग मे तो राज का लंड बसा हुआ
था.. वो राज के लंड को अपनी गंद और चूत मे लेना चाहती थी और
इसीलिए वो आज अपने पति से गंद मरवा कर राज के लंड के लिए
तय्यार कर रही थी…..
“कहो अब क्या कहते हो?” नेहा ने अपनी पति की लंड को मुँह से बाहर
निकाल कर कहा…मोहन अपने तने हुए लंड को देख रहा था…
नेहा पलंग पर हथेली और घुटनो के बल एक कुतिया बन गयी और
साइड टेबल पर पड़ी क्रीम की शीशी उठा कर अपने पति को पकड़ा
दी…
“मोहन इस क्रीम से पहले अपने लंड को अछी तरह चिकना कर लो और
फिर थोड़ी क्रीम मेरी गंद मे भी लगा देना.. जिससे लंड आसानी से
गंद मे घुस जाए..” कहकर नेहा ने अपना सिर अपने हाथों पर टीका
दिया.. उसकी गंद और हवा मे उठ गयी…
मोहन तो जैसे तय्यार बैठा था.. आज कई सालों बाद उसे नेहा की
गंद मे लंड घुसाने का मौका मिल रहा था वो अपनी पत्नी के पीछे
आया और थोड़ी क्रीम अपने हाथों पर ले अपने लंड पर अच्छी तरह
लगाने लगा…. फिर थोड़ी क्रीम उसने अपनी उंगलियों पर ली और अपनी
उंगली उसकी गंद के छेद मे घुसा गोल गोल घुमा क्रीम अंदर लगा
दी… फिर किसी कुत्ते की तरह वो चढ़ गया और अपने लंड को ठीक
उसकी गंद के छेद पर रखा धीरे धीरे अंदर घुसाने लगा…. जब
करीब आधा लंड अंदर घुस गया तो अंदर बाहर करते वो अपने लंड
को और अंदर जड़ तक घुसाने लगा… नेहा सिसक पड़ी…
“हाआँ मोहन घुसा दो अपना लंड मेरी गंद के अंदर तक आज फट जाने
दो मेरी गंद को ऊहह हाआँ और अंदर तक घुसा ज़ोर ज़ोर के धक्के
मारो..मुझे तुम्हारा लंड मेरी गंद मे चाहिए….” नेहा ज़ोर जरो से
सिसक अपनी गंद को आगे पीछे करने लगी..
नेहा की सिसकियों ने तो मोहन मे और जोश भर दिया.. वो और ज़ोर ज़ोर
से धक्के लगाने लगा अओर आख़िर उसका पूरा लंड नेहा की गंद मे
घुस गया.. वो थोड़ी देर वैसे ही रुक अपने लंड को उसकी गंद मे
हिलाने लगा फिर वापस तेज और जोर्के के धक्के मारने लगा… आज उसे
भी नेहा की कसी गंद मे मारने बड़ा मज़ा आ रहा था…
“ऑश मोहन मज़ा आ गया आहह ऑश हां ऐसे लग रहा है कि जैसे
तुम्हारा लंड मेरी गंद के रास्ते घुस मेरी चूत से बाहर आ जाएगा..
ऑश बड़ा अछा लग रहा.. हां आशीए ही मारो मेरी गंद..”
जोरों से सिसकते हुए नेहा अब अपने हाथों से अपनी चूत को ज़ोर ज़ोर से
मसल्ने लगी.. फिर अपनी चूत मे उंगली डाल अंदर बाहर करने लगी..
उसकी चूत मे जोरो से खुजली मची हुई थी…
मोहन तो उसके दोनो कुल्हों को पकड़ लिया और अपनी टाँगे अगल बगल
कर ठीक किसी कुत्ते की तरह उछल उछल कर उसकी गंद मारने
लगा… साथ ही उसने नेहा की उंगलियों के साथ अपनी उंगली भी उसकी
गंद मे घुसा दी.. और अंदर बाहर करने लगा.. और तभी नेहा की
चूत ने पानी छोड़ दिया…
मोहन की उंगलियों ने नेहा को झाड़ते महसूस किया तो हुचक हुचक कर
धक्के लगाने लगा और थोड़ी ही देर मे उसका लंड अपनी पत्नी की गंद
को अपने मदन रस से भरने लगा….. दोनो मिया बीवी थक कर पस्त
हो गये थे और एक दूसरे को अपनी बाहों मे भींच सो गये…
* * * * * * * *
कई दीनो बाद की बात है.. आज प्रीति और स्वीटी अपनी सहेलियों के
साथ घर के बाहर थे.. और आज प्रीति ने रात स्वीटी के घर यानी
अपने चाचा चाची के पास गुज़ारने की सोची थी…
घर पहुँच दोनो चचेरी बहने एक दूसरे को बाहों मे ले सो गयी
थी…जब प्रीति की यकीन हो गया कि स्वीटी को गहरी नींद आ गयी
तो उसने उसकी बाहों को अलग किया और दबे पावं पलंग से खड़ी हो
गयी… वो सोच रही थी कि क्या हर बार की तरह आज भी चाचा
मोहन अपने कंप्यूटर के सामने बैठे होंगे… हर बार की तरह आज
भी खाने के टेबल पर उसने अपने चाचा को खूब चिढ़ा कर उत्तेजित किया
था.. उसने कई बार अपनी चुचियों की झलक उन्हे दीखाई थी लेकिन
उन्हे कोई प्रतिक्रिया नही दीखाई तो उसने रात को जाग कर देखने की
ठानी.. कि आख़िर उसके चाचा भी अपने आप पर कितना काबू रख पाते
है
प्रीति दबे पाँव स्वीटी एक बेडरूम के बाहर निकल अपने चाचा के
स्टडी रूम की ओर चल पड़ी जहाँ कुछ दिन पहले उसने चाचा का लंड
चूसा था.. आज उसने सिर्फ़ पॅंटी पहन रखी थी… कमरे मे पहुँच
उसने देखा आज फिर कंप्यूटर पर उसकी बिना बालों की चूत की तस्वीर
थी और उसका चाचा कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठा अपने खड़े लंड
को ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रहा था…
वो दबे पाँव ही चल अपने चाचा के नज़दीक आ गयी थी लेकिन
कंप्यूटर स्क्रीन पर दीखती उसकी परछाईं ने उसके चाचा को बता
दिया कि वो कमरे मे है.. मोहन ने पलट कर उसे देखा और उसकी
निगाह अपनी ही भतीजे के नंगे जिस्म पर उपर से नीचे तक घूम
गयी.. उसने देखा कि उसकी भतीजी की भारी चुचियों आज कुछ ज़्यादा
फूली हुई थी और आज उसने एक छोटी से सफेद कॉटन पॅंटी पहन रखी
थी जो उसकी चूत को छिपाने असमर्थ थी .. प्रीति की आँखों मे
वासना की खुमारी सॉफ झलक रही थी…
प्रीति ने मन ही मन सोच लिया था कि अगर उसके पिताजी उसकी बात
नही मानेंगे और उसे वो नही देंगे जो उसे चाहिए तो आज वो अपनी
ख्वाइश अपने चाचा और उनके भाई से पूरी करेगी.. अपने मन को पक्का
कर वो उनके सामने आई और अपने हाथों को उनकी गर्दन मे डाल उनके
चेहरे को अपनी छाती के नज़दीक खींच उनके होठों को अपनी भारी
चुचि के करीब कर दिया…
उसके चाचा मोहन ने पीछे हटने की कोई कोशिश नही की और ना ही
कोई विरोध किया.. मोहन ने अपने होंठ खोल अपनी जीब की नोक अपनी
भतीजी के निपल के चारों और फिराने लगा.. फिर अपने मुँह मे उसके
निपल को ले चूसने लगा… फिर पूरा मुँह खोल उसने पूरी चुचि को
मुँह मे भरा और दूसरी चुचि को मसल्ते हुए वो बारी बारी प्रीति
की चुचियों को चूसने लगा… प्रीति ने अपने होठों को भींच
लिया जिससे उसके मुँह से कोई आवाज़ ना निकले.. वो स्वीटी को जगा अपना
मज़ा खराब नही करना चाहती थी..
पिछली बार प्रीति उस पर हावी थी और उसने उसे उसकी मन की नही
करने दी थी लेकिन इस बार वो अपनी हर तमन्ना पूरी करना चाहता
था उसने अपना हाथ पीछे किया और प्रीति की पॅंटी से धकि गंद को
अपनी मुट्ठी मे भर भींचने लगा… उसने अपना हाथ उसकी टाँगो पर
फिराते हुए उसकी टाँगो को तोड़ा फैलाया और अब पॅंटी के उपर से उसकी
चूत को सहलाने लगा…
प्रीति भी तो यही चाहती थी… मोहन अपनी भतीजी की चुचि को
चूस्ते हुए उसने पॅंटी के बगल से अपनी उंगली डाल पहली बार उसकी
बिना बालों की नंगी चूत को छुआ.. मोहन को लगा कि उसकी उंगली ने
जैसे किसी बिजली के नंगे तार को छू लिया हो.. उसकी चूत किसी गरम
भट्टी की तरह सुलग रही थी..

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