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अक्कू ने मेरे हिलने से पहले मेरे चूतड़ों को फैला केर मेरी गांड और चूतड़ों को प्यार से चूम चाट कर साफ़ कर दिया।
मैंने मम्मी के देखा देखी जब मुड़ी तो अक्कू का लंड अपने मुंह में लेकर चूस चाट कर साफ़ करने लगी। अक्कू के लंड पर उसके लंड के रस और मेरी गांड के रस का मिश्रित लेप मेरे मुंह के स्वाद को बहुत भाया।
अब मैं अपने पीठ पर अपने गोल मटोल मोटी टांगें फैला काट अपने छोटे भाई का इंतज़ार करने लगी। अक्कू ने मेरी जांघों को मेरे कन्धों तक पीछे झुका कर मेरे चूतड़ों को पलंग से ऊपर उठा दिया। उसका लंड मानों थकने का नाम ही नहीं ले रहा था। अक्कू ने ने अपना लंड मेरी गांड बिना उसके हाथ की मदद से ढूंड ली। फिर उसने एक बार अपने सुपाड़े को मेरी गांड में फंसा कर दो जान लेवा धक्कों से मेरी गांड में ठूंस दिया।
मैं मीठे दर्द से चीख उठी। अक्कू ने मेरी गांड की चुदाई बेदर्दी से शुरू की और तब तक मेरी गांड चोदता रहा जब तक मैं अनगिनत बार झड़ कर बेहोश नहीं हो गयी।
उस रात अक्कू ने मेरी गांड पांच बार और मारी। हम दोनों भाई-बहन देर सुबह तक सोते रहे।
मेरा सारा शरीर दर्द कर रहा था। मेरी छाती के उभार सूज कर लाल हो गए थे।
अक्कू ने मेरे मुंह को चूम कर कहा ,”दीदी, मैं आपका सारी ज़िंदगी ख्याल रखूंगा। आई लव यू दीदी,” अक्कू सुबक कर बोला और मैंने उसके खुले मुंह पर अपने मुंह दबा दिया।
हम दोनों एक दुसरे सुबह के बासी मुंह के स्वाद से परिचित होने लगे। मुझे अक्कू के मुंह का स्वाद बहुत ही अच्छा लगा और वो भी मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल कर मेरे मुंह के हर कोने को चूस चाट रहा था।
हम दोनों स्नानघृह में तैयार होने के लिए चल दिए। अक्कू ने मुझे पेशाब और पाखाना करते हुए ध्यान से देखा। जब अक्कू पेशाब कर रहा था तो मैंने उसका लंड पानी में घूमाने लगी। अक्कू ने शैतानी से अपने लंड को मेरी ओर मोड़ कर मुझे अपने पेशाब से नहला दिया। मेरे नन्हे भैया का मीठा गर्म सुनहरी मूत्र मेरे खुले हँसते हुए मुंह में भर गया और मैंने उसे प्यार से सटक लिया।
“अक्कू तेरा पेशाब तो बहुत मीठा है,” मैं हँसते हुए बोली।
“दीदी, मुझे भी आपका पेशाब पीना है ,” अक्कू ने आग्रह किया।
“पगले, अभी तो मैंने अपना पूरा पेशाब खाली किया है , अब अगली बार मुझे आयेग तो चख लेना ” मैंने प्यार से अक्कू को चूमा।
हम दोनों जब तैयार हो कर नीचे नाश्ते के लिए पहुंचे तो तब हमें पता लगा कि हम कितनी देर से नीचे आये थे।
मम्मी पापा बहुत देर से हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे। हम दोनों सर झुका कर सॉरी बोले और नाश्ते पे जुट पड़े। पापा और मम्मी हमारी भूख देख कर हंस पड़े।
हम दोनों ने रोज़ के हिसाब से बहुत ज़्यादा खाया। हम दोनों का पेट भर कर फ़ैल गया। अक्कू के मुंह से हल्की सी डकार निकल पड़ी। अक्कू ने शर्मा कर सबसे सॉरी कह कर माफी मांगीं। मम्मी ने हँसते हुए अपने लाडले बेटे को ममता भरे प्यार से चूम लिया।
“भाई तुम दोनों का क्या विचार है। बाहर लंच खाना हो या फिल्म देखनी है या दोनों करने का ख्याल है ,” पापा ने स्नेह से हमारा शनिवार का प्लान के बारे में पूछा।
अक्कू ने मेरे पैर पर अपना पैर मारा। मैंने कुछ सोच आकर कहा ,” पापा, आज हम दोनों घर पर ही रहेंगें। अक्कू को मुझे बायोलॉजी के कुछ पाठ समझाने है। ”
मुझे जो जल्दी से समझ आया वो मेरे मुंह से निकल पड़ा। अक्कू मेरे द्विअर्थिय प्रस्ताव से बिना हँसे नहीं रह सका। मैंने ज़ोर से उसकी टांग में ठोकर मार दी। उसने सिसकारी मार कर हसना बंद कर दिया।
मम्मी ने मुझे एक नई निगाह से घूर कर देखा और मेरी जान सूख गयी। हम दोनों को पापा से ज़्यादा मम्मी से डर लगता था।
पापा ने हँसते हुए कहा ,” चलो तो फिर मम्मी और हम भी आलसीपने से फिर से बिस्तर में घुस जाते हैं। ”
मम्मी की आँखे भी चमक उठीं।
अक्कू और मैं छुपके मम्मी-पापा के शयन-कक्ष में चोरी से देखते रहे जब तक मम्मी ने नंगे हो कर पापा के लंड को अपने मुंह में ले कर चूसना नहीं शुरू कर दिया। तब हमें पता था की अब दोनों घंटों के लिए चुदाई में व्यस्त हो जायेंगें।
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अक्कू और मैं बिना एक क्षण खोये अपने कपडे उतार कर एक दुसरे से लिपट गए। इस बार कोई भी हिचक और संदेह नहीं था। अक्कू ने मेरे शरीर का नियंत्रण ले लिया। उसने मेरी चूत और गांड चूस कर मुझे चार बार झाड़ने ने के बाद मुझे पलट कर मेरी गांड में अपना लंड घुसा दिया। मेरी चीख ने उसके लंड का स्वागत किया। अक्कू ने घंटे से भी ऊपर मेरी गांड की धज्जियां उड़ाने के और मुझे अनगिनत बार झाड़ने के बाद मेरी गांड में अपने लंड के रस के पिचकारी खोल दी।
मैंने अक्कू के अपने गांड के रस से लिपे लंड को चूस कर दो बार झाड़ा। अक्कू ने भी मेरी चूत और गांड को चूस कर मुझे के बार झाड़ कर मेरी गांड में अपना अतृप्य लंड जड़ तक ठूंस कर विध्वंसक चुदाई प्रारम्भ कर दी। फिर अक्कू ने मेरी गांड की तौबा मचा दी। जब तक अक्कू ने मेरी बेदर्दी से चुदी गांड में अपना लंड खोला तब तक मैं अनगिनत बार झड़ चुकी थी। जब अक्कू मेरी गांड में आया तब तक में होश खो बैठी थी।
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जब आया तो मुझे ज़ोर से पेशाब लगा था मलाशय में भी हलचल मची थी। अक्कू और मैं भाग कर घुस गए। अक्कू ने चिल्ला कर कहा ,”दीदी इस बार मुझे भी आपका पेशाब से नहाना है।”
मैं खिलखिला कर हंस दी। अक्कू मेरी टांगों के बेच में बैठ गया और मैंने अपने गरम सुनहरी मूत्र की धार अक्कू के सर के ऊपर खोल दी। फिर अक्कू ने जो किया उस से मैं चकित रह गयी। अचानक अक्कू ने अपना मुंह खोल कर मेरे मूत्र से भर लिया और उसे मुस्करा कर सटक गया।
मैंने उसे झिड़की से दी ,” अक्कू तू कितनी गंदी बात करता है। भला पेशाब भी पीने की चीज़ होती है ,” पर मैं वास्तव में अक्कू की क्रिया से रोमांचित हो गयी थी।
मैंने अपनी धार अक्कू के मुंह से दूर कर उसके केंद्रित कर दी ,” दीदी , आपने अपना पेशाब चखा तो हैं नहीं। आपको क्या पता की यह कितना स्वादिष्ट है। ” अक्कू ने मेरी झिड़की को धराशायी कर दिया।
उसने मेरे चूतड़ों को पकड़ कर मेरे मूत्र की धार को एक बार फिर से अपने खुले मुँह की तरफ मोड़ कर अपना मुंह भर लिया और उसे लाळीचेपन से निगल गया।
मेरे सारे शरीर में रोमांच की सिरहन कौंध गयी ,”अक्कू तुम भी मुझे अपना मूत्र पीने दोगे?” मैं फुसफुसा के बोली।
अक्कू ने अपने मेरे पेशाब से भरे मुंह को हिला कर सहमती दे दी।
अक्कू मेरे सुनहरे गरम पेशाब से पूरा भीग गया था और उसनेना जाने कितने बार मुंह भर कर पेरा पेशाब भी पी लिया था। अब मेरी बारी थी। अक्कू के लंड का फायदा मुझे अपनी गांड मरवाने के आलावा उस स्थिति में और भी लाभ हुआ।
मैंने अक्कू का लंड का सुपाड़ा अपने खुले मुंह में रख लिया। अक्कू की गर्म सुनहरी मूत्र के धार ने मेरे मुँह को दो क्षणों में भर दिया। मैंने उसे अपने मुंह में हिला कर गटक लिया। अक्कू सही कह रहा था। मुझे अपने छोटे भैया का सुनहरी मूत्र बहुत स्वादिष्ट लगा।
जब तक में दुबारा मुंह खोलूं अक्कू ने मुझे मूत्र स्नान करवा दिया। पर मैंने उसके लंड को अपने मुंह में भर कर मन भर अक्कू का मूत्रपान किया।
अक्कू से गांड मरवाने के बाद मुझे अपनी गांड बहुत भरी-भरी लगती थी। मैं जल्दी से कमोड पर बैठ गयी।
अक्कू से गांड मरवाने के बाद मेरी गांड में खलबली मच उठी थी। मुझे अपने मलाशय को खोलते हुए उसमें बहुत जलन और दर्द हुआ और मेरी हल्की सी चीख निकल गयी। पर मैं अक्कू के गंभीर चेहरे की ओर एक तक निहार कर मुस्कुरा दी, उसे आश्वासन देने के लिए।
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