शानू भूल गयी कि कमरे में उसके अब्बू भी हैं। जब वासना की आग नन्ही कच्ची कली के भीतर जल उठे तो उसके दिलो-दिमाग पर चुदाई का भूत तरी हो जाता है। शानू ने अपने जीजू के लंड को बाहर निकल लिया। आदिल जीजू ने शानो की चोली उतार दूर फेंक दी। शानू ने जल्दी से अपना मुँह जीजू के लेंस के टोपे से लगा दिया।
अकबर चाचू का लंड अब बेसब्री से तन्तनाने लगा। अपनी मुश्किल से किशोरवश्था के पहले वर्ष में पहुंची बेटी को अपने मौसेरे भाई और जीजू का लंड चूसते देख कर उनकी मर्दानी वासना का अजगर पूरा फनफना उठा।
चाचू ने मेरी चोली उतार कर चूचियों को मसलने चूसने लगे। नसी आपा कर अपने अब्बू की लुंगी की गिरह खोल कर उनकी लुंगी फैला दी। अब चाचू का लंड और झांगे जग जाहिर थीं।
नसी आपा ने नूसी आपा ने अपने अब्बू का गरम गीले मुंह में ले कर उनके पेशाब के छेद को अपनी जीभ की नोक से चुभलाने लगीं। मैंने अकबर चाचू के चेहरे को सहलाते हुए उनके मुँह को अपनी फड़कती चूचियों के ऊपर दबा दिया। चाचू के मर्दाने तरीके से ज़ोर से चूसने और मसलने से मेरी चूचियां कराह उठीं थीं पर दर्द में वासना की चाभी भी थी।
मैंने जोए से सिसकारी मारी , “है चाचू ज़ोर से मसल दीजिये मेरी चूची , और ज़ोर से चूसिये इन्हें। मैं तो ऐसे ही झड़ जाऊंगी ,”मैंने सिअकरते कहा।
मेरी बुलंद वासना की गुहार ने बाकी बचीं दीवारों को भी गिरा दिया। आदिल जीजू ने शानू का लहंगा उतार फेंका और उसे चौड़े दिवान पर चित लेता कर उन्स्की चूत के ऊपर धावा बोल दिया। जीजू ने शानू की चूत चूसने की शुरुआत की तो मैंने भी अकबर चाचू के साथ बात आगे बड़ा दी।
मैंने भी अपना लेहंगा उतार फेंका। नूसी आपा ने अपने अब्बू का कुरता उतार दिया। चाचू ने अपनी बड़ी बेटी को नंगा करने में ना झिझक दिखाईना देर लगायी।
शानू ने सिसकते हुए कहा , “भैया हाय नहीं जीजू आप भी तो कपड़े उतार दीजिये। ”
आदिल जीजू को अब तक यह खुद से कर देना चाहिए था। आदिल जीजू ने शानू के खुली चुत को दिल लगा जकर चूसा चाटा , उसकी घुंडी कोना केवल जीभ से तरसाया पर जालिम अंदाज़ में दांतों से भी हलके हलके काटा।
शानू चीख मार कर झड़ गयी। अकबर चाचू ने मुझे छोड़ कर नूसी आप के ऊपर हमला बोल दिया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की टाँगे चौड़ा कर उसकी घनी घुंघराली झांटों से ढकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। मैंने चाचू के मर्दाने विशाल बालों चूतड़ों को चूमते काटते हुए उनकी गान का छल्ला ढूँढ लिया। मेरी जीभ उनके गांड के छेद को चुभलाने लगी।
यही मौका था और मैंने पास में पड़े आई फ़ोन में डाले पैगाम को भेज दिया। शब्बो बुआ सिर्फ बीस फुट दूर थीं।
” अरे भाई इस महफ़िल में सिर्फ हमें ही नहीं शामिल किया गया। क्या बुआ ने कोई गुस्ताखी कर दी है ,” बुआ ने थोड़ा ज़ोर से बोल कर हम सब को चौकाने का प्रयास किया।
बेचारे चाचू थे जिन्हे इस तरतीब का कोई भी इल्म नहीं था। वो लपक कर अपनी छोटी बहन के पास गए और उन्हें गले से लगा लिया , “माफ़ करना शब्बो। मैं बच्चों के ख्याल में इतना डूब गया कि भूल गया कि तुम वापस आ गयी होंगीं। ”
बेचारे चाचू को यह अहसास भी नहीं था कि वो पूरे नंगे थे, “भैया, यदि आप वायदा करें कि मुझे ऐसे ही मिला करेंगें तो मैं हमेशा तैयार हूँ कि इस स्वागत के लिए। ”
चाचू को अहसास हुआ तो वो कपडे की ओर जाने लगे पर बुआ ने उनका हाथ पकड़ लिया , “हाय रब्बा। मेरा आना इतना बुरा लगा कि आप इस महफ़िल की ख़ुशी से बच्चों को रोक देगें। ”
“शब्बो, तुम तो मेरी प्यारी बहन हो। मैं तो फिक्रमंद हूँ कि आप क्या सोचोगी मेरे बारे में। बच्चे चाहें क्या करें क्याना करें पर मुझे तो थोड़ा संयम बरतना चाहिए था। “

