थोड़ी ही देर मे वासू को भी मज़ा आने लगा.. वो अपनी कमर को आगे पीछे कर राज के धक्कों का साथ देने लगी… राज ने उसके दोनो कुल्हों को पकड़ लिया और धक्के लगाने लगा था… वासू ने अब अपनी दो उंगलियाँ अपनी चूत मे डाल दी और राज के धक्कों का साथ देते हुए उंगलियों को अंदर बाहर करने लगी… ‘हां राज ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से अंदर घुसाओ…ओह हां मारो मेरी गंद को ज़ोर ज़ोर से ओ हां”
राज का लंड और अकड़ने लगा… और नसों मे उबाल तेज हो गया… राज और कस कस के धक्के लगाकर उसने अपने वीर्य से अपनी ही मा की गंद भर दी…. राज अपने लंड का पानी गीरा अपने लंड को बाहर निकालना चाहता था लेकिन गीली चूत अपनी कमर को और जोरों से आगे पीछे कर उसके लंड पर धक्के मारने लगी.. साथ ही वो तेज़ी से अपनी उंगलियों को चूत के अंदर बाहर कर रही थी.. थोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया….जब उसका शरीर ढीला पड़ गया तो राज ने अपना लंड बाहर निकाला और पलंग पर लुढ़क गया… और गीली चूत खिसक कर चादर की दूसरी ओर चली गयी…
“राज मुझे लगता है कि तुम्हारे जाने का वक्त हो गया है” गीली चूत ने राज से कहा. “हां.. वैसे बहोत बहोत शुक्रिया… सही मे मज़ा आ गया ” राज ने जवाब दिया. “शुक्रिया तो मुझे तुम्हारा करना चाहिए… सही मे बहोत ही मस्त लंड है तुम्हारा… इससे पहले कि तुम जाओ में तुम्हे चूमना चाहती हूं” गीली चूत ने कहा. दोनो चादर की एक दूसरी ओर इस तरह बैठ गये कि उनके मुँह आमने सामने थे… दोनो के मुँह की भाप चादर को गीला कर रही थी.. लेकिन इस की परवाह ना करते हुए दोनो ने एक दूसरे के होठों को अपने मुँह मे ले लिया…. चादर बीच मे होने की वजह से थोड़ी तकलीफ़ तो ज़रूर हुई लेकिन फिर भी दोनो को मज़ा आया… “क्या हम फिर कभी इस तरह मिल सकते है?” राज ने अपने कपड़े पहन दरवाज़े की ओर बढ़ते हुए पूछा. “हां ज़रूर हम कोई रास्ता निकाल लेंगे.. और शायद में तुमसे अपना परिचय भी करवा दूँ.. बस मुझे थोड़ा वक्त दो” वासू ने जवाब दिया. “तब तो और मज़ा आ जाएगा” राज ने खुशी खुशी कहा… “हां और अब तुम घर जाओ और मज़े करो… लेकिन ज़्यादा मज़ा मत करना” वासू ने हंसते हुए जवाब दिया…. राज भी मुस्कुराते हुए होटेल के कमरे से बाहर निकला और घर कीओर जाते हुए सोचने लगा…. गीली चूत की कसी हुई गंद उसके दिमाग़ मे बस सी गयी थी.. वो सोच रहा था क्या उसकी बेहन प्रीति की गंद भी इतनी ही कसी हुई होगी.. या फिर उसकी दोनो चचेरी बहनो की गंद
कैसी होगी….
वसुंधरा अपने घर पहुँची और अपने फ्रेश होने के बाद घर के काम काज़ मे जुट गयी.. रात को सभी खाने की टेबल पर इकट्ठा हुए तो वो तीर्चि नज़रों से अपने बेटे को देखने लगी.. उसके साथ बीताए पल उसके दिमाग़ मे घूमने लगे..अपनी ही सोच से वो शर्मा गयी और उसकी चूत हरकत करने लगी… वो शरमाते हुए अपने कमरे आ गयी और सोचने लगी कि वो किस तरह अपने बेटे को बताए कि जिस गीली चूत से वो होटेल के कमरे मे मिला था वो और कोई नही उसकी अपनी मा है..
राज और प्रीति आने वाले दीनो मे एकांत का इंतेज़ार करने लगे… कि कब उन्हे चुदाई करने का मौका मिले.. शनिवार के दिन स्वीटी का फोन आया और उसने उन्हे अपने साथ बाहर चलने को कहा.. तो दोनो खुशी खुशी तय्यार हो गये. और रात को उसी के घर पर रुकने का भी प्रोग्राम बना लिया..
तीनो ने मिलकर रात मे काफ़ी मस्ती की… खूब घूमे फिरे.. पब मे जाकर खूब नाचे और जब सुबह होने को आई तो तीनो थक कर स्वीटी के घर आ गये…. तीनो हॉल मे आ गये और स्वीटी ने टीवी पर म्यूज़िक वीडियो की सीडी लगा दी… और थोड़ी ही देर मे तीनो एक दूसरे को चूमने चाटने लगे… “तुम दोनो को में बता नही सकती कि मेरी चूत मे कितनी आग लगी हुई है” प्रीति ने अपने भाई और अपनी चचेरी बेहन से कहा… “मुझे बार बार अपनी चूत की गर्मी अपने ही हाथों से शांत
करनी पड़ती थी.. क्या करती जब भी रात मे में राज के कमरे मे चुदाई के लिए घुसना चाहती तो देखती थी कि डॅडी पेशाब के लिए उठे हुए है..मेरी तो हिम्मत ही नही हुई”
“ओहंम कितने दुख की बात है” कहकर स्वीटी ने अपनी बेहन को अपने पास खींचा और उसके होठों को अपने होठों से भींच चूसने लगी… “फिर तो मुझे लगता है की तुम्हे इसी वक्त राज से चुदवा लेना चाहिए… है ना?” ऐसा कहकर वो राज की और झुकी जो प्रीति के बगल मे बैठा था और उसकी जीन्स खींच कर उतारने लगी… “अगर मेरा चोदने का मूड ना हो तो?” राज ने मुकुराते हुए कहा.
“बस बस रहने दो.. ज़्यादा नखरे मत दीखाओ समझे ना” स्वीटी ने हंसते हुए कहा और उसके खुले लंड को अपने हाथो से पकड़ लिया… प्रीति के पैरों पर से झुकते हुए उसने राज के लंड को अपने मुँह मे ले लिया और चूसने लगी…
प्रीति अपना हाथ स्वीटी के कुल्हों पर फिराने लगी.. उसकी टाँगो को सहलाते हुए वो उसकी चूत को उसकी पॅंटी के उपर से कुरेदने लगी…. और अपना मुँह राज की ओर कर दिया… राज उसकी चुचियों को
पकड़ते हुए उसके होठों को चूसने लगा… प्रीति ने स्वीटी के टॉप को पकड़ उपर उठाना चाहा तो स्वीटी ने राज का लंड अपने मुँह से बाहर निकाल दिया जिससे प्रीति उसके टॉप को उतार सके…. और तभी राज ने प्रीति के टॉप को भी उतार दिया… स्वीटी फिर से राज का लंड चूसने लगी और राज ने अपना हाथ प्रीति की टाँगो के बीच उसकी चूत पर रख दिया… प्रीति ने स्वीटी की चूत को कुरेदते हुए पॅंटी के बगल से अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसा दी…उसकी बिना बालों की चूत प्रीति को
मज़ा दे रही थी.. वो अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगी…. वहीं राज प्रीति के निपल को भींच रहा था काट रहा था.. उसकी चूत मे और जोरों की खुजली मचने लगी.. उसे अब राज के लंड की चाहत होने
लगी…
“स्वीटी मुझे से अब सहन नही हो रहा प्लीज़ थोड़ा खिसक जाओ जिससे में इस के लंड पर चढ़ इसके लंड को अपनी चूत मे ले सकूँ” प्रीति ने स्वीटी की चूत मे उंगली अंदर बाहर करते हुए कहा. “नही एक काम करते है राज को नीचे ज़मीन पर लीटा देते है फिर तुम इसके लंड पर चढ़ जाना और में अपनी चूत इसके मुँह पर रख चढ़ जाउन्गि इससे मेरा भी काम हो जाएगा” स्वीटी ने राज के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल कर कहा.. राज दीवान पर से खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारने लगा… नंगा हो कर वो लेट गया…. प्रीति झुक कर उसके लंड को चूसने लगी… फिर खड़ी हो कर अपनी दोनो टाँगे उसके बगल मे रख वो उसके लंड को पकड़ अपनी चूत पर लगा…नीचे बैठती गयी… राज का लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया…
स्वीटी खड़ी हो कर राज के चेहरे पर खड़ी हो गयी और किसी रंडी की तरह अपनी कमर मटका अपने कपड़े उतारने लगी.. पहले उसने अपनी स्कर्ट उतारी और अपनी लाल रंग की पॅंटी के उपर से अपनी चूत को
मसल्ने लगी… प्रीति उछल उछल कर राज के लंड को अपनी चूत मे ले रही थी… थोड़ी देर इसी तरह नाचने के बाद स्वीटी धीरे धीरे अपनी पॅंटी को नीचे खिसकाने लगी… राज की आँखे उसी पर टीकी हुई थी.. उसकी बिना बालों की सपाट चूत देख उसके मुँह मे पानी आ गया और वो उसे चूसने और चाटने को मचल उठा… “अरे तुम्हारी चूत पर तो एक भी बाल नही है.. तुम्हारी बिना बालों
की चूत तो बहोत सुन्दर है ठीक मेरी बेहन की तरह” राज बोल पड़ा…
“ये सब तुम्हारी बेहन का ही कमाल है.. उस दिन जब तुम मेरी बेहन शमा को चोद रहे थे तब तुम्हारी बेहन ने मेरी झांते सॉफ की थी…” स्वीटी ने जवाब दिया… राज अपनी उंगलियों को उसकी चूत पर फिराने लगा था… “क्या उस दिन तुमने सही मे शमा को चोदा था..?” प्रीति ने पूछा. “हां” राज ने जवाब दिया… प्रीति के चेहरे पर आए नागावरी के भाव उससे छिपे ना रह सके.. “ओह में ही पागल थी.. मुझे समझ जाना चाहिए था.. मेने तो सोचा था कि वो सिर्फ़ तुम्हारे लिए झदेगी…लेकिन तुम दोनो चुदाई भी कर सकते हो ये मुझे समझ लेना चाहिए था” प्रीति ने उछलते हुए कहा.
“अब ये बातें फिर कभी करेंगे.. इस समय मेरी चूत को तुम्हारी जीब की ज़रूरत है राज” स्वीटी ने अपनी चूत को उसके मुँह पर टीकाते हुए कहा. राज ने अपना मुँह खोला और अपनी जीब को उसकी चूत पर फिरा चाटने लगा…. प्रीति ने आगे से उसकी चुचियों को पकड़ लिया और राज के लंड पर उछलते हुए उन्हे मसल्ने लगी…
स्वीटी आगे बढ़ कर प्रीति के होठों को छूने लगी.. फिर धीरे से बोली.. “अपने भाई के इतना ना निचोड़ लेना कि मेरे लिए कुछ बचे ही नही… मेरी भी चूत इसके मोटे लंड के लिए तरस रही है.”
“अरे मेरी जान बाद मे क्यों तुम अभी मेरे भाई के लंड को अभी अपनी चूत मे ले सकती हो…. तुम दोनो को चुदाई करते देख मुझे खुशी ही होगी…” प्रीति राज के लंड पर से खड़ी होती हुई बोली.
स्वीटी राज के शरीर पर नीचे खिसकने लगी.. और जब वो ठीक उस जगह पर आ गयी जहाँ थोड़ी देर पहले प्रीति बैठी थी तो वो थोड़ा सा उपर उठी और राज के लंड को अपनी चूत के मुँह से लगा लिया और ज़ोर से उछलते हुए नीचे बैठी.. एक ही झटके मे राज का लंड उसकी चूत की जड़ों तक घुस गया…
थोड़ी देर उछल उछल कर राज के लंड को अपनी चूत मे लेने के बाद स्वीटी ने कहा कि वो ज़मीन पर लेट राज के बदन को अपने बदन पर गिरता महसूस करना चाहती है…एक बार फिर दोनो अलग हुए और स्वीटी जब सीधी लेट गयी तो राज उसकी टाँगों के बीच आ गया और अपने लंड को फिर उसकी चूत मे घुसा धक्के मारने लगा… प्रीति राज के पीछे आ गयी और राज के लंड के साथ साथ उसने अपनी दो उंगलियाँ स्वीटी की चूत मे दे दी… अब राज के लंड के साथ उसकी उंगलिया भी अंदर बाहर होने लगी…
“ओह राज हाआह चोदो मुझे और ज़ोर ज़ोर से चोदो… ओह हां…श और ज़ोर से” स्वीटी अपनी कमर उपर को उछाल सिसक रही थी… राज और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और उसके लंड की नसें तनने लगी… “ऑश स्वीटी तुम्हारी चूत कितनी अछी है.. ओह मेरा छूटने वाला है”
“राज तुम अपना पानी मेरी चूत के उपर छोड़ दो और में चाहती हूँ की प्रीति इसे चाट कर सॉफ करे” स्वीटी ने राज से कहा. राज ने तीन चार ज़ोर के धक्के अपनी चचेरी बेहन की चूत मे लगाए और फिर अपने लंड को बाहर निकाल उसकी चूत पर मसल्ने लगा…. उसके लंड से वीर्य की फौहर छूट स्वीटी की चूत और पेट को भिगोने लगी…
“आओ प्रीति तुम्हारा नाश्ता तय्यार है” स्वीटी ने कहा.. राज उसके पैरों के बीच से हट गया और उसकी जगन प्रीति ने ले ली…. उसने स्वीटी की टाँगो को और फैलाया और अपनी जीब उसकी चूत पर फिरा राज
के वीर्य को चाट ने लगी जैसे की कोई बिल्ली दूध की मलाई चाट रही हो… राज अपनी बेहन के पीछे आ गया और चूत मे अपनी उंगली डाल अंदर बाहर करने लगा….साथ ही उसकी चूत की पंखुड़ियों को
मसल्ने लगा… “प्रीति तुम अपना नाश्ता पूरा कर लो फिर में तुम्हारी चूत की मलाई चाट अपना नाश्ता पूरा करूँगा..” राज ने कहा. स्वीटी की चूत पर बिखरी सारी मलाई चाटने के बाद प्रीति अपनी जीब उसकी चूत मे घुसा गोल गोल घूमाने लगी..जैसे की अंदर के रस को चाट रही हो… स्वीटी की चूत इस प्रहार से थिरकने लगी..
स्वीटी ने उसके सिर को पकड़ अपनी चूत पर जोरों से दबा दिया…और उसकी चूत ने अमृत की बरसात प्रीति की मुँह मे कर दी…. प्रीति करवट बदल कर वहीं लेट गयी जिससे की राज अपना नाश्ता कर
सके… राज ने उसकी पैरों को फैलाया और झुक कर उसकी चूत को अपने मुँह मे भर लिया… और जीब से जोरों से चाटने लगा और चूसने लगा… कुछ ही पलों मे प्रीति की चूत से रस की धारा बहने लगी…
थोड़ी देर सुसताने के बाद तीनो अपनी अपनी जगह जाकर पलंग पर गिर सो गये… सुबह सबसे पहले प्रीति की आँख खुली.. उसे पेशाब जाने की इच्छा हो रही थी.. वो चुप चाप बिना आवाज़ किए टोलीलेट की ओर बढ़ी…जैसे ही वो अपने चाचा की स्टडी रूम से गुज़री तो देख कर चौंक पड़ी कि उसके चाचा कंप्यूटर के सामने बैठे थे… प्रीति ने तिरछी नज़रों से कंप्यूटर स्क्रीन पर अपनी नज़रे डाली तो
उसने देखा की चाचा पॉर्न तस्वीरें देख रहे थे और साथ ही अपने लंड को मसल रहे थे… और साथ ही कुछ लिखते जा रहे थे शायद वो अपनी उस कहानी को पूरा कर रहे थे जो प्रीति ने थोड़े दिन
पहले पढ़ी थी.. वो और आगे देखना चाहती थी पर पेशाब की इच्छा की वजह से वो रुकी नही और बाथरूम की ओर बढ़ गयी.
प्रीति ने टाय्लेट की फ्लश खींची और वापस बाहर आ गयी.. वो जानती थी कि फ्लश की आवाज़ से उसके चाचा जान जाएँगे की कोई बाहर है.. और जैसे ही वो वापस स्टडी रूम से गुज़री तो उसका अंदाज़ा
सही था.. चाचा ने कंप्यूटर से पॉर्न तस्वीरें बंद कर दी थी और जैसे वो देखना चाहते थे कि बाहर कौन है… “ओह्ह प्रीति.. है कैसी हो” प्रीति के बदन को नज़रों से घूरते हुए बोले…
“हाई मोहन चाचा.. आप इतनी सुबह उठ कर क्या कर रहे है?” प्रीति ने पूछा.. और स्टडी रूम के अंदर दाखिल हो गयी…और अपनी नज़रें अपने चचे के खड़े लंड पर गढ़ा दी.. “कुछ ख़ास नही बस अगले हफ्ते की कुछ टायारी कर रहा था..” मोहन ने जवाब दिया और उसकी नज़रे प्रीति की भारी चुचियों से लेकर उसकी नंगी टाँगो तक घूम गयी.. “आप भी क्या चाचा में तो समझी थी कितनी सुबह आप नेट पर कुछ सर्फ कर रहे होंगे…” प्रीति ने हंसते हुए जवाब दिया.. उसकी नज़रे अब भी चाचा के लंड पर गढ़ी हुई थी… “कोई बात नही आप अपना काम करिए और में चली फिर से सोने अपने कमरे मे” कहकर प्रीति कमरे से बाहर आ गयी. मोहन अचंभित नज़र से प्रीति को कमरे से जाते देखता रहा.. एक तो पहले ही से वो कंप्यूटर पर नंगी तस्वीरे देखते हुए उत्तेजित था और उसपर से उसकी भतीजी का जानलेवा हुस्न… वो पागल सा हो गया.. उसके आने से पहले वो अपनी कहानी लीखने मे मस्त था और साथ ही काफ़ी उत्तेजित हो गया था…
मोहन को विश्वास हो गया कि उसकी भतीजी वापस अपने कमरे मे चली गयी है तो वापस अपने काम मे जुट गया.. वहीं प्रीति अपने कमरे मे आकर सोचने लगी कि क्या उसे वो कहानी जो उसने पूरी की थी अपने चाचा को भेजनी चाहिए कि नही… रह रह कर उसके चाचा का ढीली पॅंट मे छुपा तगड़ा लंड उसकी आँखों के सामने आ जाता.
रविवार को बलदेव और वसुंधरा ने अपने कुछ दोस्तों से मिलने का मन बनाया तो राज और प्रीति खुशी के मारे उछल पड़े.. उन्हे कई दीनो से मौका नही मिला था और आज वो इस मौके का भरपूर फ़ायदा उठना चाहते थे…
राज पर कुर्सी पर अपनी पॅंट नीचे खिसकाये… बैठा था और प्रीति उसकी टाँगो के बीच बैठी उसके लंड को मुँह मे ले चूस रही थी की तभी डोर बैल बजी.. राज और प्रीति उछल पड़े…लेकिन दोनो ने
बेल की ओर ध्यान नही दिया.. प्रीति अपने काम मे लगी रही की तभी उन्हे स्वीटी के चिल्लाने की बाहर से आवाज़ सुनाई पड़ी… “राज प्रीति.. तुम दोनो घर मे हो कि नही?” स्वीटी की आवास सुन कर प्रीति ने दरवाज़ा खोल दिया और स्वीटी उन दोनो के साथ उनके कमरे मे आ गयी… कमरे मे घुसते ही स्वीटी ने देखा कि राज नंगा कुर्सी पर बैठा था और उसका खड़ा लंड आसमान की ओर मुँह किए था…. राज के खड़े लंड को देख स्वीटी की चूत चोने लगी… स्वीटी राज की टाँगो के बीच बैठ गयी और राज के खड़े लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी.. प्रीति भी कहाँ पीछे रहने वाली
थी.. वो भी स्वीटी के बगल मे बैठ गयी.. और अब दोनो बहने बारी बारी अपने भाई का लंड चूसने लगी… तभी प्रीति स्वीटी के कपड़े उतारने लगी.. थोड़ी ही देर में तीनो बिल्कुल नंगे हो गये… इस बार प्रीति कुर्सी पर बैठ गयी और राज उसके बगल मे आ कर खड़ा हो गया… प्रीति ने उसके लंड को पकड़ अपनी ओर खींचा और मुँह मे ले चूसने लगी.. और स्वीटी ने प्रीति की टांगो को फैलाते हुए अपनी जीब उसकी सपाट चूत पर रख दी…

