नेहा का परिवार – Update 83 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
Reading Mode

कमरे में पहुँचते ही अक्कू और मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। कुछ ही क्षणों में हम दोनों पूर्णतया नंग्न थे। मैंने बिना एक क्षण व्यतीत किये अपने घुटनों पर बैठ कर अपने छोटे भैया का गोरा चिकना सुंदर लंड अपने हाथों में भर कर उसका सुपाड़ा अपने मुंह में ले लिया। अक्कू का लंड लगभग पूरा खड़ा हो चूका था और जो भी कमी बची थी वो उसके लंड के मेरे मुंह में जाते ही सम्पूर्ण हो गयी।
अक्कू ने सिस्कारी मारी ,” ओह दीदी। मेरा लंड चूसिये। ” मुझे अक्कू से मुंह से नए अश्लील शब्द सुन बहुत अच्छा लगा।
मैंने मम्मी की तरह अक्कू का लंड और भी अपने मुंह में लेने का प्रयास किया। पर आधे से भी कम लम्बाई मुंह में लेते ही अक्कू का लंड मेरे गले में फंसने लगा और मेरी मुंह से ज़ोर से ‘गोंगों’ की आवाज़ उबल पड़ी।
अक्कू ने अपना लंड मेरे मुंह से अपना लंड बाहर खींचने का प्रयास किया। मैंने उसके भारी चिकने चूतड़ों को हाथों से पकड़ कर रोक लिया।
“अक्कू तुमने देखा था मम्मी को पापा का लंड मुंह में लेते हुए। तुम मेरे मुंह में वैसे ही अपना लंड डालो। घबराओ नहीं जैसे मम्मी को पापा का लंड अच्छा लगा था वैसे ही मुझे भी अच्छा लगेगा। जब तुम झड़ोगे तो पहले मेरे मुंह में झड़ना,” मैंने अक्कू को स्पष्ट कर दिया कि जो ही हमने उस रात सिखा था उसका अच्छे से अभ्यास करने से ही मैं उसके लंड की देखबाल कर सकती हूँ।
अक्कू ने सर हिला कर अपनी सहमति दिखाई। उसके हाथों ने मेरे सर को कस कर पकड़ लिया जैसे पापा ने मम्मी के साथ किया था। फिर अक्कू ने मेरे मुंह को अपने लंड पर दबाया और अपने चूतड़ों के धक्के से अपना लंड मेरे मुंह में आधे से भी ज़यादा मेरे हलक में ठूंस दिया। मेरे मुंह से ज़ोर से उबकाई जैसी आवाज़ मेरेना चाहते हुए भी निकल गयी मैंने अक्कू के चूतड़ों पर अपने हाथों से दवाब डाल कर उन्हें और भी अपने समीप खींचने लगी। मेरा स्याना भाई मेरे बात समझ गया।
उसने अपने मोटे लम्बे लड़ से मेरे मुंह की चुदाई शुरू करदी। हमारे कमरे में मेरी ‘गोंगों ‘ की दयनीय आवाज़ें गूंजने लगीं। मेरा गला दर्द करने लगा पर मैं अक्कू की सिसकारी से और भी उत्तेजित हो रही थी। आंसू मेरी नाक में बहने लगे। मैंने बहुत सुड़कने की बहुत कोशिस की पैर मेरे आंसू मेरी नासिका से बहने लगे। मेरी लार भी मी मुंह टपक कर मेरी छाती को भिगो रही थी। इस सब होने के बावज़ूद मुझे मुंह चोदना इतना अच्छा लग रहा था कि मेरी चूत गीली होने लगी। पहले तो मुझे लगा कि मेरा पेशाब निकलने वाला था ।
अक्कू अब तक अभ्यस्त हो गया और उसने भीषण तेज़ लय बना ली थी। उसका लंड मेरे गोंगों करते गले को निर्मम प्यार से चोदता रहा। मुझे लगा कि अक्कू ने मेरा मुंह कई घंटों तक चोदा पर शायद एक घंटे की अवधी अधिक सम्भावित है।
अक्कू ने अजीब सी गुर्राहट की आवाज़ निकाली और उसका लंड मेरे मुंह में फट पड़ा। उसके लंड से उबली मीठी ने मेरे मुंह को भर दिया और मेरे हलक के उबकने के साथ मेरे मुंह और नाक में से बह निकला।
पर उसके बाद मैंने एक बूँद भी बर्बाद होने दी और अक्कू के लंड से निकली अनेक धारों को मैं प्यार से सतक गयी। मुझे अक्कू के झड़ने का स्वाद उसकी महक जितना ही अच्छा लगा।
मैं और हांफ थे। अक्कू का चेहरा ठीक पापा के चेहरे संतुष्टी सेदमक रहा था। हम दोनों पहले अभियान के सफलता से कि पागलों की तरह एक दुसरे से लिपट कर लगे। अक्कू मुझे इतनी बार चूमा कि मैं और भी खिलखिला कर हंस दी।
अक्कू चेहरा चूम कर अपने थूक से लस दिया। फिर उसने मुझे पलंग पर कमर के बल लिटा कर मेरी टांगें चौड़ा दीं।
अक्कू ने मेरे होंठों को चूसा फिर मेरे खुले मुँह में अपनी जीभ घुसा दी। हमरा वो बड़ों जैसा चुम्बन बहुत ही बेढंगा था पर हमारे लिए उसमे उतना ही प्यार और उत्तेजना थे जितनी आज है।
अक्कू ने मेरे छाती के उभारों को पापा के नक़ल करके ज़ोरों से मसलना लगा। मेरी दर्द भरी सिसकारी तो निकली पर मैंने अक्कू का हाथ अपने हाथ से अपनी छाती पर और भी कस कर दबा लिया।
अक्कू ने मेरे मटर के दानों जैसे छाती की घुन्डियाँ अपनी उंगली और अंगूठे में दबा कर कस कर मसल दीं.
” आह अक्कू ऊ आंह ,” मेरे मुंह से निकली लम्बी दर्द भरी सिसकारी ने अक्कू की प्रंशसा सी की।
अक्कू ने मेरा निचला होंठ दातों तले दबा कर कसके काट लिया। मेरी हल्की सी चीख निकल गयी पर मेरी मोटी गोल जांघों के नीचे में मेरी चूत से बहता पानी इकठ्ठा होने लगा।
अक्कू ने मेरे एक घुंडी अपने मुंह में ले ली और दूसरी को बेदर्दी से मसलने लगा। मेरे मम्मी जैसे मुलायम विशाल चूचियाँ तो नहीं थी पर अक्कू ने मेरी छाती के मोटे चर्बी के उभारों को उतनी ही निर्ममता से मसला जैसे पापा ने मम्मी के सुंदर चूचियों को किया था।
मेरे दर्द भरी सिस्कारियों में एक नया आनंद था जो मैंने कभी भी नहीं महसूस किया था।
‘अक्कू, हाय अक्कू और ज़ोर से मसलों अक्कू,” मैं बिना सोचे बोल उठी।
अक्कू ने मेरी दोनों घुन्डियाँ और छाती के उभारों को मसलते हुए अपना मुंह मेरी जांघों के बीच में दबा दिया। जैसे ही मेरे छोटे भाई का मुंह मेरे गुलाबी संकरी दरार पर लगा मैं चिहुंक गयी और मैंने ज़ोर से फुसफुसाया , “अक्कू मेरा अक्कू। ”
अक्कू ने अपने जीभ से मेरे चूत की पूरी दरार को चूम कर चाटने लगा। पता नहीं कैसे प्राकर्तिक रूप से मेरी चूत की दरार के दोनों छोटे से होंठ अलग हो गए और अक्कू की जीभ ने मेरे चूत के अंदर के द्वार को चाटते हुए मेरे पेशाब के छेद को ले कर मेरे चूत के ठीक ऊपर एक और मेरे छाती की घुंडी से भी छोटी घुंडी को अपने जीभ से संवेदन शील कर दिया।
मेरे चूतड़ पलंग से ऊपर उठ गए ,” अक्कू यह तो बहुत अच्छा था। एक बार फिर से करो अक्कू। ”
अक्कू ने अब बिना रुके मेरे छातियों को मसलते हुए मेरी चूत चटनी शुरू की तो तभी रुका जब मैं अचानक झड़ने लगी।
मेरी सांस मनो मेरे गले में अटक गयी। मेरा गोल मटोल शरीर तन कर कमान हो गया। अक्कू ने मेरे चूतड़ों को बिस्तर में दबा लिया पर फिर भी मैं हवा में थी।
फिर मेरे नीचे के पेट में तेज़ दर्द उठा जो जल्दी से मेरी चूत में पहुँच गया। उसके बाद तो मानों मेरा पूरा शरीर बुखार से जलने लगा।
मैं घबरा के चीखी , “अक्कू, मुझे कुछ हो रहा है। अक्कू……. अक्कू…. मेरा अक्कू ऊ.. ऊ… ऊ…. हाआआय….. ,” और मैं पलंग पर वापस शिथिल हो कर ढलक गयी।
अक्कू एक क्षण के लिए भी बिना रुके मेरी चूत छॉटे रहा। मेरी चूत में उसके चाटने से एक अजीब सा दर्द हो रहा था। अक्कू ने मेरी उसे रुक जाने की विनतियां को उनसुना कर दिया। अक्कू ने पापा से एक रात में बहुत कुछ सीख लिया था।
और वातव में मैं भी मम्मी की तरह कुछ देर में अक्कू को उकसा रही थी ,”अक्कू और ज़ोर से मेरी चूत चूसो। अक्कू अपने जीभ अंदर डाल दो। ”
अक्कू ने तो मेरी निर्देशों से भी आगे बढ़ गया। अक्कू अब मेरी गांड के छेद से ले कर मेरी पूरी चूत चाट रहा था। अब तक मैं समझ गयी थी कि अक्कू ने मुझे झाड़ दिया था। मैं खुशी से दूसरी बार झड़ने की प्रतीक्षा करने लगी।
अक्कू की जीभ अब मेरे पूरे शरीर में आग सी लगा रही थी। मैं कुछ मिनटों में ज़ोरसे चीख कर फिर से झड़ गयी। अक्कू ने मेरे हाँफते हुए शरीर को बाँहों में भर लिया।
मैंने अक्कू के होंठों पर अनगिनत प्यार से भरी पुच्चियाँ जमां दीं।
हम दोनों दस पंद्रह मिनट तक अपनी साँसे ठीक होने का इंतज़ार करते एक दुसरे को हलके हलके चूम रहे थे। मैंने अक्कू के उन्नत खम्बे जैसे खड़े लंड को सहला कर और भे सख्त कर दिया। मुझे अक्कू की रेशम जैसी चिकनी त्वचा का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर मैंने अक्कू से पूछा ,”अक्कू तुम अब मेरी गांड मारने के लिए तैयार हो ? तुम्हे याद हैना कैसे पापा ने मम्मी की गांड मारी थी ?”
अक्कू ने थोडा डरते हुए कहा ,” मम्मी को तो बहुत दर्द हुआ था , सुशी दीदी। ” अक्कू मुझे बहुत प्यार करता है और तब वो और मैं भी प्यार भरे दर्द और दर्द भरे दर्द के बीच के अंतर से अनभिज्ञ थे।
“अक्कू यदि मम्मी पापा को गांड मारने से मज़ा आता है तो शायद दर्द भी उसके लिए ज़रूरी है। ” मैंने छद्म-विज्ञान से उपजी परिकल्पना का सहारा लिया।
अक्कू ने फिर मुझे कायल कर दिया ,”पर दीदी हमारे पास पापा वाले ट्यूब कहाँ है ?”
मैंने माथा सिकोड़ कर सोचा। पापा ने उस ट्यूब को अपना लंड और मम्मी की गांड को गीला करने के लिए इस्तेमाल किया था। मुझे याद आये कि कितनी बार मम्मी जब अपनी अंगूठी आसानी से उतार नहीं पाती थीं तो वो अपनी उंगली को मुंह में ले कर गीला कर लेती थीं और फिर उनकी अंगूठी आसानी से निकल आती थी।
मैंने खुश खुश इस समस्या का हल अक्कू से बात लिया।
“अक्कू मैं तेरे लंड को मुंह से गीला कर दूंगी और तू मेरी गांड गीली कर देना बस उस से काम बन जाना चाहिए ,” मैं अपने प्यारे भैया के साथ आज की इकट्ठी की सारी शिक्षा का अभ्यास करने के लिए उतावली थी।
अक्कू ने मुझे मम्मी की तरह घोड़ी की तरह कोहनियों और घुटनों पर पलट दिया। उसने मेरे मुंह में अपना लंड घुसा दिया ,”दीदी, थूक लगा दीजिये। मैं आपको कम से कम दर्द करना चाहता हूँ। ”
मुझे तो मेरा अक्कू जान से भी प्यारा था और तब मैं कहाँ से और प्यार लेके आती उसके लिए ?
मैंने अक्कू के लंड को अपने ठोक से लिसलिसा कर पूरा गीला कर दिया।
अक्कू ने मेरी गांड के छेद को खूब अच्छे से चूसा और अपना थूक मेरी गांड के ऊपर उलेढ़ दिया।
अब मेरी गांड की चुदाई का समय आ गया था। मेरी तीव्र इच्छा के बावज़ूद भी मेरा दिल और भी तेज़ धड़कने लगा और मेरा गला सूख गया। अक्कू का लंड बहुत ही मोटा है , मेरे दिमाग में से यह ख्याल निकल ही नहीं पाया।
मेरी गांड के नन्हे छेद के ऊपर अक्कू के गरम और गीले मुंह के प्रभाव ने मेरी अविकसित चूत में हलचल मचा दी। मुझे बिना किसी पहले अनुभव के बिना भी अब अपनी गांड में कुछ अंदर लेने की इच्छा जागृत हो चली थी।
“अक्कू ,अब अपना लंड मेरी गांड में घुसा दो, प्लीज़। जैसे पापा ने मम्मी की गांड में ठूंसा था अपना लंड ,” मैं अब जल रही थी पर मुझे बाद में पता चलेगा कि वो कामवासना का ज्वर था, ” अक्कू प्लीज़।”
अक्कू ने हमेश के तरह अपनी दीदी की इच्छा का पालन किया। अक्कू ने अपने मोटे लंड के सुपाड़े को मेरी थूक से सनी गांड के छिद्र पर कस कर दबाया। मुझे ऐसा लगा कि अक्कू ने अपनी मुट्ठी मेरी गांड पर लगा दी हो। अक्कू ने और भी ज़ोर लगाया। पर मुझे सिर्फ दर्द होने के अलावा, कुछ और नहीं हुआ।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply