परिवार हो तो ऐसा – Update 14 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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प्रीति अपने पिता के नज़दीक गयी और उन्हे अपनी बाहों के घेरे मे ले गुड नाइट कहा….इसी बीच उसने अपनी चुचियों का भार उनकी छाती पर डाल दिया… देव तो अपनी बेटी के इस अचानक व्यवहार से घबरा सा गया उसे पता था कि जब प्रीति ने उसे बाहों मे लिया था तो ज़रूर उसका खड़ा लंड उसकी जांघों से टकराया होगा… उसने अपने आप को प्रीति से अलग किया और उसे गुड नाइट कह अपने कमरे मे आ गया. राज ने अपनी गाड़ी होटेल के बाहर रोकी और थोड़ी देर सोचने लगा कि उसे आगे बढ़ कर होटेल के अंदर जाना चाहिए या फिर वापस लौट जाना चाहिए… पर उसने अपना मन पक्का किया और गाड़ी से उत्तर होटेल के अंदर चला गया..

वो कमरे के बाहर पहुँचा तो देखा कि कमरे का दरवाज़ा खुला था.. वो कमरा खोल अंदर आ गया.. कमरे के अंदर पलंग के बीचों बीच एक चादर बँधी हुई थी… इस तरह पलंग दो हिस्सों मे बँट गया था…उसने आवाज़ देकर ये जानना चाहा कि क्या गीली चूत कमरे मे ही है.

“हां में यही हूँ राज और तुम्हारे इंतेज़ार मे मेरी चूत गीली हो रही है” वासू ने भारी आवाज़ बना कहा… उसने जान बुझ कर अपनी आवाज़ बदली हुई थी… जिससे कि राज उसकी आवाज़ को पहचान ना पाए… वासू ने राज को कपड़े उतार नंगा हो जाने को कहा और कहा कि वो अपने लंड को चादर के दूरी और रख दबाया… राज ने वैसे ही किया… तभी दो हाथों ने उसके चादर से लिपटे लंड को अपने हाथों मे पकड़ लिया…

वासू चादर की दूसरी ओर खड़ी अपने ही हाथ का चादर से लिपटा लंड पकड़ मसल्ने लगी.. अपने हाथों से उसकी मोटाई और लंबाई मापने लगी.. जिस लंड को उसने कई बार कंप्यूटर की स्क्रीन पर देखा था आज वही लंड उसके सामने उसके हाथो मे था… कितने सपने देखे थे उसने इस लंड के…वो राज से कह रही थी कि कितना शानदार और मर्दाना लंड था उसका…”तुम्हे पता नही में तुम्हारी सपाट और चिकनी चूत का कितना दीवाना हूँ.. में कितने दीनो से इसे चूसने के लिए मरा जा रहा

हूँ” राज ने जवाब दिया.

“और आज में भी चाहती हूँ कि तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ दे” गीली चूत ने उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ते हुए कहा.. “लेकिन पहले में देखना चाहूँगी कि में इस लंबे लंड को

कितना अपने मुँह मे ले चूस सकती हूँ” राज ने देखा कि उन दोनो के बीच बँधी चादर थोड़ी उठी और उसका लंड दूसरी ओर खो गया.. तभी उसे एक गरम जीब का एहसास अपने लंड पर हुआ… और जैसे की किसी गरम भट्टी ने उसके लंड को जाकड़ लिया हो.. गीली चूत का गरम मुँह उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगा था… उसे विश्वास नही हो रहा था कि कभी ऐसा भी हो सकता है.. आज एक अंजान औरत एक अंजान होटेल के कमरे मे उसका लंड चूस रही थी… और वो उसका चेहरा तक नही देख पा रहा था.. ना ही उसके बदन की झलक ले पा रहा था.. उत्तेजना मे उसका लंड और अकड़ने आगा.. गीली चूत उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूस रही थी.. हर बार वो उसके लंड को और ज़्यादा गले तक लेने की कोशिश करने लगी.. राज की सिसकारियाँ बढ़ने लगी…

वासू को भी अपने बेटे का लंड चूसने मे बहोत मज़ा आ रहा था.. उसे भी यकीन नही हो रहा था कि मज़ाक मज़ाक मे बात इतनी आगे बढ़ जाएगी.. वो और ज़ोर ज़ोर से अपने बेटे का लंड चूसने लगी. उसे और अपने गले तक लेने लगी… “में तुम्हारी चूत चूसना चाहता हूँ” वासू को अपने बेटे की आवाज़ दूसरी ओर से सुनाई पड़ी.. उसने उससे कहा कि वो चादर के नीचे पलंग पर उसके लिए जगह बनाए…फिर उसने अपनी टाँगे पलंग पर चादर के नीचे से खिसका दी…अब चादर उसके पेट पर ठहर गयी.. उसका कमर के नीचे का हिस्सा अब राज की तरफ था… वासू ने महसूस किया कि दो हाथ उसकी टाँगो को पकड़ फैला रहे है तो उसने अपनी टाँगे पूरी तरह चौड़ी कर दी….. तभी गीली और गरम जीब उसकी चूत पर चलने लगी… उसकी चूत को चाटने लगी.

वासू के बदन मे एक मस्ती की लहर दौड़ गयी. उत्तेजना मे वो अपनी चुचियों को पकड़ मसल्ने लगी.. उसके ख़यालो मे उसके बेटे का चेहरा आने लगा… और राज हक़ीकत से अंजन उसकी चूत को ज़ोर ज़ोर

से चूसने लगा चाटने लगा…वासू सिसकने लगी.. “ओ हां चूसो और ज़ोर से चूसो ऑश हाँ खा जा मेरी चूत को में कब से तड़प रही थी तुम्हारी जीब के स्पर्श को ऑश”

राज और ज़ोर ज़ोर से अपनी जीब उसकी चूत मे चलाने लगा… अपना पूरा मुँह खोल उसकी चूत को मुँह मे ले चूसने लगा… “ऑश ऑश प्लीज़ रुक जाओ वरना मेरी चूत तुम्हारे मुँह मे पानी छोड़ देगी” राज ने अपना मुँह थोड़ी देर के लिए उसकी चूत से हटाया और बोला, “हां आज तुम मुझे तुम्हारा ये अमृत पीला ही दो.. में भी तुम्हारे इस रस का स्वाद चखना चाहता हूँ” कहकर वो वापस उसकी चूत को चूसने लगा… और तभी गीली चूत की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसे राज अपनी जीब से चाटने लगा और पीने लगा…

वासू की चूत मे अंगार लग हुई थी.. अब तो उसकी चूत भी चादर के दूसरी तरफ अपने बेटे के लंड के सामने थी. वो अपने बेट्रे के लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती थी… “अपने लंड को अब मेरी छूत मे घुसाओ राज.. में तुम्हारे लंड की लंबाई और मोटाई को अपनी चूत मे महसूस करना चाहती हूं” राज तो खुद बेसबरा हुआ जा रहा था.. उसने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया और घिसने लगा.. फिर धीरे धीर उसे अंदर घुसाने लगा….गीली चूत की चूत प्रीति और स्वीटी की चूत जितनी कसी हुई थी नही थी..लेकिन फिर भी राज को बहोत मज़ा आने लगा… वासू तो जैसे पागल सी हो गयी… उसने कई बड़े नकली लंड और मूली ग़ज़र अपनी चूत मे घुसाए थे.. लेकिन ये सबसे लंबा और मोटा लंड था जो उसकी चूत मे घुसा था… इतने सालों की शादी के बाद आज फिर उसे अपनी चूत मे हल्का दर्द का एहसास हुआ…

“ओह राज कितना मोटा और लंबा लंड है तुम्हारा कितना अछा लग रहा है.” उसने कहा.

राज अब अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा…अपनी कमर को चला वो ज़ोर ज़ोर के धक्के मारने लगा… “ओ हां राज चोदो मुझे और ज़ोर ज़ोर से चोदो आज फाड़ दो मेरी

चूत को श हां भर दो मेरी चूत को अपने रस से” गीली चूत सिसकने लगी…

राज ने देखा कि एक हाथ चादर के नीचे से आया और चूत को मसल्ने लगा.. वो और ज़ोर ज़ोर से उछाल कर धक्के लगाने लगा… तभी उसका लंड अकड़ने लगा.. उसने अपने लंड को उसकी चूत की गहराइयों मे पेलते हुए पानी छोड़ दिया… और साथ ही वासू का बदन भी ज़ोर से कंपा और उसकी चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया. वासू ही अपने काँपते और थाराते बदन को लेटे हुए संभालने लगी…राज लुढ़क कर उसके बगल मे हो गया वो देख रहा था कि गीली चूत की चूत से किस तरह दोनो का मिश्रित रस बह रहा था… “सही मे बहोत मज़ा आ गया राज” गीली चूत ने कहा.

राज वैसे ही बैठा सोचता रहा कि पता नही आगे क्या होगा.. लेकिन तभी उसके सामने लेटा वो अंजान शरीर वापस चादर की दूसरी और खिसक गया… तभी उसने देखा कि चादर के दूसरी ओर से वो अपनी दोनो चुचियों के उभार को चादर पर दबा रही थी.. “राज मुझे छुओ मेरे नंगे बदन को चादर के नीचे हाथ डाल मस्लो मेरे बदन को सहलाओ..” गीली चूत ने उससे कहा. राज घुटनो के बल पलंग पर खिस्सक चादर के नज़दीक आया और अपना हाथ चादर के नीचे से डाल उसकी चुचियो को मुट्ठी मे भर लिया.. उसकी चुचिया प्रीति जितनी बड़ी तो नही थी लेकिन फिर भी काफ़ी भारी थी..वो उन्हे मसल्ने लगा.. भींचने लगा.. फिर अपने हाथों को उसके नंगे बदन पर फिराने लगा एक हाथ से चुचि को मसल्ते हुए उसने अपने दूसरे हाथ से पहले उसकी कमर को सहालाया फिर उसकी सपाट पेट को फिर हाथ को नीचे लेजाकार उसकी चूत को मुट्ठी मे भर मसल दिया…

“राज मेरी चुचियों को ज़ोर ज़ोर से मसल्ते हुए अपनी उंगली मेरी चूत मे डाल अंदर बाहर करो” गीली चूत ने अपनी टाँगे थोड़ी फैलाते हुए कहा. राज ने अपनी उंगली उसकी चूत पर फिराते हुए अंदर घुसा दी.. गीली चूत चिहुक पड़ी.. राज अब एक हाथ से उसकी चुचियों को बेरहमी से मसल रहा था और

दूसरे हाथ की दो उंगलियाँ उसकी चूत मे डाल अंदर बाहर कर रहा था… वो उसके निपल को पकड़ खिच देता तो कभी ज़ोर की चिकोटी काट देता.. तभी गीली चूत ने उसके हाथ को पकड़ा और अपनी गंद

पर रख दिया.. राज को विश्वास नही हम की जिस गंद को उसने कंप्यूटर पर देखा था आज वो उसकी गंद मे उंगली घुसाने जा रहा है.. अब राज ने अपनी एक उंगली उसकी चूत मे डाले दूसरी उंगली उसकी गंद के छेद मे घुसा दी… और अंदर बाहर करने लगा. चादर की दूसरी और से आती सिसकियाँ और उखड़ी साँसों की आवाज़ से राज समझ गया कि गीली चूत एक बार फिर झड़ने वाली है.. तभी गीली चूत ने अपनी टाँगों को जाकड़ उसकी उंगली को अपनी चूत मे जाकड़ लिया…और उसकी उंगली उसके रस से भर गयी..वो अपनी उंगली को उसकी चूत मे घूमाता रहा और गीली चूत का बदन हल्के हल्के

काँपने लगा…

तभी गीली चूत ने चादर के नीचे से हाथ डाल उसके लंड को पकड़ खींच लिया..राज ने अपना लंड और चादर की दूसरी ओर कर दिया.. गीली चूत एक बार फिर उसके खड़े लंड को मुँह मे ले चूसने

लगी… “तुम बहोत ही अछा लंड चूस्ति हो” राज ने कहा. “सच, लेकिन एक बात सच सच बताना तुमने अपनी बेहन से भी लंड चूस्वाया है ना.. देखो झूठ मत बोलना..” वासू ने उसके लंड को

मुँह से बाहर निकाल कहा और फिर उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… “हाँ चुस्वाया है” राज ने जवाब दिया. “क्या में तुम्हारी बेहन से भी अछा लंड चूस्ति हूँ?” गीली चूत ने पूछा.

“एम्म इतना बुरा भी नही चूस्ति..बस जब में ये सोचता हूँ कि मेरी बेहन मेरा लंड चूस रही है. इस बात से ज़्यादा उत्तेजित हो जाता हूँ” राज ने जवाब दिया.. वासू अब और ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी और ज़ोर ज़ोर से मसालने लगी.. राज से सहन नही हुआ और उसका लंड वीर्य की पूछकारी

उसके मुँह मे छोड़ने लगा और वो उसके पानी को पीने लगी…. “राज इससे पहले कि हम जुदा हो क्या तुम्हारी और कोई इच्छा है?” गीली चूत ने पूछा… “हां है तो” राज ने जवाब दिया… ज

राज अपनी मा की हक़ीकत से अंजान उसके साथ होटेल के कमरे मे था.. वो अब भी उसे एक अंजान गरम औरत ही समझ रहा था.. उसकी आँखों के सामने वो द्रिस्य आ गया जब गीली चूत ने अपनी गंद मे

उंगली कर उसे दीखया था… “एक काम है अगर तुम मेरे लिए करो तो मुझे खुशी होगी” राज थोडा

हिचकिचाते हुए कहा. “और वो क्या है?” “अगर तुम आज फिर मुझे अपनी गंद मे उंगली घुसा के दिखाओ तो मुझे बहोत अछा लगेगा.” राज ने जवाब दिया.

“में समझ सकती हूँ कि जब में अपनी गंद मे उंगली अंदर बाहर करती हूँ तो तुम बहोत उत्तेजित हो जाते होगे..” वासू ने चादर की दूसरी ओर से राज से कहा, “और जहाँ तक में समझ रही हूँ आज तक तुमने कभी किसी की गंद नही मारी है.. है ना?” वासू ने राज से पूछा. “हाँ तुम सही कह रही हो..मुझे आज तक किसी की गंद मारने का मौका नही मिला और जब तुम अपनी गंद को फैला उसमे जब उंगली अंदर बाहर करती हो तो जैसे में पागल हो जाता हूँ..मेरे लंड इतना अकड़ जाता है कि में बता नही सकता” राज ने जवाब दिया. “फिर तो तुम्हारी इच्छा पूरी करते हुए मुझे ज़्यादा खुशी होगी”

राज ने देखा कि पहले गीली चूत के पैर चादर के नीचे नज़र आए फिर वो घूम कर झुक गयी और पीछे होने लगी.. अब उसके चूतड़ चादर के किस तरफ आ गये.. और राज ललचाई नज़रों से उसकी गंद और चूत को देखने लगा… फिर राज को टाँगो के बीच से एक हाथ नज़र आया वो चूत को सहलाने

लगा…फिर दो उंगलियाँ चूत के अंदर बाहर होने लगी.. और फिर थोड़ी देर के लिए हाथ गायब हो गया और वापस आ अब गंद के छेद को कुरेदने लगा.. राज गीली चूत की गंद और चूत देखते हुए अपने लंड को मसल्ने लगा और तनता जा रहा था… फिर उसने देखा की गीली चूत अपनी दो उंगलिया अपनी गंद मे घुसा घूमाने लगी….और थोड़ी देर बाद बोली..

“राज अब तुम अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दो.” राज ने गीली चूत को कहते हुए सुना राज आगे बढ़ा और उसने अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया.. गीली चूत ने अपनी गंद थोड़ी सी पीछे धकेल उसके लंड को अपनी चूत मे ले लिया… “ऑश भगवान तुम्हारा लंड कितना बड़ा महसूस हो रहा है” गीली छूट सिसक पड़ी.. “ऑश राज चोदो मुझे के बार फिर से भर दो मेरी चूत को अपने लंड से” वासू अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सिसकने लगी.. राज अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर होते देखता रहा और साथ ही गीली चूत की उंगली उसकी गंद के अंदर बाहर हो रही थी.. थोड़ी देर अपनी उंगली को गंद के अंदर बाहर कर वासू ने अपनी उंगली बाहर निकाल ली और राज से कहा कि अब वो अपनी उंगली को उसकी गंद के अंदर बाहर करे. राज ने अपनी दो उंगलियाँ अपने लंड के साथ साथ उसकी चूत मे घुसा दी.. जब उसकी उंगलियाँ अछी तरह से गीली हो गयी तो वो उन्हे उसकी गंद के छेद पर फिराने लगा… फिर धीरे से उंगलियों को उसकी गंद के अंदर ठेलने लगा… राज को मज़ा आने लगा.. एक छेद मे उसका लंड अंदर बाहर हो रहा था तो दूसरे छेद मे उसकी उंगलियाँ ..

तभी गीली चूत ने अपना एक हाथ को पीछे लाकर राज के लंड को अपने मुट्ठी मे कस लिया.. अब उसका लंड उसकी मुट्ठी से रगड़ खाते हुए उसकी चूत के अंदर बाहर होने लगा… गीली चूत उसके लंड को पकड़ मसल देती….एक उत्तेजना की लहर राज के शरीर मे दौड़ जाती… “राज अब सहन नही होता प्लीज़ अपना लंड मेरी गंद मे घुसा कर आज इसे फाड़ दो… चिथड़े चिथड़े कर दो मेरी गंद के आज” राज गीली चूत के शब्दों को सुन चौंक पड़ा.. उसे उमीद नही थी की पहली ही मुलाकात मे वो उसे अपनी गंद मारने को कहेगी… वैसे भी उसने अभी तक किसी की गंद मे लंड नही पेला था.. इसलिए वो हर नये मज़े का आनंद लेने को तय्यार था… वो समझ गया कि इस

उम्रदराज़ औरत से उसे बहोत कुछ सीखने को मिलेगा…

राज ने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसकी गंद के छेद पर रख अपने लंड को घिसने लगा…. “राज थोड़ा धीरे धीरे करना …. इतना मोटा लंड मेने पहले कभी गंद मे नही लिया है…” वासू ने अपने बेटे से कहा… राज ने अपने लंड को धीरे धीरे उसकी गंद के अंदर घुसाना शुरू किया.. एक दर्द की मीठी लहर दौड़ गयी वासू के शरीर मे…. वासू का बदन काँप उठा.. उसे लगा कि जैसे कोई लोहे की कोई सख़्त सलाख उसकी गंद को और चौड़ा कर रही है.. उसने अपनी गंद को

खूब फैलाता हुआ महसूस किया….

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