बड़े मामा ने मेरी चूत के अंदर अपना लौहे समान सख्त लंड और भी अंदर घुसेड़ दिया. उनका लंड मेरी कौमार्य की सांकेतिक योनिद्वार की झिल्ली को फाड़ कर और भी अंदर तक चला गया.
मेरी दर्द से भरी चीख से सारा कमरा गूँज उठा. मैं रिरिया कर मामा से अपना लंड बाहर निकलने की प्रार्थना कर रही थी. मेरे आंसूओं की अविरल धारा मेरे दोनों गालों को तर करके मेरी गर्दन और उरोज़ों तक पहुँच रही थी. मैंने सुबक सुबक कर रोना शुरू कर दिया.
बड़े मामा कठोड़ हृदय से मेरी सुबकाई और छटपटाहट की उपेक्षा कर अपने यंत्रणा के हथियार को मेरी दर्द से भरी चूत में कुछ इंच और भीतर धकेल दिया. मुझे अपनी चूत से एक गरम तरल द्रव की अविरल धारा बह कर मेरी गांड के ऊपर से बिस्तर पर इकट्ठी होती महसूस हुई.
मेरे प्रचुर आंसू मेरी नाक में से बहने लगे. मेरा सुबकता चेहरा मेरे आंसूओं और मेरी बहती नाक से मलिन ही गया था. मैं हिचकियाँ मार कर ज़ोर से रो रही थी. बड़े मामा ने मेरे रोते लार टपकाते हुए मुंह पर अपना मुंह रख कर मेरी चीखों को काफी हद तक दबा दिया. मुझे लगा की मेरी चूत के दर्द से बड़ा कोई और दर्द नहीं हो सकता. मुझे किसी भी तरह विष्वास नहीं हो रहा था कि सिर्फ मामाजी का लंड अंदर जाने के इस दर्द के बाद कैसे मामाजी मुझे चोद पायेंगे. मैं दिल में निश्चित थी की मैं दर्द के मारे बेहोश हो जाऊंगी.
मेरा सुबकना हिचकी मार-मार कर रोना जारी रहा, पर बड़े मामा अपने मुंह से मेरा मुंह बंद कर मेरे रोने की ध्वनि की मात्रा कम कर दी थी. बड़े मामा कस कर मुझे अपने नीचे दबाया और अपना लंड मेरी थरथराती हुई चूत में से थोड़ा बाहर निकाल कर अपने शक्तिवान कमर और कूल्हों को भींच कर अपना लंड पूरी ताकत से से मेरी तड़पती कुंवारी चूत में बेदर्दी से ठोक दिया. मेरा सारा बदन अत्यंत पीड़ा से तन गया. बड़े मामा ने अपने भारी वज़न से मेरे छटपटाते हुए नाबालिग शरीर को कस कर दबाकर काबू में रखा. मेरे गले से घुटी-घुटी एक लम्बी चीख निकल पड़ी. मैं ‘गौं-गौं’ की आवाज़ निकालने के सिवाय, निस्सहाय बड़े मामा के वृहत्काय शरीर के नीचे दबी, रोने चीखने के सिवाय कुछ और नहीं कर सकती थी. मेरी कुंवारी चूत की मामाजी ने अपने, किसी असुर के लंड के समान बड़े लंड से, धज्जियां उड़ा दी.
मैं दर्द से बिलबिला रही थी पर मेरी आवाज़ मामाजी ने अपने मुंह से घोंट दी थी. मेरे नाखून मामाजी की पीठ की खाल में गड़ गए. मैंने बड़े मामा की पीठ को अपने नाखूनों से खरोंच दिया.
मैं उनसे अपनी फटी चूत में से मामाजी का महाकाय लंड बाहर निकालने की याचना भी नहीं कर सकती थी. यदि इसको ही चुदाई कहते हैं तो मैंने मन में गांठ मार ली कि जब मामाजी ने मुझे इस यंत्रणा से मुक्त कर देंगे तो उसके बाद सारा जीवन मैं चूत नहीं मरवाऊंगी .
मुझे ज्ञात नहीं कि मैं कितनी देर तक रोती बिलखती रही. मेरे आंसू और नाक निरन्तर बह रही थी. काफी देर के बाद मुझे थोडा अपनीस्थिति का थोड़ा अहसास हुआ. मैं अब रो तो नहीं रही थी, पर जैसे लम्बे रोने के बाद होता है, वैसे ही कभी-कभी मेरी हिचकी निकल जाती थी. बड़े मामा का मुंह मेरे मुंह पर सख्ती से चुपका हुआ था. मेरी चूत में अब भी भयंकर दर्द हो रहा था. मुझे लगा कि जैसे कोई मूसल मेरी चूत में घुसड़ा हुआ था.
बड़े मामा ने धीरे से मेरे मुंह से अपना मुंह ढीला किया, जब मेरे मुंह से कोई दर्दनाक चीख नहीं निकली तो मामाजी अपना मुंह उठा कर बोले, “नेहा बेटा, आपकी कुंवारी चोट बहुत ही तंग है. सॉरी, यदि बहुत दर्द हुआ तो.”
मुझे विष्वास नहीं हुआ कि मेरे पिता-तुल्य मामाजी को मेरे चीखने चिल्लाने के बावज़ूद मेरी पीड़ा का ठीक अंदाज़ा नहीं था, “बड़े मामा,” मैंने सुबक कर बोली, ‘आपने मेरी चूत फाड़ दी है. आप बहुत बेदर्द हैं, मामाजी. आप ने अपनी इकलौती भांजी के दर्द का कोई लिहाज़ नहीं किया?”
बड़े मामा ने हल्की सी मुस्कान के साथ मुझे माथे पर चूमा, “पहली बार कुंवारी चूत मरवाने का दर्द है, नेहा बेटा. आगे इतना दर्द नहीं होगा.”
मैं अपनी चूत में फंसे मामाजी के मूसल को अब पूरी तरह से महसूस करने लगी. मुझे बड़े मामा के अत्यंत मोटे लंड के ऊपर अपनी चूत के अमानवीय फैलाव की जलन भरे दर्द का पहली बार ठीक से अनुमान हुआ. मेरी कुंवारी चूत में अबतक मेरी एक पतली कोमल उंगली तक नहीं गयी थी, उसमे बड़े मामा ने अपना घोड़े से भी बड़ा लंड बेदर्दी से मेरी नाज़ुक, कुंवारी चूत में पूरा लंड की जड़ तक घुसेड़ दिया था.
बड़े मामा प्यार से मेरा मुंह साफ करने लगे. बड़े मामा ने प्यार से मेरे सारे मलिन मुंह से सारे आंसू और बहती नाक को चाट कर साफ़ कर दिया. मैं दर्द के बावज़ूद हंस पड़ी, “मामाजी, मेरे मूंह पर सब तरफ मेरी नाक लगी है, छी आप कितने गंदे हैं.” मैंने मामाजी को कृत्रिम रूप से झिड़कना दी, पर मेरा दिल मेरी मामाजी के लाड़-प्यार से पिघल गया. मुझे अब अपने, विशाल शरीर और अमानवीय ताकत के, पर फूल जैसे कोमल हृदय के मालिक बड़े मामा पर बहुत प्यार आ रहा था. अब मुझे उनका बेदर्दी से मेरी चूत फाड़ना उनकी मर्दानगी और मर्द-प्रेमी की सत्ता का प्रतीक लगने लगा. आखिर मेरे सहवास के अनाड़ीपन का भी तो बड़े मामा को ख़याल रखना पड़ा था?
बड़े मामा ने मेरा पूरा चेहरा अपनी जीभ से चाट कर साफ़ कर, मेरी नाक को अपने मूंह में भर लिया. बड़े मामा की जीभ की नोक ने मेरे दोनों नथुनों के अंदर समा कर मेरी नाक को प्यार से चाट कर साफ़ कर दिया. मैं खिलखिला कर छोटी बच्ची की तरह हंस पड़ी.
बड़े मामा के ने मेरी नाक को प्यार से चूमा और मेरे हँसते हुए मुंह को अपने मुंह से ढक लिया.

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