नेहा का परिवार – Update 34 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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सुधा अपने ससुर की हिंसक चुदाई के बाद थोड़ी देर आराम करने के लिए लेट गयी थी। बेचारी सुधा तीन परिवार के लंड से चुदवा कर बहुत थक गयी थी और वो देर तक सोती रही। नीचे एक करीब ६० साल का एक हृष्ट-पुष्ट पुरुष सूटकेस के साथ हॉल में खड़ा था। उसकी शक्ल काफी सुधा से मिलती-जुलती थी। उसने सूटकेस फर्श पर रख कर सुधा को ढूँढने लगा। सब दर्शकों को एक क्षण लगा यह निर्णय लेने में कि वो महाजन सुधा के पिता जी थे।
अपनी बेटी को नीचे ना पा कर सुधा के पिताजी ऊपर चल पड़े।
विश्राम-गृह में उनकी प्यारी बेटी नग्न बिस्तर में सो रही थी। पिताजी ने प्यार भरी निगाह से अपनी सोती बेटी को निहारा। सुधा के विशाल नर्म उरोज़ उसकी गहरी सांसों से ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी गोल कमर और फूले हुए बड़े नितिम्ब अत्यंत सुंदर थे। सुधा की खुली जांघों के बीच घनी झांटों से ढका योनिद्वार मानो उसके पिता को निमंत्रित कर रहा था।
सुधा के पिता ने अपने कपडे जल्दी से उतार दिए। सुधा के पिता का लंड कुछ ही क्षणों में तन कर खड़ा हो गया। उनका लंड दस इंच लम्बा और बहुत मोटा था। सुधा की आँख अचानक खुल गयी। अपने पिता को कमरे में देख कर सुधा का चेहरा खुशी से खिल उठा,” सॉरी, पापा में आपके लिए पूरी तैयार होना चाहती थी पर मेरी आँख ही नहीं खुली। ”

सुधा के पिता लपक कर बिस्तर पर चढ़ गए और अपनी नग्न बेटी को बाँहों में भर लिया, “बेटा, आप इस से और अच्छी तरह मेरे लिए तैयार नहीं हो सकते थे। ”

सुधा ने अपना आधा खुला मुंह अपने पिता को अर्पण कर दिया। सुधा के पिता अपनी बेटी के खुले मुंह से अपना भूखा मुंह लगा कर सुधा के मुंह का रसास्वादन करने लगे। उनके दोनों हाथ अपनी बेटी के उरोज़ों को मसलने में व्यस्त हो गए। सुधा ने सिसकारी मार कर अपने पिता के मूसल लंड को अपने छोटे-छोटे हाथों से सहलाना शुरू कर दिया।
सुधा ने अपने पिता का विशाल शरीर को प्यार से धक्का दे कर बिस्तर पर चित लिटा दिया। सुधा ने अपना खुला मुंह अपने पिता के लोहे जसे सख्त विशाल लंड के सुपाड़े के ऊपर रख दिया। सुधा का हृदय अपने पिता की मीठी सिसकारी सुन कर प्रसन्न हो गया। उसने प्यार से धीरे-धीरे अपने जीभ से अपने पिता के पूरे सुपाड़े को चाटना शुरू कर दिया। अपनी बेटी की जीभ की मीठी यातना से उसके पिता का लंड थरथरा उठा।
सुधा के पिताजी को वो दिन साफ़ साफ़ याद था जब उन्होंने अपनी बेटी की कुंवारी चूत पहली बार चोदी थी। इतने सालों के बाद भी उन्हें अपनी बेटी की चूत की भूख बिलकुल भी कम नहीं हुई थी।
सुधा ने अपने पिता के लंड के सुपाड़े को चाट कर अपने जीभ की नोक उसके पेशाब-छिद्र में डाल दी। उसके पिता ने अपना भारी हाथ सुधा के सर के पीछे रख कर अपने लंड के ऊपर दबाने लगे। सुधा ने आज्ञाकारी बेटी की तरह अपना मुंह पूरा खोल कर अपने पिताजी का मोटा लंड अपने मुंह में ले लिया। पिताजी ने सिकारते हुए सुधा को और भी उत्साहित किया, “सुधा बेटी, मेरा लंड चूसो। मेरा लंड और भी अपने मुंह के भीतर डालो।
सुधा ने अपने पिता का जितना हो सकता था उतना भारी-भरकम मूसल जैसा लंड अपने मुंह में ले अपने मीठे मधु जैसे थूक से गीला कर दिया। उसने अपना मुंह पिता के लंड से उठा कर अपने मुंह को थूक से भर कर उनके लंड के ऊपर उलेढ़ दिया। सुधा के पिताजी का महा लंड अपनी बेटी के मीठी लार से सराबोर हो गया। सुधा ने अपने पिताजी का भीमकाय लंड एक बार फिर से अपने मुंह में ले लिया और अपना मुंह ऊपर नीच कर उनके लंड को चूसने लगी। उसके नाज़ुक छोटे छोटे हाथ हाथ अपने पिता के थूक से गीले मोटे लंड के ऊपर नीचे फ़िरक्ने लगे।
सुधा के पिता जी के मुंह से सिकारियां फूटने लगीं।

उन्होंने बेसब्री से अपनी बेटी की भारी गुदगुदी गांड को अपने मजबूत हाथों से खींच कर उसकी चूत अपने मुंह के ऊपर लगा ली। जैसे ही सुधा के पिताजी की जीभ ने उसकी झांटों को फैला कर उसकी चूत की दरार को अपनी जीभ से खोल कर चाटना शुरू कर दिया। सुधा के मुंह से निकली सिसकारी अपने पिताजी के लंड के ऊपर घुट कर रह गयी।
दोनों पिता और बेटी एक दुसरे को अपने मुंह से सुख देने लगे। सुधा के पिताजी ने अपनी बेटी की मीठी चूत हज़ारों बार चाट रखी थी फिर भी उसकी महक और स्वाद ने उन्हें बिलकुल पागल कर दिया। सुधा भी अपने पिताजी के मीठे लंड को मुंह में ले लालची भूखी स्त्री की तरह चूसने लगी। उसके पिता का लंड उसकी वासना को कुछ ही क्षण में भड़काने में अभ्यस्त था। पिता और बेटी बड़ी देर तक एक दुसरे के लंड और चूत को अपने मुंह से चाट और चूस कर एक दुसरे के शरीर में कामुकता के तूफ़ान को जगाने लगे।

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