कुछ देर बाद ही नसीम आपा बोल पाईं , “हाय रब्बा, नेहा तूने वाकई अब्बू के साथ चुदाई की कल रात ?”
“नसीम आपा क्या बताऊँ चाचू बेचारे इतने महीनों से भूखे थे की उन्होंने मेरी चूत और गांड की तौबा बुला दी अपने घोड़े जैसे लंड से ठोक ठोक कर। ” मैंने नसीम आपा की भारी हो चलीं साँसों को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा।
” नेहा मुझे कितना रश्क हो रहा है इस वक्त। मैं थोड़ी सी भी बहादुर होती तेरी तरह तो कब की अब्बू के कमरे में जा चुकी होती। काश मैं अपने प्यारे अब्बू के अकेलेपन को अपनी जवानी से दूर कर पाने की हिम्मत जुटा पाती। इस बेटी की जवानी का क्या फायदा जब जिस अब्बू ने इसे जनम दिया उसी अब्बू के काम ना आये तो ? ” नसीम आपा बहुत भावुक हो गयीं।
” नसीम आपा ज़रा मेरी बात सुने पहले। मैंने कल चाचू के साथ बहुत खुल कर बात की और…….. ” और फिर मैंने नसीम आपा को पूरा किस्सा सुना दिया।
नसीम आपा खिलखिला उठीं , “हाय अल्लाह की नेमत है तू नेहा। वाकई अब्बू की मेरे लिए चाहत इतने सालों से दबी हुई थी। मैं जैसे तूने मंसूबा बनाया है वैसे ही चलूंगी। ”
अचानक हम तीनों एक दुसरे से लिपट कर रोने लगे। लड़कियों की इस क़ाबलियत का कोई मुकाबिला नहीं कर सकता। जब दुखी हों तो रों पड़ें और जब बहुत खुश हो तो भी रों पड़ें।
जब हम तीनो का दिल कुछ हल्का हुआ तो हम तीनों पागलों की तरह खिलखिला कर हंस पड़ीं। और बड़ी देर तक हंसती रहीं।
काफी देर बाद नसीन आपा ने कहा ,”नेहा तू मुझे सारी रात का ब्यौरा बिना एक लफ्ज़ काम किये दे दे। मुझे खुल कर बता कि कैसे कैसे अब्बू ने तुझे चोदा और क्या क्या कहा। उन्हें क्या ज़्यादा अच्छा लगता है और कैसे तुखसे उन्होंने करवाया। कुछ भी नहीं छुपाना। पूरा खुलासा दे दे नेहा। मेरा सब्र अब टूटने वाला है। ”
मुझे नसीम आपा के अपने अब्बू के लिए इतना प्यार देख कर रहा नहीं गया। मैंने चाचू और अपने बीच हुए घनघोर लम्बी चुदाई का पूरा खुलासा देना शुरू कर दिया।
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जब तक मैंने पूरी रात की कहानी बहुत खुलासे और सुचित्रित प्रकार से सुनाई तब तक शानू का मुंह अपनी बड़ी बहन की चट्टान जैसी उन्नत चूची पर कसा हुआ था। मैंने दूसरे उरोज़ को मसलते हुए अपने दूसरे हाथ को नसीम आपा की धमाके दार जंगों के बीच में छुपे ख़ज़ाने की गोह को सहलाने में मशगूल कर दिया।
कहानी पूरी होते ही नसीम आपा सिसकारी मरते हुए फुसफुसाई, “कैसी नमकहराम बहनों हो दोनों, एक ने मेरे खाविंद अपने जीजू का लंड पूरी रात खाया दूसरी ने मेरे वालिद मेरे अब्बू का लंड पूरी रात खाया और अब दोनों अपनी बड़ी बहन आपा को अच्छे से चोदने की जगह देखो कैसे नाटक कर रहीं है मरी चुचीओ और चूत के साथ ,” नसीम आपा के उल्हानों ने मानों हम दोनों का कोई छुपा बटन दबा दिया। मैं लपक कर नसीम आपा की टांगों के बीच में डुबकी मारने लगी। शानू ने अब बेहिचक अपनी बड़ी बहन के एक चुचूक ज़ोर चूसते हुए दूसरे चुचूक को मड़ोड़ना और मसलना शुरू कर दिया। नसीम आपा ने सिसक कर अपनी नन्ही बहिन का मुंह अपने मुंह के ऊपर जकड लिया।
नसीम आपा और शानू खुले मुंह से बहुत गीले और लार आदान-प्रदान करने वाले चुम्बन में जुड़ गयीं। मैंने नसीम आपा की तूफानी जांघें फैला कर उनके गीले मोहक सुंगंधित स्त्री धन के गुफा के पर्दों को अपनी जीभ से खोल कर उनकी नैसर्गिक गोह में घुसा दिया। नसीम आपा की दबी दबी सिसकारी ने कमरे में संगीत की लय खोल दी।
शानू ज़ोरों से अपनी आपा के उरोज़ों का मर्दन कर रही थी। मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चोदते हुए उनके भग-शिश्न को अपने अंगूठे से रगड़ रही थी – बेदर्दी से, बहुत ज़ोर से।
नसीम आपा की सिस्कारियां शानू के मुंह में दबी नहीं रहीं पर कमरे में गूँज उठी। उनका सत्तर किलो का गुदाज़ सुडौल शरीर अब बिस्तर से उझलने लगा।
मैंने शानू से कहा , ” शानू, आपा के मुंह पर अपनी चूत दबा कर उनकी चूचियों को मसल। ”
शानू मेरा इशारा तुरंत समझ गयी। उसने झट से उठ कर अपने चूतड़ नसीम आपा के मुंह पर टिका दिए। उसकी गांड और चूत अब नसीम आपा के मूंग के ऊपर थी। शानू नसीम आपा के ऊपर उल्टी लेट गयी। नसीम आपा ने अपनी छोटी बहिन के चूतड़ कस कर मसलते हुए उसकी चूत को अपने मुंह पर दबा ली।
मैंने नसीम आपा की चूत में दो उँगलियाँ घुसा कर उनके मोटे लम्बे गुलाबी भग-शिश्न को अपने मुंह में काबू कर लिया। नसीम आपा की सिसकारी ने मुझे और शानू को बहुत उत्तेजित कर दिया।
“नेहा, काट ले आपा की चूत। घुसा दे अपना पूरा हाथ उनकी चूत में। चोद आपा की चूत नेहा,” शानू वासना के उत्तेजना के असर से चिल्लायी।
मैंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। शीघ्र मेरी उँगलियाँ, एक नहीं दो, आपा की गांड में थीं, मेरी दूसरी दो उँगलियाँ उनकी चूत में , और मेरा अंगूठा और मुंह उनके तड़पते भग-शिश्न पर। और शानू की सुगन्धित चूत उनके मुंह पर और शानू के हाथ और मुंह उनके फड़कते उरोज़ों के ऊपर सितम ढा रहे थे।
हम दोनों ने दिल लगा कर नसीम आपा को समलैंगिक प्यार से डूबा दिया।
नसीम आपा कांपते हुए कई बार झड़ गयीं। उन्होंने गाली दे कर, प्यार की दुहाई दे कर हमें रुक जाने की गुहार लगाई पर शानू और मैंने उन्हें घंटे भर तक नहीं छोड़ा। आखिर में नसीम आपा अनगिनत बार झड़ कर ना केवल शिथिल हो गयी बल्कि बेहोश सी हो कर गहरी गहरी साँसे लेते आँखे बंद कर सो सी गयीं।
मैंने नसीम आपा की गांड और चूत के रस से लिसी अपनी उँगलियाँ स्वाद लेते हुए शानू के साथ मिल बाँट कर चूस चाट कर साफ़ कर दीं।
नेहा का परिवार – Update 130 | Erotic Family Saga

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