नेहा का परिवार – Update 127 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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सुबह जब मैं उठी तो कगभग बारह बज रहे थे। चाचू का कोई भी चिन्ह नहीं था शयनघर में। चाचू तैयार हो कर ऑफिस चले गए थे।
जब मैं उठी तो पूरा शरीर टूट रहा था। चाचू ने कस कर रगड़ कर चोदा था अपने घोड़े जैसे महालण्ड से मुझे लगभग सारी रात। शरीर नहीं टूटेगा तो और क्या होगा।
शरीर में ऐसा लगा कि कईं नयी मांस-पेशियां जिनका मुझे पहले हल्का सा आभास भी नहीं था। मैं टांगें चौड़ा कर चल रही थी। गांड में ज़्यादा जलन हो रही थी। मैंने रसोई में जा कर चॉकलेट मिल्क-शेक बना शुरू किया ही था की शानू के पैरों की रगड़ की आवाज़ सुन कर मैं पीछे मुड़ी। शानू बड़ी मुश्किल से टाँगे फैला कर चल पा रही थी।
मुझेना चाहते हुए भी हंसी आ गयी , ” लगता है जीजू ने खूब रगड़ रगड़ कर कोडा है तुझे सारी रात। ”
” हाँ कुछ भी ना कह नेहा। जीजू ने सारी रात नहीं सोने दिया। सुबह सुबह ही मैं सो पाई। जीजू ने जाने कितने आसनों में चोदा है मुझे। कभी लिटा कर, कभी घोड़ी बना कर , कभी खड़ा करके दीवार से लगा कर। फिर पट्ट लिटा कर पीछे से चोदा तो मेरी तो जान ही निकल गयी। मुझे उनका गधे जैसा लंड और भी बड़ा और मोटा लग रहा था। ” बेचारी शानू अभी किशोरावस्था का एक साल ही पूरा किया था और दुसरे साल में थी । मुझ से पूरे दो साल से भी छोटी थी।
” नेहा तू बता। अब्बु ने कैसी चुदाई की तेरी ?” शानू की आँखों में एक नयी चमक थी अपने अब्बु के साथ मेरी चुदाई के ख्याल से।
“अरे शानू रानी, तेरे अब्बु ने मेरी भी हालत ख़राब कर दी। रात भर रगड़ा है मुझे उन्होंने।ना जाने कितनी बार मेरे गांड और चूत की कुटाई की चाचू ने। मैं दो तीन बार तो थक कर बेहोश सी हो। फिर भी चाचू रुकने वाले थोड़े ही थे। चोदते रहे मुझे लगातार बिना थके। ” मैंने शानू को अपनी रति-क्रिया की छोटी सा विवरण दिया।
” नेहा अब्बु का लंड जीजू के लंड के मुकाबले कैसा है ? बड़ा है या नहीं ?” शानू को अपने अब्बु के लंड के बारे में जानने की बड़ी जिज्ञासा थी।
“शानू, चाचू का लंड जीजू के लंड थोड़ा ही सही पर बीस ही होगा उन्नीस नहीं। लेकिन जब मर्दों के लंड घोड़े गधे जितने बड़े हों तो एक आध इंच का फर्क तो दीखता ही नहीं है। ” मैंने शानू को बाँहों में भर कर उसके नींबुओं को मसल दिया।
“हाय रब्बा , क्यों मसल रही है नेहा। जीजू ने इन्हें रात भर वहशियों की मसला नोंचा है। दर्द के मरे मेरी छाती फट पड़ी थी। ” शानू ने सिसक कर कहा।
हम दोनों ने दो बड़े गिलास चॉकलेट मिल्क-शेक पी कर थोड़ी से ऊर्जा बड़ाई।
” शानू, चाचू नसीम आपा के लिए बेताब हैं। नसीम आपा कब वापस आ रहीं हैं।” मैंने वापस शानू की चूचियों को मसला शुरू कर दिया।
” दो एक घंटे में आतीं ही होंगी आपा ,” शानू अपनी आँखें फैला के फुसफुसाई , ” नेहा , आपा को नहीं बता पर रात में जीजू ने मुझसे एक बहुत गन्दी बात करने को कहा। ”
” ऐसा क्या गन्दा काम करने को बोला जीजू ने तुझे ? ” मैंने शानू की शमीज़ उतार कर फर्श पर फैंक दी। जैसे मुझे लगा था शानू ने कोई कच्छी नहीं पहनी थी।
“तू भी तो उतार अपनी शमीज़ ,” शानू ने भी मेरा इकलौता वस्त्र उतार फेंका।
“अब बोलना कुतिया मेरी जान निकली जा रही जानने के लिये ,” मैंने शानू के सूजे चुचूकों को बेदर्दी से मड़ोड़ दिया।
शानू की चीख निकल गयी , “साली, जान तो तू मेरी निकल रही है। ” फिर फुसफुसा कर बच्चों के तरह बोली , ” जीजू ने जब मुझे तीन चार बार चोद लिया था तो मुझे बहुत ज़ोर से मूत लगने लगा था। जीजू बड़े प्यार से मुझे उठा कर बाथरूम में तो ले गए फिर उन्होंने हाय रब्बा कैसे कहूँ ?” लाल हो गयी। ” यदि नसीम आपा को पता चल गया तो वो मुझे जान से मार डालेंगीं।
” अरे कुतिया बता तो पहले। जो नसीम आपा करेंगी वो बाद में सोचना, ” मैंने शानू के चूचियों को मुट्ठी में भींच कर मसल दिया।
“नेहा, जीजू मेरा मूत पीने चाहते थे। मैं शर्म से मर गयी। पर जीजू नहीं माने। मैं बहुत गिड़गिड़ायी जीजू से ऐसा नहीं करने को। ”
” अरे तो बता तो सही की तूने आखिर में अपना खारा सुनहरी शर्बत जीजू को पिलाया या नहीं? ” मुझे शानू के बचपने पर हंसी भी आ रही थी और प्यार भी।
” आखिर मैं कितना मना करती ? शानू शर्म से लाल हो कर धीरे से बोली।
“अरे पागल , जब जीजू अपनी साली को बहुत प्यार करतें हैं तभी ही तो उससे उसके सुनहरे शर्बत पीने की गुहार लगतें हैं। तू तो बहुत प्यारी भोली बच्ची है। अब बता तूने कितना पिलाया जीजू को। “मैंने शानू की च्चियों को कास कर मसल रही थी।
” अरे नेहा मैं कौन होती थी नाप-जोख करने वाली। जीजू ने एक बूँद भी नहीं ज़ाया होने दी। सारा का सारा सटक गए,” शानू की आवाज़ में अचानक अपने जीजू के ऊपर थोड़ा सा फख्र का अहसास होने लगा।
” और तूने अपने जीजू का शर्बत पिया या नहीं ? “मैंने एक हाथ को खाली कर शानू की सूजी चूत के ऊपर रख कर उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
” यदि जीजू चाहते तो मैं मना थोड़े ही करने। पर तब तक जीजू का लंड तनतना कर खूंटे की तरह खड़ा हो गया। जीजू ने ना आव देखाना ताव और मुझे वहीँ गोद में उठा कर मेरी चूत की कुटाई करने लगे। ” शानू अपनी चुदाई के ख्याल से दमक उठी।
” शानू , मैंने भी कल रात चाचू का खारा सुनहरा शर्बत दिल और पेट भर कर पिया। चाचू ने भी मेरा शर्बत आखिरी बूँद तक पी कर मुझे छोड़ा। ” मैंने अपनी तर्जनी को धीरे से शानू की चूत में सरका दिया। शानू सिसक उठी।
” हाय रब्बा। अब्बू और तूने और क्या-क्या किया ?” शानू अपने अब्बू के साथ मेरी चुदाई के किस्से सुनना चाहती थी।

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