नेहा का परिवार – Update 132 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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मैंने नसीम आपा को उनकी बायीं तरफ पलट दिया। शानू को मैंने नसीम आपा के अगले भाग को सौंप पिछवाड़ा खुद सम्भाल लिया।
जब तक नसीम आपा अपने लम्बे चरम – आनंद के आक्रमण से सभलतीं शानू का मुंह उनकी चूत के ऊपर था। मैंने उनके भारी चूतड़ों को फैला दिया। उनके नितम्ब किसी मर्द की भी लार टपकाने में सक्षम थे।
शानू ने अपनी बड़ी बहन के सूजे भग-शिश्न को कस कर चूसते हुए तीन उँगलियाँ उनकी योनि की सुरंग में घुसा कर उनकी चूत का ऊँगली-चोदन दिया। मैंने आपा के चौड़े भारी मुलायम नितिम्बों और उनकी गुलाबी संकरी गुदा के सिकुड़े छेद को अपनी आँखों से सहलाया और मेरा सब्र टूट गया। मैंने नसीम आपा के चूतड़ों को चूमते हुए कई बार अपने दांतों से काटा।
” अरे चुड़ैल क्या मुझे जाएगी ? हआांंंंन ……… नेहा आआआ। …. और ज़ोर से काट चुड़ैल हाय। … शानू तू भी मेरी चूत कट खायेगी क्या ? उन्न्नन्नन्नन ……… रब्बा मेरा जिस्म जल रहा है …….. और ज़ोर से आआआआआण्ण्ण्ण्ण्ण्ण ,” नसीम आपा वासना की उत्तेजना से कराहीं।
मैंने अपने जीभ से उनकी गुदा-द्वार को कुरेदना शुरू कर दिया। उनकी आनंद भरी कराहटें कमरे में गूंजने लगीं। शानू और मैं उनकी चूत और गांड और भी ज़ोरों से चूसने , चाटने और चोदने लगे।
मेरी जीभ आखिर कार नसीम आपा के तंग सिकुड़ी गांड के ऊपर हावी हो गयी। मेरी जीभ की नोक उनकी ढीली होती गुदा के छेद के अंदर दाखिल हो गयी। नसीम आपा की गांड के सुगन्धित गांड को मैं अपनी जीभ से चोदते हुए उनके गदराए चूतड़ों को मसलने लगी।
शानू के तीन उँगलियाँ अब तेज़ी से नसीम आपा की चूत चोद रहीं थी। उसने अपनी बड़ी बहन के सूजे मोठे लम्बे भग-शिश्न को एक क्षण के लिए भी अपने मुंह से नहीं निकलने दिया। शानू नसीम आपा की चूत के दाने को लगातार ज़ोर से चूस रही थी।
नसीम आपा सिस्कारते हुए कई बार झड़ चुकीं थीं।
अचानक उनका बदन फिर से धनुष की तरह तन गया, ” हआआआ …….. उन्न्नन्नन्नन ………..हम्म्म्म्म्म्म ……. मर गयी रब्बा मेरे ………उन्न्नन्नन। ”
हमें लगा कि नसीम आपा के अगले चरम – आनंद बहुत ही तीव्र और ज़ोरदार होगा और वो ज़रूर थक जाएंगी।
मैंने उनकी थूक से सनी गांड में एक और फिर उँगलियाँ जोड़ तक बेदर्दी से ठूंस दीं। शानू और मैं नसीम आपा की चूत और गांड बेदर्दी से और तेज़ी से अपनी उँगलियों से चोद रहे थे।
नसीम आपा ने एक घुटी – घुटी चीख मारी। उनका बदन तन गया और उनकी सिसकारियाँ बिलकुल बंद हो गयीं। कुछ देर बाद के मुंह से एक लम्बी सीकरी निकली और उनका बदन बिलकुल शिथिल हो कर बिस्तर पर पस्त हो गया।
शानू और मैंने एक दुसरे को ख़ामोशी से शानदार चुदाई के लिए बधाई दी।
हम दोनों ने नसीम आपा के थके निश्चेत बदन को बाँहों में भर कर उनके दोनों ओर लेट गए।
शानू ने मेरी नसीम आपा की गांड से ताज़ी-ताज़ी निकली रास से लिसी उँगलियाँ अपने मुंह में भर ली। बदले में मुझे उसकी नसीम आप के चूत – रस से लिसी उँगलियों का स्वाद मिल गया।
नसीम आपा काफी देर बाद होश में आयीं और फिर उनके आनंद भरी थकी मुस्कराहट से दमके चेहरे को देख कर हम दोनों ने उन्हें चूम-चूम कर गीला कर दिया।
” नेहा अब आज रात के बारे में भी सोचो ? ” शानू दादी-अम्मा की तरह बोली।
” आज रात के बारे में क्या सोचना है शानू ? ” मैंने शानू को कुरेदा , ” आज रात नसीम आपा की चूत और गांड की तौबा बोलने वाली है चाचू के लण्ड से। ”
” अरे उसके लिए तो आपा वैसे ही बेचैन हैं सालों से अब्बू के लण्ड खाने के लिए। मैं तो पूछ रही थी कि आपा क्या पहनेंगीं ?” शानू ने अपना सवाल साफ़ किया।
” अरे वो तो मैंने पहले ही सोच रखा है। अकबर चाचू ने मुझे बताया था और सुशी बुआ ने भी कहा था। चाचू की पसंदीदा पोषल लहंगा और चोली है। नसीम आपा बहुत खूबसूरत लगेंगी रज्जो चाची की चोली लहंगे में। ” मैंने खुलासा दिया।
“लगता है तुम दोनों ने मेरे लये कुछ भी नहीं छोड़ा ,” नसीम आपा ने प्यार से हम दोनों को चूमा।
” अरे आपा सबसे ज़िम्मेदारी का काम तो आपके लिए ही छोड़ा है। ज़ोर से चाचू से चुदने का काम,” मैंने खिलखिलाते हुए कहा।
शानू और नसीम आपा भी खिलखिला कर हंस दीं। नसीम आपा की आँखों में प्यार और वासना का मिलाजुला खुमार छा गया।

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