नेहा का परिवार – Update 161 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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अब बुआ से नहीं रहा गया , “संयम बरतें मेरे भाई के दुश्मन। यदि मेरे भाई के घर की औरतें और बच्चे उनका और उनकी ख़ुशी का ख्याल नहीं रखेंगें तो काउ रखेगा। ”
“तुम खुश हो इस ,” अकबर चाचू ने अपनी बहन को चूम लिया।
“खुश , मैं बेइंतिहा खुश हूँ। मैं तो अपने को कोस रहीं हूँ की अब तक मेरी अक्ल क्या चारा चरने गयी थी कि मुझे हम सबको इकट्ठे करने का ख्याल नहीं आया ,”शब्बो बुआ का प्यार अब पूरे निखार पे था।
हम सब एक दुसरे के साथ चपक गए. सारे परिवार का महा-आलिंगन था यह। नूसी आपा ने सबको मदिरा, शैम्पेन के गिलास थमा दिए, “चलिए अब जल्दी से खाना खा लेते हैं फिर सारी रात है एक दुसरे को प्यार करने के लिए। ”
नूसी आपा ने किसी के दिमाग , खास तौर से चाचू के दिमाग , में यदि कोई झिझक बाकि हो तो उसको नाकाबिल कर दिया।
खाने पर हम सब खुल आकर अपने दिल की बातें करने लगे।
“भैया , सुना की शानू ने अपने जीजू से अपनी सील खुलवा ली है ,”बुआ ने खुल्लम-खुल्ला वार्तालाप ठीक दिशा में मोड़ दिया।
“बुआ मैंने देर तो लगायी पर अब पीछे नहीं हटने वाली। अब जब जीजू का मन हो मैं तैयार हूँ उनकी ख़ुशी के लिए ,”शानू खुल कर बोली, “और बुआ नूसी आपा ने भी अपने ज़िंदगी की हसरत भी पूरी कर ली। अब्बू ने आखिर आपा के साथ नाता बना है। नहीं अब्बू अब आप हमेशा नूसी आपा के साथ हमबिस्तर होते रहेंगें ?’
शानू अब रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।
” उन्ह उन्ह। .. ठीक है बेटा। एक बार अपनी जन्नत की परी जैसी सुंदर बेटी के साथ हमबिस्तर होने के बाद कौन बाप रुक पायेगा।”
सब लोग खाना भी खा रहे थे और मदिरापान करते हुए पारिवारिक सम्भोग के पुराने पन्ने भी पलट रहे थे।
“नूसी बेटा तू तो नसीब वाली है। अब्बू के दोनों प्यार, यानि बाप और मर्द , किसी कसी नसीब वाली बेटी ही को मिलते हैं ,” शब्बो बुआ ने नूसी आपा की बालाएं उतार लीं।
“बुआ मैं भी तो नसीब वाली बेटी हूँ। मुझे भी तो अब्बू दोनों तरह का प्यार करेंगें। नहीं अब्बू ?”शानू ने तीर छोड़ा।
“बेटी शानू तू जब कहेगी उसी दिन अब्बू तुझे भी हनबिस्तर बना लेंगें,” शब्बो बुआ ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
अब हम सब गरम हो चले थे।
“अब्बू आप भी तो एक बार बुआ के साथ हमबिस्तर हुए थे ?” नूसी ने अपने अब्बू के लंड को सहलाते हुए कहा।
“नूसी वो महीन मेरी ज़िंदगी का बहुत हसीं महीना था ,”अब्बू ने प्यार से अपनी बहन को देखते हुए कहा।
“भैया , उस हसीन महीने का मीठा इनाम मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीं तोहफा है आपकी तरफ से,” बुआ ने गीली आँखों से जज़्बाती आवाज़ में कहा।
“शब्बो, मैं समझा नहीं,”चाचू ने मीठी आवाज़ में अपनी बहन से पूछा।
“भैया , उस महीने में अप्पने अपनी बहन की खाली कोख भर थी। आदिल ही तो उस महीने का तोहफा है आपका ,”बुआ ने चाचू को रहस्य बता दिया।
अकबर चाचू ने आदिल भैया की ओर घमंड से देखा , “शब्बो, आदिल तो हमेशा से मेरे बेटे की तरह था। मेरा सब कुछ इन तीनो बच्चों का है। पर मैं शुक्रगुज़ार हूँ की आदिल मेरे बेटे की तरह नहीं मेरा बेटा ही है। मेरी बहन यह तो तुम्हे तोहफा है मेरे लिए। इस के लिए तो मैं तुम्हारे पैरो को हमेशा चुमता रहूंगा। ”
चाचू और आदिल दोनों बाओ बेटे की तरह गले मिलने लगे।
हम सब की आँखें थोड़ी गीली हो गयीं।
बुआ ने माहौल ठीक करने के लिया अपना स्वाभाविक व्यवहार का सहारा लिया ,”भैया , आपका बेटा तो अब आपका ही है। लेकिन यहाँ चार चार चूतें हैं दो महालंडो के लिए। कौन बटवारा करेगा ?”
नूसी आपा ने भी माहौल संभाला ,”बुआ आदिल का दिल मचल रहा है आपके लिए। इस रात आप का हक़ पहला है अपने बेटे के लण्ड के ऊपर। मेरे प्यारे अब्बू का लंड आज रात पहले पहल छोटी रंडी बहन की चूत फाड़ कर उसकी गांड की सील तोड़ेगा। “

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