कुछ देर बाद मुझे होश सा आया और मैंने संसर्ग में लिप्त सुरेश चाचू, बड़े मामा, नम्रता चाची और जानकी दीदी की तरफ ध्यान दिया।
गंगा बाबा का वृहत लंड थोड़ा सा नर्म हो चला था। पर उसका अमानवीय आकार मेरी कमसिन चूत को अभी भी बेदर्दी से फाड़ सकता था।
बड़े मामा ने नम्रता चाची को चोद कर बिलकुल निश्चेत कर दिया था। नम्रता चाची गहरी गहरी साँसे ले कर आँखे बंद किये हुए अपनी शरीर की अशक्त हालत को पुनः स्थिर करने का प्रयास कर रहीं थीं।
सुरेश चाचा के जादू भरे हाथ जानकी दीदी की चूचियों और चूचुक मसल सहला कर तरसा रहे थे। उनका विशाल लंड जानकी दीदी की चूत को बिजली की रफ़्तार से मार रहा था। उनकी सिस्कारियां कभी फुसफुसाहट और कभी हल्की चीख के रूप में निरंतर कमरे में गूँज रहीं थीं।
बड़े मामा ने अपना विकराल नम्रता चाची के रति रस से सने हुए लंड को उनकी थकी योनी से बाहर निकाल कर सुरेश चाचा के लंड के ऊपर अटकी जानकी दीदी की भरी गांड की तरफ इन्द्रित कर दिया।
“रवि, जानकी की गांड खुली हुई है, इंतज़ार किस बात का है,” सुरेश चाचा ने बेदर्दी से एक बार फिर नीचे से जानकी दीदी की चूत में अपना लंड निर्मम वासनादायक उत्तेजक धक्के से जड़ तक ठूंस दिया।
जानकी दीदी सिसक कर बोलीं, “हाय, सुरेश भैया, एक तो बेदार्दी से पहले ही अपनी बहिन की चूत मार रहे हैं और ऊपर से दुसरे भाई को उस बिचारी की गांड फाड़ने के लिए निमंत्रित कर रहे हैं।”
सुरेश चाचा ने जानकी दीदी के दोनों चुचुकों को वहशियों की तरह खींच कर कस के उमेठ दिया। जानकी दीदी की चीख निकल गयी।
बड़े मामा ने भोलेपन से दर्द से मचलती जानकी दीदी से पूछा ,” क्या हमें अपनी छोटी बहिन की गांड नहीं मिलेगी?”
जानकी दीदी सिसकीं और फुसफुसा कर बोलीं, “रवि भैया, क्या आपकी बहिन ने आपको चोदने से कभी भी रोका है? मेरी गांड आप जैसे भी मन करे मार लीजिये।”
बड़े मामा नेकी और बूझ-बूझ के अंदाज़ में जल्दी से जानकी दीदी के भारी फूले हुए नितिम्बो को सुरेश चाचा के बड़े बलवान हाथों में थमा कर उनकी नाज़ुक तंग गांड के हलके गुलाबी-भूरे छिद्र के ऊपर अपने लंड के विशाल सेब जैसे मोटे सुपाड़े टिका दिया।
सुरेश चाचा ने जानकी दीदी की चूत को अपने लंड की जड़ तक फाँस कर उनकी गांड को अपने मित्र और भाई के लिए तैयार कर दिया।
बड़े मामा ने ने बलपूर्वक ज़ोर से जानकी दीदी के मलाशय के द्वार को अपने विकराल लंड के सुपाड़े से धीरे-धीरे चौड़ा कर खोल दिया। अचानक जानकी दीदी के नन्हे तंग गुदा-छिद्र ने हथयार डाल दिए। जानकी दीदी के गले से चीत्कार उबल उठी। बड़े मामा का सेब जैसा मोटा सुपाड़ा जानकी दीदी की गर्म मुलायम अँधेरी मलाशय की गुफा में प्रविष्ट हो गया।
बड़े मामा ने जानकी दीदी को कुछ क्षण दिए उनकी गांड में उपजे दर्द को कम होने के लिए।
सुरेश चाचा ने अपनी जीभ दर्द से मचलती जानकी कान की सुंदर नाक में डाल उसे अपने थूक से भिगो दिया। जानकी दीदी उत्तेजना से कसमसा उठी, “इसका मतलब है आपको गांड मरवाने की कामना थी ?”
जानकी दीदी सुरेश चाचा की बाहों में मचल गयी, “मैं तो सिर्फ आप का दिल रखने के लिए रवि भैया से अपनी गांड मरवा रहीं हूँ। क्या कोई भी समझदार लड़की आपके और रवि भैया के घोड़े जैसे लंड से इकट्ठे अपनी गांड और चूत फटवाना चाहेगी?”
बड़े मामा ने हंस कर अपने लंड को जानकी दीदी की गांड में और भी अंदर तक धकेल दिया। जानकी दीदी चिहुक उठी।
सुरेश चाचा ने जानकी दीदी को अपने बहुशाली हाथों से जकड़ कर स्थिर कर रखा था।
बड़े मामा ने जानकी दीदी की मुलायम गोल भरी कमर को कस कर तीन चार भयंकर धक्कों से अपना विशाल खम्बे जैसा लंड जड़ तक बिलखती जानकी दीदी की गांड में ठूंस दिया।
बड़े मामा और सुरेश चाचा पहले धीरे धीरे बिलखती सिसकती जानकी दीदी की दोहरी चुदाई करनी प्रारंभ की। थोड़ी देर में ही जानकी दीदी की सिसकियाँ ने दूसरा रूप अंगीकृत कर लिया। उनकी सिस्कारियों में अब दर्द कम और कामवासना का अधिकाय हो उठा था।
बड़े मामा और सुरेश चाचा ने जानकी दीदी की गांड और चूत इकट्ठे मारने की लय बना कर चुदाई की रफ़्तार बड़ा दी।

