नेहा का परिवार – Update 85 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
Reading Mode

अक्कू ने बिना मेरी चीख पर ध्यान दिए एक और भयंकर धक्का मारा और उसका लंड कुछ और मेरी कुंवारी गांड के भीतर घुस गया। अब मेरी चीखें हमारे कमरे में गूँज रहीं थीं। मैं सुबक सुबक कर रो रही थी पर अक्कू ने एक के बाद एक ताकत भरे धक्कों से आखिरकार अपना पूरा लंड मेरी गांड में जड़ तक ठूंस दिया।
अक्कू ने मेरी कांपती पीठ को प्यार से सहलाया ,” सॉरी दीदी, आपने ही मुझे कहा था पूरा लंड डालने को। ”
मैं अक्कू को आश्वासन देना चाहती थी पर दर्द से सुबकते हुए मेरे से कोई शब्द ही नहीं बन पा रहे थे। अक्कू ने पूछा, “दीदी मैं रुक जाऊं या गांड मारना शुरू कर दूं ?”
बेचारा अक्कू एक तरफ तो अपनी दीदी के रोने से दुखी था और दूसरी तरफ उसे मेरे हुए दिए निर्देश का पालन भी करना था। मैंने बड़ी मुश्किल से अपना सर हिला कर उसे गांड मारने के लिए प्रोत्साहित किया। अक्कू ने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी घबराहट की सिसकी से मैं भी घबरा गयी। मैं डर से कांप उठी कि कहीं अक्कू को मेरी कसी गांड में लंड घुसाते हुए उसके लंड पर चोट तो नहीं लग गयी.
मैंने सुबकते हुए मुश्किल से फुसफुसा कर पूछा ,” अक्कू, तुम्हारा लंड तो ठीक है ?”
“दीदी, आपकी गांड से खून निकल रहा है। मैं क्या करुँ ?” अक्कू की आवाज़ की घबराहट में मेरे लिए प्यार और मेरी हिफाज़त की फ़िक्र थी।
“अक्कू मम्मी के भी गांड से खून निकला होगा पर पापा ने तो उसका ज़िक्र भी नहीं किया। तुम मेरी गांड पापा की तरह मारो। मम्मी की तरह मेरी गांड भी कुछ देर में ठीक हो जायेगी, ” मेरा अक्कू को दिया आश्वासन पर खुद मुझे उतना भरोसा नहीं था।
अक्कू ने मेरे कांपते चूतड़ों को कस कर पकड़ कर अपना लंड पापा की नकल करते हुए बेदर्दी से मेरी गांड में एक धक्के के बाद दुसरे धक्का मारते हुए फिर से जड़ तक ठूंस दिया। मैं चीख उठी और मेरी सुबकियां और भी ज़ोर से कमरे में गूंजने लगीं। पर इस बार मेरे छोटे भैया ने अच्छे बच्चे की तरह मेरे निर्देशों का पालन करते हुए अपना लंड जल्दी से बाहर निकाल कर पूरी ताकत से मेरी गांड में वापस घुसा दिया।
अक्कू ने मेरी गांड मारनी शुरू की तो बिना रुके उसने अपने लंड को मेरी तड़पती फटी हुए गांड में अंदर बाहर करने लगा। मेरी चीखें बहुत देर बाद मद्धिम हो गयी पर मेरे सुबकियां तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं।
अक्कू का लंड मेरी जलती दर्द भरी गांड में तूफ़ान की तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था। मुझे दर्द से सुबकते हुए भी अपने नन्हे भाई पर अभिमान आ रहा था कि कितनी जल्दी उसने पापा की तरह मेरी गांड मारने की कला की दक्षता दिखाने में सफल हो गया था।
दर्द और पीड़ा से मेरे माथे, ऊपर के होंठ पर पसीना आ गया था।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply