हम दोनों जानते थे की शानू की चूत तीन चार धक्कों के बाद उसके रस से लबालब भर जायेगी।
जीजू ने इस बार दो ही धक्कों में शानू की चूत की गहराइयों को और भी अंदर धकेलते हुए अपना वृहत लण्ड एक बार फिर जड़ तक ठूंस दिया। इस बार शानू की चीखें थोड़ी हलकी थीं। जीजू ने बिना देर किये दनादन अपने लण्ड की आधी लम्बाई से शानू की चूत बिजली की रेलगाड़ी की रफ़्तार से चोदने लगे।
शानू के आंसूं बहने बंद हो गए। उसकी चीखें पहले तो धीमी हुईं फिर सिसकारियों में बदल गईं। और फिर जीजू के भीमकाय लण्ड और उसकी चूत के बीच में अदि-काल से चलता रति-सम्भोग का खेल शुरू हो गया।
शानू की चूत में रति-रस का सैलाब आ गया। चुदाई के दर्द से शानू की काम-वासना और भी प्रज्ज्वलित हो गयी। शानू के सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं। मैंने अब उसका सुबकता मुंह अपनी गीली चूत के ऊपर दबा लिया। शानू के चूतड़ खुद-ब-खुद जीजू के लण्ड का स्वागत करने के लिए आके-पीछे होने लगे।
जीजू का लण्ड अब फचक फचक फचक की आवाज़ें पैदा करते हुए शानू की नन्ही चूत रौंद रहा था। मेरी चूत जीजू के लण्ड के लिए तड़पने लगी।
पर मुझे शानू के फड़कते होठों से स्पंदन से उपजे आनंद से ही संतोष करना पड़ा। जीजू का पहले शानू की चूत का मर्दन करने के बाद ही मेरा नंबर लगाएगा।
शानू की सुबकियां अब वासना के आनंद से भरी हुईं थीं। उसका बदन बार बार रति-निष्पत्ति के प्रभाव से कांप रहा था। जीजू ने जब देखा कि शानू की चीखेंना केवल धीमी हो गईं हैं बल्कि वो अब ज़ोर ज़ोर से सिसक रही थी तो उन्होंने उसकी गोल गोल गुदाज़ कमर को छोड़ कर उसके अल्पव्यस्क कच्चे स्तनों को अपने विशाल निर्मम हाथों में भर कर बेदर्दी से मसलने लगे। शनु की चीखें निकल पड़ीं फिर से। जीजू ने ना केवल शानू के उरोजों को मसला मरोड़ा बल्कि उनको खींच खींच उसकी छाती से जैसे उखाड़ने कि कोशिश कर रहे थे। उन्होंने शानू की वासना के मसाले में में दर्द की मिर्ची मिला दी। शानू चाहे चीख रही हो या सिसक रही हो पर वो भरभरा कर लगातार झड़ रही थी।
जीजू के भीमकाय लण्ड की भीषण चुदाई से शानू अनेकों बार झड़ गयी पर जीजू ने चुदाई की रफ़्तार को ज़रा सा भी धीमा नहीं होने दिया। मैं भी शानू की चुदाई को देख और अपनी चूत के उसके सिसकते मुंह के आनंद से भरभरा कर झड़ गयी। जीजू ने जब मेरी आँखों को कामोत्तेजना के आनंद से बंद होते देखा तो लगभग एक घंटे की चुदाई का खत्म करते हुए शानू की चूत को और भी बेदरदी और तेज़ी से चोदने लगे। शानू सिसकते हुए बार बार झड़ रही थी। जीजू के भीषण धक्का लगाया और अपने उर्वर बच्चे पैदा करले वाली मलाई की बरसात की बौछार से शानू के कच्चे गर्भाशय को नहला दिया।
शानू बिलकुल शिथिल और बेहोश से हो गयी। जैसे ही जीजू ने अपना बलशाली लण्ड उसकी चूत में से निकाला शानू की चूत से जीजू के मर्दाने रस की लहरें उसकी टांगों के ऊपर दौड़ने लगीं।
मैंने एक लम्हा भी नहीं बर्बाद किया। शानू जैसे ही बिस्तर पर ढुलक गई मैंने जीजू का अभी भी तन्नाया हुआ लण्ड अपने दोनों हाथों में सम्भाल कर उसके ऊपर लिसे रस को चाटने लगी।
जीजू ने मेरा सर कस कर दबोच लिया और अपना महा लण्ड मेरे मुंह में ठूसने लगे। मैं गौं – गौं करती उनके मोठे लण्ड को मुश्किल से मुंह में भर पा रही थी। मेरे मुंह के कौनें इतने फ़ैल गए थे जीजू के मोटे लण्ड के ऊपर की मुझे डर लग रहा था की वो फट जाएंगें। जीजू ने बिना मेरी परवाह किये मेरे मुंह का भरपूर चोदन किया। उनका सब जैसा सुपाड़ा मेरे हलक के पीछे की दीवार से जब टकराता तो मैं ‘गौं – गौं ‘ करतीं और मेरी आँखें गीली हो जातीं। पर जीजू के मर्दाने मुंह-चोदन से मेरी चूत और भी गीली हो चली थी।
“बड़ी साली साहिबां अब आपकी बारी है।” जीजू ने अपना लण्ड मेरे मुंह से खींच लिया। मेरी लार मेरे फड़कते स्तनों के ऊपर फ़ैल गयी।
” जीजू मेरी चूत तो एक घंटे से तड़प रही है आपके लण्ड के लिए ,” मैं जल्दी से बिस्तर के किनारे की तरफ खिसकने लगी।
“नेहा रानी तुम्हारे जीजू के लण्ड को एक साली की चूत के बाद दूसरी साली की गांड चाहिए ,” जीजू का लण्ड मानों दो तीन इंच और लम्बा और मोटा लग रहा था।
मैं समझ गयी अब जीजू मेरी चीखें निकलवाने के लिए तैयार हो रहे थे।
नेहा का परिवार – Update 139 | Erotic Family Saga

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