गंगा बाबा ने सुरेश अंकल और नम्रता चाची के आगमन की इत्तिला दी.
अंकल आंटी कमरे में अपने कपडे अलमारी में रख रहे थे. सुरेश शर्मा अंकल ६ फुट ऊंचे ४९ साल के बहुत मोटे मर्द थे. उनकी तोंद का मज़ाक हम सब लोग बनाते थे. नम्रता शर्मा आंटी भी , ५’५” के ४८ साल की उम्र की, थोड़ी मोटी स्त्री थीं.उनका स्थूल गदराया हुआ शरीर और अत्यंत सुंदर चेहेरा किसी भी मर्द को आकर्षित कर सकता था.
मैं खुशी से चीख कर दौड़ कर सुरेश अंकल की खुली बाँहों में समा गयी. अंकल ने मुझे बाँहों में उठा कर मेरा मूंह चुम्बनों से भर दिया.
बड़े मामा ने आंटी को गले लगाया,”नम्रता भाभी आप हमेशा की तरह किसी अप्सरा जैसी सुंदर लग रहीं है.”
आंटी शर्म से लाल हो गयीं, ” रवि भैया आप तो मेरी प्रशंसा बस अपने प्यार के वजह से करते हैं.”
मैंने खुशी से किलकारी मारते हुए आंटी के आलिंगन में समा गयी. आंटी ने मेरे चेहरे को चूम चूम कर गीला कर दिया, फिर मेरे कान में फुसफुसा कर पूछा, “नेहा बेटी, रवि भैया ने तुम्हारी चूत की पूरी देखभाल की ना? मैं तो तुम्हे बिस्तर में कराहते हुए देखने की अपेक्षा कर रही थी.” मैं शर्म से लाल हो गयी. अंकल आंटी दोनों को बड़े मामा और मेरे कौटुम्बिक व्यभिचार के बारे में पता था.
मैंने शरमाते हुए पर इठला कर कहा कहा,”आंटी बड़े मामा ने हमें बहुत बेदर्दी से चोदा है. ”
“रवि भैया, नेहा बेटी पर थोड़ा तो रहम करना था ना. अभी बेचारी कमसिन है और आपका लंड घोड़े से भी बड़ा है,” नम्रता आंटी ने बड़े मामा को प्यार से धक्का दिया, “पर नेहा बेटी अब आप किसी भी लंड से चुदवाने के लिए तैयार हो.” मैं शर्मा गयी.
“नम्रता भाभी, नेहा बेटी ने हमसे कोई शिकायत नहीं की.” बड़े मामा ने मुझे अपनी बाँहों में भर कर प्यार से चूमा.
सुरेश अंकल ने बड़े मामा की तरफदारी की, “नेहा बेटी आप जैसी अप्सरा सुन्दरी का कौमार्य-भंग कर स्त्री बनाना कोई आसान काम नहीं है. मुझे विश्वास है कि रवि ने ज़रुरत से ज्यादा दर्द नहीं किया होगा.”
“सुरेश अंकल आप बड़े मामा की तरफदारी क्यों कर रहें है. आंटी आप अंकल को कहें ना?” मैंने प्यार से अंकल के पेट में घूँसा मरा. अंकल ने मुझे हंस कर गले से लगा लिया.
“नेहा बेटी, लगता है तुम्हारे अंकल तुम्हारी चूत में घुसने की योजना बना रहे है. इस लिए वो तुम्हारे दर्द को नज़रंदाज़ करने के कोशिश कर रहें है. ये भी रवि भैया के साथ मिल गए हैं.” नम्रता आंटी बड़े मामा की बाँहों में समा कर बोलीं.
मैंने शर्मा कर अपना मुंह अंकल के सीने में छुपा लिया. मुझे बड़े मामा पर तरस आ गया।
मैंने अंकल के सीने से लगे हुए कहा, “नहीं मेरे बड़े मामा ने मेरी चुदाई बहुत अच्छे से की है। आंटी आप उनको कुछ नहीं कहें। ”
“देखा भाभी नेहा बेटी ने मुझे माफ़ कर दिया है,” बड़े मामा ठहाका लगा कर हंस दिए।
बड़े मामा ने हम सबके सामने नम्रता आंटी को प्यार से चूम लिया।
“रवि भैया, आज सिर्फ चुम्बन से काम नहीं चलेगा। मुझे आप से एक चुम्बन से बहुत ज़्यादा चाहिए। ” आंटी ने बड़े मामा की चौड़ी कमर के इर्द-गिर्द बाहें डाल कर उनसे कस कर लिपट गयीं।
बड़े मामा ने अपने विशाल हाथों में आंटी के बड़े-बड़े गुदाज़ चूतड़ों को भर कर ज़ोर से मसला और कहा, “भाभी, हम तो आप के देवी जैसे सौन्दर्य की सेवा करने के लिए तैयार हैं यदि सुरेश और नेहा को कोई आपत्ती नहीं हो तो। ”
अंकल ने मेरी तरफ देखा। मैंने शर्म से लाल अपना मुंह अंकल के सीने में फिर से छुपा लिया और सिर्फ अपना सर हिला कर अनुमति दे दी।
हम सब भोजन कक्ष की तरफ चल पड़े। अंकल-आंटी गंगा बाबा और जानकी दीदी से गले मिले।
“आंटी, यदि आप एक दिन और रुक सकते हों तो रुक जाइये,” जानकी दीदी ने आंटी से अनुरोध किया।
अंकल ने जल्दी से सिर हिला कर आंटी को अपनी अनुमती दे दी। आंटी ने भी हामी भर कर जानकी के चेहरा खुशी से भर दिया।
खाना ख़त्म होते ही गंगा बाबा ने सब नौकरों को विदा कर दिया। हम सब मदिरापान करने बैठक में चले गए। दो गिलास मदिरा के बाद गंगा बाबा ने जानकी की बाजू पकड़ कर उठाया और विदा मांगी।
“जानकी, लगता है आज रात तुम्हारी चूत की खैर नहीं है। गंगा भैया, की बेसब्री छुप नहीं पा रही”। आंटी ने जानकी की चुटकी ली।
जानकी शर्मा कर लाल हो गयी,”पापा तो रोज़ मेरी हालत बुरी कर देतें है। पर मुझे भी उनके बिना चैन नहीं पड़ता। ”
हम सब हंस दिए और दोनों को शुभ-रात्री की कामना के साथ विदा किया।
अंकल ‘सुधा’ के कौटुम्बिक-व्यभिचार के दूसरी किश्त ले कर आये थे। हम सब चलचित्र-गृह की तरफ चल दिए। बड़े मामा ने नम्रता आंटी का हाथ खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया। आंटी ने भी अपनी बाहें बड़े मामा की गर्दन पर डाल दीं।
मैं बड़े मामा और आंटी के बीच खुली संभोग पूर्व क्रीड़ा से प्रभावित हो गयी। जब अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा तो मै स्वतः उनकी गोद में समा गयी। अंकल ने रिमोट से फिल्म शुरू कर दी।

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