नेहा का परिवार – Update 84 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
Reading Mode

“अक्कू पापा ने जैसे ज़ोर से अपना लंड मम्मी की चूत के घुसाया था उसी तरह से प्रयास करो। मेरे दर्द की बिलकुल परवाह नहीं करना। तुम्हें मेरी कसम है अक्कू भैया,” मैंने अपना निचला होंठ दातों से कस कर दबाते हुए कहा।
पर अक्कू का लंड मेरी नन्ही गांड में घुस ही नहीं पा रहा था। अक्कू ने विफलता से कुंठित से हो कर अपना लंड मेरी गांड से हटा लिया और जब तक मैं कुछ बोल पाती अपने तर्जनी एक झटके में मेरी गांड के अंदर घुसा दी।
मैं बिलबिला कर चीख उठी अक्कू ने मेरे निर्देशानुसार मेरी चीख की उपेक्षा कर दी। मेरी आँखों में आंसू भर गए। मैं अभी अक्कू के एक उँगली के दर्द से सम्भली भी नहीं कि अक्कू ने अपने मझली उँगली भी तरजनी के साथ मेरी गांड में एक झटके से घुसा दी। मैं फिर से दर्द के आधिक्य से बिलबिला कर चीख उठी। अक्कू ने बिना मेरे दर्द की परवाह किये मेरी गांड को अपनी दो उँगलियों से मारने लगा। मेरी गाड़ में दर्द के अलावा उसके छल्ले पर बेहद जलन भी हो रही थी। अक्कू ने अपनी पूरी उंगलियां गांड में ठूंस दीं। मेरी गांड में दर्द के साथ साथ एक नया संवेदन भी जाग उठा। जब अक्कू की उँगलियाँ मेरी गांड के बहुत भीतर के भाग को कुरेदती थीं तो मेरे पेट में अजीब सी कुलबुलाहट पैदा हो जाती थी।
मेरा दर्द अब कम होने लगा। मुझे दर्द के बीच में एक नये आनंद की अनुभूति भी होने लगी।
अक्कू ने दस पंद्रह मिनटों तक दो उंगलीओं से मेरी गांड मारी अब मुझे गांड में से अनोखा आनंद आने लगा जिसने दर्द के तूफ़ान को मंद कर दिया।
“अक्कू अब मुझे समझ आया कि मम्मी गांड मारने का दर्द बर्दाश्त कर रहीं थीं। अक्कू मैं तुम्हारे लंड का अपनी गांड में घुसने का इंतज़ार नहीं कर सकती ,” मैं अब एक दूसरी ही की ‘पीड़ा ‘ से कुलबुला रही थी।
अक्कू ने मेरे हृदय की पुकार सुन ली और अपनी उंगलियां बाहर निकाल कर उन्हें मुंह में भर कर चाट लीं ,”उफ़ अक्कू यह क्या कर रहे हो ? गंदी उंगलियां क्यों मुंह में डालीं? ” मैंने दिखावे के लिए अक्कू को झिड़की दी थी पर मेरा दिल अक्कू की क्रिया से पुलकित हो गया था।
अक्कू ने मुस्करा कर कहा ,” दीदी आपने स्वाद लिया होता तो मुझे नहीं डाँटतीं,”
अक्कू का लंड का वृहत सुपाड़ा एक बार फिर से मेरी गांड के छेद पर दस्तक देने लगा। इस बार अक्कू ने पूरी ताकत लगा कर एक ज़ोर से झटके जैसा धक्का मारा और मेरी गांड का छेद यकायक खुल गया और मेरे छोटे भैया का सुपाड़ा मेरी गांड को चीरता हुआ मेरे मलाशय में घुस गया।
“अक्कू मैं माआआअर गयीईईई। ….,” मैं असहाय दर्द से बिलबिलाती हुई चीख उठी। मेरी आँखों से तुरंत आंसू बहने लगे। मैंने फिर भी अक्कू के मज़बूत हाथों से छुड़ने का कोई प्रयास नहीं किया।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply