परिवार हो तो ऐसा – Update 17 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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नेहा ने गौर किया कि अपने बेटे के लंड की बात सुनकर उसकी जेठानी के चेहरे पर हल्की सी चमक आ गयी थी.. और वो अपने सूखे होठों पर ज़ुबान फिरा रही थी.. तभी उसने महसूस किया राज के लंड की बात करते हुए उसके खुद के निपल तन कर खड़े हो गये थे.. कि उसने अपनी निगाह अपनी जेठानी के बदन पर घुमाई… तो उसने पाया कि वासू के निपल का उभार उसकी टाइट टॉप से सॉफ दीख रहा था… और उसकी चुचियाँ फूल गयी थी. “क्या बात है कुछ ज़यादा ही सोच रही हो क्या?” नेहा ने पूछा.

“क्या कहा तुमने” वासू अचानक चौंक पड़ी… और उसे एहसास हुआ कि वो अपनी देवरानी के साथ बैठी है…”ये सब तुम्हारी ग़लती है तुम्हीने इस ढंग से उसके लंड के बारे मे कहा कि मुझे भी अजीब ख़याल आने लगे…” वासू ने हंसते हुए कहा. “कसम से वासू जब भी तुम्हारे बदन को देखती हूँ तो मुझे कॉलेज के वो दिन याद आने लगते है.. जब हमारी शादी से पहले याद है ना तुम्हे” नेहा ने धीरे से कहा. “हां अछी तरह याद है.. भला उन दीनो को कैसे भूल सकती हूँ” वासू ने जवाब दिया. “तुम समझ रही हो ना में तुमसे क्या कह रही हूँ?” नेहा ने फिर

पूछा… वासू नेहा की बात को अच्छी तरह समझ रही थी…. “हां समझ तो रही हूं.. लेकिन में पिछले कई सालों से इस विषय के बारे मे नही सोचा.. क्या तुम उन दीनो को याद किया करती हो?”

“हां क्या करूँ…. जब भी कोई बहोत ही सुंदर और सेक्सी औरत दीखती हो तो उन दीनो की याद आ जाती है या फिर जब भी तुम्हारे खड़े निपल देखती हू तो रहा नही जाता” नेहा ने धीरे से जवाब

दिया.. “सच?” “हां और क्या.. जब तुम अपने होठों पर अपनी ज़ुबान फिरा रही थी तो मेरे दिल मे उन दीनो कि याद ताज़ा हो गयी … याद है तुम्हे हमने कैसे सब शुरआत की थी… वासू को अपनी जवानी के वो दिन याद आने लगे जब वो और नेहा एक ही कॉलेज मे पढ़ते थे और गहरी सहेलियाँ थी… और दोनो ने सेक्स की पहल साथ साथ की थी.. किस तरह दोनो एक दूसरे को चूम चूस कर चुंबन की प्रॅक्टीस की थी….

और बात यहाँ तक बढ़ी की दोनो समलैंगिक सेक्स का आनंद उठाने लगे… दोनो एक दूसरे की चूत को चूसना और उसमे उंगली कर मज़ा लेने लगे थे.. ये सिलसिला करीब एक साल तक चला था कि वासू ने अपना पहला बाय्फ्रेंड बनाया और उसने भविश्य के लिए नेहा को मना कर दिया… नेहा उनके बीच का ये

रिश्ता आगे बढ़ाना चाहती थी लेकिन वासू ने मना कर दिया था… “क्या तुम दूसरी औरतों के साथ सेक्स का मज़ा लेती हो?” वासू ने अपनी सहेली और देवरानी से पूछा. “नही तुम पहली और आखरी औरत थी… ऐसा नही कि मेने कोशिश नही की लेकिन हर बार किसी को पसंद करने के बाद आगे बढ़ने की हिम्मत नही हुई… तुम नही जानती तुम्हारे बारे मे सोचते ही मेरी चूत मे जैसे आग सी लग जाती है.” नेहा ने जवाब दिया. “सच कहूँ तो मेने भी कभी तुम्हारे अलावा किसी दूसरी औरत के साथ सेक्स नही किया है.. और तुम्हारी बातों ने मेरी भी सोई हुई भावनाओं को जगा दिया है” वासू ने कहा…

“तो क्या आज फिर तुम उस रिश्ते का आरंभ करना चाहोगी.. में तुम्हारी चूत चूसना चाहती हू” नेहा ने कहा. “में भी यही सोच रही थी.. कि क्यों ना एक बार पुराने रिश्ते की शुरआत कर जिंदगी का मज़ा लिया जाए” वासू ने कहा.. नेहा को तो जैसे कोई माँगी हुई मुराद मिल गयी.. वो झट से अपनी कुर्सी से उठी और उसे अपनी सहेली को गले लगा लिया… “मुझे पता था कि तुम मना नही करोगी….” कहकर उसने वासू का हाथ पकड़ा और उसे अपने बेडरूम मे ले आई… “तुम नही जानती आज में कितनी खुश हूँ” नेहा ने कहा और वासू उसका ब्लाउस खोलने लगी…..लेकिन नेहा ने उसे रुक जाने को कहा और उसे अपनी तरफ खीच अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए.. वासू ने भी उसका साथ दिया और उसके होठों को चूसने लगी. साथ ही उसने अपनी जीब उसकी मुँह मे दे दी जिसे नेहा चूसने लगी.. और अपनी जीब

से मिलाने लगी…

दोनो के हाथ एक दूसरे के बदन पर रेंग रहे थे और एक दूसरे के अंगों को सहला और मसल रहे थे…. नेहा के हाथ वासू के टॉप के आगे के बटन खोलने लगे.. जैसे ही उसका एक बटन खुलता तो उस

जगह के नंगे जिस्म को वो चूम लेती…अब वो नीचे झुकते हुए एक एक बटन खोलने लगी.. थोड़ी ही देर मे वो नीचे घुटनो के बल बैठ गयी…. और जब नीचे का बटन खोला तो वासू की नाभि दीखाई देने लगी.. वो आगे झुकी और उसकी नाभि को चूम लिया और अपनी जीब की नोक उसकी नाभि मे घूमने लगी… उत्तेजना मे वासू का बदन कांप उठा… नेहा ने फिर आखरी बटन खोल टॉप अपनी सहेली के बदन से उतार दिया…

नेहा ने फिर ब्रा मे क़ैद वासू की चुचियों को पकड़ लिया और सहलाने लगी…. अपनी उंगली से उसकी गोलाइयाँ नापने लगी…. साथ ही वो अपनी जीब को उसकी चुचियों की किनारे फिराने लगी.. वासू के हाथ नेहा के सिर पर कस गये. और उसके मुँह से सिसकारी फूटने लगी.. नेहा ने अपना हाथ उसकी पीठ पर किया और उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसकी ब्रा को खींच निकाल दिया…. वो अपनी सहेली के खड़े

निपल को देखने लगी… और झुक कर उन्हे मुँह मे ले लिया और चूसने लगी….अपनी जीब से उन्हे चुलबुलाने लगी… वासू ने नेहा के गुलाबी रंग के टॉप को पकड़ा और सिर से उठा कर निकाल दिया.. वासू की नज़रे भी नेहा की भारी और कड़ी चुचियों पर टीक सी गयी…उसके निपल उसी की तरह काफ़ी बड़े बड़े थे.. वो उसकी चुचि को पकड़ मसल्ने लगी… उसकी चुचि पहले के मुक़ाबले काफ़ी बड़ी और भारी हो गयी थी… “नेहा तुम्हारी चुचि और निपल तो काफ़ी बड़े हो गये.. है पहले से” वासू ने अपनी सहेली से कहा. “बच्चे पैदा होने के बाद औरतों का शरीर कहाँ पहले जैसे रह पाता है” नेहा ने जवाब दिया. “हां शरीर का आकार तो नही रहता लेकिन चुदाई मे वैसा ही मज़ा आता है.. है ना? वासू ने जवाब देते हुए पूछा. “ये तो दुनिया की सचाई है” नेहा ने कहा और उसके होठों को चूसने

लगी. और अपने बदन को वासू के बदन से रगड़ने लगी….

“अब तुम्हारे बाकी के बदन को देखना है.. कितने साल हो गये देखे हुए” कहकर नेहा ने उसकी स्कर्ट के हुक को खोला और उसकी ज़िप नीचे खिच दी.. फिर नीचे बैठते हुए उसकी स्कर्ट नीचे खिसका दी… वासू की आसमानी रंग की पॅंटी नज़र आने लगी.. उसने अपना मुँह पॅंटी के उपर से उसकी चूत पर रखा तो पाया कि उसकी पॅंटी वहाँ से गीली हो गयी थी.. “लगता है की तुम मेरे लिए तय्यार हो” नेहा ने कहा और उसकी पॅंटी की एलास्टिक को पकड़ा नीचे खिसका दिया.. वासू ने अपनी टाँगे उठा अपनी पॅंटी को निकाल दिया.. उसकी गुलाबी चूत चमक रही थी…जिस पर बॉल का एक रेशा तक नही था.. “अरे वाह तुम्हारी चूत तो एक दम साफा चॅट है” नेहा ने कहा… “हां” वासू ने कहा.. अब वो पूरी तरह नंगी अपनी सहेली के सामने खड़ी थी. “पर पहले तो तुम अपनी झांते साफ नही करती थी” नेहा ने कहा.

“हां लेकिन अब कई सालों से ऐसे ही रहती हू” वासू ने जवाब दिया. “बलदेव को बिना बालों की चूत बहोत अछी लगती है” “मोहन भी मुझसे कई बार झटें सॉफ करने को कह चुका है.. लेकिन पता नही क्यों मेने ऐसा अभी तक नही किया..” नेहा ने कहा. “तुम्हे उसकी बात माननी चाहिए.. सच मे बिना बालों की चूत मे लंड लेने मे बहोत मज़ा आता है” “पता नही फिर एक बार अजमौँगी ज़रूर” कहकर नेहा अपनी उंगली वासू की चूत पर फिराने लगी….”वासू प्लीज़ अब पलंग पर लेट जाओ” वासू अपनी टाँगो को फैलाए पलंग पर लेट गयी और नेहा उसकी टाँगो के बीच आ गयी… और उसके नंगे जिस्म को निहारने लगी..

“पता है तुम्हे तुम्हारा ये नशीला बदन किसी को भी बहका सकता है” नेहा ने उसके गोरे बदन को निहारते हुए कहा.और अपनी जीन्स के बटन खोल उसे नीचे खिसका निकाल दिया..और साथ ही पॅंटी भी

उतार दी. वासू की नज़रे नेहा की बदन से घूम उसकी चूत पर टीक गयी.. उसकी चूत एक दम साफा चॅट तो नही थी लेकिन नेहा ने अपनी झांते अछी तरह तराश कर उन्हे छोटी कर रखा था… “तुम्हारा भी जिस्म कम नही है.. किसी नमार्द के लंड मे भी ये जान फूँक देगा” वासू ने मुस्कुराते हुए कहा.

नेहा अपने खड़े निपल को वासू के नंगे जिस्म पर रगड़ते हुए उपर की ओर खिसकने लगी… जब वो उसकी चुचियों पर पहुँची तो उसने उसके निपल को मुँह मे लिया और चूसने लगी…पहले उसने दाएँ निपल को चूसा और फिर उसके बाएँ निपल को चूसने लगी…और एक हाथ नीचे कर उसकी चूत को मसल्ने लगी.. उत्तेजना मे वासू सिसकने लगी..

“ऑश वासू तुम्हारे साथ सेक्स करने की कितने दीनो से इच्छा थी…आज में बहोत खुश हूँ” नेहा अपन सहेली के बदन से अपने बदन को रगड़ते हुए बोली. नेहा अब वासू के बदन को चूम रही थी…सहला रही थी.. मसल रही थी…..जब उसके हाथ उसकी चूत पर पहुँचे तो वो उसे मुट्ठी मे भर भींचने लगी…फिर अपनी उंगली उसकी गीली चूत मे घुसा गोल गोल घूमाने लगी.. और फिर उंगली को बाहर निकाल उसे मुँह मे ले चूसने लगी… नेहा फिर झुकी और अपनी जीब को उसकी चूत के चारों और फिराने लगी…फिर उसकी चूत को थोड़ा फैला उसने जीब अंदर घुसा दी और उसकी चूत को चुलबुलाने लगी…. गोल गोल घूमाने लगी… और ज़ोर ज़ोर से चाटने लगी..

वासू की चूत मे तो जैसे भुकूंप आ गया हो… वो अपने ही हाथों से अपनी खड़ी चुचियों को मसल्ने लगी.. अपने निपल को खींचने लगी… वो झड़ने के लिए मरी जा रही थी…. लेकिन नेहा थी कि इस खेल को और खेलना चाहती थी.. आज कितने बरसों का बाद उसे ये मौका मिला था… नेहा ने वासू की चूत को चूसना और चाटना बंद किया और अपनी उंगली उसकी चूत मे घुसा अंदर बाहर करने लगी और साथ ही दूसरी उंगली से उसकी गंद के छेद को कुरेदने लगी…एक बार फिर उसने उंगली उसकी चूत मे घुसाइ और उसकी चूत के रस से गीली कर उसने अब एक उंगली वासू की गंद मे घुसा दी.. अब वो उसकी चूत और गंद मे उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगी..

नेहा ने अब उंगली के साथ एक बार फिर अपनी जीब उसकी चूत पर रख दी और उसकी चाटने लगी… कि तभी वासू का बदन कांपा और उसकी चूत झड़ने लगी.. लेकिन नेहा थी कि वो काम मे लगी हुई थी.. वो उसकी

चूत चूस रही थी.. उसकी गंद मे उंगली अंदर बाहर कर रही थी.. इस दोहरे मज़े से वासू चीख सी पड़ी और उसने नेहा के सिर को और ज़ोर से अपनी चूत पर दबा दिया.. और अपनी कमर उठा अपनी चूत को और उसके मुँह मे घुसेड दिया…. नेहा और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लगी.. अपनी उंगली अंदर

बाहर करने लगी. उसकी गंद मे उंगली और अंदर तक घुसाने लगी…. ‘ऑश नेहा हाआँ ऑश और ज़ोर से चूस ऑश हां और अंदर तक अपनी जीभ घुसा और अंदर तक ऑश हां” वासू अपने सिर को इधर उधर पटक सिसकने लगी.. और उसकी चूत ने दोबारा पानी छोड़ दिया…

वासू ने नेहा को अपने उपर से उठने को कहा और नेहा ने अपनी सहेली को छोड़ दिया.. वासू पलंग पर पसर सी गयी.. और नेहा खिसक कर उसके बगल मे लेट गयी.. “थॅंक्स वासू कि तुमने मुझे ये सब करने दिया.. में तुम्हे बहोत पसंद करती हूँ” नेहा उसके बदन को सहलाते हुए बोली.

“शुक्रिया तो मुझे तुम्हारा करना चाहिए… आज तुमने एक बार फिर मुझे वो सुख दिया जिससे मैं इतने सालों से मिस कर रही थी…” वासू ने कहा.. “लेकिन जिस तरह तुम चूत चूस्ति हो उससे तो यही लगता है कि तुम्हे चूत चूसने की अछी ख़ासी प्रॅक्टीस है” “क्या हम फिर से ऐसा कर सकेंगे?” नेहा ने पूछा. “हां ज़रूर करेंगे.. लेकिन पहले अब में तुम्हारा शुक्रिया करूँगी” वासू ने कहा.

“सच…. मुझे यकीन नही हो रहा” नेहा किसी बच्ची की तरह ताली बजाते हुए बोली… वासू करवट बदल कर अपनी सहेली और देवरानी के उपर चढ़ गयी और उसके होठों को चूसने लगी… अपने ही चूत के रस का स्वाद लेने लगी… फिर नीचे खिसकते हुए वो उसके बदन को चूमने लगी.. फिर

ठीक उसी की तरह उसकी चुचियों को चूसने लगी… फिर नीचे खिसकते हुए वो उसकी चूत के नज़दीक आई और उसकी चूत को फैला अपनी जीब अंदर घुसा दी.

वासू उसकी चूत को चूस्ते हुए ऐसे उसकी जांघों पर लेट गयी और उसकी टांग को उठा अपने उपर रख ली.. फिर अपनी जीब के साथ अपनी उंगली उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगी.. नेहा तो जैसे ही गयी.. आअज उसे फिर कई साल पहले का मज़ा आ रहा था.. उसने अपनी टाँगो को कैंची बना वासू के सिर को जाकड़ लिया और अपनी कमर हिलाने लगी.. वासूकी जीब अब नेहा की चूत के दाने कुरेदने लगी और चुलबुलाने

लगी….और तभी नेहा की चूत पानी छोड़ने लगी… वासू बड़े प्यार से अपनी सहेली के रस पीने लगी…. आख़िर थक कर दोनो अलग हुई और एक दूसरे के बगल मे लेट गयी.

“नेहा शायद में तुम्हारी एक ख्वाइश पूरी कर सकती हूँ” वासू ने थोड़ी देर बाद कहा., “में कुछ समझी नही..” नेहा ने अचंभे मे कहा.. पता नही कौन सी ख्वाइश की बात कर रही है..

“क्या तुम राज का लंड देखना चाहोगी?” वासू ने अपनी सहेली और देवरानी से पूछा. “कहीं तुम मज़ाक नही तो नही कर रही हो?” नेहा ने जवाब मे पूछा. “हां में तुम्हारी ये तमन्ना पूरी कर सकती हूँ” वासू ने जवाब दिया.

नेहा अपनी जेठानी की बात सुनकर चौंक पड़ी और सोचने लगी कि वो किस तरह उसे अपने ही बेटे का लंड दीखा सकती है… “दीदी तुम ये कैसे कर सकती हो?” नेहा ने चौंक कर पूछा. “में तुम्हे एक राज की बात बताती हूँ… पर तुम्हे एक वादा करना होगा कि तुम किसी को बताॉगी नही..” वसुंधरा ने अपनी देवरानी नेहा से कहा. “ठीक है दीदी में वादा करती हूँ” नेहा ने जवाब दिया. तब वासू ने नेहा को बताया कि किस तरह उसने राज का ईमेल आईडी हासिल कर लिया था और किस तरह उसने एक अलग नाम से आईडी बना अपने ही बेटे के लंड को वेब कॅम पर देखा है… बस अपनी देवरानी से होटेल मे चुदाई वाली बात छुपा गयी.. “अरे वाह दीदी तुम तो छुपी रुस्तम निकली.. ” नेहा ने खिलखिलते हुए कहा…

“यार मेरी भी कुछ तमाननाएँ है.. कुछ इच्छाए है” वासू ने जवाब दिया… “अछा अब ये बताओ क्या तुम इस खेल के लिए तय्यार हो?” “वो तो ठीक है दीदी.. लेकिन क्या राज इस बात के लिए तय्यार होगा..?” नेहा ने पूछा… “और क्या तुम्हे बुरा नही लगेगा अगर में तुम्हारे ही बेटे को कंप्यूटर पर मूठ मारता देखूँगी या फिर में कुछ उसके के लिए करूँ तो…?” “मुझे बुरा नही बल्कि खुशी होगी.. और तुम राज की तो चिंता मत करो.. तुम मर्दों की फ़ितरत को नही जानती. जहाँ उन्हे नई चूत की भनक लगी कि वो सूंघते हुए दौड़े चले आ जाते है.. में कोई ना कोई रास्ता निकाल कर तुम्हे खबर कर दूँगी” वासू ने अपनी देवरानी को आश्वासन दिलाया.. “ठीक है फिर जब तुम्हे कोई ऐतराज़ नही तो मैं तय्यार हूँ” नेहा ने कहा.

तब वासू ने अपनी देवरानी को गले लगा अलविदा कहा और अपने घर की ओर चल पड़ी.. रास्ते में वो ये सोच कर खुश थी कि उसके उसकी देवरानी और सहेली के साथ एक बार फिर संबंध शुरू हो गये थे… और अब उसने उसे इस बात का वादा भी कर दिया था कि वो किसी ना किसी तरह उसे राज का लंड दीखा देगी..

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