नेहा का परिवार – Update 73 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
Reading Mode

इधर मीनू आखिर में जानकी दीदी के मर्द को भी शर्माने वाले सम्भोग से थक कर अनेकों बार झड़ कर लगभग बेहोश हो गयी। जानकी दीदी ने चार पांच अस्थि-पंजर धक्कों से अपने को एक बार फिर झाड़ लिया और मीनू को मुक्त कर दिया। वो परमानन्द से अभिभूत अश्चेत हो गयी।
मैं भी अब बेसुधी के कगार पर थी। नम्रता चाची का नकली लंड मेरी गांड को बुरी तरह से मथने के बाद भी मेरी गांड मार रहा था। नम्रता चाची एक बार फिर से झड़ गयीं और मैं भी सुबक कर नए ताज़े चरमानन्द के के मादक पर बेसुध करने में शक्षम प्रभाव से निसंकोच सिसकते हुए फ्रेश पर ढलक कर बेहोशी के आगोश में समा गयी। मुझे पता भी नहीं चला कि कब नम्रता चाची ने मेरी गांड में से अपना नकली रबड़ का मोटा लंड निकाल कर उसे प्यार से चाट कर साफ़ करले लगीं।
*************
ऋतू मौसी अब थकी-मांदी फर्श पर अपने नीतिम्बों पर बैठीं थीं। छः मर्द अब अपने आनंद के लिए झड़ने को उत्सुक थे। संजू ने अपने गरम वीर्य से अपने मौसी के खुले मुंह को नहला दिया। उसकी कमसिन वीर्य की धार ने ऋतु मौसी के मुंह को तो भर ही दिया पर उनके दोनों नथुनों में भी उसका गरम वीर्य भर गया। संजू के वीरू की फौवार उनके माथे पर और आँखों में भी चली गयी।
गंगा बाबा ने ऋतु मौसी का सर पकड़ कर स्थिर कर लिया। उनके बड़े मूत्र-छिद्र से लपक कर निकली वीर्य की बौछार ने ऋतू मौसी के मुंह को जननक्षम मीठे-नमकीन वीर्य से भरने के बाद उनके नथुनो में और भी वीर्य डाल दिया। गंगा बाबा ने ऋतु मौसी की दोनों आँखों को खोल कर उनमे अपना वीर्य का मरहम लगा दिया।
बड़े मामा भी पीछे नहीं रहे। हर बार ऋतु मौसी को मुंह भर गरम वीर्य पीने को मिलता और उनका सुंदर मुंह अब पूरा वीर्य के गाड़े रस से ढका हुआ था।
बड़े मामा की तरह नाना और राज मौसा ने ऋतु मौसी का मुंह, आँखे और नथुने अपने वीर्य से भर दिए।
सुरेश चाचा का गाड़ा वीर्य ने ऋतु मौसी को और भी निहाल कर दिया। उनके फड़कते उरोज़ भी वीर्य से ढक चले थे।
ऋतु मौसी वीर्य के स्नान के आनंद से एक बार फिर झाड़ गयीं।
उन्होंने उंगली से सारा वीर्य इकठ्ठा कर अपने मुंह में भर लिया। ऋतु मौसी ने बड़ी सावधानी से वीर्य की एक बूँद भी बर्बाद नहीं होने दी।
उनके दोनों नथुने वीर्य से भरे हुए थे और उनकी गहरी सांसों से उनके दोनों नथुनों में बुलबुले उठ जाते थे।
ऋतु मौसी अब छः पुरुषों के आखिरी उपहार के लिए मचल रहीं थीं ।
सब मर्दों ने अपने मूत्र की बारिश एक साथ शुरू कर दी। ऋतु मौसी सब तरफ घूम घूम कर गरम नमकीन मूत से अपना मुंह भर लेतीं और जल्दी से उसे सटक कर दुबारा तैयार हो जातीं।
ऋतु मौसी छः पुरुषों के पेशाब के स्नान से सराबोर हो गयीं। उन्होंने अनेकों बार अपना मुंह गरम पेशाब से भर कर उसे लालचीपन से निगल लिया।
ऋतु मौसी इतनी मादक हो गयीं थीं कि गरम मूत्र के स्नान मात्र से ही उनका रति-विसर्जन हो गया।
ऋतु मौसी एक हल्की चीख मर कर निश्चेत बेसुध अवस्था में फर्श पर लुड़क गयीं।
जैसी ही छः गर्व से भरे संतुष्ट पुरुष मदिरा पैन के लिए अगर्सर हुए वैसे ही नम्रता चाची और जानकी दीदी ने लपक कर ऋतु मौसी के शरीर को चाटना शुरू कर दिया।
दोनों बचे-कुचे वीर्य और उनके गरम मूत्र के लिए बेताब थीं।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply