नेहा का परिवार – Update 162 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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अब तो सब कुछ खुल्लम खुल्ला हो चला। आदिल भैया ने प्यार से अपनी अम्मी को बाँहों में उठा लिया।
“हाय मेरे बेटे , आपकी अम्मी हलकी फुलकी नहीं है , चोटना लग जाये बेटा। “बुआ ने प्यार से आदिल को चूमा।
“अम्मी, आपके बेटे की बाहें अपनी अम्मी को उठाने के लिए कभी भी कमज़ोर नहीं पड़ेंगीं ,”आदिल ने अपनी अम्मी की नाक को चूमते हुए कहा।
चाचू ने शानू को बाँहों में उठाते हुए कहा , “शानू तुम्हे जो आपा ने कहा है वो सब करना है अब्बू के साथ ?”
“अब्बू एक बार नहीं हज़ारों बार।आज ही नहीं हमेशा हमेशा करना है आपके साथ, “शानू ने अपने अब्बू के गले पे अपनी नन्ही बाँहों का हार डाल दिया।
हम सब पारिवारिक कक्ष में चल पड़े। आदिल ने बुआ को घोड़ी बना कर उनकी गांड और चूत चुसनी शुरू कर दी।
“अब्बू, इस रंडी की चूत तो पूरी गरम है अब आप अपने लंड डाल दीजिये ,”नूसी आपा ने शानू की छोटी छोटी उगती चूचियां मसलते हुए कहा।
अकबर चाचू ने अपनी छोटी बेटी को घोड़ी बना कर चोदने के लिए तैयार कर लिया। जैसे ही चाचू ने अपना लंड बढ़ाया शानू की चूत की ऒर मुझे एक ख्याल आ गया।
मैंने लपक कर पास पड़े लहंगे से शानू की चूत सोख कर सूखा दिया , “चाचू, यदि शानू की चूत कसमसाना उठे , उसकी चीखेंना निकलें और आपके लण्ड के ऊपर उसकी चूत से लाल रसना दिखे तो उसे यह रात कैसे मीठी यादें बनाएगी ?”
“अब्बू, वाकई। शानू कुंवारी तो नहीं है चूत से पर आप उसे आज भी कुंवारेपन की पहली चुदाई का अहसास दिला सकते है। कौन बेटी नहीं यद् करेगी अपने अब्बू के साथ पहली दर्दीली मीठी चुदाई को ? “नूसी आपा ने भी अपने अब्बू को भड़काया।
उधर आदिल ने धीरे धीरे अपना लण्ड एक एक इंच कर अपनी अम्मी की चूत में घुसना शुरू कर दिया।
“हाय आदिल बेटे, मैं तो जन्नत में चली गयी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में ले कर। मेरा बेटा एक बार फिर अपनी अम्मी के अंदर है ,”शब्बो बुआ अनुचित अगम्यगमनी वासना से जल रहीं थीं।
“अम्मी, मेरा लंड पहली बार की आपकी चूत की गरमी को कभी भूलेगा।”आदिल ने अपनी अम्मी के भारी भारी मुलायम विशाल उरोजों को बेदर्दी से मसलते हुए कहा।
“बेटा मसल दो अपनी अम्मी की चूचियों को। आज तो अपनी अम्मी की चूत की धज्जियाँ उदा दो। रुला दो अपनी अम्मी को चुदाई से। बीटा दस साल से तुम्हे देखते हुए दिल की भूख छुपा कर राखी है हमने,”बुआ वासना में जलती हुई बुड़बुड़ायीं
आदिल भैया ने बेदर्दी से बुआ की चीचियों को मसलते हुए एक विधवंसिक धक्के में पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया। बुआ की चीख निकल गयी।
“बेटा और दर्द करो अम्मी को। तुम्हारी अम्मी की चूत अनछुई है बीस साल से। तुम्हारे अब्बू की चुदाई और तुम्हारे मेरे पेट में आने के बाद तुम्हारा पहला लंड है मेरे बेटे ,” बुआ की दिल के हालत सुन कर आदिल का प्यार परवान हो चला।
उन्होंने अपनी अम्मी की चूत की चुदाई भीषण अंदाज़ में शुरू कर दी। पांच मिनट नहीं बुआ झड़ने लगीं। आदिल भैया मुझे नहीं लगता था की घंटों से पहले रुकेंगें अपनी अम्मी की चूत चोदने से।
इधर चाचू ने अपना तनतनता हुस घोड़े जैसा लंड शानू की नन्ही सुखी चूत ले टिका कर उसे नन्ही बकरी की तारक जकड़ कर भयानक जान लेवा धक्का लगाया। नूसी आपा ने शानू के कंधे पीछे दबा दिए। शानू की दर्द भरी चीख उबाल उठी।
उसकी आँखों आंसूं भर गए। छोटी छोटी चूचियों को हुए बेदर्दी से मसलते दूसरा चूत फाड़ने वाला धक्का लगाया और उनका पूरा महालँड नन्ही शानू की चूत में ठुँस गया था। शानू बिबिला कर रो रही थी। पर अपने अब्बू से चुदाई के लिए तो वो और भी दर्द बर्दाश्त कर लेती।
चाचू ने बिना शानू को आराम करने का मौका दिए अपना लंड टोपे तक बाहर निकल लिया। उनके लंड पर लाल खून की गाढ़ी परत चढ़ गयी थी। चाचू के लंड के किसी कुंवारी की चूत फटने जितना खून तो नहीं निकला था शानू की चूत से पर बहुत कम भी नहीं था।
शानू अब बिना रुके हिचकी मार मार थी। उसकी आँखे इतनी बाह रही थीं की बेचारी के सुड़कने के बावजूद भी उसके आंसू उसकी सूंड नासिका में से बह चले।
“अब्बू देखिये तो आप अपनी नन्ही बेटी के हुस्न को, “नूसी आपा ने शानू का रोता हुआ आंसुओ और उसकी बहती नासिका के रस से मलिन मुँह को अपने अब्बू को दिखाया।
वाकई का मलिन चेहरा अपने अब्बू के महालँड की चुदाई के दर्द और भी सूंड लग रहा था।
“अब्बू, आपको कसम है हमारी, बिना रुके शानू की चूत मारें। इसकी चीखें नहीं रुकनी चाहियें ,”नूसी आपा ने अकबर चाचू को उकसाया।
चाचू ने बिना रुके शानू की चूत को बेदर्दी से कूटना शुरू किया तो अगले आधे घंटे तक बेचारी सुबक सुबक कर रोती रही। उसकी आँखे और सुंदर नासिका जानकी की तरह बहतीं रहीं।
नूसी आपा ने पहले तो अपने हाथ से उसके आंसू और बहती नासिका के रस को उसके मुँह पर रगड़ दिया पर जब आधे घंटे की चुदाई के बाद उसका दर्द कम हुआ और वो सिसकारियां मारने लगी तो नूसी आपा ने अपनी जीभ से अपनी नहीं बहन का मुँह चाट चाट कर साफ़ कर दिया। उन्होंने शानू के नथुनों में अपनी जीभ हुआ उन्हें भी अपनी लार से भर दिया।
“अब्बू मुझे झाड़ दीजिये हाय रब्बा मेरी चूत मारिये अब्बू ,….. ूण ंन्न ……… आनंनं आँह्ह्ह ,” शानू अब लगातार झाड़ रही थी और उसकी चूत उसके रतिरस से लबालब भर चली थी।
चाचू का लंड अब रेलगाड़ी के इंजन के पिस्टन जैसे पूरी रफ़्तार और ताकत से शानू की चूत
चोद रहा था। उनका लंड उसकी चूत में फचक फचक की अश्लील आवाज़ें निकलते हुए बिजली की गति से अंदर बाहर आ जा रहा था।
घंटे भर की चुदाई के बाद शानू ना जाने कितनी बार झड़ गयी थी। उसके अब्बू ने भी अपना लंड अपनी नन्ही अल्पव्यस्क बेटी की कमसिन चूत में खोल दिया। उनका उर्वर वीर्य की बारिश के कच्चे गर्भाशय को नहला दिया।

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