नेहा का परिवार – Update 52 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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तीनों मर्दों ने अपनी गोद में बैठी वासना से जलती सम्भोग की साझीधार को अपनी बाँहों में उठा लिया और भीतर हाल की ओर त्वरित कदमों से चल पड़े।
गंगा बाबा ने मुझे दीवान के ऊपर लिटा दिया और मेरा कुरता शीघ्र फर्श पर था। मेरा जांघिया मेरे रतिरस से गीला हो गया था। गंगा बाबा ने उसे अपने मुंह से लगा कर ज़ोर से सूंघा और फिर उसे चाटने लगे।
गंगा बाबा के व्यवहार से मैं और भी कामुकता से जल उठी।
मैंने उठ कर बाबा के कुर्ते के बटन खोल कर उसे उतारने की अधीरता से मचलने लगी।
गंगा बाबा ने हंस कर अपना कुरता उतार दिय. तब तक मेरे अधीर हांथों ने उनके पजामे के नाड़े को खोल कर उसे उनकी जांघो से नीचे गिरा दिया।
अब गंगा बाबा का विशाल लंड मेरे मुंह के ठीक सामने था।
मैंने अपने छोटे छोटे हाथों से उनके विकराल लंड को उठा कर उनके सेब जैसे सुपाड़े को बड़ी मुश्किल से अपने मूंह में भर लिया।
गंगा बाबा का लंड पहले से ही तन्ना रहा था। मेरे मुंह की गर्मी से कुछ ही क्षणों में उनका भीमकाय लंड लोहे की तरह सख्त हो गया और एक सपाट के खम्बें की तरह छत की तरफ उन्नत हो गया।
मैं अब बड़ी मुश्किल से उसे चूसने के लिये नीचे कर पा रही थी।
गंगा बाबा ने मुझे अपने लंड से अलग कर दीवान पर लिटा दिया। कमरे में अलग दीवानों पर अब नम्रता चाची और जानकी दीदी पूरी नग्न लेटी हुईं थी।
सुरेश चाचा जानकी दीदी की मांसल झांघों में अपना मुंह दबा कर उनके मीठी रतिरस को चाट रहे थे। उनकी कुशल जीभ अविरत जानकी दीदी की सिस्कारियां उत्पन्न कर रही थी।
बड़े मामा नम्रता चाची के विशाल गद्देदार स्तनों पर अपना पूरा वज़न डाल कर बैठे हुए थे। उन्होंने अपने हाथों से नम्रता चाची के सर तो ऊपर उठाया हुआ था जिस से वो उनके मूसल दानवीय लंड को चूस सकें।
मेरा ध्यान शीघ्र ही अपनी कसमसाती चूत पे वापस आ गया। गंगा बाबा ने अपने मूंह में मेरी चूत को भर का निर्ममता से उसे चूसने लगे। मेरी सिसकारी कामवासना और थोड़े दर्द से भरी हुई थी।
गंगा बाबा ने अपनी खुरदुरी जीभ से मेरे भगशिश्न को तरसाने लगे।मेरे नितिम्ब स्वतः दीवान से उठ कर मेरी चूत को गंगा बाबा के मुंह में दबाने लगे।
“गंगा बाबा अब मुझे चोदिये, प्लीज़,” मैं कामवासना से छटपटा रही थी।
गंगा बाबा ने मेरे सुडौल टखनों को पकड़ मेरी मांसल झांघों को पूरा फैला कर मेरे अविकसित योनी द्वार को अपने वृहत लंड के आक्रमण के लिए खोल दिया।
गंगा बाबा का लंड बड़े मामा के लंड की तरह विशाल, लंबा और मोटा था।
गंगा बाबा ने मेरे पैर दीवान पर रख कर मेरी खुली मांसल जांघों के बीच अपने घुटनों पर बैठ गए।
गंगा बाबा ने अपने भीमकाय लिंग के सुपाड़े को मेरी गीली फड़कती हुई चूत के तंग रेशम जैसे नर्म मुहाने पे पांच छे बार रगड़ कर उसे स्थिर कर धीरे से मेरी चूत के अंदर दबाने लगे। मैं धीरे से सिसक उठी। मेरी कमसिन अविकसित चूत गंगा बाबा के सेब जैसे सुपाड़े के दवाब से चौड़ी होने लगी।
मैंने कस कर अपना निचला होंठ अपने दांतों के बीच दबा लिया। अचानक एक झटके से गंगा बाबा का पूरा सुपाड़ा मेरी नन्ही चूत के अंदर समा गया। मेरी चूत एक बार फिर से मोटे लंड के ऊपर अमानवीय आकार में फ़ैल गयी।
गंगा बाबा अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चूत में फंसा कर मेरे ऊपर लेट गए। मैंने अपनी दोनों बाँहों से उनकी गर्दन को कस कर जकड़ लिया।
गंगा बाबा ने अपने खुले मूंह को मेरे सिसकते मूंह से कस कर चुपका दिया। उन्होंने अपने लंड के सुपाड़े को धीरे धीरे गोल गोल घुमा कर मेरी तंग योनि के द्वार को ढीला करने लगे।
मेरी सिस्कारियां मेरी तड़पती चूत की हालत बयान कर रहीं थीं।
मेरे कानों में पहले एक फिर दूसरी चीख भर गयीं। पहली चीख जानकी दीदी की थी और दूसरी नम्रता चाची की। स्पष्टः यह सुरेश चाचा और बड़े मामा के विशाल लंड का उनकी कोमल चूत पर बेदर्दी से आक्रमण का परिणाम था।
अगले दो तीन मिनटों तक जानकी दीदी और नम्रता चाची की दर्द और वासना भरी चीखें हाल में गूँज रहीं थीं। पर शीघ्र ही उनकी चूत विकराल लंडों के ऊपर फ़ैल गयीं।
अब हाल में उनकी सिस्कारियां गूंजने लगीं।
मैं अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकती थी। मेरा धैर्य निरस्त हो चुका था, “गंगा बाबा मुझे चोदिये। अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दीजिये।”
जैसे गंगा बाबा मेरी प्रार्थना का इंतज़ार कर रहे थे। उनके विशाल शक्तिशाली कुल्हे पहले एक बार सुकड़े फिर उनकी मज़बूत कमर के मिलेजुले प्रयास से उन्होंने अपना विकराल भीमकाय लंड निर्ममता से मेरी चूत में जड़ तक ठूंस दिया। मेरी चीख जानकी दीदी और नम्रता चाची से भी ऊंची थी।
“गंगा ……… बा आआआअ बा आआआआआ। आआआआह धीरे ऎऎऎऎए …….. ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ………… बहुत दर्द आआआह …………. ,” मैं दर्द से तड़प उठी।
पर गंगा बाबा ने सुरेश चाचा और बाद मामा की तरह जितनी निर्ममता से अपना लंड मेरी कमसिन चूत में ठूंसा था उन्होंने उसे बाहर खींच कर एक बार फिर उतनी बेदर्दी से से उसे मेरी योनि में जड़ तक डाल दिया।
गंगा बाबा ने मेरी चूत मर्दन जानलेवा भयंकर धक्कों से करना शुरू कर दिया।
मेरी चूत मुझे लगा की मानों फट जायेगी। पर अब मुझे ज्ञान हो चला था कि मेरी चूत पहले जितना भी दर्द करे पर थोड़ी देर में गंगा बाबा मोटे लम्बे लंड के आनंद से अभिभूत हो जायेगी।
गंगा बाबा ने मेरे होंठो को चूस कर उन्हें सुजा दिया।
मैं अब सिसक सिसक कर गंगा बाबा के लंड का स्वागत कर रही थी। उनका लंड मेरी रस से भरी चूत में सपक सपक की आवाज़े पैदा करते हुए रेल इंजन के पिस्टन की तरह अविश्वसनीय रफ़्तार से मेरी चूत में अंदर बाहर आ जा रहा था।
मैं गंगा बाबा से कस कर लिपट गए और मेरी जाँघों ने उनकी कमर को अपनी गिरफ्त में लेने का असफल प्रयास किया।
गंगा बाबा के वृहत भीमकाय मूसल ने पांच मिनटों में मुझे कामोन्माद के द्वार पर ला पटका।
“आआआआह ……… गंगा बाबा ………. आआआआअ मैं आने वाली हूँ,” मैं वासना के ज्वार से सुलगते हुए बुदबुदाई।
गंगा बाबा ने मेरे सुबकते मुंह को अपने मर्दाने मुंह से दबोच लिया और उनका लंड अब दनादन मेरी चूत को बेरहम धक्कों से चोद रहा था।
शीघ्र ही मैं झड़ने लगी। मेरी सिसकारी हल्की सी चीख में बदल गयी।
गंगा बाबा ने बिना धीरे हुए मेरी चूत का मर्दन निरंतर अविरत भीषण धक्कों से करते हुए मेरी चूत को दुसरे रतिविसर्जन को तैयार कर दिया।
मैं अब वासना की आग से पागल सी हो उठी। मैं सुबक सिसक कर अपनी चुदाई के आनंद के अधिक्य से बिलबिला रही थी।
मेरे कान अब जानकी दीदी और नम्रता चाची की सिस्कारियों की तरफ बेहरे हो गए थे। अब मेरा पूरा ब्रह्म्बांड मेरी चूत में पिस्टन की तरह चलते गंगा बाबा के विकराल लंड के ऊपर सिमट चुका था।
गंगा बाबा ने अपने धक्कों में और भी ज़ोर लगाना शुरू कर दिया। मेरा पूरा शरीर उनके भारी विशाल शरीर के नीचे दबे होने के बावज़ूद उनके हर भीषण धक्कों से सर से पैर तक हिल रहा था।
मैं अब तक ना जाने कितने बार झड़ चुकी थी। मैं अब कामानंद के अविरत आक्रमण से हवा में डोलते पत्ते की तरह कांप रही थी।
गंगा बाबा का लंड मेरी चूत में अभी भी एक बेदर्द धक्के के बाद दूसरा धक्का लगा रहा था।
मैं थोड़ी देर में नए रतिविसर्जन के आनंद से डोल उठी। मेरा मस्तिष्क उत्तेजना और कामानंद के प्रभाव से शिथिल हो जा रहा था।
मेरा आखिरी कामोन्माद इतना तीव्र गहन और प्रचंड था कि मैं एक चीख मार कर दीवान पर शिथिल हो कर निसहाय लेट गयी। मैंने अपने आप को गंगा बाबा और उनके भीमकाय लंड के ऊपर न्यौछावर कर उनके रहम और उनकी करुणा के ऊपर छोड़ दिया।

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