नेहा का परिवार – Update 49 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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रेश चाचा और मैं सुबह देर तक सोते रहे। जब नम्रता चाची और बड़े मामा ने हमें उठाया तब भी मैं सुरेश चाचा की बाँहों में थी। उनका लंड अभी भी मेरी गांड में घुसा हुआ था। सुबह सवेरे भी उनका लंड तन कर मेरी गांड को प्रताड़ित करने के लिए उत्सुक था।
मैं अभी भी निद्रालु थी पर नम्रता चाची की चहकती मदुर आवाज़ ने मेरी नींद खोलने में मदद की।
“नेहा बेटी, मैं तो आपसे बहुत ही प्रभावित हूँ। आपने अपने चाचू का लंड अभी भी गांड में छुपा रखा है,” बड़े मामा और नम्रता चाची बिलकुल नग्न थे। नम्रता चाची का भरा गदराया हुआ शरीर और अत्यंत आकर्षिक चेहरा रात की प्रचंड चुदाई से निखरा हुआ था। उनके विशाल विपुल स्तन बड़े भारी और उनके छाती के ऊपर ढलक रहे थे। गोल थोड़े उभरे हुए पेट के के साथ उनकी भरी कमर के ऊपर दो तहों के बीच में एक गहराव था। उसके नीचे उनके दो विशाल, गदराये, विपुल नितिन्म्ब उनकी भारी गुदाज़ नारी सुलभ जाँघों और गोल भरी-भरी टखनों को और भी सुंदर बना रहे थे। उनके छोटे कोमल पैर एक सम्पूर्ण नारी का चित्रण करते प्रतीत हो रहे थे।
नम्रता चाची के पेट, नितिम्बों और जाँघों पर दो गर्भों के बाद के खिंचाव के निशान उन्हें और भी नारीत्व का आकर्षण प्रदान कर रहे थे। नम्रता चाची के रोम रोम से झलकता नारीसुलभ इन्द्रिय सौंदर्य जनक्षम ईश्वरीय सुन्दरता का द्योतक था।
जब तक मैं नम्रता चाची की देवितुल्य सुन्दरता के मोहक सम्मोहन से बहार निकल पाई तब तक उन्होंने मुझे अपने पति से छीन कर अपने बाँहों में भर लिया था। उनके गुलाबी होंठ मेरे होंठो से चिपक गए। उनके मूंह सोने के बाद के सवेरे का मीठा स्वाद मेरे उस स्वाद से मिल गया।
मैंने भी अपनी बाहें चाची के इर्द-गिर्द डाल दीं।
चाची ने मेरे निचले होंठ को चूसते हुए कहा, “नेहा बेटी, मुझे आपकी चूत और गांड में अपने पति का वीर्य चाहिए।”
मेरे मूंह से मेरे बिना समझे शब्द निकल गए, “चाची यदि आप भी मुझे अपनी चूत और गांड में भरे बड़े मामा का मर्दाने शहद देंगीं।”
नम्रता चाची ने मेरी नाक की नोक को प्यार से काट कर कहा, “मेरी बेटी तो दो तीन दिन ही में इतनी चुदक्कड़ बन गयी है।”
मैंने भी इठला कर कहा, “आप और सुरेश चाचा जैसे शिक्षक मिलने का कमाल है यह तो।”
पर मैं ऐसी अश्लील वार्तालाप से शर्म के मारे लाल हो गयी।
“नेहा बेटी आप अपने बड़े मामा को तो भूल ही गयीं,” सुरेश चाचा ने मुझे और भी शर्म से लाल कर दिया। मेरी उलझी हुई हालत देख कर नम्रता चाची, बड़े मामा और सुरेश चाचू ज़ोर से हंस दिए।
नम्रता चाची ने मेरे दोनों दर्दीले चूचियों को मसल कर कहा, “नेहा बेटी अब मुझे अपनी चूत और गांड का प्रसाद दे दो। आज मुझे दो मोटे लंडो से एक साथ चुदना है।”
मैं नम्रता चाची के मूंह के ऊपर अपनी चूत रख कर उनके खुले मूंह के अंदर अपने योनी में भरे सुरेश चाचा के मर्दाने शहद को बाहर धकेलने लगी। नम्रता चाची ने टपकती बूंदों के रिसाव को प्यार से अपने मूंह में भर लिया। नम्रता चाची ने मेरी चूत में अपनी जीभ अंदर तक डाल कर मेरे रतिरस और सुरेश चाचा के लंड के जननक्षम द्रव्य को चाट कर सटक गयीं।
उन्होंने मेरे नितिन्म्ब खींच कर अपने मूंह के ऊपर मेरी गांड रख ली। मैंने ज़ोर लगा कर अपनी बेदर्दी से चुदी सुरेश चाचा के वीर्य से भरी गांड को नम्रता चाची के मूंह में खाली करने का प्रयास करने लगी।
नम्रता चाची ने अपनी गीली जीभ से मेरे झपकते हुए गुदा के छिद्र को चाट कर मुझे और भी उत्साहित करने लगीं। आखिर कार मेरी गांड में से एक मोटी लिसलिसी धार फिसल कर नम्रता चाची की मूंह में टपकने लगी। नम्रता चाची ने मेरे गांड से सुगन्धित अपने पति के गाड़े वीर्य को लपक कर अपने मूंह में भर लिया। मैंने ज़ोर लगा कर और भे भीतर से सुरेश चाचा के वीर्य को नीचे धकेल कर अपनी गांड से बाहर निकाल कर नम्रता चाची के अधीर मूंह में भर दिया।
नम्रता चाची ने सारा पदार्थ इच्छुक उत्साह से सटक लिया।

अब मेरी बारी थी। नम्रता चाची के विशाल गदराये नितिन्म्बओं ने मुझे बहुत मोहक लगे। उन्होंने अपनी घने रेशमी बालों से ढकी चूत को के भगोष्ठों को फैला कर अपनी गुलाबी चूत के द्वार को मेरे मूंह के ऊपर टिका दिया। शीघ्र ही बड़े मामा के जनक्षम वीर्य की धार नम्रता चाची की योनी की सुरंग से फिसल कर मेरे मूंह में टपकने लगी। मुझे बड़े मामा के वीर्य की तीव्र सुगंध अत्यंत मादक लगी। जब नम्रता चाची की चूत से सारा बड़े मामा का रस मेरे मूंह में समां गया तब मैंने उसे लालचपन दिखाते हुए सटक लिया।
नम्रता चाची ने अपने प्रचुर विशाल नितिम्बों को अपने कोमल हाथों से फैला कर अपनी भूरी गुदा का छिद्र मेरे मूंह के ऊपर टिका कर नीचे की ओर ज़ोर लगाया। उनकी मेहनत का पुरूस्कार जल्दी ही मेरे मूंह में टपकने लगा। बड़े मामा ने भी, सुरेश चाचा की तरह, चाचीजी की गांड बहुत बार मारी होगी। उनकी गांड में से उनकी चूत से भी अधिक वीर्य मेरे मूंह में भर गया।
मैंने सारा स्वादिष्ट पदार्थ सटक कर नम्रता चाची की गांड को प्यार से चाट कर उन्हें धन्यवाद दे दिया।

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