नेहा का परिवार – Update 28 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
Reading Mode

आखिर आधे घंटे बाद सुधा टब से निकली और उसने अपना गदराया हुआ बदन मुलायम तौलिया से पौंछ कर सुखाया।
जब सुधा का ध्यान अपने शरीर को तौलिया से सुखाने पर था तब उसके ससुर चुप चाप से उसके शयनकक्ष में दाखिल हो गए। उनकी आँखें अपनी बहु के गदराये सुंदर नग्न शरीर को देख कर चमक उठीं। सुधा के ससुर हौले-हौले चलते हुए अपनी बहु के पीछे तक पहुँच गए।
उसके ससुर छः फुट ऊँचे भारी भरकम पुरुष थे। उन्होंने सुधा के नग्न शरीर को अपनी बाँहों में भर लिया।
सुधा अपने आप को अपने ससुर की शक्तिशाली बुझायों में पा कर खिलखिला कर हंस दी, “बाबूजी, मेरे ससुर जी ने चोरों की तरह कबसे अपनी बहु को पकड़ना शुरू कर दिया?”
सुधा प्यार से कुनमुनाई और पलट कर अपने ससुर की मजबूत बाँहों में समा गयी।
सुधा के ससुर ने उसे प्यार से कई बार चूम कर उसे खुशखबरी दी, “सुधा बेटा तुम्हारे पापा आज आज शाम को आने वाले हैं.” सुधा खुशी से खिलखिला उठी.
उसके ससुर खुश बहु के थिरकते हुए भारी विशाल उरोजों को सहलाने लगे। उनका भीमकाय लंड पतलून के भीतर कसा हुआ सख्त होने लगा। अपनी सुंदर बहु का नग्न गुदाज़ शरीर देख कर हमेशा उनका लंड कुछ ही क्षड़ों में फूल जाता था।
“सुधा बेटी, मेरे पोतों ने अपनी माँ को चोद कर थका तो नहीं दिया?” सुधा के ससुर ने अपनी बहु के होंठों को प्यार से चूसते हुए कहा।
“बाबूजी आपके पोतों ने अपने माँ की चूत और गांड सुबह बुरी तरह से तो मारी है ।” सुधा ने भी अपने मर्दाने ससुर के होंठों को वापस चूसा।
“इसका मतलब है कि मेरी थकी बहु अपने ससुर से चुदवाने के लिए अभी तैयार नहीं है,” सुधा के ससुर ने उसके एक निप्पल की ज़ोर से चुटकी भर दी।
“ऊईई .. बाबूजी,” सुधा की दर्द भरे आनंद से सिसकारी निकल गयी, “आपकी बहु क्या कभी भी आपसे चुदवाने के लिए तैयार नहीं मिली ?” सुधा का मुलायम हाथ ने अपने ससुर के विशाल लंड को उनकी पतलून के ऊपर से सहलाया।
ससुर के चेहरे पे अपनी बहु के प्यार को देख कर खुशी की मुस्कान छा गयी। उनका दूसरा हाथ अपनी बहु की घुंघराली झांटों से ढकी चूतपर चला गया। उनकी उँगलियों ने उन्हें अपनी बहु की गीली तैयार चूत की सूचना दे दी। उन्होंने अपनी नंगी बहु को अपनी बाँहों में उठा कर पलंग पर पटक दिया।
सुधा के ससुर बच्ची की तरह खिलखिला के हंसती हुई बहु को एकटक देखते हुए अपने कपडे बेसब्री से उतारने लगे।
सुधा की साँसे तेज़ तेज़ चलने लगीं। उसकी आँखे अपने ससुर के वृहत लंड को कच्छे से बाहर आने के लिए उत्सुक थीं। शीघ्र ही उसके ससुर का भीमकाय दस इंच लम्बा बोतल के जैसा मोटा लोहे की तरह सख्त लंड उनके घने बालों से भरे मर्दाने बदन की शान बड़ा रहा था।
सुधा के ससुर ने अपनी बहु की भारी खुली जांघों के बीच बैठ कर अपना अमानुषिक लंड सुधा की कोमल रेशमी चूत के द्वार पर टिका। सुधा की सांस कुछ देर के लिए उसके गले में अटक गयी। सुधा के ससुर ने अपनी अप्सरा जैसी बहु की मोटी गुदाज़ जांघें अपनी शक्तिशाली बाँहों के उपर रख कर उसके गुदाज़ बदन के उपर झुक गए।
सुधा की हलके भूरे रंग की सुंदर आँखे अपने ससुर की वासना से भरी आँखों से अटक गयीं। सुधा के ससुर ने अपने शक्तिशाली कमर की ताकत से प्रचंड धक्का लगाया। सुधा की चीख कमरे में गूँज उठी। सुधा के ससुर ने अपना अमानवीय लंड अपनी बहु की कोमल चूत में डाल दिया। सुधा पांच बार और चीखी। उसकी हर चीख ससुर के खूंखार धक्के से शामिल थी। सुधा रिरयायी, “बब्बुजी, मार डाला आपने। धीरे बाबूजी! कितना मोटा लंड है आपका? हाय कितना दर्द करता है इतने सालों के बाद भी?”
सुधा के ससुर ने अपनी बहु की गुहार सूनी तो उसे अनसुनी कर दी।
ससुर ने बिस्तर पर चित टांगें पसारे लेती अपनी अप्सरा सामान बहू की चूत में अपना विध्वंसक लंड भयंकर धक्कों से जड़ तक डाल कर सुधा की चूत की वहशी अंदाज़ में चुदाई शुरू कर दी। उनके बड़े जालिम हाथ सुधा की हिलती फड़कती चूचियों का मर्दन करने लगे। सुधा की सिस्कारियां कमरे में गूँज रही थीं। सुधा के ससुर का भीमकाय लंड उसकी गीली चूत में ‘सपक-सपक’ की आवाज़ के साथ रेल इंजिन के पिस्टन की तरह बिजली की तेजी से अंदर बहर जा रहा था। सुधा दर्द भरे आनंद से अभिभूत हो चली।
सुधा के ससुर की प्रचंड चुदाई से सुधा की चूत चरमरा गयी। उसके स्तन ससुर के बेदर्दी भरे मर्दन से दर्द से भर गए। पर सारा दर्द सुधा के सिसकारी भरते हुए बदन में परम आनंद की आग लगा रहा था।
जल्दी ही सुधा का शरीर एन्थ कर झड़ गया। उसके ससुर ने अपनी बहु के रति-निष्पति की उपेक्षा कर उसको तूफानी रफ़्तार से चोदते रहे। अगले आधे घंटे में सुधा चार बार और झड गयी। सुधा अब वासना के आनंद से अभिभूत अपना सर इधर-उधर फेंक रही थी। उसके रेशमी घुंघराले बाल सब तरफ समुन्द्र की लहरों की तरह बिस्तर पर फ़ैल गए।
सुधा के ससुर ने अपनी बहु के कोमल विशाल चूचियों को अपनी मुठी में भर कर कुचलना शुरू कर दिया। उनका लंड पिस्टन की तरह सुधा की चूत मार रहा था।
सुधा का जब चौथा चरम-आनंद उसकी चूत में रस की बौछार ला रहा था तो उसकी सिस्कारियों ने अनर्गल बातें का रूप ले लिया, “बाबूजी, मेरी चूत फाड़ दीजिये। अपनी बहु की चूत के चिथड़े उड़ा दीजिये। आपकी बहु की चूत आपके लंड की हमेशा भूखी रहेगी। अह … बाबु ….अनंह ……मैं फिर से झड गयी बाबू ..ऊ ..ऊ … जी …ई ई … ऊउन्न्ह।”
सुधा के ससुर ने अपने विध्वंसक लंड को काबू में रख अपनी बहु को शांत होने का मौक़ा दिए बिना उसकी भारी गुदाज़ टांगें उसके सर की तरफ कर उसे लगभग दोहरा कर दिया। सुधा की गांड बिस्तर से उपर उठ गयी।
सुधा के ससुर ने अपना रति-रस से लिप्सा लंड सुधा की चूत से निकाल कर उसकी छोटी सी गांड के ऊपर लगा दिया। सुधा जब तक संभले उसके ससुर ने आदिमानव की तरह निर्दयी भाव में अपना लंड गांड फाड़ने के अंदाज़ में सुधा की गांड में दर्द भरे धक्के से अंदर डाल दिया। जैसे ही ससुर के भीमकाय लंड का सुपाड़ा सुधा की गांड की छल्ली को चीरता हुआ सुधा की गांड में दाखिल हुआ सुधा के गले से दर्द से भरी चीख निकल गयी।
उसके ससुर ने चार बेदर्द धक्कों से अपना पूरा लंड अपनी बहु की गांड में जड़ तक अंदर डाल दिया।
सुधा दर्द से बिलबिला कर चीख उठी, “आह बाबूजी ऊउन्न्न्न्नग मेरी गा …आं …..आं ….आं ….ड फाड़ दी आपने।”
सुधा की दर्द से भरी चीख अभी शांत ही हुई थी कि उसके ससुर ने उसकी गांड की प्रचंड चुदाई की शुरुआत कर दी। सुधा पहले तो दर्द से बिलबिला उठी पर कुछ ही देर में उसकी गांड में आनंद की लहरें खेलने लगीं। उसके ससुर के लंड ने शीघ्र ही सुधा के मखमली मलाशय के रस की परत इकठी कर ली। अब उनका लंड उनकी बहु की संकरी गर्म गांड में और भी तेज़ी से अंदर-बाहर जा रहा था।
सुधा का का ताज़ा चरम-आनंद [ ओर्गास्म ] उसके शरीर में बिजली की तरह दौड़ उठा। सुधा की साँसे बड़ी मुश्किल से काबू में हो पा रहीं थीं।
“बाबूजी आपने मुझे फिर से झाड़ दिया। मेरी गांड मारिये, बाबूजी। आपका मोटा लंड मेरी गांड फाड़ के ही मानेगा।” सुधा वासना के आनंद के प्रभाव में अनर्गल बकने लगी।
सुधा के ससुर ने अपनी बहु की गांड की भीषण चुदाई बदस्तूर बिना धीमे हुए जारी राखी।
आखिर में उन्होंने अपना मुंह अपनी बहु के खुले हुए मुंह से लगा कर अपने लंड को सुधा की गांड में खोल दिया। सुधा ससुर के स्खलन को अपनी गांड में महसूस कर फिर से झड़ गयी।
सुधा लगभग बेहोशी के आलम में निश्चल हो गयी।
सुधा के ससुर एक घंटे बाद ढीली थकी सुधा की गांड में अपना लंड स्खलित कर अपनी बहु के उपर निढाल हो कर अपने पूरे वज़न के साथ गिर पड़े।.
काफी देर बाद सुधा के ससुर ने अपनी बहु की गांड से अपना लंड बाहर निकाला । उनके गोल्फ खेलने का टाइम भी हो गया था।
“बहू मैं गोल्फ खेलने जा रहा हूँ,” ससुर गहरी सांस भरती सात यौन चरमोत्कर्ष से थकी बहू को प्यार से चूम कर तैयार हो गोल्फ-कोर्स के लिए रवाना हो गए. सुधा एक घंटे के लिए सो गयी.

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply