राज अपनीं बेहन की चूत मे अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए स्वीटी
को देख रहा था जो उसकी बेहन के मुँह पर झुकी अपनी चूत चूस्वा
रही थी.. उसकी नज़रे उसकी फूली गंद पर आ कर ठहर गयी.. वो
झुक कर उसकी गंद के उपर के हिस्से को चूमने लगा.. अपनी जीब वहाँ
फिराने लगा..
“ओह राज कितना अछा लग रहा है.. ओह हां काटो वहाँ पर.. ओह हां”
स्वीटी सिसक पड़ी और अपनी चूत को और प्रीति के मुँह पर दबाने लगी..
राज की उत्तेजना और बढ़ने लगी.. वो ज़ोर ज़ोर से अपने दाँतों को स्वीटी
की गंद पर गढ़ाने लगा… और तभी स्वीटी की चूत ने प्रीति के मुँह मे पानी छोड़ दिया.. राज का लंड भी उबाल पर था.. उसने अपनी बेहन को बताया कि उसका छूटने वाला है…
“मेरे मुँह मे अपना पानी छोड़ो राज में तुम्हारे इस स्वाद भरे रस को पीना चाहती हूं.. ” प्रीति सिसक कर बड़बड़ा उठी.. और राज ने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल उसके मुँह मे ठूंस दिया… प्रीति ने अपनी जीब से उसके लंड कों जकड़ा ही था कि उसके लंड ने एक बार फिर
पिचकारी छोड़ दी.. और प्रीति अपने ही भाई के वीर्य का स्वाद ले पीने लगी..
अपने भाई का पानी पीने के बाद प्रीति ने स्वीटी की अपनी टाँगो के बीच खींच लिया..
“ऐसे नही जाने दूँगी तुम्हे अब तुम्हे मेरी चूत चूस कर मेरा पानी
छुड़ाना होगा.. मेरी प्यास अभी बुझी नही है”
स्वीटी ने अपनी जीब उसकी चूत पर लगाई और तेज़ी से उसकी चूत के
अंदर बाहर करने लगी.. दो तीन झटकों मे ही प्रीति की चूत ने पानी
छोड़ दिया.. थके हारे तीनो बिस्तर की ओर बढ़ गये… राज स्वीटी के साथ पलंग
पर सो गया और प्रीति ज़मीन पर बीचे गद्दे पर सो गयी..
* * * * * * * *
अगली सुबह राज की आँख खुली तो उसकी नज़र अपने बगल मे नंगी लेटी
स्वीटी पर पड़ी.. उसका दिल किया कि वो उसके बदन के साथ खेले लेकिन
रात का हादसा उसकी आँखों के सामने आ गया..
उसे याद आया कि किस तरह शमा उसका लंड चूस अपने कमरे मे भाग गयी थी.. उसने शमा से मिलने का मन कर लिया.. वो पलंग से उठा और अपनी बॉक्सर शॉर्ट्स पहन कर शमा के कमरे की ओर बढ़ गया… दरवाज़े को खटखटा के वो अंदर घुसा तो देखा की शमा जाग चुकी
थी और अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी.. राज को देख वो मुस्कुरा दी.. “हाई शमा, अब कैसा महसूस हो रहा है? ” उसने पूछा. “थोड़ा सिर भारी है.. लगता है कि कल रात को पी शराब से थोड़ा
हॅंगओवर हो गया है” समा ने जवाब दिया.
“मेरा पूछने का मतलब था कि रात को अचानक तुम्हे क्या हो गया था..? ”
“सच कहूँ तो में भी पीछले आधे घंटे से यही सोच रही थी…में इन सब से बचना चाहती थी लेकिन फिर भी ये सब हो गया..”
शमा ने कहा. “तुम्हे पता है शमा मेने हमेशा से तुम्हे पसंद किया है.. जब हम
दोनो 13 साल के थे तब से… ” राज ने शरमाते हुए कहा. “वो सब ठीक है राज लेकिन कल रात जो कुछ हुआ में उसके लिए तय्यार नही थी…. और उपर से वो मेरी छोटी बेहन मेरी चुचियों पर
गिरे तुम्हारे पानी को चाटने लगी.. और तुम्हारी बेहन मेरी मुँह मे अपनी जीब डाल चूसने लगी… शायद इसी से में घबरा गयी” शमा ने जवाब दिया.. “हां में समझ सकता हूँ.. हम तीनो तो एक दूसरे के आदि हो चुके है.. लेकिन वो दोनो ये भूल गये कि ये सब तुम्हारे लिए एक दम नया
है.”
“इसका मतलब है कि तुम तीनो भी पहले ये सब कर चुके हो? शमा ने पूछा.
“हां.. इन सब की शुरुआत तुम्हारी पार्टी वाली रात से हुई थी.. ” फिर राज ने शमा को सभी बात विस्तार से बता दी.. “पहले तो मुझे भी बड़ा अजीब लगा कि आख़िर ये दोनो मेरी बहने है.. लेकिन जब वो दोनो
तय्यार थी तो में क्या कर सकता हूँ.. ” “हां में भी यही सोच रही थी…” शमा ने अपनी नज़रे उसके खड़े लंड के उभार पर गढ़ाते हुए कहा… “मुझे भी रात को मज़ा आया
था.. और सबसे बड़ी बात मुझे प्रीति का इस तरह चूमना बहोत अछा
लगा… और सच कहूँ तो तुम्हारा लंड कमाल का है..मेने आज तक इतना बड़ा और मोटा लंड नही देखा… और अगर इस लंड को देख स्वीटी बहक गयी तो बड़ी बात नही है.. किसी का भी दिल आ सकता है” शमा ने कहा.. “अगर तुम्हे मेरी ज़रूरत हो तो तुम जानती हो कि में मना नही
करूँगा” कहकर राज ने उसके गालों को चूमा और जाने लगा… तभी
शमा ने अपना हाथ उसकी गर्दन मे डाला और उसे अपने नज़दीक खींच
अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए… राज उसकी चुचियों को सहलाने
लगा.. कि शमा उससे अलग हो गयी..
राज शमा के कमरे से जाने लगा की उसे उसकी आवाज़ सुनाई पड़ी.. वो पलट कर रुक गया..
“राज क्या तुमने प्रीति को भी चोदा है? राज ने अपनी गर्दन हिलाई और कमरे से बाहर आ गया..
रविवार की शाम को राज और प्रीति ने अपनी दोनो चचेरी बहनो से विदा ली और अपने घर आ गये.. उनकी मम्मी ने बताया कि वो किसी काम से सोमवार और मंगलवार की रात बाहर जा रही है..
प्रीति और राज के व्यवहार ने वसुंधरा को सोच मे डाल दिया था..राज के साथ हुई बातों से वो सोच मे पड़ गयी थी और उसका दिल कहता था कि दोनो भाई बेहन आपस मे चुदाई करते है.. लेकिन ये विषय ऐसा था कि वो उन्हे डॅंट भी नही सकती थी और ना ही घर से निकाल सकती
थी.. वो क्या करे यही उसकी समझ मे नही आ रहा था… अपने होटेल के कमरे मे बैठी वो इन्ही सभी बातों के बारे सोच रही थी…
वसुंधरा की इस सोच ने उसके बदन और चूत मे भड़कती आग को जैसे और हवा दी.. हर बार उसके जेहन मे ये ख़याल आने लगा कि राज का मोटा लंड प्रीति की चूत मे किस तरह घुसता होगा..दोनो चुदाई कैसे करते होंगे.. उसकी चूत गीली होने लगी थी.. उसने अपनी चूत मे उंगली कर
अपनी भड़कती आग को शांत किया.
वहीं राज और प्रीति अपनी मस्ती मे लगे हुए थे… दोनो दिन भर चुदाई कर मज़ा ले रहे थे.. उनकी मा को आने मे भी एक दिन था और पापा को तो आने मे करीब एक हफ़्ता पड़ा था.
वहीं वसुंधरा की हालत खराब थी उसके ख़याल मे बार बार अपने बेटे
का मोटा लंबा लंड घूम रहा था.. अब उससे सहन नही हो रहा था.. आख़िर उसने उसे एक ईमेल भेजने की सोची.. उसने एक ईमेल लीखा और राज_मस्ताना के आईडी पर भेज दी..
राज उस रात अपने कंप्यूटर को ऑन किया बैठा था कि तभी उसे गीली चूत का ईमेल आने का संदेश मिला… उसने झट से वो ईमेल खोला और पढ़ने लगा…
मेरे राजा.. राज दो दिन से में तुम्हारे बारे मे ही सोच रही थी… तुम्हारे मोटे लंड
ने ,मेरी चूत को बेचैन कर दिया है.. मुझे लगता है कि अब मुझसे सहन नही होगा और अब वक्त आ गया है कि तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ उसकी गर्मी को शांत कर दे… में तुमसे चुदवाना चाहती हूँ….. में जानती हूँ कि तुम मेरा ईमेल पढ़ कर सोच मे पड़ जाओ और शायद
तुम्हे मुझे चोदने मे कोई दिलचस्पी ना हो… लेकिन अगर तुम भी मेरी चूत के लिए उतने ही बेचैन जितनी की मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए है तो में तुम्हे एक प्रपोसल लिख रही हूँ…और साथ ही मेरी कुछ शर्तें है जो तुम्हे माननी होगी.. सबसे पहली शर्त तो ये है कि में एक शादी शुदा औरत हूँ और तुम्हे अपने बारे मे कुछ नही बता सकती और ना ही तुम ये जानने की ज़िद
करोगे… दूसरी बात जब हम मिलेंगे तो में तुम्हे अपना चेहरा तक नही दिखाउन्गि.. .
अब तुम ध्यान से सुनो में तुम्हारे ही इलाक़े मे एक होटेल मे कमरा बुक करा लूँगी… और हम उस कमरे मे मिलेंगे.. इसका मतलब कि हमे एक दूसरे को अपना पता नही देना पड़ेगा…
तुम्हारे आने से पहले में बाथरूम मे बंद रहूंगी.. और कमरे मे बिछे पलंग पर एक चादर बँधी होगी जो हमारे बीच पर्दे का काम करेगी… चादर उँची बँधी होगी समझो तुम्हारी कमर तक… तुम कमरे मे आकर सीधे पलंग पर आ जाओगे और चादर की दूसरी ओर
मेरा इंतेज़ार करोगे.. फिर में दूसरी तरफ आकर तुम्हारे लंड का मज़ा लूँगी..
फिर में चदार की दूसरी ओर झुक कर तुम्हे अपने चूतड़ पेश करूँगी जिससे तुम अपना लंड मेरी चूत मे पीछे से घुसा सकोगे और चाहो तो मेरी चूत से खेल भी सकोगे.. और हां शायद मेने अपनी आवाज़ भी बदली हुई होगी.. इसलिए तुम चौंक मत पड़ना मेरी आवाज़ सुनकर…
में समझती हूँ कि तुम मेरी मजबूरी को समझोगे.. में तुमसे मिकलर अपनी शादी को ख़तरे मे डाल रही हूँ.. पर क्या करूँ जबसे तुम्हारा लंड देखा है.. में पागल सी हो गयी हूँ… और तुम्हारा लंड अपनी चूत मे लेने के लिए में ये ख़तरा भी उठाने को तय्यार हूँ…
अगर तुम्हे ये सब मंज़ूर है तो जवाब देना.. मुझे इंतेज़ार रहेगा.. तुम्हारे लंड की दीवानी और प्यासी गीली चूत
राज ईमेल पढ़ कर सोचता रहा कि उसे क्या जवाब देना चाहिए… बहोत देर तक वो सोचता रहा और आख़िर उसने उसकी शर्तें मानने का फ़ैसला कर लिया.. ऐसा मौका जिंदगी मे कभी कभी मिलता है.. और वो इस मौके को खोना नही चाहता था… इसलिए उसने गीली चूत को लीख दिया कि वो तय्यार है और वो उसे सब तय्यरी कर ईमेल कर दे तो वो अपना लंड हाथ मे लिए उसकी सेवा मे पहुँच जाएगा..
ईमेल भेजने के बाद राज ने अपना कंप्यूटर बंद किया और सोचने लगा कि पता नही कि जवाब कितने दिन मे आएगा और उसे कब उसकी चूत मे अपना लंड घुसाने का मौका मिलेगा.. और क्या वो अपनी उंगली ठीक उसी की तरह उसकी गंद मे घुसा पाएगा…
वसुंधरा अपने पति बलदेव के आने का इंतेज़ार करने लगी.. वो अपने पति को प्यार से देव बुलाती थी.. एक महीना हो गया था उसे गये हुए और वो लंड के लिए काफ़ी तरस रही थी.. उसने अपनी उंगलियों से नकली लंड से कई बार अपनी चूत का पानी छुड़ाया था लेकिन अब उसे असली लंड की ज़रूरत थी..
जिस दिन देव आने वाला था उसने अपने दोनो बच्चे राज और प्रीति को अपने देवर के पास भेज दिया.. दोनो खुशी खुशी वहाँ से चले गये.. जब उसे घर के बाहर टॅक्सी रुकने की आवाज़ सुनाई दी तो वो दौड़ कर दरवाज़े पर गयी और अपनी आँखे की होल से लगा दी.. जब उसने देखा कि उसका पति अकेला घर के बाहर खड़ा है तो उसने अपना इकलौता गाउन खोल कर गीरा दिया.. और नंगी होकर देव का इंतेज़ार करने लगी…
देव अपनी चाभी से घर का दरवाज़ा खोल अंदर आ गया.. “वाह क्या बात है.. ये है ना सही तरीका अपने पति का स्वागत करने का” उसने अपनी पत्नी को नंगी देखा तो कहा और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया.. वसुंधरा दौड़ कर उसकी बाहों मे आ गयी और अपनी होठों को उसके होठों पर रखते हुए अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी… और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… देव ने अपनी बॅग वहीं गिरा दे और वासू की उंगलियाँ उसकी पॅंट के बटन खोलने लगी.. फिर नीचे खिसकाते हुए उसकी पॅंट को भी नीचे खिसकाने लगी.. आख़िर उसका खड़ा लंड ठीक उसके मुँह के सामने था.. जैसे ही वसुंधरा ने उसके लंड को अपने मुँह मे ले भींचा देव के मुँह से एक सिसकारी निकल पड़ी.. वो जल्दी जल्दी अपने बाकी के कपड़े खोलने लगा.. और अपनी पत्नी की तरह नंगा हो गया…
वसुंधरा ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को अपने मुँह मे भींच चूसने लगी.. जैसे की कोई भूका बच्चा दूध की बॉटल की निपल को चूस्ता है ठीक वैसे ही वो आवाज़ करते हुए उसके लंड को अपने गले तक ले कर चूसने लगी… कभी उसके लंड की छेद पर अपनी जीब फिराती तो कभी उसके लंड को नीचे से उपर तक चाट्ती… उसका लंड उसके थूक से अच्छी तरह गीला हो चुका था.. “देव मुझे यहीं और अभी चोदो.. बहोत तदपि है मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए.. आज चोद चोद के फाड़ दो साली को” “अरे मेरी जान में कैसे मना कर सकता हूँ.. मेरा लंड भी तो तडपा है तुम्हारी चूत के लिए..” देव ने जवाव दिया और वसुंधरा ने वहीं हॉल मे बीचे कार्पेट पर लेट कर अपनी टाँगे फैला दी.. उसकी बिना बालों की चूत उसके रस से भीग चमक रही थी..
देव उसकी टाँगो के बीच आ गया और उस पर लेटते हुए उसने अपना लंड एक ही धक्के मे उसकी चूत मे घुसा दिया.. “ऑश देव कितना अच्छा लग रहा.. तुम्हे अंदाज़ा नही होगा कितना तदपि हूँ में तुम्हारे इस मोटे लंड के लिए..” वासू सिसक पड़ी.. “अगर मेरा स्वागत इसी तरह होता रहा तो मुझे अब जल्दी जल्दी सहर से जाना होगा..” देव ने हंसते हुए कहा… और ज़ोर ज़ोर के धक्के अपनी
पत्नी की चूत मे लगाने लगा…
“अब थोड़ी देर के लिए अपना मुँह बंद रखो और मेरी चूत पर ध्यान दो और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदो” वासू ने अपनी गंद उठा उसके लंड को और अंदर लेते हुए कहा..
“फिर तो मुँह बंद करने का एक ही तरीका है” कहकर देव उसकी चुचि को मुँह मे ले चूसने लगा.. और ज़ोर ज़ोर के धक्के मार उसे चोदने लगा…
“ऑश देव हाँ चोदो ओःः हां और ज़ोर ज़ोर से चोदो श हां ऐसे ही चोदो ऑश हां” वासू सिसक पड़ी… उसकी हालत देख देव हँसने लगा और अपने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ाते हुए उसे चोदने लगा… वासू हर धक्के पर ‘ह्म’ ‘ह्म’ की हुंकार भर अपने चूतड़ उपर को उठा देव के लंड को और अपनी चूत के अंदर तक ले लेती.. फिर अचानक वो रुक गयी….
“अब में चाहती हूँ कि तुम मुझे कुतिया बना पीछे से मेरी गंद मे अपना लंड घुसा मुझे चोदो” देव ने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और वसुंधरा ने घोड़ी बनने से पहले उसने उसके लंड को चूस उसपर लगे अपने रस को चाट लिया… देव वासू के पीछे आ गया और अपने लंड को एक बार फिर उसकी चूत मे घुसा दिया.. दो तीन बार अंदर बाहर कर उसने अपने लंड को गीला किया और फिर उसे वासू की गंद के छेद पर लगा दिया.. उसके दोनो को कुल्हों को पकड़ उसने ज़ोर का धक्का मारा और वासू ने अपने चूतड़ पीछे कर उसका साथ दिया.. देव का लंड एक ही धक्के मे उसकी गंद के जड़ तक घुसाया… वासू को एक त्रीव दर्द का एहसास हुआ तो उसने थोड़ा धीरे धीरे अपने चूतड़ आगे पीछे करने लगी.. उसने अपना हाथ नीचे किया और अपनी चूत को रगड़ने लगी.. देव ने धक्कों की रफ़्तार थोड़ी बढ़ा दी.. और वासू उत्तेजना मे चीख पड़ी..
“ऑश हां और ज़ोर ज़ोर से मारो मेरी गंद को.. ओह हां और ज़ोर से ऑश” वासू ने अपना हाथ पीछे अपनी गंद पर कर अपने पति के लंड को मापने लगी… तभी उसके जेहन मे अपने बेटे का लंड आ गया और वो सोच्नेलगि.. कि उसके बेटे का लंड उसकी चूत मे घुसेगा तो उसे कैसा महसूस होगा.. वो अभी तय नही कर पा रही थी कि वो अपने ही बेटे से अपनी गंद मराए या नही.. इन्ही ख़यालों मे उत्तेजित हो वो अब ज़ोर ज़ोर से अपने गंद को आगे पीछे कर अपने पति के धक्कों का साथ देने लगी… एक तो पति का मोटा लंड गंद के अंदर बाहर होता हुआ और बेटे का लंड उसके ख़यालों मे उसकी चूत के अंदर बाहर होता हुआ.. दो लंड के ख़याल को वो सहन नही कर पाई… और उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया… देव ने भी दो तीन धक्के ज़ोर ज़ोर के मारे और अपना
वीर्य उसकी गंद मे छोड़ दिया… देव ने जब अपना लंड वासू की गंद से बाहर निकाला तो वीर्य की एक धार
उसकी गंद से बहने लगी… वासू ने अपने पति के लंड को पकड़ा और उसे खींच बाथरूम मे ले गयी और शवर को ऑन कर दिया…
दोनो शवर के नीचे खड़े एक दूसरे के बदन से खेलने लगे.. साबुन बदन पर मलने लगे.. इसी तरह मस्ती कर दोनो नहाने लगे… इस छेड़ छाड़ से देव का लंड एक बार फिर खड़ा हो गया…
वासू वहीं शवर के नीचे अपने पति के सामने घुटनो के बल बैठ गयी और उसके खड़े लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी… अपने पति के लंड को चूस्ते हुए वासू ने साबुन अपने हाथों मे ले झाग मचाने लगी.. जब उसका हाथ साबुन से चिकना हो गया तो वो उसे अपने पति की गंद के पीछे ले गयी और उसके चूतदों पर मलने लगी.. फिर उसने अपनी एक उंगली उसकी गंद मे घुसा दी…. देव ज़ोर से उछल पड़ा… और उसका लंड वासू के मुँह मे गले तक घुस गया.. वासू अब अपनी उंगली अपने पति की गंद के अंदर बाहर करने लगी और देव अपने लंड को अपनी पत्नी के मुँह मे… थोड़ी ही देर मे उसके लंड मे उबाल आने लगा… वासू उसके लंड को मुँह से बाहर निकाल उसे ज़ोर
ज़ोर से मुठियाने लगी.. उसने अपना मुँह खुला रखा और एक ज़ोर की पिचकारी देव के लंड से निकल उसके मुँह मे गिरी..जिसे वो पी गयी..फिर दूसरी पिचकारी उसकी चुचियो पर गीरी.. इसी तरह देव का लंड
पिचकारी छोड़ता रहा और वासू अपने पति से वीर्य स्नान करती रही..
फिर दोनो ने एक दूसरे के बदन को सॉफ कर स्नान किया और बाथरूम के बाहर आ गये.. वासू ने तब डिन्निंग टेबल पर खाना लगा दिया.. दोनो नंगे ही खाना खाने बैठ गये… शहर के दूसरे हिस्से मे देव के भाई के घर रात के खाने की तय्यरी चल रही थी….
प्रीति अपने भाई के बगल मे बैठी थी और उसकी दोनो चचेरी बहने उसके सामने… स्वीटी और शमा की बगल मे उनके चाचा मोहन और उनकी चाची नेहा बैठी थी..
प्रीति यहाँ भी अपनी हरकतों से बाज़ नही आ रही थी.. वो बार बार अपना हाथ अपने भाई कि गोद मे रख उसके लंड को मसल देती और अपनी दोनो बहनो के देख उन्हे आँख मार चिढ़ा देती… फिर कभी अपने पावं को स्वीटी की नंगी टाँगो पर फिराने लगती.. और उपर चढ़ा उसकी चूत को कुरेदने लगती..

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