परिवार हो तो ऐसा – Update 22 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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फिर वासू ने कैची लेकर उसकी चूत की झांते अछी तरह से तराश कर छोटी कर दी… फिर उस पर शेविंग क्रीम लगा दी…इस बात से दोनो अंजान थी कि दोनो के बेटियाँ यही काम इसी बाथरूम मे ठीक

उन्ही की तरह कुछ दिन पहले कर चुकी है.. वासू फिर रेज़र उठा कर उसकी झान्टे सॉफ करने लगी.. वो गरम पानी मे रेज़र को डुबाती और फिर उसकी मुलायम त्वचा पर रेज़र घुमा देती…आख़िर मे नेहा की चूत पर बॉल का एक रेशा भी नही बचा था… फिर वासू ने गरम पानी से उसकी चूत और बगल के हिस्से को अछी तरह पौंछ दिया…

नेहा अब उठ कर अपनी बिना बालों की चूत को शीशे के आगे निहारने लगी.. “अछा लगा?” वासू ने पूछा.. “कुछ कह नही सकती क्यों कि मेने पहली बार अपने बाल सॉफ किए है” नेहा ने जवाब दिया..

“वो तुम्हे अभी समझ मे नही आएगा.. एक काम करो बेडरूम मे चलते है.. और जब मेरी जीब तुम्हारी चूत पर कथक करेगी तो तुझे बिना बालों की चूत का फ़ायदा समझ मे आएगा” वासू ने हंसते हुए कहा..

थोड़ी ही देर के बाद वासू ने अपनी देवरानी को पलंग पर लीटा दिया था और उसकी टाँगो को फैला उसकी टाँगो के बीच बैठी थी… फिर अपना चेहरा झुकाते हुए उसने अपनी जीब उसकी चूत पर रख दी…..

अपनी जीब को उसकी चूत को चारों और फिराने के बाद वो अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगी.. नेहा की चूत मे सनसनी मचने लगी…..

“ऑश वासू ओह सही मे बहुत अछा लग रहा है… ऑश हाां ऐसे ही जीब को फिराव…ऑश हाआँ चॅटो मेरी चूत को” नेहा सिसक पड़ी..

नेहा तो जैसे उत्तेजना मे पागल हो गयी थी.. वो अपनी दोनो चुचियों को अपने ही हाथों से मसल्ने लगी… उसकी चूत मे और जोरोन्‍न से खुजली शुरू हो गयी थी… वो अपनी कमर को उठा और ज़्यादा वासू के

मुँह मे अपनी चूत को देने लगी. .

वासू भी ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लगी और जब उसकी चूत ने पानी छोड़ा था उसने अपना मुँह खोलते हुए उसका पानी पीने लगी… “सच वासू बहोत अछा लगा.. थॅंक्स” नेहा ने अपनी जेठानी से कहा.. वासू नेहा के बदन से अलग हुई की उसकी साइड टेबल पर पड़ी घड़ी पर पड़ी.. “नेहा अब मुझे जाना होगा.. घर पर सब मेरा इंतेज़ार कर रहे होंगे”

“थॅंक्स वासू”

“अरे थॅंक्स कोई बात नही.. में सब कुछ फिक्स कर तुम्हे बता दूँगी कि तुम मेरे बेटे और अपने भतीजे के लंड का मज़ा कब ले सकोगी” वासू ने कहा..

प्रीति आज कॉलेज से जल्दी घर आ गयी थी और बोर भी हो रही

थी.. घर पर कोई नही था… इसलिए उसने सोचा की क्यों ना मम्मी के

खिलोनो का कलेक्षन देखा जाए… घर पर कोई ना होने वाने की

वजह से उसने सोचा कि आज क्यों ना मम्मी के खिलोनो का दिल खोल कर मज़ा

लिया जाए…

उसने डिब्बे मे से एक मीडियम साइज़ का डिल्डो निकाला जो वाइब्रटर भी

था… और बाकी के खिलोनो को उसने वापस डिब्बे मे रख वापस उसी

जगह उस डिब्बे को रख दिया.. वाइब्रटर चला कर देखा कि उसकी

बॅटरी तो सही है ना…. डिल्डो सही काम कर रहा था..

प्रीति के क्या दिल मे आया कि वहीं अपने मम्मी के पलंग पर लेट

गयी.. उसने अपनी स्कर्ट उठाते हुए अपनी पॅंटी उतार दी… इतने

खिलोनो को देख उसने सोच लिया था कि आज वो हर खिलोने को ट्राइ कर

हर एक का मज़ा लेगी… उसने अलमारी से उस डब्बे को फिर से निकाल अपने

पास पलंग पर ही रख लिया…

फिर हाथ मे पकड़े नीले रंग के वाइब्रटर को उसने धीरे से अपनी

चूत पर लगाया और उसका ऑन का बटन दबा दिया.. वाइब्रटर के ऑन

होते हुए उसकी चूत मे हलचल मचने लगी.. उसे लगा की जैसे कोई

उसकी चूत को हल्के हल्के कुरेद रहा है… वो वाइब्रटर को अपनी

चूत के चारों और घूमाने लगी.. जब उसे लगा कि उसकी चूत अछी

तरह से गीली हो गयी तो उसने दूसरे हाथ से अपनी चूत को फैलाया

और उस डिल्डो को अपनी चूत मे घुसा दिया… वाइब्रटर की थरथराहट

ने तो तूफान मचा दिया उसकी चूत मे ..उसने उस वाइब्रटर को पूरी

तरह अपनी चूत्के अंदर तक घुसा दिया… वो उसे अंदर बाहर करते

हुए मज़ा लेने लगी और साथ ही दूसरे हाथ से अपनी चूत को मसल्ने

लगी..

तभी उसकी निगाह डिब्बे मे रखे एक लाल रंग के डिल्डो पर पड़ी.. जो

थोड़ा पहले वाले से मोटा भी था और लंबा भी… उसने नीले वाले को

अपनी चूत से बाहर निकाला और और उसे मुँह मे ले अपनी ही चूत के

रस का स्वाद लेने लगी… फिर उस लाल रंग के वाइब्रटर को उसने अपनी

चूत मे घुसा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया..

प्रीति ने महसूस किया कि चमड़ी के लंड से इस प्लास्टिक की त्वचा काफ़ी

कड़क है… नकली लंड का अपना ही मज़ा है.. जब सच का लंड ना

मिले तो ये नकली लंड बुरे नही है.. उसने भी एक दो खरीद कर

अपने रूम मे छुपा कर रखने की सोच ली… जब लाल रंग का डिल्डो

उसकी चूत मे पूरी तरह घुस गया तो उसने वो नीले रंग का डिल्डो

फिर से उठा लिया और उसे फिर से अपने मुँह मे ले चूसने लगी..

उसने नीले वाले नकली लंड को वापस डिब्बे मे रखा और इस बार दूसरा

नकली लंड उठा लिए.. ये वाला थोड़ा लचीला था और उसका आकार भी

ठीक लंड के रूप का बना हुआ था.. उस पर नसे भी बनी हुई थी…

पहेल वाले से काफ़ी लंबा भी था ठीक राज के लंड की तरह… राज

का ख्याल आते ही उसने उस लचीले लंड को अपने मुँह मे ले दन्तो से

भींच लिया जैसे की सही मे राज के लंड को उसने मुँह मे ले रखा

हो…

राज के ख़याल ने उसे और उत्तेजित कर दिया… उसने लाल वाले लंड को

अपनी चूत से बाहर निकाला और इस लचीले लंड को अंदर घुसा अंदर

बाहर करने लगी… इस लंबे लंड से उसकी चूत पूरी तरह से भर

गयी..

प्रीति उस लचीले लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगी.

चूत से रस बह कर उसकी गंद के छेद तक आने लगा… उसे याद आया

कि किस तरह राज ने अपनी उंगली उसकी गंद के अंदर घुसा दी थी….

उसने पलट कर फिर उस नीले छोटे वाइब्रटर को देखा और सोचने लगी

कि क्यों ना इस नीले वाइब्रटर को अपनी गंद मे घुसा दो नकली लंड का

मज़ा साथ साथ अपने दोनो छेदों मे लूँ…

प्रीति ने अपनी स्कर्ट को पूरी तरह से उपर उठा दी जिससे वो उस

लचीले लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर होते देख सके….

विबारटोर की थरथराहट उसकी चूत के अंदर हलचल मचाए हुए

थी.. वो उसे और अंदर तक घुसा मज़ा ले रही थी..

प्रीति ने उस लचीले लंड को अपनी चूत से बाहर निकाला और पलंग

पर कुतिया बन गयी…. और अपने सिर को पलंग से टीका दिया.. उसकी

गंद हवा मे उठ गयी थी… उसने डिब्बे से एक काले रंग के बहोत ही

लंबे डिल्डो को उठाया और अपनी गीली चूत के अंदर घुसा दिया…

फिर उस छोटे नीले रंग के वाइब्रटर को उठा अपनी गंद के छेद से

लगा दिया…अपनी गंद को थोड़ा हिला उसने उसे अपने छेद पर अड्जस्ट

किया और फिर धीरे धीरे उसे अपनी गंद के अंदर घुसाने लगी…

दोनो लंड उसके दोनो छेदों की दीवारों को चीरते हुए अंदर घुस

गये..

* * * * * * * * * *

बलदेव ने अपनी गाड़ी मकान के बाहर रोकी… आज उसकी किसी पार्टी के

साथ सहन के बाहर मीटिंग थी जो जल्दी ख़तम हो गयी थी…

इसलिए उसने सोचा कि इस मौका का क्यों ना फ़ायदा उठाए जाए और घर

जाकर आज कंप्यूटर पर पॉर्न तस्वीरें देखी जाए… उसने सोचा की

आज घर पर कोई नही होगा इसलिए वो आराम से पॉर्न तस्वीरे देखते

हुए अपना लंड को मूठ भी मार सकता है..

उसने अपनी चाबी से घर का दवज़ा खोला और अंदर आकर दरवाज़ा

वापस बंद कर दिया….वो अपने बेडरूम की तरफ बढ़ गया… जहाँ

उसका कंप्यूटर था और जिस पर आज वो कमसिन और छोटी लड़कियाँ की

नंगी तस्वीरें देखना चाहता था.. उसे अपनी बेटी के उम्र की

लड़कियों की नंगी तस्वीरे बहोत ही अच्छी लगती थी.. और जब से उसकी

बेटी प्रीति ने उसे चिढ़ाना शुरू किया था उसकी ये आदात और बढ़

गयी थी…

लेकिन तभी कमरे से आती घर घराहट की आवाज़ ने उसे चौंका

दिया… शायद वसुंधरा होगी और वो भी यही कर रही होगी.. उसने

सोचा..

उसने सोचा कि क्यों ना आज मिया बीवी साथ मे पॉर्न देखे और बहोत

दीनो बाद दिन मे चुदाई करने का मौका मिला है.. वो अपनी बीवी के

सामने अचानक जा उसे चौंका देना चाहता था इसलिए उसने कमरे के

बाहर ही अपने कपड़े उतार दिए… बीवी की चूत के ख़याल से ही उसका

लंड तन कर खड़ा हो गया था…वो सोचने लगा कि उसकी बीवी ने आज

अपने किस खिलोने को अपनी चूत मे डाल रखा होगा…

देव ने पहले दरवाज़े की झिरी से अंदर झाँक कर देखा ..उसने देखा

की एक गंद उसकी तरफ उठी हुई है.. और एक वाइब्रटर उस गंद के

अंदर बाहर हो रहा है और दूसरा खिलोना नीचे बिना बालों की

चूत के अंदर बाहर हो रहा था… ये द्रिश्य देख उसका लंड मचल

उठा… उसने थोड़ी देर इस खेल को देखने की सोची और वैसे ही

खड़े खड़े अपने लंड को मसल्ने लगा…

लेकिन देव अपने आप पर ज़्यादा देर काबू नही रख पाया.. उसे चूत की

ज़रूरत थी उसने कमरे मे अंदर आते हुए कहा…

“अरे दोनो छेद मे अपने ही हाथ से घुसओगि.. कहो तो में तुम्हारी

मदद करूँ?”

प्रीति अपने पिताजी की आवाज़ सुनकर डर कर चौंक गयी.. उसने उनके घर

के अंदर आने की आवाज़ भी नही सुनी थी और अब वो खुद अपनी ही

चूत और गंद से खेलते पकड़ी गयी थी….अपनी मम्मी के ही खिलोने

से वो उन्ही के पलंग उपर खुद चुदाई कर रही थी…

उसने पलट कर देखा जहाँ दरवाज़े से उसके पिताजी अपने हाथ मे

खड़ा लंड मसल्ते हुए कमरे के अंदर आ रहे थे….जहाँ चेहरे

पर उत्तेजना थी लेकिन प्रीति को देख वो उत्तेजना हैरानी मे बदल

गयी…

“तुम यहाँ क्या कर रही हो?” देव ने अपनी बेटी से जोरों से पूछा..

जब उसे ये एहसास हुआ कि कमरे मे उसकी बीवी नही उसकी सग़ी बेटी अपनी

चूत और गंद से खेल रही है….

प्रीति की समझ मे नही आया कि वो क्या जवाब दिया.. कई दीनो से

उसकी तमन्ना थी कि वो अपने बाप के खड़े लंड को देखे और किस्मत

ने उसे मौका दे दिया था.. लेकिन वो अपने ही पिताजी के कमरे मे उन्ही

के पलंग पर उसी की मम्मी के खिलोनो से चुदाई करती पकड़ी भी गयी

थी…. लेकिन जिस्म की गर्मी दिल के डर पर हावी हो गयी..

“बस पापा चूत और गंद मे उठ रही खुजली शांत नही हो रही थी

इसलिए उसे शांत कर रही थी” प्रीति ने शैतानी मुस्कुराहट से

कहा..

“मेरा पूछने का मतलब ये नही था में ये जानना चाहता हूँ कि तुम

मेरे कमरे मे अपनी ही मम्मी के खिलोनो के साथ क्यों हो? देव ने

पूछा.. उसकी निगाह अभी भी अपनी बेटी की चूत और गंद पर टिकी हुई

थी….

“वो क्या है ना पापा मेरे पास ऐसे खिलोने थे नही और आज चूत की

खुजली शांत नही हो रही थी तब मेने सोचा कि क्यों ना मम्मी के

खिलोने इस्तेमाल कर लूँ बस उत्तेजना मे होश ही नही रहा और में

यहीं आपके कमरे मे अपनी चूत की गर्मी शांत करने लगी… ”

प्रीति ने ज़मीन पर बैठते हुए अपनी गंद और चूत से उन खिलोनो

को बाहर निकाला…. उसकी टाँगे फैली हुई थी और उसकी बिना बालों की

चूत ठीक उसके पिताजी के चेहरे के सामने थी जिसपर उनकी नज़रे

टीकी हुई थी..

“अब आप मेरी गर्मी शांत करने मे मेरी मदद करेंगे?”

“क्या कहा तुमने?” देव ने जोरों से पूछा.. उसे प्रीति से ऐसी उम्मीद

नही थी…

“पापा आप ही ने तो मदद करने के लिए कहा था… अब आप यहाँ है

और नंगे भी और शायद आप भी मेरी तरह काफ़ी उत्तेजित है तो

मेने सोचा कि शायद आप मेरी मदद करेंगे” प्रीति ने भोली बनते

हुए कहा.

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