हम सब को लम्बे सम्भोग के मेराथन के श्रम की वजह से बहुत भूख लगी थी।
गंगा बाबा ने स्त्रियों के लिए सफ़ेद मदिरा और पुरुषों के लिए बियर का प्रयोजन किया था।
मुझे भी मदिरा के दो गिलास मिल गए। स्वादिष्ट भोजन और मदिरा के प्रभाव से शीघ्र ही मेरा अल्पव्यस्क मस्तिष्क चकराने लगा।
नम्रता चाची ने हंस कर कहा, “चलिए आप सबने ने मेरी नन्ही नेहा को शराब पिला कर नशे में धुत कर दिया। इस अवस्था में तो बेचारी किसी को भी चोदने से मना नहीं कर पायेगी।”
मैं थोड़ा सा शर्मायी पर शराब के आगोश में मैंने थोड़ी सी नम्रता चाची जैसी शरारत भरी हिम्मत पा ली थी, ” चाची मुझे शराब का सहारा नहीं चाहिए अपनी चुदाई के निमंत्रण के लिये। मैं तो अब चुदने के लिए पूरी तैयार हूँ।”
मेरे गाल अपनी बेशर्मी भरी बातों से सुर्ख लाल हो गये।
नम्रता चाची ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी मुझे अपनी गोद में खींच लिया, “देखा आप सबने। मेरी छोटी सी बिटिया कितनी निखर गयी है।”
नम्रता चाची ने मेरे सूजे हुए होंठो को प्यार से चूम कर मेरे दोनों उरोजों को हलके झीने सूती लगभग पारदर्शी कुर्ते के ऊपर से मसल दिया, “नेहा बेटी, यहाँ तीन विकराल लंड चूत और गांड की गहरायी नापने के लिये बहुत उत्सुक हैं। थोड़ा सावधानी से बोलो कहीं लेने के देने ना पड़ जाएँ।”
मैं अब थोड़ा शराब और बड़े मामा और सुरेश चाचा के भीषण सम्भोग के प्रभाव से शायद बेशर्म हो चली थी, “नम्रता चाची, मैं तो अब किसी भी विकराल लंड के लिये तैयार हूँ पर मुझे आप और जानकी दीदी का भी तो ध्यान रखना है। आखिर में कम से कम एक लंड तो आप दोनों के लिए भी छोड़ना पड़ेगा।”
नम्रता चाची ने तब तक मेरे कुर्ते के सारे बटन खोल दिए थे। उनके कोमल हाथों ने मेरे दोनों अविकसित पर भारी उरोजों को सहलाने लगे, “नेहा बेटी अभी आपने सारे लंड कहाँ लिए हैं?,”
नम्रता चाची ने प्यार से मेरी नाक की नोक को हलके से काट कर मुस्करा कर कहा, “गंगा भैया के लंड से तो अभी तक आपका परिचय नहीं हुआ।”
मैं थोडा सा शर्मा कर बोली, “मैं तो तैयार हूँ। गंगा बाबा ने अब तक पूछा ही नहीं। मैं शायद जानकी दीदी जैसी सुंदर नहीं हूँ।”
सब मेरी बचकानी मासूम बातों से हंस दिये।
“नेहा बिटिया। हमारी नज़र में तो हमारी सारी बेटियों से सुंदर कोई कहीं भी नहीं है”, गंगा बाबा ने भी हंस कर मुझे और शर्म से लाल कर दिया।
मै शर्मा कर नम्रता चाची की गोद से उठ कर गंगा बाबा की भारी भरकम गोद में समा गयी। उनके भरी शक्तिशाली बाँहों ने मुझे कस कर जकड लिया।
“जानकी चलो, हमारी नेहा ने तो अपनी चूत की मरम्मत का इंतज़ाम कर लिया हमें भी तो एक लंड का इंतजाम कर लेना चाहिये।” नम्रता चाची ने खिलखिला कर कहा।
सुरेश चाचा ने अपनी खाली गोद को दिखा कर हँसते हुए कहा, “भाई हमारी गोद तो तैयार है। कोई बैठने वाली चाहिये।”
जानकी इठला कर झट से सुरेश चाचा की गोद में बैठ गयीं। नम्रता चाची भी अधीरता दिखाते हुए बड़े मामा की गोद में बैठ गयीं, “मुझे तो अपने रवि भैया की गोद और उसमे बसे दानव मिल जाये तो मैं तो बहुत खुश हूँ .”
हम सब पेट की क्षुदा शांत होने के बाद कामवासना की क्षुदा से विचलित हो चले थे।
मेरी दोनों बाहें गंगा बाबा की मोटी बलवान गर्दन के इर्द गिर्द जकड़ गयीं।
शीघ्र ही उनके मोटे होंठ मेरे नाज़ुक होंठो से चिपक गए। हमारी जीभ एक दुसरे की जीभ से लड़ने लगी। गंगा बाबा की जिव्हा के ऊपर से फिसलते हुए उनकी लार से मेरा मुंह भर गया।
मैंने गंगा बाबा के गरम थूक को निगल कर और भी कामुकता से उनके होंठो को चूसने लगी। गंगा बाबा के बड़े भारी खुरदुरे हाथों ने मेरे फड़कते उरोज़ों का मर्दन करना शुरू कर दिया था। मेरी सिस्कारियां गंगा बाबा के मुंह में समा गयीं।
मैं गंगा बाबा के मर्दाने चुम्बन और स्तनमर्दन से काम वासना से जल उठी थी। गंगा बाबा का लिंग मेरे नितिम्बों के नीचे धीरे धीरे सख्त हो चला था। हम दोनों नम्रता चाची की सिसकती आवाज़ से वापस धरती पर आ गए, “हम लोगों को वापस हाल में अंदर चलना चाहिये।”
मैंने देखा कि नम्रता चाची के दोनों विशाल स्तन बड़े मामा की बेदर्द रगड़ाई से लाल हो गए थे।
सुरेश चाचा ने भी जानकी दीदी के सुंदर बड़े भारी उरोज़ों को मसल मसल कर उन्हें सख्त और लाल कर दिया था।
नेहा का परिवार – Update 51 | Erotic Family Saga

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