जीजू ने शानू की चूत को एक बार ज़ोर से कुरेदा और उसकी चूची को बेदर्दी से मसला और फिर अपने ससुर मामू का लिहाज़ दिखते हुए अपनी मर्दानी गिरफ्त से आज़ाद कर दिया।
अकबर चाचू जीजा-साली के उन्मुक्त कामुक प्रदर्शनी के ऊपर मुस्कराए। फिर उनकी निगाहें अपनी बड़ी बेटी के हुस्न से उलझ गयीं। चाचू भी युरन्त आने वाली रात के ख्याल से थोड़े हिचकते हुए लगने लगे।
चालाक शानू ने तुरंत पैंतरा फेंका , ” अब्बू देखिये ना जीजू कितने बेदर्द हैं? कितनी बेदर्दी से पेश आते हैं मेरी तरफ? और आपा भी उनको बढ़ावा देती हैं। ”
चाचू ने अपनी छोटे नन्ही बेटी को गोद में उठा लिया छोटे बच्चे की तरह और शानू की दोनों बाहें अपने अब्बू के गले का हार बन गयीं।
” शानू बीटा जीजा -साली के बीच में मैं नहीं आने वाला। वैसे भी बड़ी बहन को तुम्हारे जीजू का पूरा ख्याल रखने की ज़िम्मेदारी भी तो संभालनी है। याद है कल रात की कहानी। तुम्हारी अम्मी ने भी तो तुम्हारी शन्नो मौसी को जीजू के लिए तैयार किया था। ” अकबर चाचू की बात सुन कर शानू जो से मुस्करायी।
“आप सही कह रह हैं अब्बू, ” और फिर ज़ोर से उसने अब्बू के होंठों के ऊपर अपने कमल की पंखुड़ियों जैसे गुलाबी होंठ रख दिए।
मैं शानू के ऊपर फ़िदा हो गयी। एक ही बाण से उसने एक नहीं तीन-तीन चिड़िया गिरा दीं।
नसीम आपा ने तुरंत उत्सुक हो कर पूछा , ” अब्बू यह शन्नो मौसी की कौनसी कहानी है ?”
” अब्बू इस बार मैं सुनाऊंगी यह कहानी। पर पहले आप कपडे बदल कर ताज़े हो जाइये ,” कौन सा बाप उस ख़ूबसूरत मुश्किल से किशोरावस्था के पहले साल को फांदती बेटी को नज़रअंदाज़ कर सकता है।
” बिलकुल ठीक अब्बू , आप तरोताज़ा हो जाइए फिर इस शैतान से वो कहानी सुनते है। पर आप इसकी कहानी पर नज़र रखिएगा। हमारी नन्ही शानू की मनघरन्त बातें बनाने की क़ाबलियत से आप पूरे वाकिफ हैं ,” नसीम आपा ने किसी बीवी की तरक अब्बू के पास जा कर उनका हाथ थाम कर शानू को नीचे उतरने में मदद की।
अकबर चाचू पहले तो झिझके फिर हिम्मत जोड़ कर अपने बड़ी बेटी को बाँहों में भर कर उसके शर्म से लाल गाल को चूम लिया , ” मैं जल्दी ही नीचे वापस आता हूँ। ”
” चलिए आदिल आप भी ताज़ा हो जाइए। हम सब तब तक ड्रिंक्स तैयार कर देंगें,” आदिल भैया से ऑंखें मिला नहीं पा रहीं थीं।
” नसीम मेरी जान, आज रात तो फ़रिश्ते भी तुम्हारे ऊपर फ़िदा हो जाएंगें। मामू की आँखें तुम्हारे ऊपर से हट ही नहीं पा रहीं थीं। मुझे तुम पर बहुत फख्र है नूसी। ” आदिल भैया ने आपा के होंठों को प्यार से चुम कर कहा।
हम सब प्यार से नसीम आपा को नूसी बुलाते थे बचपन में। लगता है कि वो नाम अब उन पर पूरा टिक गया था।
“हाय रब्बा मेरे। आदिल मेरा दिल देखो कैसे धड़क रहा है। मेरी तो जान निकली जा रही सिर्फ सोच सोच के। कैसे मैं हिम्मत जुटाऊँगी ?” नसीम आपा ने अपने दिल का डर ज़ाहिर किया।
” जानम सब ऊपरवाले के ऊपर छोड़ दो। सिर्फ जैसा सोचा है वैसा करो सब ठीक हो जायेगा ,” आदिल भैया ने अपनी ममेरी बहिन और बीवी को प्यार से जकड कर तस्सली दी।
आदिल भैया और चाचू के जाते ही हम सब शाम के ड्रिंक्स तैयार करने में मशगूल हो गए।
चाचू की पसंदीदा स्कॉच , तीस साल पुरानी ग्लेनमोरांजी। आदिल भैया के लिए लाल मदिरा , इटली की बरोलो। हम लड़कियों के लिए सफ़ेद फ़्रांस की सौविंयों – ब्लाँक।
एक घंटे में हम सब पारिवारिक हॉल में अपने गिलासों को ससम्भाले फिर से इकट्ठे हो गए। मैं होशियारी से चाचू के दोनों ओर अपने आप और नसीम आपा को बैठा कर घेर लिया।
अकबर चाचू ने सफ़ेद कुरता और पायजामा पहना था। आदिल भैया ने शॉर्ट्स और टी शर्ट। नसीम आपा और मैं एक नज़र में समझ गए किादिल भैया के शॉर्ट्स ने नीचे कच्छा नहीं पहना था। दोनों छह फुट से ऊँचे चौड़े बलशाली मर्द बहुत ही कामकरषक और हैंडसम लग रहे थे।
शानू ने मटकते हुए बच्चों जैसे ज़िद का नाटक करते हुए अपने जीजू की गोद में बैठ गयी। हम तीनों को शानू की ऊपर उठी फ्रॉक के भीतर का उत्तेजक नज़ारा साफ़ साफ़ दिख रहा था। उस कामुक नज़ारे को और भी परवान चढ़ाते हुए आदिल भैया ने शानू को अपनी गोद में सँभालने की ओट में उसके दोनों चूचियों को अपने हाथों से ढक दिया।
” चल शानू अब कहानी सुना ना नूसी को ,” मैंने चाचू की भारी मज़बूत बाज़ू उठा कर अपने कन्धों पर रख उनके सीने पर सर रख कर अपनी मदिरा [ वाइन ] का घूँट भरा। मेरी आँख का इशारा समझ कर नूसी आपा ने भी अपने अब्बू के मज़बूत मर्दाने बाज़ू के अंदर आ कर उनके कंधे पर सर टिका दिया।
नेहा का परिवार – Update 135 | Erotic Family Saga

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