अक्कू ने मेरी गांड मारने की रफ़्तार को बिलकुल धीमा नहीं होने दिया। मैं अब सुबकना बंद कर दिया था। मुझे अभी तक गांड से उस आनंद का आभास नहीं हो रहा था जैसे अक्कू की उँगलियों से होने लगा था। फिर भी मेरी गांड में अब दर्द बर्दाश्त होने लगा था। मुझे पहले दर्द और फिर अक्कू की आनंद भरी सिस्कारियों ने इतना तल्लीन कर लिया था कि समय का कोई अंदाज़ हे नहीं रहा। पर मुझे थोडा अंदाज़ा था कि अक्कू मुझे एक घंटे से चोद रहा था।
“दीदी मेरे लंड से पहले की तरह का पानी निकलने वाला है ,’ अक्कू ने दांत किसकिसा कर कहा।
“अक्कू तुम झड़ने वाले हो। जैसे मम्मी और पापा झड़े थे, और तुम स्नानगृह में झड़े थे ,” मुझे गांड मरवाते हुए भी बड़ी बहन के छोटे भाई की शिक्षा के उत्तरदायित्व का पूरा ख़याल था।
अक्कू के लंड ने गरम द्रव्य की फ़ुहार मेरी गांड में खोल दी। पहले तो मैंने हर बौछार को गिना पर अक्कू रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था और मैं गिनती भूल गयी।
अक्कू ने हाँफते हुए मुझे अपनी बाँहों में जकड लिया , ” दीदी आप भी झड़ गयीं ?”
मैं शुरू के दर्द से आने की स्थिति में नहीं थी पर मुझेना जाने कैसे समझ आ गया था कि अक्कू को यह सुन कर दुख होगा , “क्या तुम बहाना ढूंढ रहे हो और अपनी बहन की गाड़ना मारने का ? यदि मैं आ गयी तो तुम मेरी गांड मारना बंद कर दोगे ?”
अक्कू ने मेरी पसीने से भीगी पीठ को प्यार से चूम कर कहा ,” दीदी आपकी गांड मारना तो मुझे इतना अच्छा लगा कि मैं बता ही नहीं सकता। देखए मेरा लंड अभी भी पूरा खड़ा है। यदि आप थकी नहीं हो तो मैं दुबारा गांड मारना शुरू कर दूं ?”
नेकी और पूछ पूछ। मैंने खुशी से लपक कर कहा ,” अक्कू तुम मेरी गांड जितनी देर तक और जितनी बार मारना चाहो मारो। मैं तो चाहूंगी कि तुम रोज़ मेरी गांड मारो और मैं तुम्हारा लंड भी चूसूंगी। ”
“दीदी, आप मुझे अपनी चूत और गांड भी चूसने देंगीं ना ?” अक्कू ने जल्दी से आश्वासन मांगा।
“बिलकुल मेरे भोले भैया ,” मेरी छोटी से हंसी निकल गयी और एक क्षण बाद ही मेरी चीख बात करते हुए अक्कू ने अपने लंड निकल कर मेरी गांड मारने की तैयारी कर ली थी और दो तीन खुन्कार धक्कों से अपना लंड मेरी गांड में ठूंस दिया।
इस बार मेरी चीख में दर्द के साथ विचित्र सा आनंद भी शामिल था ,”हाय अक्कू तुम्हारा लंड मेरी गांड में जाते हुए बहुत अच्छा लग रहा है। भैया ज़ोर से अपनी बड़ी बहन की गांड मारो।
अक्कू ने अपनी बहन के निर्देश और निवेदन का अपने पूर्ण शक्ती से प्रत्युत्तर दिया। अक्कू ने मेरी गांड का मर्दन भीषण धक्कों से करना शुरू कर दिया। दर्द और आनंद के मिश्रित लहर मेरे शरीर में बिजली की तरंग कौंध गयी। मेरी सिस्कारियां मध्यम से तीव्र हो गयीं।
“अक्कू मेरे प्यारे भैया मेरी गांड और ज़ोर से मारो। अक्कू अब तो बहुत ही अच्छा लग रहा है, ” मैं मम्मी के तरह कामाग्नि से जल रही थी। हमारे अविकसित शरीर अब शारीरिक प्रेम की भूख से परिचित हो चले थे। थोड़े से ही अनुभव से हम दोनों बहन-भाई उस भूख को भुजाने की तरतीब भी समझ गए थे।
अक्कू का लंड मेरी गांड में सटासट अंदर बाहर हो रहा था। उसके लंड पर मेरे पहली गांड की चुदाई का खून, उसका वीर्य और मेरे गांड के रस का मोटा सा लेप चढ़ चूका था। कमरे में मेरी गांड के मनोहर महक फ़ैल गयी थी। हम दोनों उस सुगंध से और भी उत्तेजित हो गए।
“दीदी, दीदी, मुझे आपकी गांड मारना बहुत अच्छ ………. हुन ,” अक्कू ने हचक कर अपना लंड निर्मम प्रहार से मेरी गांड में जड़ तक डालते हुए कहा।
नेहा का परिवार – Update 86 | Erotic Family Saga

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