नेहा का परिवार – Update 147 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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नसीम आपा और अब्बू ४
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जब मैं जगी तो अब्बू के भारी प्यारे बदन ने मुझे बिस्तर के ऊपर दबा रखा था। मैंने पागलों की तरह अब्बू के मुंह को चूम चूम कर गीला कर दिया।
“अब्बू माफ़ कर दीजिये मैं तो आपकी चुदाई से गाफिल हो गयी ,” मैंने अब्बू की मर्दानी नाक की नोक को चूमते हुए कहा।
“बेटी आज रात कौन सोने देगा मेरी बेटी को ,” अब्बू ने प्यार से कहा।
मैं तो यह ही सुनना चाहती थी। आखिर यह मेरी और अब्बू की ‘ सुहागरात ‘थी।
“अब्बू अब मेरी बारी है आपको प्यार करने की ,”मैंने अब्बू से दरख्वास्त की।
अब्बू ने जब अपना लन्ड मेरी मेरे रस और उनके वीर्य से भरी चूत से निकाला तो एक लंबी धार बिस्तर पर फ़ैल गयी।
मैंने अब्बू को चित्त लिटा दिया। मैं उनके भारी-भरकम शरीर के ऊपर चढ़ गयी। पहले मैंने उनके मर्दाने चेहरे को अपने नन्हें हाथों में भर कर दिल भर कर चूमा। मैंने उनकी पलकें , उनका चौड़ा माथा , उनकी छोटी दाढ़ी से ढकी गर्दन को गीले मीठे चुम्बनों से इंच इंच गीला कर दिया। फिर उनके कानों के लोलकियों [इअरलोब्स ] को दिल भर कर चूसा। उनके कान के अंदर मैंने जीभ डाल उन्हें अपने गरम थूके से गीला कर दिया। अब्बू मेरे बेटी का अपने अब्बू की तरफ अपने प्यार का पागलपन से इज़हार करते देख आकर मर्दानी हल्की हल्की मुस्कान फेंकतें मुझे प्यार से देखते रहे।
मैंने उनकी मर्दानी सुंदर नाक के शक्ल को अपनी जीभ की नोक नापने के बाद उसे अपने मूंह में भर लिया। फिर अपनी जीभ की नोक से मन भर कर उनके एक नथुने के बाद दुसरे नथुने को खूब प्यार से चोदा। मेरे थूक से उनकी नाक गीली हो गयी।
मैं फिर उनकी मर्दानी चौड़ी बालों से भरी छाती को चुम्बनों से गीला करने के बाद उनकी बालों से भरी बगलों को भी चूस चूम कर खूब प्यार किया। उनके बदन से मेरी चुदाई की महनत से पसीने की मंद मंद खुशबू मेरे नथुनों में भर गयी। फिर बारी थी मेरे अब्बो की तोंद की। मैंने उनकी पूरी बालों से भरी तोंद को खूब चूमा और उनकी गहरी नाभि को जीभ से कुरेदने के साथ साथ उसे थूक से भर दिया।
मैंने अब्बू की मोटे के पेड़ के तने जैसी भारी भारी चौड़ी जाँघों को चूमते हुए उनके पैरों की हर ऊँगली को दिल खोल कर मूंह में भर कर चूसा।
और फिर मैं अब्बू के जाँघों को चूमते चूमते उनकी जांघों के बीच लटके घोड़े जैसे लंबे मोटे मूसल के ऊपर पहुँच गयी। मैंने उसे प्यार से थाम के हौले हौले मीठे चुम्बनों से उनके ख़ौफ़नाक पर प्यारे लन्ड के डंडे की पूरी लंबाई चूम ली। अब मैंने अब्बू के लन्ड का मोटा सेब जैसा सुपाड़ा अपने मूंह में भर कर हलके हलके चूसने लगी। अब्बू का लन्ड सिर्फ आधा खड़ा था फिर भी मुश्किल से मेरे दोनों हाथ उसे घेर पा रहे थे। जैसे जैसे उनका लन्ड तनतनाने लगा मेरा मूंह और भी खुल गया। मैंने अपनी जीभ की नोक से उनके पेशाब के छेद को कुरेदने लगी। मेरे नन्हें हाथ अब्बू के घोड़े जैसे लन्ड के तने को सहला रहे थे।
मैंने एक हाथ से उनके बड़े अण्डों जैसे मोटे घने घुंगराले झांटों से ढके फोतों को सहलाने लगी। मैंने अब्बू के लन्ड को चूसना बन्द कर उनके फोटों के नीचे की मुलायम खाल को चूमने लगी। उनके जांघों और चूतड़ों से उठती मर्दानी खुशबु मेरे नथुनों में भर गयी और मैं उनके मर्दाने शरीर के नमकीन खारे स्वाद के लिए बैचैन हो गयी। मैंने अब्बू को पलटने के लिए दरख्वास्त की। अब्बू अब पेट के बल लेते थे। मैंने उनके ऊपर लेट कर अपने फड़कते चूचियों से उनकी बालों भरी कमर की मालिश करने लगी। अब्बू के मुँह से निकली हलकी सिसकारी ने मेरे दिल और दिमाग़ में ख़ुशी की बिजली सी कौंधा दी। मेरे बड़े भारो उरोज़ उनके कमर और चूतड़ों के ऊपर रगड़ रगड़ कर उन्हें अनोखा मज़ा दे रहे थे।
मैंने उनके मज़बूत भारी बालों से भरे चूतड़ों को फैला कर अपने तन्नाए हुए चुचुकों से उनकी गांड की दरार सहलाने लगी। मैंने अपने एक चूचुक से उनकी गांड के फड़कते छेद को कुरेदा तो उनके दोनों मांसल चूतड़ फड़क उठे। अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उनके फैले हुए चूतड़ों के बीच में अपना मूंह दबा दिया।
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