तीनो एक दूसरे को चूस चाट कर मज़ा देते रहे.. थोड़ी देर मे प्रीति और स्वीटी ने अपनी अपनी जगह बदल ली.. और इस बार प्रीति स्वीटी की चूत को चूसने लगी…. एक बार फिर तीनो ने अपनी जगह
बदली इस बार राज कुर्सी पर बैठ गया.. और प्रीति उसकी गोद मे चढ़ कर उसके लंड को अपनी चूत से लगा नीचे बैठ गयी.. फिर अपनी गंद को गोल गोल घूमा उसके लंड से खेलने लगी….. स्वीटी ने
अपना मुँह प्रीति की चुचियों पर रख दिया और उसके निपल को चूसने लगी…. तीनो के मुँह से सिसकारियाँ फुट रही थी…. प्रीति और उछल उछल कर उसके लंड को अंदर लेते हुए बड़बड़ाने
लगी… ऑश हाआँ ऑश हाआँ ऑश में तो गयी…..” प्रीति की चूत ने पानी छोड़ा था स्वीटी ने उसकी जगह ले ली और फिर राज की गोद मे उछलने लगी…. राज भी उत्तेजना मे नीचे से अपनी
कमर उठा अपने लंड को और अंदर तक घुसाने लगा….
“ओह हां राज और अंदर तक घुसा कर चोदो ऑश हाँ और अंदर तक …”अपनी चुचियों को मसल्ते हुए स्वीटी सिसकने लगी…. “स्वीटी और प्रीति मेरा छूटने वाला हैऔर आज में तुम दोनो को मेरा वीर्य स्नान कराउँगा” राज ने स्वीटी को अपनी गोद से उतारते हुए कहा… राज उठ कर खड़ा हो गया और प्रीति और स्वीटी नीचे बैठ कर उसके लंड को बारी बारी फिर चूसने लगी…. राज का लंड अकड़ने लगा था.. तभी स्वीटी ने अपना मुँह खोल दिया और प्रीति राज के लंड को स्वीटी के मुँह की ओर कर ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगी…
राज के लंड से वीर्य की ज़ोर की पिचकारी छूट कर स्वीटी के मुँह मे गीरी…फिर प्रीति ने राज के लंड को अपने मुँह के ओर किया… फिर से पिचकारी छूटी और प्रीति उसके वीर्य को निगलने की कोशिश करने
लगी….. जब राज के लंड से आखरी बूँद भी निचोड़ गयी तो दोनो बहने अपने अपने होंठ मिला कर राज के वीर्य का आदान प्रदान करने लगी… फिर प्रीति ने स्वीटी को अपने गले लगा लिया.. “मुझे नही पता था कि हम दोनो ये भी कर सकते थे” प्रीति ने कहा. “मुझे लगता है कि ये तो कुछ भी नही है.. हम तीनो आज की तारीख मे कुछ भी कर सकते है” स्वीटी ने राज की ओर देखा की तीनो हँसने लगे..और तीनो पलंग पर लुढ़क गये….. “तुम्हारा कहने का मतलब क्या है?” प्रीति ने पूछा.
“ये तुम राज से पूछा उसने ही तो हमे उकसाया था?” स्वीटी ने जवाब दिया… “ठीक है में बताता हूँ” राज ने कहा
और स्वीटी की ओर देखने लगा और सोचने लगा कि गीली चूत के बारे मे उसे स्वीटी के सामने बताना चाहिए की नही… प्रीति तुम्हे पता ही है कि में ऑनलाइन एक औरत से बात किया करता था…” राज ने कहा. “हां और शायद उसकी आईडी गीली चूत थी” प्रीति ने जवाब दिया… वहीं स्वीटी हैरत भरी नज़रों से अपने चचेरे भाई और बेहन को देख रही थी…. “वो क्या है कुछ दिन पहले में उससे एक होटेल के कमरे मे मिला था और उसकी जम कर चुदाई की थी” राज ने कहा. “ओह राज अब इतना भी मत फैंको…में विश्वास नही करती तुम्हारी बातों का” प्रीति ने कहा. “अरे विश्वास करो मेरा.. और यहाँ तक कि उसने अपनी गंद भी मरवाई थी” प्रीति हैरत से अपने भाई को देख रही थी और स्वीटी को तो जैसे लकवा मार गया था… वो बूत बनी राज की बात सुन रही थी… “एक काम करो तुम हमे खुल कर बताओ कि क्या हुआ…” स्वीटी ने कहा.. वो प्रीति को देख रही थी जिसे अपने भाई की बात पर विश्वास नही हो रहा था, “वैसे भी मुझे कुछ पता नही है कि तुम किस विषय पर बात कर रहे हो” तब राज ने स्वीटी को बताया कि किस तरह चॅट करते हुए उसकी मुलाकात नेट पर गीली चूत से हुई और किस तरह दोनो ने वेब कॅम पर एक दूसरे को अपना लंड और चूत दीखाई… किस तरह दोनो मूठ मारते हुए एक दूसरे का दिल बहलाते थे…फिर उसने बाते की किस तरह एक बार गीली चूत ने अपनी गंद मे उंगली घुसा उसे दीखया था… और फिर उसने एक दिन उसे होटेल के कमरे मे मिलने की पेशकेश की और किस तरह बिना उसकी शकल देखे उसने गीली चूत की चूत और गंद को
जम कर चोदा था..
प्रीति और स्वीटी अपने भाई की कहानी ध्यान से सुन रहे थे.. वो बीच बीच मे उससे सवाल भी कर रहे थे.. उन्हे अब भी विश्वास नही हो रहा था.. कि सही में ऐसा कुछ हुआ होगा… राज ने उन्हे बताया कि किस तरह गीली चूत ने पहले अपनी खुद की उंगलियाँ अपनी गंद के अंदर बाहर की थी और फिर बाद मे राज ने पहले अपनी उंगली से उसकी गंद के छेद को चौड़ाया था और फिर बाद मे अपना लंड उसकी गंद के छेद मे डाल उसकी गंद मारी थी… “तुमने कभी अपनी गंद मे लंड लिया है?” प्रीति ने स्वीटी से पूछा. “नही मेने तो नही लिया है.. और मुझे लगता है कि तुमने भी नही लिया है” स्वीटी ने जवाब दिया. “हां तुम सही कह रही हो” “क्या ये नया अनुभव करना चाहोगी?” स्वीटी ने फिर प्रीति से पूछा. “मेरी तो कुछ समझ मे नही आ रहा… राज के कहने के मुताबिक उस औरत को गंद मे लंड लेने मे काफ़ी मज़ा आया लेकिन मुझे तो ये सब गंदा लगता है” प्रीति ने जवाब दिया. “तुम क्या कहती हो?’ “सोच तो में भी वही रही हूँ… लेकिन कुछ नया करने के ख़याल से ही मेरी चूत फुदकने लगती है” स्वीटी ने कहा.
ने कहा… प्रीति उठ कर पलंग पर घुटनो के बल लेट गयी.. उसकी चुचियों नीचे टीकी हुई थी ठीक स्वीटी की तरह… अब उसकी गंद भी उसके भाई के तरफ हो गयी…
राज चुप चाप बैठा अपनी दोनो बहनो के बीच की बात सुन रहा था.. उसका लंड फिर से हरकत कर खड़ा होने लगा था….उसे लगने लगा था कि उसकी दोनो बहने उससे गंद ज़रूर मरवा के रहेंगी…
तभी राज को याद आया कि प्रीति ने कहा था कि वो तीनो कुछ भी कर सकते है.. “प्रीति तुमने ये बात क्यों कही कि हम तीनो कुछ कर भी सकते है” प्रीति को अचानक याद आया कि बात कहाँ से शुरू हुई थी और कहाँ पहुँच गयी… तब उसने बताया कि किस तरह उसने अपने ही डॅडी को किस तरह अपनी चुचियों के दर्शन करा बहकाया था और इस हद तक उत्तेजित कर दिया था कि उनका लंड पॅंट मे मचल तन कर खड़ा हो गया था… कि जब गुड नाइट के लिए वो उनसे गले लगी थी तो उन्होने अपने लंड को उसकी जांघों पर ज़ोर से दबाया था… इतना कहकर प्रीति राज और स्वीटी के चेहरों पर उनकी प्रतिक्रिया देखने लगी… “एक बताउ प्रीति तुम्हारे डॅडी यानी कि मेरे ताउजि देखने मे काफ़ी हॅंडसम है..” स्वीटी ने कहा, “और जब तुमने हमे ये बता ही दिया है.. तो क्या उनका लंड राज से बड़ा और मोटा है?” स्वीटी की बात सुन कर प्रीति हँसने लगी… “हे भगवान तुम भी ना प्रीति..मुझे तो लगा था कि तुम नाराज़ हो जाओगी या फिर मुझे छीनाल गंदी सब उपाधियाँ दे डालगी”
“यार इसमे कुछ सोचने जैसा ही नही… हम दोनो अपने भाई से चुदवा ही रहे है.. और अगर तुमने अपनी अदाओं से अपने बाप को उत्तेजित कर दिया तो इसमे बुराई ही क्या है.” स्वीटी ने जवाब दिया.
राज चुप चाप बैठा था की तभी प्रीति ने उससे पूछा की कहीं वो उससे खफा तो नही है. “नही लेकिन में भी कुछ सच बताना चाहता हूँ” राज ने शरमाते हुए कहा. “अब तुम ये मत कहना कि तुम मम्मी को चोद चुके हो?” प्रीति ने ज़ोर से कहा.
“नही ऐसा कुछ नही है” राज ने हस्ते हुए कहा.. और फिर उसने दोनो को वीडियो का पूरा किस्सा बताया कि किस तरह उसने प्रीति को नंगा देखना चाहा था और किस तरह उसकी मम्मी की नंगा देखा था और
बाद मे किस तरह उसने मम्मी की पॅंटी को अपने लंड पर लपेट मूठ मारी थी. “क्या तुम अपनी ही मम्मी को चोदना चाहोगे?” स्वीटी ने पूछा. “मुझे लगता है कि हां” राज ने जवाब दिया… शायद मेरा सोचना ग़लत है लेकिन जब में ख़यालों मे ये सब सोच ही चुका हूँ तो में कहूँगा कि अगर मुझे ये मौका मिला तो पीछे नही हटूँगा… “अब मेरी समझ मे आया कि कुछ भी कर सकते है का मतलब क्या था” स्वीटी ने कहा.. “मुझे लगता है कि जब में घर पहुँचुँगी तो मुझे भी अपने मम्मी पापा पर नज़र रखनी होगी.. कि क्या वो भी इतने ही खुले विचारों के है”
आज राज और प्रीति ने अपनी अपनी बातें एक दूसरे को बता दी थी.. और दोनो ही साथ मे स्वीटी भी अब सब कुछ जान चुकी थी…. कि तभी प्रीति ने आगे बढ़ कर राज के खड़े लंड को एक बार फिर पकड़
लिया… “ओह राज… इन सब बातों ने मेरी चूत मे एक बार फिर आग लगा दी है…… अपने लंड को मेरी चूत मे घुसा कर इसकी जाम कर धुनाई कर दो ना प्लीज़.” प्रीति ने पीठ के बल लेटते हुए कहा.
राज खुशी खुशी उसकी टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी चूत से लगा एक ही ज़ोर के धक्के मे अपना पूरा लंड घुसा दिया… स्वीटी प्रीति की छाती पर झुक गयी और उसकी चुचियों से खेलने लगी… राज का लंड अपनी बेहन की चूत के अंदर बाहर हो रहा था… स्वीटी ने अपने होंठ अपनी चचेरी बेहन के होठों पर रख दिए और उन्हे चूसने लगी.. राज अपनी दोनो बेहन को समलिंगन चुंबन लेते हुए देख रहा था और उत्तेजना मे ओर ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा…
तभी स्वीटी ने अपना चेहरा उठाया और राज से कहा की उसकी चूत को भी उसके लंड की ज़रूरत है.. राज ने अपना लंड प्रीति की चूत से निकाला और स्वीटी के पीछे आकर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा…. “ऑश राज क्यों तडपा रहे हो प्लीज़ घुसा दो ना अंदर ” स्वीटी
सिसकते हुए बोली. राज ने उसके दोनो कुल्हों को पकड़ा और और अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया… लंड को अंदर बाहर करते वक्त उसकी नज़र स्वीटी की गंद के छेद पर पड़ी… वो सोचने लगा कि क्या ये सही समय है उसकी गंद मे लंड पेलने का… दोनो ही गंद मे लंड लेने के लिए तय्यार थी.. उसना अपना मन पक्का कर लिया… राज ने अपना लंड स्वीटी की चूत से बाहर निकाला और अपने लंड को उसकी गंद के छेद पर घिसने लगा.. इससे उसके लंड पर लगे रस से स्वीटी की गंद का छेद चिकना हो गया फिर अपने लंड को वापस उसकी चूत मे घुसा दिया और अपनी उंगली उसकी गंद मे घुसा गोल गोल घुमाने लगा…. स्वीटी अपनी बेहन की चुचियाँ चूस रही थी… कि उसे राज की उंगली का एहसास अपनी गंद मे हुआ….और उसने प्रीति की चुचि चूसना बंद कर दिया… “रुक क्यों गयी… क्या हुआ?” प्रीति ने पूछा.
“वो मेरी गंद मे उंगली अंदर बाहर कर रहा है” स्वीटी ने जवाब दिया. प्रीति ने पाना चेहरा थोड़ा उठा कर देखा… राज की उंगली आराम से स्वीटी की गंद मे अंदर बाहर हो रही थी… “क्या अछा लग रहा है तुम्हे?” प्रीति ने स्वीटी से पूछा. “पता नही बड़ा अजीब सा लग रहा है लेकिन एहसास इतना बुरा भी नही है” स्वीटी
“राज मेरी भी गंद मे उंगली अंदर बाहर करो में भी देखना चाहती हूँ कि कैसा लगता है” प्रीति ने अपनी गंद को राज के और थोड़ा नज़दीक करते हुए कहा. राज ने अपने हाथों को प्रीति के पेट से लगाते हुए उसे और अपने पास खींचा जिससे उसके कूल्हे स्वीटी के कुल्हों से सॅट गये…. और उसने
अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसा दी… और साथ ही स्वीटी की गंद मे उंगली करता रहा. फिर उसने प्रीति की चूत से उंगली निकाल उसकी गंद के छेद मे धीरे धीरे घुसाने लगा… अब वो स्वीटी की
चूत मे अपना लंड घुसाए उसकी गंद मे उंगली कर रहा था और प्रीति की गंद मे दूसरे हाथ से उंगली कर रहा था…
राज ने तभी अपना लंड स्वीटी की चूत से बाहर निकाल उसे अपनी बेहन की चूत मे घुसा धक्के मारने लगा.. उसका लंड अपने पूरे जोश मे था.. और वो उसकी गंद मे उंगली करते हुए ज़ोर ज़ोर के धक्के मारने लगा…
प्रीति भी पूरे जोश मे आ गयी थी.. उसने नीचे से अपना हाथ पीछे किया और अपनी दो उंगलियाँ राज के लंड के साथ अपनी चूत मे घुसा दी.. और तेज़ी से आगे पीछे होते हुए सिसकने लगी… “ऑश राज हाँ चोदो मुझे और ज़ोर ज़ोर से चोदो ओ हां ऐसे ही कस कस के चोदो” प्रीति की सिसकियाँ सुन राज तो जैसे पागल हो गया वो अपनी उंगलियों को और उसकी गंद के अंदर घुसाते हुए उछल उछल कर ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा.. उसके लंड की नसों मे खून का बहाव तेज होता जा रहा था….
“ऑश राज हां और ज़ोर ज़ोर से ऑश हाआँ ऑश में तो गयी…” सिसकते हुए प्रीति की चूत ने पानी छोड़ दिया. प्रीति झाड़ तक कर निढाल और ढीली पड़ गयी… राज का लंड अभी भी तना हुआ था.. उसने अपना लंड प्रीति की चूत से बाहर निकाल लिया.. और स्वीटी के पीछे आ गया.. “अब तुम्हारी बारी है” राज ने अपपने लंड को स्वीटी की चूत पर रगड़ते हुए कहा. राज ने उसकी चूत को अपने हाथों से थोड़ा फैलाया और अपने लंड को एक ही धक्के मे उसकी चूत मे पूरा का पूरा घुसा दिया…. “ओह मर गयी..” स्वीटी चीख पड़ी. स्वीटी की चीख सुन राज ने अपना लंड थोड़ा बाहर खींच लिया तो स्वीटी को थोड़ी राहट पड़ी लेकिन राज तो आज पूरे अपने जोश मे था उसने ज़ोर का धक्का मार फिर अपने लंड को उसकी चूत मे पेल दिया.. और धक्के लगाने लगा…. स्वीटी को भी अब मज़ा आने लगा.. वो भी अपने चूतड़ आगे पीछे कर उसके धक्कों का साथ देने लगी…. राज अब उसकी चूत मे लंड पेलते हुए कभी अपने लंड को बाहर निकाल उसके पर लगे रस को उसकी गंद के छेद पर घिसता और फिर उसकी चूत मे लंड घुसा धक्के लगाने लगता… स्वीटी की गंद मे एक अजीब सी उथल पुथल मचने लगी थी… वो और तेज़ी से आगे पीछे हो उसके लंड को अपनी चूत मे ले रही थी….राज ने फिर अपनी उंगलियाँ उसकी गंद के छेद मे घुसा दी और एक बार वो उसके दोनो छेद को अपनी उंगली और लंड से चोदने लगा….
प्रीति की उत्तेजना अब शांत हो गयी थी और वो दीवान पर बैठी राज और स्वीटी को देख रही थी साथ ही राज को उकसाती भी जा रही थी… राज प्रीति के उकसाने से और तेज़ी से उसके दोनो छेदों को चोद रहा
था कि तभी उठ कर दोनो के पास आई… और बड़े प्यार से स्वीटी के छूतदों को मसल्ने लगी..
“लाओ मुइझहे इसकी गंद मे उंगली करने दो” प्रीति ने राज से कहा… राज ने अपनी उंगलियाँ स्वीटी की गंद से निकाल ली… वहीं प्रीति ने पहले अपनी दो उंगलियाँ राज के लंड के साथ स्वीटी की चूत मे घुसा
दी.. जब उसकी उंगलियाँ अछी तरह से चूत के रस से भीग गयी तो उसने उंगलियाँ निकाल उन्हे स्वीटी की गंद मे घुसा दी और अंदर बाहर करने लगी… स्वीटी के बदन मे तो जैसे हलचल मच गयी.. वो और तेज़ी से आगे पीछे हो प्रीति की उंगली अपनी गंद मे और राज का लंड अपनी चूत मे और अंदर तक लेने लगी.. स्वीटी की चूत मे अपना लंड पेलते हुए राज ने अपनी बेहन की दोनो चुचियो को पकड़ लिया और मसल्ने लगा…. और साथ ही उसके निपल पर चिकोत काटने लगा.. प्रीति को भी अब मज़ा आने लगा था और वो और तेज़ी से अपनी उंगली स्वीटी की गंद के अंदर बाहर करने लगी… और उसकी जिगयसा बढ़ने लगी कि क्या वो राज के भारी भरकम लंड को अपनी गंद मे ले पाएगी… राज प्रीति की बदन मे बढ़ती उत्तेजना को महसूस कर रहा था.. और वो और ज़ोर ज़ोर से स्वीटी को चोदने लगा…तभी उसने महसूस किया कि स्वीटी की चूत ने उसके लंड को अपनी मांसपेशियों से जाकड़ लिया है और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी… जब स्वीटी थोड़ा संभली तो उसने उसे ज़मीन पर पीठ के बल लीटा दिया और उसकी टाँगो को पूरा फैला दिया.प्रीति ने उसे सहारा दिया और पलंग पर लेटने मे उसकी मदद की.. राज अपने लंड को उसकी चूत पर कर मसल्ने लगा. प्रीति थोड़ी देर तक राज को अपना लंड मसल्ते देखते रही फिर झुक कर उसने उसके लंड को अपने मुँह मे ले लिया और चूसने लगी…
जब राज का लंड और अकड़ने लगा तो उसने उसके लंड को बाहर निकाल दिया और राज ने वीर्य की पिचकारी स्वीटी की चूत और पेट पर छोड़ दी. जब सारा वीर्य नीचूड़ कर निकल गया तो उसने अपने लंड को स्वीटी के मुँह पर रखा जिसे उसने मुँह खोल कर अंदर लिया और चूसने लगे…
एक दिन शाम को वसुंधरा अपनी देवरानी नेहा के साथ शाम की चाइ पी रही थी और आपस मे बातें कर रही थी… “वासू बहोत दीनो से में तुमसे कुछ बात करना चाहती थी” नेहा ने अपनी जेठानी से कहा. “अछा? तो कहा क्यों नही अभी तक..” वासू ने नेहा के चेहरे की ओर देखते हुए जवाब दिया. “पता नही तुम मेरी बात सुनकर क्या सोचेगी.. पता है उस दिन जब राज और प्रीति मेरे यहाँ रात को रुके थे… उस रात चारों बच्चे किचन मे बर्तन सॉफ कर रहे थे.. कि में किचन मे एक कोल्ड ड्रिंक लेने गयी तो मेने तुम्हारे बेटे का खड़ा लंड उसकी शॉर्ट्स के उपर से देखा….. में ये बात नही कहती लेकिन मुझे लगता है कि राज का लंड बहोत ही मोटा और लंबा होगा…और में सोच रही थी कि क्या तुम्हे इस बात का एहसास है की तुम्हारे बेटे का लंड कितना मोटा और लंबा है” नेहा ने कहा. नेहा की बात सुनकर वासू ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी.. “अरे इस मे हैरान होने वाली कोई बात नही है.. मेने भी इस बात को महसूस किया है” वासू ने हंसते हुए कहा. “शुक्रा है भगवान का कि में अकेली ही इस बात को लेकर परेशान नही हूँ… पता है तुम्हे जब भी में उसके लंड के बारे मे सोचती हू तो मुझे ना जाने कैसे कैसे ख़याल आने लगते है.. कभी कभी तो मन करता है कि आगे बढ़ कर उसके खड़े लंड को अपने हाथो से पकड़ लूँ… मेरा कहने का मतलब ये नही है कि मोहन का लंड का छोटा या पतला है… पर उसका लंड पकड़ एक अजीब ही आनंद आएगा है ना?” नेहा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा.
नेहा की बात सुनकर वासू की चूत मे चईटियाँ रेंगने लगी…. उसने खुद ने तो पकड़ने के अलावा सभी कुछ तो कर लिया था उसके साथ.. “शायद तुम ठीक कह रही हो” वासू ने जवाब दिया.

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