उन्होंने ने अपनी बेटी के रति रस से लबालब भरी गुलाबी अविकसित चूत में अपना अमानवीय विकराल लंड तीन अस्थी-पंजर हिला देने वाले धक्कों से जड़ तक डाल दिया। और फिर पहली चुदाई की तरह मीनू को जानलेवा धक्कों से चोदने लगे।
संजू ने भी अपने पिता की तरह मुझे दुसरे आसान में चोदने के लिए उत्सुक था। उसने मुझे पलट कर पेट के बल लिटा दिया औए मेरी जांघें फैला दीं। उसने अपना मूसल मेरी रस भरी चूट में जड़ तक दल कर फिर से मेरी चूट की दनादन धक्कों से चोदने लगा।
कमरे में एक बार फिर से सहवास की आग में जलती दो लड़कियों की सिस्कारियां और दो के मालिक पुरूषों की गुरगुराहटें गूँज उठीं।
संजू अपने पिता से मानो होड़ लगा रहा था। मेरे पट लेटने से और उसके पीछे से मेरी चूत के मर्दन से मेरी चूत और भी तंग और संकरी महसूस हो रही थी। संजू का मोटा लंड अब मुझे और भी मोटा लगने लगा। संजू के गले से ‘हूँ हूँ’ की घुटी घुटी गुरगुराहट से उबलने लगीं।
संजू अब अपने धक्कों में और भी ज़ोर लगा रहा था। मेरी सिस्कारियों में हल्की से चीखें भी शामिल हो चलीं। मैंने मुलायम चादर को दाँतों के बीच लिया। संजू के हर तक्कड़ मेरे सारे शरीर को हिला रहे थी। सुरेश चच ने भी मीनू की चुदाईकी रफ़्तार और आधिक्य को और भी परवान चढ़ा दिया था।
मीनू मेरी तरह अब अनगिनत बार झड़ चुकी थी। उसका अपरिपक्व छोटा हल्का सा शरीर अपने विशाल पिता के नीचे दबा था पर फिर भी उनके हर धक्के से बेचारी सर से पाँव तक हिल रही थी। पर अब मुझे पुरुषों की बेदर्दी से उपजे आनंद का अभ्यास हो गया था। मीनू हालांकि मुझसे तीन साल छोटी थी पर उसका सम्भोग का अनुभव मुझसे तीन साल अधिक था।
“पापा, आपका घोड़े जैसे लंड मेरी चूत फाड़ कर ही मानेगा। मुझे और भी ज़ोर से चोदिये, पापा ई …………ई …………ई ………… मैं फिर से झड़ने वाले हूँ। आह आआन्न चो ……… ओ …………ओ …………दिये मर गयी मैं तो ………… हाय मम्मी………… ई …………ई …………ई,” अगम्यगमनात्मक आग में जलती मीनू ने अपने नविन चरम-आनंद की घोषणा कर दी।
मैं भी एक बार से कामोन्माद के पराकाष्ठा पे पहुँच कर कौटुम्बिक व्यभिचार की आनद की घाटी में लुड़क गयी।
संजू और चाचू ने मीनू और मुझे आधा घंटा और चोदा। तब तक हम दोनों रति-निष्पति के उन्माद के अतिरेक से अभिभूत हो कर शिथिल हो गयीं थीं। हम दोनों की सिस्कारियां बहुत मंद हो चलीं थीं।
कुछ क्षणों में संजू ने गुर्रा कर ज़ोर से अपना लंड मेरी चूत में ढूंस कर मेरे बिखरे रेशमी केशों में अपना हांफता हुआ सुंदर मुखड़ा छुपा लिया। उसके लंड ने मेरी योनि के भीतर जननक्षम वीर्य की बौछार कर दी। मैं, अपने गर्भाशय के ऊपर संजू के उबलते वीर्य की हर पिचकारी के संवेदन से सुबक गयी। मैं निरंतर रति-निष्पति से थक कर निश्चेत हो गयी। उसके पिता ने उसकी अविकसित चूत और गर्भाशय को अपने उर्वर फलदायक गरम वीर्य से नहला दिया। मीनू एक बार फिर से अपने पापा के लिंग स्खलन के प्रभाव से चीखे बिनाना रह सकी।

