बड़े मामा ने बेसब्री से अपना वृहत लोहे के खम्बे जैसे सख्त लंड को मेरी चूत के द्वार के भीतर धकेल दिया।
मैं दर्द और आनंद के मिश्रण से बिलबिला उठी। बड़े मामा ने मेरी कमर को कस कर जकड लिया और तीन जानलेवा धक्कों से अपना दानवीय लंड मेरी कमसिन चूत में जड़ तक ढूंस दिया।
“हाय बड़े मामा थोड़ा धीरे से चोदिये,” पर मैं तब तक समझ चुकी थी कि पुरुष के बेसबरी से चोदने के दर्द में भी बहुत आनंद मिला हुआ था।
बड़े मामा खूंखार धक्कों से मेरी चूत का मरदन एक बार फिर से करने लगे। मेरी दर्द की सिस्कारियां वासना से लिप्त रति-निष्पति की घोषणा करते हुए कराहटों में बदल गयीं।
बड़े मामा का भीमकाय लंड पच-पच की आवाज़ें करता हुआ मेरी रति रस से भरी चूत इंजन के पिस्टन की तरह अंदर-बाहर आ जा रहा था।
मैं कुछ ही क्षणों में फिर से झड़ गयी। अगले घंटे तकना जाने कितनी बार मेरी चूत बड़े मामा के मूसल लंड से चुदते हुए झड़ी। जब बड़े मामा के लंड ने मेरी बिलबिलाती चूत में अपना गाढ़ा जननक्षम से भर दिया।
हम दोनों कुछ देर तक एक दुसरे से लिपटे रहे। मैंने बड़े मामा के लंड को चूस कर उनके वीर्य और अपने योनि के सत्व का रसास्वादन बड़े प्रेम से किया।
बड़े मामा ने मुझे आराम से गाड़ी में बिठा कर फिर से घर की ओर चल दिए।
दो घंटे बाद अगला पड़ाव उसी ढाबे पर था जिस पर हम पहली बार रुके थे।
मैंने फिर से अपना प्रिय खाना मांगा। ढाबे के मालिक ने मुझे पहचान कर खुद उठ कर हमें खाना परोसा , ” बिटिया थोड़ी थकी सी लग रही है। यदि आप चाहें तो पीछे के कमरे में आराम कर सकते हैं। हम उन कमरों को थके दूर तक सफ़र करते लोगों के लिए ही इस्तेमाल करते हैं। ”
बड़े मामा ने मुस्कराते हुआ कहा , ‘बहुत धन्यवाद। आप सही कह रहें हैं। बिटिया को थोड़ा आराम चाहिए। ”
ढाबे के मालिक के जाने के बाद बड़े मामा ने मुझे घूरते हुए कहा , “और हमें मालुम हैं कि बिटिया को कैसे आराम दिया जाता है। ”
मैं शर्म से लाला हो गयी और फुसफुसा कर बोली , “आप बहुत शरारती हैं बड़े मामा। क्या पता उन कमरों में कितना एकांत और गोपनीयता होगी। ”
“यदि ऐसा नहीं होगा तो आपको बिना चीखे चुदना पड़ेगा,” बड़े मामा ने मुझे चिड़ाया।
कमरा ढाबे से कुछ दूर था और घने पेड़ों और झाड़ियों से घिरा हुआ था। बड़े मामा को पूरे गोपनीयता मिल गयी और मेरी चूत और गांड की खैर नहीं थी. बड़े मामा ने दो घंटों तक मेरी चूत और गांड का बेदर्दी से मरदन किया। मेरी वासनऩयी घुटी चीखें और सिस्कारियों ने उस कमरे को सराबोर कर दिया।
बिचारे ढाबे के मालक को क्या पता कि बड़े मामा ने ‘बिचारी बिटिया’ को आराम करने के बजाय और भी थका दिया था। पर मुझे बड़े मामा के लंड के सिवाय कुछ और खय्याल भी दिमाग में नहीं आता था।
हम दोनों घर देर शाम से पहुंचे।
नेहा का परिवार – Update 75 | Erotic Family Saga

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.