स्वीटी को उम्मीद तो थी कि ऐसा ही होगा.. उसने फिर भी काँपते हाथों से अपनी बेहन की शॉर्ट्स खोली और नीचे खिसका कर उतार दी… उसने देखा कि उसकी नीले रंग की पॅंटी बीच मे से गीली हो कर उसकी
चूत से चिपक गयी थी… उसने पॅंटी के एलास्टिक मे उंगलियाँ फँसाई और उसकी पॅंटी को नीचे खिसका उतार दी.. और फिर उसकी टाँगो को सहलाते हुए अपने हाथ उपर को ले आई… उसने देखा कि उसकी तराशी हुए झांते रस से भीग चमक रही थी.. स्वीटी का दिल तो किया कि वो तभी उसकी चूत पर टूट पड़े और उसकी चूत का रस पी जाए लेकिन एक बार के लिए उसने इस ख्याल को झटक दिया और उसपर लेट गयी… अपनी चुचियों को उसकी चुचियों से मसल्ते हुए वो उसके होठों को चूसने लगी.. अपनी जांघों को उसकी
टाँगों के बीच फँसा वो उसकी चूत को अपनी जांघों से रगड़ने लगी.. शमा के मुँह से कराह फुट रही थी..
तभी अपनी बेहन के बदन को चाट्ती और चूमती हुई नीचे को बढ़ी और जैसे ही उसके अपनी जीब उसकी चूत पर रखी शमा के बदन मे एक करेंट सा दौड़ गया उसे लगा कि उसकी चूत पर किसी ने बिजली का नंगा तार रख दिया.. स्वीटी की नुकीली और गरम जीब उसे बहोत अछी लगी..
स्वीटी ने पहले अपनी जीब को उसकी चूत पर उपर से नीचे फिराते हुए बहते रस को चाटती रही फिर उसकी चूत को अपनी उंगीयों से फैला उसने अपनी जीब अंदर घुसा दी.. कामविभोर हो उसने अपन हाथ अपनी
छोटी बेहन के सिर पर रखा और उसके बालों मे अपनी उंगलियाँ फिराने लगी…
स्वीटी अब अपनी जीब को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगी.. शमा की चूत मे बहाव तेज हो गया वो अपनी कमर उठा अपनी चूत को और उसके मुँह पर रगड़ने लगी.. और सिसकने लगी.. “ऑश स्वीटी ऑश हाआँ और अंदर तक घूसा के चूस ओ हां और अंदर तक चूस ओ चूस” स्वीटी ने अपनी जीब की रफतार बढ़ा दी और एक चीख के साथ शमा झाड़ गयी.. स्वीटी वापस अपनी बेहन के बदन पर चढ़ गयी और उसकी चुचि को मसल्ते हुए उसके होठों को चूम लिया..
शमा ने अपनी छोटी बेहन के होंठो को चूम उसे थॅंक्स कहा और वादा किया कि भविश्य मे उसकी चूत चूस वो इस मज़े का बदला ज़रूर चुकाएगी..
राज नंगा अपने कंप्यूटर के सामने कुर्सी पर बैठा था और अपने खड़े लंड को मुट्ठी मे भींच मसल रहा था.. स्क्रीन पर गीली चूत अपनी पॅंटी के बगल से हाथ डाल अपनी चूत से खेल रही थी…
राज मस्ताना} आज में चाहता हूँ कि तुम अपनी चूत मे वो नकली लंड घुसाओ.
गीली चूत} ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा.. ज़रा रूको में अभी आई.
राज मसाना} ओके
गीली चूत} क्या ये वाला चलेगा.
राज तो जैसे कुर्सी पर गिर पड़ा… उसकी आँखे फटी रह गयी. गीली चूत के हाथ मे वही गुलाबी रंग का डिल्डो था जो कि पिछली रात राज ने प्रीति की चूत और गंद मे घुसाया था.. और उसे पक्का यकीन था कि ये वही खिलोना था जो गीली चूत ने पकड़ रखा था.. और फिर उसे याद आया कि मम्मी के कलेक्षन मे एक वैसा ही डिल्डो उसने देखा था जो एक बार गीली चूत ने अपनी चूत और गंद मे घुसा
कर उसे दीखाया था..
राज को अब भी यकीन था था कि जो औरत वेब कॅम पर उसके सामने अपनी चूत से खेलती है.. जो औरत एक होटेल मे चादर के पीछे उसे चोदने दे सकती है.. अपनी गंद मे उसका लंड ले सकती है वो किसी भी हालत मे उसकी मा नही हो सकती लेकिन प्रमाण को झुटलाया भी तो नही जा सकता था.
राज को पता था कि इस समय वो और उसकी मा ही घर पर है. पर उसे लगा था कि उसकी मम्मी सोने चली गयी है.. अब उसे एक ही काम करना था.. उसे पता लगाना था.. ये औरत उसकी मम्मी हो सकती है इस ख्याल से ही वो और उत्तेजित होने लगा.. उसके ख़याल मे पहले की सब घटनाए आने लगी..
कैसे उसने अपनी मम्मी की बिना बालों की चूत देखी थी और फिर कैसे उसने उनकी पॅंटी को अपने लंड पर लपेट मूठ मारी थी… और अगर सही मे ये औरत उसकी मम्मी निकली तो जिंदगी मे तो जैसे चार चाँद लग जाएँगे… राज अब अपने लंड को स्क्रीन पर देखते हुए मसल रहा था जहाँ वो नकली लंड अब गीली चूत की चूत के अंदर बाहर हो रहा था..
राज मस्ताना} अब इस डिल्डो को मेरे लिए अपनी गंद मे घुसा दो.
गीली चूत} जैसे तुम कहो डार्लिंग.
राज मस्ताना} अपने घुटनो पर होकर.
गीली चूत}ओ के
राज ने देखा कि वो खड़ी होकर अपने आप को वेब कॅम के सामने अड्जस्ट करने लगी जिससे वो आछी तरह से देख सके और फिर उस डिल्डो को वो अपनी गंद के अंदर बाहर करने लगी.. और दूसरे हाथ की उंगली को
अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी.. फिर उसे उससे कहा कि वो थोडा मोइस्तेरुzइएर लेकर अभी वापस आता है..
राज दबे पावं अपने कमरे से बाहर निकल अपने मम्मी डॅडी के बेडरूम की ओर बढ़ा.. और धीरे से कमरे के हॅंडल को खोला जिससे की कोई आवाज़ ना हो उसे यकीन था कि उसकी मम्मी इस वक्त सो रही होगी और वो उन्हे डिस्टर्ब नही करना चाहता था.. पर जैसे ही थोडा दरवाज़ा खुला उसकी तो साँसे जैसे हलक मे ही अटक गयी.. कमरे के अंदर उसकी मम्मी वेब कॅम के सामने अपनी गंद मे नकली लंड को अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही अपनी चूत मे अपनी उंलगी को..
राज का तो शरीर जैसे सुन्न पड़ गया उसकी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे.. क्या वो अपनी मम्मी को बता दे कि उसे सब पता चल गया? के वो इसी समय कमरे के अंदर जा कर उनकी चूत मे उंगलियों की जागह अपना लंड डाल उनकी चुदाई कर दे…. उसके दीमाग मे यही सब ख़याल दौड़ रहे थे.. लेकिन अपने ख़यालों को झटक वो चुपचाप वहाँ से खिसक वापस अपने कमरे मे आ गया..
वो चुप चाप कंप्यूटर स्क्रीन के सामने अपनी कुर्सी पर बैठ गया.. और स्क्रीन पर देखने लगा.. जहाँ उसकी मम्मी उसे खुश करने के लिए अपनी गंद मे उस डिल्डो को घुसा अंदर बाहर कर रही थी..
राज का लंड अब भी पूरी तरह तना हुआ था.. उसका दीमाग काम नही कर रहा था वो सोच रहा था कि उसकी मा को उसके बारे मे पता कैसा चला और ऐसी क्या बात हुई कि उसकी मम्मी ने उससे मूठ मारने की फरमाइश की और फिर बाद मे उससे होटेल मे छुप कर चुदवाया भी…और गंद भी मरवाई..
गीली चूत} राज अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मस्लो में तुम्हारे लंड से वीर्य की पिचकारी छूटते हुए देखना चाहती हूँ.
राज मस्ताना} हां क्यों नही
राज ने अपने लंड पर थोड़ा माय्स्टयरिसर लगाया और अपने लंड को मूठ मारने लगा… और उसकी मम्मी ज़ोर ज़ोर से डिल्डो को अपनी गंद के अंदर बाहर करने लगी..
तभी उसे याद आया कि उसकी मम्मी ने अपनी सहेली को भी उसे मुट्ठी मारते दीखाया था.. और उसे यकीन था कि वो सहेली और कोई नही उसकी चाची ही होगी…. और तभी उसके लंड ने ज़ोर की पिचकारी हवा
मे छोड़ी…
राज सोच रहा था कि अब उसे क्या करना चाहिए? उसे अपनी मम्मी की चुदाई करने मे तकलीफ़ नही थी पर अगर उन्हे पता चल गया कि वो सब जानता है तो उनका रिक्षन क्या होगा वो यही सोच रहा था.. और अगर साथ ही प्रीति को सब पता चल गया तो कैसे बिहेव करेगी.. इन सब बातों का उसे हल निकालना ही होगा…
एक शाम नेहा के घर पर वसुंधरा और नेहा दोनो शाम की चाइ पी रहे थे…. “नेहा बहोत दीनो से मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ” वासू ने अपनी देवरानी और सहेली से कहा… “हां कहो” नेहा ने कहा.. वो अचानक वासू की बात से चौंक पड़ी थी
“तुम तो जानती ही हो कि हम दोनो ने साथ साथ राज को वेब कॅम पर मूठ मारते हुए देखा था..” वासू ने कहा. “हां वो रात मैं कैसे भूल सकती हूँ आज जब उसके मोटे लंबा लंड मेरी आँखों के सामने आता है तो मेरी चूत गीली हो जाती है” नेहा ने जवाब दिया. “में ये कहना चाहती हूँ कि मेने उसके लंड को जीता जागता इन आँखों से देखा है” कहकर वासू ने अपना मुँह भींच लिया.. और अपनी देवरानी के चेहरे को घूर्ने लगी..
“ये क्या कह रही हो दीदी.. क्या तुम उसके कमरे के दरवाज़े के पीछे खड़ी रहती हो या फिर वो जब नहाने जाता है तो बाथरूम मे ताक झाँक करती रहती हो” नेहा ने कुर्सी पर आगे झुकते हुए कहा.. उसकी चूत मे खुजली मचने लगी थी.. और वो अपनी जेठानी से और जानकारी पाना चाहती थी..
“तुझे बुरा तो नही लग रहा ना?” वासू ने अपनी देवरानी से पूछा. “मुझे क्यों बुरा लगेगा.. क्या हम दोनो आपस मे सेक्स का खेल नही खेलते.. फिर हम दोनो ने साथ साथ राज को हमारे लिए मूठ मारते भी
देखा है.. पर हां मुझे असचर्या ज़रूर हो रहा है कि तुममे इतनी हिम्मत आ गयी कि तुम अपने ही बेटे का लंड हक़ीकत मे देख सको” नेहा ने जवाब दिया..
“मेने जो किया वो कमरे या बाथरूम मे ताक झाँक करने से भी ज़्यादा ख़तरनाक था..” वासू ने कहा. “तो क्या तुमने उसके कमरे मे वीडियो कॅमरा छुपाया था..?” नेहा ने खिलखलाते हुए पूछा..
“नही ऐसा कुछ नही बल्कि इससे भी ज़्यादा ख़तरनाक.. ठीक है में तुम्हे बताती हूँ…” वासू ने कहा.. फिर वसुंधरा ने शुरू से पूरी बात उसे बताई कि किस तरह उसने अपने ही बेटे को होटेल के बंद
कमरे मे मिलने के लिए बुलाया और अपनी आवाज़ बदल कमरे के बीच मे एक चादर बाँध दी जिससे वो अपने ही बेटे के लंड को चूस सके और उसके लंड को अपनी चूत मे ले मज़ा कर सके.. ”
नेहा अपनी जेठानी के हर शब्द को बड़ी ध्यान से सुन रही थी.. उसका हाथ खुद बा खुद उसकी चूत पर पहुँच गया था और वो अपनी चूत को रगड़ने लगी थी… आख़िर वासू ने अपनी कहानी ख़तम की..
“तुमने तो कमाल ही कर दिया वासू.. तुम तो बहोत बड़ी छिनाल निकली… ” नेहा ने कहा… तुम्हारी सिर्फ़ बात सुनकर मेरी हालत खराब हो गयी है… मन कर रहा है कि अभी कोई चीज़ अपनी चूत मे घुसा लूँ.. लेकिन एक बात मेरी समझ मे नही आ रही ये सब तुमने मुझे क्यों बताया?” नेहा ने पूछा…
“वो इसलिए कि जिस दिन तुम उसके लंड को वेब कॅम पर देख रही थी तो मुझे लगा कि शायद तुम भी उसके लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती हो… उससे चुदवाना चाहती हो” वासू ने जवाब दिया… “क्या तुम सही मे सच कह रही हो?” नेहा ने पूछा.. उसे अपनी जेठानी की बात पर विश्वास नही हो रहा था…
“हां नेहा मैं सच कह रही हूँ… तुम नही जानती ये सोच कर ही की मेरी अपनी सहेली मेरी देवरानी अपने ही भतीजे से चुडवाएगी मुझे कुछ होने लगता है… और अगर मौका लगा तो साथ मे चुदवा कर कितना मज़ा आएगा.. है ना?” वासू ने जवाब दिया..
“एक बात कहूँ अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो.. अगर तुम इतनी बड़ी छिनाल हो सकती हो कि अपने ही बेटे से चुदवा लो तो में भी कम छीनाल नही हू…. अपने ही भतीजे का लंड अपनी चूत मे लेने के
ख़याल से ही कुछ होता है.. और अगर उसका लंड मेरी चूत मे और तुम्हारी बिना बालों की चूत मेरे मुँह पर तो मज़ा और बढ़ जाएगा है ना?” नेहा ने कहा. “पर तुम ये सब करोगी कैसे?” “वो क्या है ना नेहा.. राज ये नही जानता कि गीली चूत कौन है.. इसलिए में उससे पूछूंगी कि क्या वो दो औरतों की चूत एक साथ मे मारना चाहेगा… और में जहाँ समझती हूँ वो मना नही करेगा…
क्यों कि वो यही समझेगा कि वो दूसरी औरत मेरी सहेली है जिससने उसे मूठ मारते देखा था” वासू ने जवाब दिया..
“मुझे तो विश्वास नही हो रहा कि तुम ये सब कर पावगी?” नेहा ने खुश होते हुए कहा.
“वो तो मैं सब कुछ संभाल लूँगी लेकिन एक ही अड़चन है…..” वासू ने अपनी बात बीच मे ही छोड़ दी.. “और वो अड़चन क्या है?” नेहा ने अपनी जेठानी से पूछा. “वो क्या है ना चुदाई के मामले मे राज थोड़ा अलग है…जैसे उसे बिना बालों की चूत बहोत अछी लगती है.. और उसे गंद मारने मे बहोत मज़ा आता है… इसलिए मेने उसे पहले ही बता दिया था कि तुम्हारी चूत पर बाल का नामो निशान नही है और तुम्हे भी अपनी गंद मे लंड लेने मे बहोत मज़ा आता है… वैसे तो उसने आज तक
सिर्फ़ मेरी ही गंद मे अपना लंड घुसाया है लेकिन वो एक नई गंद मे अपना लंड घुसाने के लिए बेकरार है” वासू ने कहा.
“वो सब तो ठीक है लेकिन में उसका इतना मोटा और लंबा लंड अपनी गंद मे कैसे ले पाउन्गि.. कितना मोटा है मेरी तो गंद ही फॅट जाएगी… और दूसरी बात मेने आज तक अपनी चूत की झांते सॉफ नही की है.. में मोहन से क्या कहूँगी.. उसने कई बार मुझे चूत के बाल सॉफ करने को कहा लेकिन मेने हर बार मना कर दिया… और अब में अपनी झांते सॉफ करूँगी तो उसे शक़ हो सकता है” नेहा ने
कहा..
“अरे इस बात को लेकर तुम चिंता मत करो.. तुम मर्दों की फ़ितरत को नही जानती.. जब वो तुम्हारी बिना बालों की चूत देखा तो तुम्हे पूछेगा भी नही की तुम्हारा इरादा कैसे बदल गया.. वो तुम्हारी
चूत चूसने मे लगा रहेगा… और जहाँ तक गंद मे लंड लेने का सवाल है.. तुम एक काम करो मोहन से रोज़ गंद मराओ जिससे तुम्हारी गंद थोड़ी फैल जाए… फिर तुम्हे कोई तकलीएफ नही होगी” वासू ने जवाब दिया…
“ठीक है फिर एक काम करते है.. तुम मेरी चूत के बाल सॉफ कर दो और में मोहन का लंड अपनी गंद मे लेकर अपनी गंद को राज के लंड के लिए तय्यार करती हूँ” नेहा ने कहा..
“ठीक है” वासू ने कहा “क्या में तुम्हारी चूत के बाल अभी सॉफ कर दूं?” वासू ने पूछा..
“हां और क्या? शुभ काम मे देरी क्यों” नेहा ने हंसते हुए कहा…दोनो सहेलियाँ खड़ी हुई और बाथरूम की ओर बढ़ गयी…
बाथरूम मे पहुँच कर वासू ने पहले तो सभी समान इकट्ठा किया जो झांते सॉफ करने के काम मे आता है और फिर एक टवल बिछा कर अपनी देवरानी को उसपर लेट जाने को कहा. नेहा अपने कपड़े उतार कर टॉवेरल पर लेट गयी… वासू उस के सामने खड़ी हो गयी और उसके नंगे बदन को निहारने लगी… फिर उसके पास झुकते हुए उसने नेहा के होठों पर एक चुंबन जड़ दिया… और दूसरे हाथ से उसकी चुचीय को मसल्ते हुए उसकी निपल को चिकोटी काट दी..

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