नसीम आपा पीठ पर लेते दोनों हाथों और टांगों को फैलाये गहरी गहरी साँसे ले रहीं थीं। समलैंगिक प्यार की उत्तेजना किसी और सम्भोग की उत्तेजना का मुकाबिला कर सकती है। मैंने एक बार फिर से नसीन आपा के गदराये लुभावने शरीर के रस का नेत्रपान किया। साढ़े पांच फुट का कद। सत्तर किलो का गुदाज़ बदन। चौड़े गोल कंधे। गोल सुडौल बाहें। केले के तने जैसी गोरी गोल भरी-भरी जांघें। भरी-भरी पिंडलीं। सुडोल टखने। नसीम आपा के वज़न का हर किलो हुस्न में इज़ाफ़ा कर रहा था।
तब मैंने पहली बार गौर किया कि उनकी फ़ैली बाँहों की बगलें रेशमी बालों से ढकीं थीं। शानू और मैं आपा के दोनों तरफ उनकी बाँहों में मुंह छुपा कर लेट गयीं।
” आपा अपने अपनी बगलों में रेशमी जंगल कब से उगने दिया ?” मैंने उनकी फड़कते उरोज को सहलाते हुए पूछा।
आपा हंस दीं , मंदिर की घंटियों जैसी मधुर संगीत भरी हंसी , ” नेहा मैंने गलती से शब्बो बुआ से शर्त लगा ली। तुझे तो पता है हमारी बुआ की बगलों में उनके घुंघराले रोमों से भरी हैं। उन्होंने मुझे उकसा दिया। और मैंने बुद्धुओं के जैसे गलत शर्त लगा ली कि मैं भी अपनी बगलों में उनके घने बगलों जैसे रोएं ऊगा सकती हूँ। पर अब मुझे पता लग रहा है कि पहले तो मेरे रोएं सीधे है जब कि बुआ के सूंदर घुंघराले हैं। और मेरी बगले बड़ी मुश्किल से भर रहीं हैं। लगता है मैं बुरी तरह हारने वालीं हूँ। ”
” आदिल भैया यानि जीजू को मेरी बड़ी बहन की भरी बगलें कैसे लगीं ?” मैंने अपना मुंह आपा की बगल में दबा दिया। हमारे लम्बे समलैंगिक सम्भोग और प्यार की गर्मी और मेहनत से हम तीनो के बदन पसीनों की बूंदों से चमक रहे थे। मेरे नथुनों में आपा की मोहक सुगंध समां गयी।
” अरे नेहा बुआ मुझे पक्का वायदा दिया था कि आदिल तो होश गवां देंगें मेरी बगलों को देख कर। और वही हुआ। आदिल मुझे चोदते हुए मेरी बगलों को बिना थके चूस चूस कर गिला कर देतें हैं। ” नसीम आपा ने मेरे चुचूक को मसलते हुए बताया।
शानू ने भी अपनी बड़ी बहन के दुसरे उरोज को मसलते हुए रोती से आवाज़ में कहा , ” मेरी बगलों में रेशा भी नहीं है। ”
” मेरी रांड कमसिन नन्ही बहन तेरी तो अभी झाँटें उगना भी नहीं शुरू हुईं है। इन्तिज़ार कर। जब तेरे जीजू तेरी झांटों को देखेंगें तो पागल हो जाएंगें। तेरी चूत को चोद – चोद कर फाड़ देंगें। ”
शानू ने नसीम आपा के बगलों के रेशों को चूसते हुए बड़ी बहन का ताना बेशर्मी से हँसते हुए सहा ,” आपा मेरी चूत फाड़ने का तो अब पूरा हक़ है जीजू को। ”
मेरे हाथ बहकते हुए आपा के घनी घुंघराली झांटों से ढकी कोमल चूत की फांकों को सहला रहे थे। नसीम आपा सिसक उठी , ” आह नेहा धीरे ,” मैंने उनके उन्नत भाग-शिश्न को मसल दिया था।
शानू ने मेरा साथ देते हुए आपा के उरोज के ऊपर आक्रमण बोल दिया। शानू ने अपनी बड़ी बहन के चुचूक को कस कर चूसना शुरू कर दिया। और शानू अपने नन्हें दोनों हाथों से उनके भरी विशाल स्तन को कस कर मसले भी लगी।
आपा सिसक उठीं , ” हाय तुम दोनों छिनालों को सब्र नहीं है क्या? अभी कुछ लम्हों पहले ही तो मुझे घंटे भर रगड़ा है तुम दोनों ने। ”
आपा ने शिकायत तो की पर उन्होंने एक हाथ से अपनी छोटी बहन का मुंह अपने फड़कते उरोज के ऊपर और दुसरे से मेरे हाथ को अपने चूत के ऊपर दबा दिया।
मैंने अपनी दो उँगलियाँ आपा की गुलाबी चूत के सुरंग में घुसाते हुए अपने अंगूठे से उनके मोठे सूजे भग-शिश्न [ क्लिटोरिस ] को लगी।
आपा की सिसकारी कमरे में गूँज उठी।
नसीम आपा के होंठ खुल गए। उनके अध-खुले लम्बी-लम्बी भरी साँसें उबलने लगीं। मेरी उत्सुक उँगलियों ने नसीम आपा नसीम आपा की रेशमी चिकनी योनि की सुरंग के आगे की दीवार पे छोटा खुरदुरा स्थल ढूंढ लिया और उसे तेज़ी से सहलाने लगीं। नसीम आपा के बड़े गुदाज़ चूतड़ बिस्तर से उठ कर चहक गए।
” हाँ हाय रब्बा ऐसे ही…. नेहा ,,…… उन्न्नन्नन हाँ ज़ोर से ……. उन्न्नन्नन्न ,” नसीम आपा सिसकारियों ने हम दोनों को और भी उत्साहित कर दिया।
थोड़ी देर में ही नसीम आपा की हल्की से चीख निकल गयी और उनका गुदाज़ बदन ऐंठ गया। नसीम आपा भरभरा कर झड़ रहीं थीं।
मुझे अचानक बहुत ही उत्तेजक विचार आया।
नेहा का परिवार – Update 131 | Erotic Family Saga

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