नूसी आपा ने इस बार बहती आँखों और नासिका के रस को तुरंत चूसना और चेतना शुरू कर दिया। मैं भी उसके नीचे लेट कर उसकी एक चूची चूसने लगी और दूसरी को मसलने मड़ोड़ने लगी।
“अब्बो,ठीक ऐसे ही। शानू की यह रात उसको ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी। अल्लाह कसम उसकी चीखें नहीं बंद होनी चाहिए अब्बू ,”नूसी आपा ने अब्बो को बढ़ावा देते हुए उकसाया।
और अकबर चाचू ने अपना वायदा किया और उस से भी आगे निकल गए।
उन्होंने शानू की कुंवारी गांड को उसी बेदर्दी से अगले घंटे तक मारा। शानू की चीखें ,सुबकियां , और हिचकियाँ अगले घंटे तक बंद नहीं हुई। उसकी अब्बू का लंड अब सटासट उसकी गांड में से माथे हलवे की चिकनाई से अंदर बाहर जा रहा था। अकबर चाचू ने शानू की दर्दीली गांड-चुदाई से उसके लिए झड़ना बिलकुल असंभव कर दिया था। शानू घंटे से भी ज़्यादा अपनी गांड चुदाई के दर्द से बिलबिलाने के अलावा कुछ और सोच भी नहीं पायी झड़ना तो कोसों दूर।
पर आखिर कर वासना की प्रज्जवलत अग्नि, चुदाई का जूनून और अपने अब्बू के साथ नाजायज़ सम्भोग की तमक से शानू दर्द के गड्ढे से भर निकल ही गयी। उसके अब्बू का लंड उसकी गांड के मक्खन से लिसा अब उसे आननद देने लगा। नूसी आपा और मई अब बेदर्दी उसकी छूछोयां मसलने लगे पर अब उसकी वासना फतह का झंडा लहरा था। शानू ने अगले दस मिनटों में तीन ब्रा झड़ने के बाद अपने अब्बू से और भी ज़ोर से गांड मारने की गुहार लगाना श्रुओ कर दिया। अकबर चाचू ने अपनी प्याररी नन्ही बेटी की गांड को एक और घंटा बिना थके और धीरे हुए चोदा।शानू की अविरत रत-निष्पति ने उसके अल्पव्यस्क कच्चे बदन को बिलकुल थका दिया। जब अकबर चाकू ने अपना लंड शानू की गांड में खोला तो वो चीख कर निश्चित हो गयी। अकबर चाचू ने बीस पच्चीस वीर्य की बौछारों के बाद विजय पताका फहराता हुआ लंड निकला तो नूसी उसके ऊपर भूखों की तारक जगपत पड़े। हम दोनों ने अकबर चाचू के शानू की गांड के मंथन के रास और उनके पाने वरीय के माखन को चूसने और चाटने लगे।
उधर आदिल भैया ने भी अपनी अम्मी की गांड मार मार कर उन्हें इतनी बार झाड़ दिया कि वो भी शानू की तरह बेहोश हो गयीं। कमरे में दो ख़ूबसूरत गाण्डों की भयंकर चुदाई और मंथन की गहरी खुशबू फ़ैली हुई थी। नूसी आपा और मेरी चूतों में आग लगी हुई थी। अब हम दोनों को उस आग को दो मुस्टंड लंड चाहिए थे।
नूसी ने अपने अब्बू का हुए मैंने आदिल भैया का ताज़ा ताज़ा गांड मंथन के बाद से उपजे माखन से सजे संवरे लंड को मुँह में ले कर चूसने चाटने लगीं। दोनों मर्दों के लंड तूफानी तेज़ी से तनतना रहे थे।
अब्बू ने नूसी आपा को निहुरा कर उनकी चूत में अपना लंड तीन चूत – फाड़ू धक्कों में जड़ तक ठूंस दिया। नूसी आपा की चीख में आनंद ज़्यादा दर्द कम था। आदिल भैया भी अपने अब्बा से पीछे नहीं थे। उन्होंने भी बेदर्दी से मेरी चूत में अपना लंड ठूंसने में को धक्कों की कंजूसी बरती। पर उसके बाद की चुदाई में कोई कंजूसी नहीं दिखाई दोनों ने। अकबर अब्बू ने अपनी बेटी की भैया ने मेरी चूत को घण्टे भट रोंदने के बाद ही अपने लंड की उपजाऊ क्रीम से हमारी चूतों को सींच दिया।
“अब्बो,ठीक ऐसे ही। शानू की यह रात उसको ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी। अल्लाह कसम उसकी चीखें नहीं बंद होनी चाहिए अब्बू ,”नूसी आपा ने अब्बो को बढ़ावा देते हुए उकसाया।
और अकबर चाचू ने अपना वायदा किया और उस से भी आगे निकल गए।
उन्होंने शानू की कुंवारी गांड को उसी बेदर्दी से अगले घंटे तक मारा। शानू की चीखें ,सुबकियां , और हिचकियाँ अगले घंटे तक बंद नहीं हुई। उसकी अब्बू का लंड अब सटासट उसकी गांड में से माथे हलवे की चिकनाई से अंदर बाहर जा रहा था। अकबर चाचू ने शानू की दर्दीली गांड-चुदाई से उसके लिए झड़ना बिलकुल असंभव कर दिया था। शानू घंटे से भी ज़्यादा अपनी गांड चुदाई के दर्द से बिलबिलाने के अलावा कुछ और सोच भी नहीं पायी झड़ना तो कोसों दूर।
पर आखिर कर वासना की प्रज्जवलत अग्नि, चुदाई का जूनून और अपने अब्बू के साथ नाजायज़ सम्भोग की तमक से शानू दर्द के गड्ढे से भर निकल ही गयी। उसके अब्बू का लंड उसकी गांड के मक्खन से लिसा अब उसे आननद देने लगा। नूसी आपा और मई अब बेदर्दी उसकी छूछोयां मसलने लगे पर अब उसकी वासना फतह का झंडा लहरा था। शानू ने अगले दस मिनटों में तीन ब्रा झड़ने के बाद अपने अब्बू से और भी ज़ोर से गांड मारने की गुहार लगाना श्रुओ कर दिया। अकबर चाचू ने अपनी प्याररी नन्ही बेटी की गांड को एक और घंटा बिना थके और धीरे हुए चोदा।शानू की अविरत रत-निष्पति ने उसके अल्पव्यस्क कच्चे बदन को बिलकुल थका दिया। जब अकबर चाकू ने अपना लंड शानू की गांड में खोला तो वो चीख कर निश्चित हो गयी। अकबर चाचू ने बीस पच्चीस वीर्य की बौछारों के बाद विजय पताका फहराता हुआ लंड निकला तो नूसी उसके ऊपर भूखों की तारक जगपत पड़े। हम दोनों ने अकबर चाचू के शानू की गांड के मंथन के रास और उनके पाने वरीय के माखन को चूसने और चाटने लगे।
उधर आदिल भैया ने भी अपनी अम्मी की गांड मार मार कर उन्हें इतनी बार झाड़ दिया कि वो भी शानू की तरह बेहोश हो गयीं। कमरे में दो ख़ूबसूरत गाण्डों की भयंकर चुदाई और मंथन की गहरी खुशबू फ़ैली हुई थी। नूसी आपा और मेरी चूतों में आग लगी हुई थी। अब हम दोनों को उस आग को दो मुस्टंड लंड चाहिए थे।
नूसी ने अपने अब्बू का हुए मैंने आदिल भैया का ताज़ा ताज़ा गांड मंथन के बाद से उपजे माखन से सजे संवरे लंड को मुँह में ले कर चूसने चाटने लगीं। दोनों मर्दों के लंड तूफानी तेज़ी से तनतना रहे थे।
अब्बू ने नूसी आपा को निहुरा कर उनकी चूत में अपना लंड तीन चूत – फाड़ू धक्कों में जड़ तक ठूंस दिया। नूसी आपा की चीख में आनंद ज़्यादा दर्द कम था। आदिल भैया भी अपने अब्बा से पीछे नहीं थे। उन्होंने भी बेदर्दी से मेरी चूत में अपना लंड ठूंसने में को धक्कों की कंजूसी बरती। पर उसके बाद की चुदाई में कोई कंजूसी नहीं दिखाई दोनों ने। अकबर अब्बू ने अपनी बेटी की भैया ने मेरी चूत को घण्टे भट रोंदने के बाद ही अपने लंड की उपजाऊ क्रीम से हमारी चूतों को सींच दिया।

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