नेहा का परिवार – Update 69 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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नम्रता चाची ने भी मुझे घोड़ी बना कर पीछे से मेरी चूत चोद कर मेरी हालत बहुत ख़राब कर दी थी। इस अवस्था में हम चारों ऋतू दीदी का सामूहिक लतमर्दन साफ़-साफ़ देख सकते थे।
हम सब अनेकों बार झड़ कर हांफ रहीं थीं। आखिर कार जानकी दीदी ने लगभग दो घंटों तक मीनू की गांड रौंदने के बाद अपना रबड़ का नकली लंड उसके मुँह में ठूंस दिया। मीनू सुबकते हुए जानकी दीदी के डिल्डो को चूस चाट कर साफ़ करने लगी। उसके चूसने के प्रयास से जानकी दीदी की चूत में घुसा लंड उनकी भी अति-संवेदन योनि को जला देता था। जानकी दीदी सिसक कर मीनू के मुँह को अपने लंड के ऊपर पर और भी ज़ोर से खींच लेतीं।
नम्रता चाची ने अपना लंड निकाल कर मुझे अपने गोद में बिठा कर मेरे ज़ोर से भारी भारी अध्-खुले मुंह को चूम चाट कर गीला कर दिया।
हम सब एक टक आँखें टिका कर छः अतृप्य लंडों की आगे की प्रक्रिया के लिए उत्सुक हो उठे। गहन सम्भोग के परिश्रम और प्रभाव से हम सब पसीने से लतपथ थे।
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कुछ एक फुसफुसाने के बाद एक बार फिर से पूर्णरूप से सचेत ऋतु मौसी को घेर कर सुरेश चाचा ने अपने छोटी साली को आदेश दिया, “चलिए साली साहिबा। अच्छी रंडी की तरह गांड चाटिये। आप की और आगे की चुदाई इस पर ही निर्भर करती है। ”
सारे छहों पुरुष एक सोफे पर अपनी टांगें ऊपर कर तैयार हो गये। ऋतु मौसी ने सिसक कर पहले अपने नन्हे भांजे की गोरी गुलाबी गुदा के छल्ले को अपनी जीभ से चाटने लगीं। उन्होंने संजू के चिकने चूतड़ों को और भी खोल कर उसकी मलाशय के तंग संकरे द्वार को चूम कर अपने जीभ से उसे खोलने लगीं।
ऋतु मौसी ने प्यार से दिल लगा कर संजू की गांड के नन्हे संकरे छिद्र को आखिर कायल कर राजी कर लिया और संजू का मलाशय द्वार होले-होले खुल गया। ऋतु मौसी ने गहरी सांस ले कर संजू के गुदा के अंदर की सुगंध से अपनी घ्राण इंद्री को लिया।
उनकी जीभ की नोक सन्जू की गांड में प्रविष्ट हो गयी। संजू की सिसकी ने उसकी प्रसन्नता को उजागर कर दिया।
ऋतु मौसी ने अपने प्यारे भांजे की गांड को अपने जीभ से चोदा और उसके गोरे चिकने अंडकोष को भी चूस कर उसे खुश कर दिया।
ऋतु मौसी ने अब गंगा बाबा के बालों से भरे चूतड़ों के बीच अपना मुंह दबा दिया। गंगा बाबा के चूतड़ों की दरार में उनके चोदने की मेहनत के पसीने की सुगंध ने वास्तव में ऋतु मौसी को पागल कर दिया। उन्होंने चटकारे ले कर ज़ोर से सुड़कने की आवाज़ों के साथ गंगा बाबा की गांड की दरार को चूम चाट कर अपने थूक से भिगो कर बिलकुल साफ़ कर दिया।
उन्होंने पहली की तरह गंगा बाबा की गांड को प्यार से अपनी जीभ से कुरेद कुरेद कर खोल दिया। उनकी विजयी जीभ की नोक गंगा बाबा के मलाशय की सुरंग में दाखिल हो गयी।
ऋतु मौसी ने गहरी सांस भर कर गंगा बाबा की गांड की महक का आनंद लेते हुए उनकी गुदा का अपनी गीली गरम जीभ से मंथन करना प्रारम्भ कर दिया। ऋतु मौसी के कोमल हाथ गंगा बाबा के भारी विशाल से ढके अंडकोषों को सहला कर उनके गुदा-चूषण के आनंद को और भी परवान चढ़ा रहे थे।
ऋतु मौसी ने गंगा बाबा की गांड का रसास्वादन दिल भर कर किया और उन्हें गुदा-चूषण के आनंद से अभिभूत करने के बाद वो अपने पिता के विशाल चूतड़ों के बीच फड़कती गांड की और अपना ध्यान केंद्रित करने को उत्सुक हो गयीं।
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ऋतु मौसी ने अपने पिताजी की आँख झपकाती मलाशय-छिद्र की आवभगत उतने ही प्यार और लगन के साथ की। उन्होंने नानू की गांड की गहराइयों को अपनी जिज्ञासु जिव्ह्या से कुरेद कर उनके मलाशय के तीखे, कसैले मीठे रस का आनंद अविरत अतिलोभी पिपासा से उठाया। ऋतु मौसी ने बारी-बारी से बाकी बची गांड भी लालच भरे प्यार और लालसा से कर सब मर्दों का मन हर लिया
राज भैया बोले, “पापा इस सस्ती रंडी ने बड़ी लगन से गांड चूसी है । क्या विचार है आप सबका इसे और चोदे या नहीं ?”
ऋतु मौसी जो अब कामाग्नि से जल रहीं थीं उठीं, “मुझे आपके लंड चाहियें। मुझे अब और नहीं तड़पाइये। ”
बड़े मामा ने नानू और गंगा बाबा को उकसाया ,”भाई मैं तो राजू से इत्तफ़ाक़ हूँ। इस रंडी ने और चुदाई का हक़ जीत लिया है। ”
नानू ने वासना के ज्वर से कांपती अपनी बेटी को गोद में उठा लिया। ऋतु मौसी ने अपनी गुदाज़ बाहें पिता के गले के इर्द-गिर्द फैंक कर अपनी जांघों से उनकी कमर जकड़ कर उनसे लिपट गयीं।

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