नेहा का परिवार – Update 145 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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नसीम आपा और अब्बू २
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अब्बू के होंठों में मेरे होंठों को कस कर चूमते हुए एक बार फिर से मेरा मुंह अपनी जीभ से खोल कर मेरा मुंह का हर कोना दिल खोल कर चूसने लगे। मैं भी पगला कर उनके दीवाने गीले चुम्बन का जवाब उतने ही ज़ोर से देने लगी। मेरे मुंह में जैसी ही अब्बू की मीठी गरम लार इकट्ठे हो जाती मैं उसे स्टॉक लेती पर बिना चुम्बन तोड़े।
मेरी चूचियां अब्बू के मर्दाने बालों भरे सीने के नीचे कुचलीं हुईं थीं। उनके सीने की रगड़ से मेरे दोनों चुचुक गनगना रहे थे। मैं बिना सोचे अपनी चूत को अब्बू पेट से रगड़ रही थी।
अब्बू ने चुम्बन तोड़ कर मेरे माथे, पलकों को चूमा। फिर उनका गरम मुंह मेरे कानों के मुलायम लोंको को चूसने लगा तो मेरा दिल धकधक करने लगा। अब्बू जैसे मेरे बदन के सारे वासना को उकसाने वाले हिस्सों को जानते थे। उनकी जीभ की नोक ने मेरे कान की सुरंग को भी नहीं छोड़ा। फिर उनकी जीभ ने मेरी गर्दन को कामुक चुम्बनों से ढक दिया। उनकी जीभ ने मेरी गर्दन को सहलाया और होंठों से खाल को चूसा। मेरे चूत से रस की धार बह चली थी।
फिर उनकी जीभ की नोक ने मेरी फड़कती नाक की पूरे नक़्शे को धीरे धीरे सहलाया। फिर अब्बू ने मेरी पूरी नाक को अपने मुंह में भर कर अपनी जीभ की नोक को कभी एक नथुने में या फिर दुसरे नथुने में घुसेड़ कर उसे चूत की तरह चोदने लगते। मैं अब वासना से जल रही थी। और हलके हलके सिसक रही थी।
अब्बू ने हलके हलके अपने चुम्बन मेरे बदन के नीचे हिसों की तरफ बड़ा दिए। अब्बू ने मेरे सीने को चूम और फिर एक हाथ से मेरे एक स्तन को सहलाते हुए दुसरे चूचुक को जीभ से हिलाते हुए उसे अपने मुंह ने भर कर चूसने लगे। उनका दूसरा हाथ मेरे दूसरे चूचुक को सहलाते, कभी ऊँगली और अंगूठे के बीच में हलके हलके दबाते। मैं अब खुल कर सिसक रही थी। अब्बू अपनी बेटी को अपने अब्बू और मर्दाने प्यार से पागल बना रहे थे। मेरे बदन में आग लग रही थी और उसे बुझाने की चाभी अब्बू के पास थी।
अब्बू ने मेरे दोनों चूचियों और चूचुकों को खूब क्षुमा, चूसा और सहलाया। मैं तो छह रही थी कि अब्बू अपने फावड़े जैसे बड़े हाथों से मेरे दोनों चूचियों को मसल मसल कर सूज दें। पर अब अपनी बेटी के साथ पहला संसर्ग अपने ही तरीके से करने वाले थे। मैं तो जो अब्बू करते उस से इतनी ही पागल हो जाती।
अब अब्बू के चुम्बन मेरे उभरे गोल पेट के ऊपर छाने लगे। उन्होंने अपनी जीभ से मेरी गहरी नाभि को खूब कुरेदा चूमा। जब अब्बू के चुम्बन जाँघों के ऊपर पहुंचें तो मैं भरभरा कर झड़ने के लिए तैयार थी। बस अब्बू को मेरी जलती चूत की ऊपर एक बार ही अपना मुंह लगाना भर था।
अपर अब्बू ने अपनी बेटी की वासना की आग को और परवान चढ़ाने के लिए मेरी चूत को अकेला छोड़ कर मेरे मांसल गुदाज़ जाघों को चूमते हुए नीचे जाने लगे। अब्बू ने मेरी सीधी जांघ और टांग की एक एक इंच को चूमा। जब उनके चुम्बन मेरे घुटने के पीछे की नाज़ुक संवेदनशील खाल को चुम रहे थे तो मैं तो मस्ती से बौखला गयी।
मेरा सारा बदन गनगना उठा था। मैं अब बिलकुल तैयार थी। यदि उस वक़्त अब्बू ने एक धक्के में अपना घोड़े जैसा लन्ड मेरी चूत में ठूंस दिया होता तो मैं एक लम्हे में झड़ जाती। पर अब्बू मेरे बदन को सारंगी के तारों की तरह बजा रहे थे।
आखिर में अब्बू ने मेरे दाएं पैर को गीले चुम्बनों से भर कर मेरे अंगूठे को अपने मुंह में भर लिया। उन्होंने मेरे दाएं पैर के अंगूठे को चूस चूस कर मुझे पागल। मुझे उस रात पता चला कि मेरे पैर की उँगलियों और अंगूठे भी मेरे वासना के बटन हैं। अब्बू ने मेरे पैर की सारी उंगलीयों को उतने प्यार चूस चूस आकर मुझे दीवानी कर दिया। फिर अब्बू ने मेरे बाएं पैर को भी वैसे ही प्यार से चूम चूस। उनके चुम्बन फिर मेरे बाएं टांग और जांघ के ऊपर कहर ढाते हुए मेरे पेंडू की ऊपर पहुँच गये।
इस बार अब्बू ने अपनी जीभ से मेरी घनी घुंघराली झांटों को फैला कर मेरे भगोष्ठों को गुलाब की पंखुड़ियों की तरह अलग अलग कर दिया। अब्बू के जीभ की नोक ने मेरी चूत की गुलाबी सुरंग के मुहाने को सहलाया। मैं हलके से चीख उठी मस्ती में ,” अब्बू अब्बू हाय रब्बा अब्बू । ”
अब्बू ने मेरी गुदाज़ जांघों को मोड़ कर फैला दिया। अब मेरी रस से भरी चूत अब्बू के मुंह के लिए पुरी खुली थी। अब्बू ने मेरी जांघों को सहलाते हुए मेरी चूत को अपनी जीभ से कुरेद प्यार से हलके से। उन्होंने मेरे दाने को बिलकुल अकेला चूड़ दिया था। मैं तड़प रही थी झड़ने के लिए। मैं झड़ने के कगार पे थी बस अब्बू की जीभ को एक बार मेरे भग-नासे को कुरेदने भर था। पर अब्बू ने अपनी बेटी की वासना को ऐसी आसानी से नहीं खड़ने देने वाले थे उस रात।
अब्बू ने जब मेरी वासना की आग को बेकाबू होते देखा तो अपनी जीभ से मेरी जांघें चूमने लगे। मैं तपड़ रही थी। पर मेरे झड़ने की चाहत और अब्बू का प्यारा सितम मुझे और भी जला रहा था।
अब्बू ने एक बार फिर से मेरी चूत चूमने चाटने लगे। उन्होंने मेरी चूत की सुरंग को अपनी गोल गोल मोड़ी जीभ से चोदा। फिर उन्होंने मेरे तन्नाए दाने को चूसा चाटा। जैसे ही मैं झड़ने वाली थी ना जाने कैसे अब्बू जान गए और उन्होंने मेरी चूत को अकेला छोड़ दिया।
मैं अब झड़ने की चाहत से जल रही थी। अब्बू ने कई बार मुझे झड़ने के कगार पे ले कर प्यासा छोड़ दिया।
“अब्बू मेरे अब्बू, अब नहीं रहा जाता अब्बू। अब अपनी बेटी के ऊपर इतना प्यारा सितम बन्द कीजिये और झाड़ दीजिये मुझे अब्बू ……….. ,” मैं बिलबिला उठी थी।
अब्बू ने एक बार फिर से अपना पूरा भारी भरकम बदन मेरे ऊपर डाल दिया। उन्होंने मेरे पसीने की बूंदों से सजे मुंह को जी भर कर चूमा। उन्होंने ममेरी बगलों को भी खूब चटखारे मारते हुए चूसा। मैं अब्बू के चूमने से मस्त पड़ी थी और मुझे पता ही नहीं चला। ना जाने किस लम्हे में अब्बू मोटे सेब जैसे सुपाड़े को मेरी चूत के दरवाज़े के ऊपर टिका दिया।
मेरी वासना से भरी आँखें अब्बू की आँखों से अटक गयीं।

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