शब्बो बुआ की कहानी सुनते सुनते नूसी आपा और मैं इतनी गरम हो गयीं थी कि हम दोनों बिना आगाह हुए बुआ की चूचियां चूस मसल रहे थे।
लेकिन मुझे अचानक बुआ की कहानी की सबसे ज़ोरदार बात समझ आ गयी।
“शब्बो बुआ इसका मतलब है कि आदिल भैया अकबर चाचू के भांजे और दमाद नहीं बेटे भी हैं। ” मैं असली बात उगल दी।
नूसी आपा की आँखें चमक उठीं।
“अरे जो भी समझो। तुम्हारे फूफा जान महीने भर से बाहर थे और तीन सालों से मेरी कोख सूखी थी। भाईजान के साथ एक हफ्ते के बाद ही मेरा आने वाला महीना नहीं आया।” बुआ ने थोड़ा शरमाते हुए कहा , “नूसी बेटा तुम्हे इस बात से कोई एतराज़ तो नहीं पैदा हो गया। ”
नूसी आपा ने बुआ के होंठो को कस कर चूमा और बोलीं,” शब्बो खाला तभी तो मैं और आदिल बिलकुल भाई बहन की तरह जुड़े हैं बचपन से। और खाला जान नेहा आज इसी प्यार भरे घराने को खुल्लमखुल्ला इकट्ठे करने का इरादा बना कर आयी है। ”
“नेहा नूसी तुम्हारी तदबीर बाद में सुनूँगी। तुम दोनों को अपने भाईजान से चुदने और हमल से होने की कहानी सुनाते सुनाते मैं बहुत गरम हो चली हूँ। चलो रंडियो पहले अपनी खाला को ठंडी करो फिर बताना अपनी तदबीर ,” शब्बो बुआ ने नूसी आपा और मुझे हुक्म दिया।
नूसी आपा ने शब्बो बुआ की दोनों हिमालय जैसे विशाल भारी ढलके उरोजों के ऊपर हमला बोल दिया और मैंने झट से अपना मूंह शब्बो बुआ की स्थूल गदरायी जांघों के बीच में घने घुंगराले झांटों से ढके यौनिद्धार के ऊपर दबा दिया।
“अरे नूसी बेटा यह तुम्हारी नाज़ुक चूचियां नहीं हैं। यह तुम्हारी खाला की चूचियां हैं कस कर मसलो और ज़ोर से काटो मेरे चुचुकों को, “शब्बो बुआ ने सिसकते हुए नूसी आपा को धमकाया और फिर अपना आक्रमण मेरी ओर मोड़ा , “नेहा बिटिया ऐसे हलके हलके चाटेगी मेरी चूत तो कैसे अपनी बुआ को झाड़ेगी। चलो जैम कर चुसो काटो मेरे दाने को। और ज़ोर से उँगलियाँ करो मेरी चूत और गांड में। झाड़ो मुझे लड़कियों , झाड़ो अपनी शब्बो खाला जान को। ”
हम दोनों जैम कर लग गए शब्बो बुआ को झाडने में। नूसी आपा ने अपने दांतों से कमल से शब्बो बुआ की चीखे निकलवा दीं। मैंने अपनी दो उँगलियाँ बुआ की चूत में और दो उनकी मखमली गांड में ठूंस कर कसके उनके दाने को चूसने काटने लगी। पांच मिनटों में शब्बो बुआ भरभरा के झड़ गयीं।
पर हम दोनों नहीं रुके और शब्बो बुआ की चूत और चूचियों का समलैंगिक मर्दन करते रहे। आधे घंटे में शब्बो बुआ छह बार झाड़ गयीं और वासना की उत्तेजना के अतिरेक से बिलबिला उठीं।
“उङनङ अरे अब छोड़ो मुझे। मार डाला तुम दोनों ने। कहाँ से सीखा ऐसा जादू ,”शब्बो बुआ निढाल हो चली थीं।
हम दोनों ने उनसे लिपट कर उन्हें दिल खोल कर चूमा।
जब शब्बो बुआ कुछ ठीक हुई तो बिस्तर से उठ कर अपने बिस्तर की पास मेज की दराज़ से एक विशाल मोटा कृत्रिम लिंग निकाल के ले आयीं। बिलकुल काले रंग का स्ट्राप-ऑन डिलडो था वो, लगभग अकबर चाचू और आदिल के लन्ड जितना लंबा मोटा पर उसके दूसरी ओर छह इंच का दानों से भरा लन्ड पहनने वाली लड़की की चूत में जाने के लिए जिसे दोनों को मज़ा आये।
” चलो नेहा पहन ले इसे और छोड़ मेरी नूसी को मेरे सामने। मैं भी तो देखूं कैसे चौड़ गयी होगी इसकी चूत भाईजान के लन्ड के ऊपर,” शब्बो बुआ ने हमें निर्देश दिया ,” चलो नूसी बेटी अपनी चूत अपनी बुआ के मुँह के ऊपर ले आओ। ”
मैंने छह इंच मोटा दानों से भरा डिलडो का हिस्सा जब अपनी गीली चूत में ठूंसा तो मैं सिसक उठी। लेकिन आगे का दुगुना लंबा पर उतना ही मोटा डिलडो को नूसी आपा की चूत में ठूसने के लिए मैं बेचैन हो गयी।
मैंने इंच इंच करके पूरा डिलडो सिसकती नूसी आपा की चूत में ठूंस दिया। शब्बो बुआ नूसी आपा के दाने को चूसने लगीं। मैंने लंबे धक्कों से नूसी आपा की चूत मारने लगी। नूसी आपा की चूत से मीठा रस टपकने लगा शब्बो बुआ के मुँह के ऊपर जिसे वो प्यार से चाट गयी।

