नेहा का परिवार – Update 124 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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चाचू का लंड तन्नाया हुआ था। उनके लंड के खम्बे पर मोटी सर्पों जैसे घिमावदार नसें फूल गयीं थीं। उनका सुपाड़ा लाल से जामुनी रंग का हो चला था। उन्होंने आने विशाल भरी शरीर को मेरे नितिम्बों के दोनों ओर घुटनों के ऊपर रख कर मेरे दुदाज़ चूतड़ों के बीच छुपे गुदा-द्वार को अपने तड़कते लंड से ढूंढ कर अपने महाकाय सेब जैसे सुपाड़े को मेरी नन्ही गांड के छेद पर रख दिया।
फिर चाचू अपने भारी भरकम शरीर के पूरे वज़न के साथ मेरे ऊपर लेट गये। उन्होंने मेरी उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फंसा लीं। अब ममेरी दोनों टांगें और बाज़ू पूरे शरीर से दूर फ़ैल गए थे। उनके विशाल बालों से ढके भारी शक्तिशाली नितिम्बों ने एक जुम्बिश सी ली और उनके सुपाड़ा मेरे गांड के छेद पर दस्तक देने के बाद उसे खोलने के लिए बेताब हो गया।
मेरा छोटी हिरणी जैसा शरीर चाचू के विशाल शरीर के नीचे दबा हुआ था , उस दबाव से मेरी चूचियाँ और चूत खुल कर चटाई के बड़े बड़े गांठों के ऊपर और भी रगड़ खा रहे थे।
चाचू ने मुझे बिलकुल निसहाय कर के एक ज़ोरदार धक्का लगे। मैं चीख उठी दर्द के मारे , ” चाचू नहीईईइ……… धीईईईई …..रेए…ए….ए……ए……ए…….ए……..। ” बिलबिला कर चाचू से तरस खाने के लिए गुहार की।
चाचू ने मुझे अब नन्ही हिरणी की तरह अपने विशाल शरीर के नीचे दबा रखा था। मैं कितना भी बिलबिला कर तड़पती पर कुछ भी नहीं कर सकती थी। चाचू ने दूसरा भयंकर धक्का मारा। उनका लंड मेरी गांड के तंग द्वार को फैला कर अंदर धसने लगा। मेरी सुबकाई के साथ साथ मेरी आँखों में आंसू भर गये दर्द के प्रभाव से।
चाचू ने निर्मम खूंखार धक्कों से मेरी गांड के भीतर अपना महाकाय लंड ठूंसते रहे। आखिर में उनके घुंगराले झांटे मेरे चूतड़ों की कोमल त्वचा को रगड़ रही थी। मैं दर्द से बोझिल बिलबिलाने के बावजूद भी समझ गयी कि चाचू का विकराल गांड-फाड़ू जड़ तक मेरी गांड में विजय-पताका फहराते हुए स्थापित हो चूका था।
” नेहा बेटा तुम्हें नमृता चाची ने समझाया होगा की यदि लड़की की चीख ना उठे दर्द से बिलबिला कर और उसकी आँखें आंसुओं सेना भरे तो मर्द के लंड पे बड़ी तोहमत लग जाती है।”
मैं दर्द से बिलख उठी थी और कुछ नहीं बोल पाई। चाचू की बात बिलकुल सही थी।
चाचू में मुझे अपने नीचे कस कर दबा कर मेरी गाड़-हरण शुरू कर दिया। उनके भरी चूतड़ ऊपर उठते और उनका लंड मेरी तड़पती गांड से बाहर निकलता और फिर चाचू अपना पूरे भरी वज़न का फायदा उठा कर मेरे ऊपर अपने को पटक देते और उनका वृहत मोटा लम्बा लंड एक धक्के ऐसे मेरी गांड में जड़ तक समां जाता।
अब मेरी गांड की चुदाई की एक लय सी बन गयी। चाचू के वज़न से मेरी चूचियों चटाई की गांठों से मसल रहीं थी। चाचू के लंड का हर धक्का मेरा शरीर को कई इंचों तक ऊपर धकेल देता। उस से मेरी चूत चूचियाँ और भग-शिश्न रगड़ खा रहे थे रहे थे।
चाचू की जादुई चटाई उनके साथ मिल कर मेरी चुदाई में उनका पूरा साथ दे रही थी।
चाचू ने मेरी गांड ज़ोरदार धक्कों से मारनी शुरू की। मेरी दर्द भरी सुब्काइयां शीघ्र वासना की सिस्कारियों में बदल गयीं। मैं चाचू की पांच मिनटों की भीषण गांड चुदाई से भरभरा कर झड़ उठी।
“आअन्न्न्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह चाआआ………… चूऊऊऊऊऊऊऊऊऊ…… ,” मैं चरमानंद के अतिरेक से सिसक कर चाचू के लंड के गुण गाने लगी |
चाचू ने मेरी गाड़ मारने का अब लम्बा इंतिज़ाम बना सा लिया था। उन्होंने मुझे चटाई पर बरकार दबाते हुए अपने लंड के धक्कों की रफ़्तार और लम्बाई बदलने लगे। चाचू कभी लम्बे सुपाड़े से जड़ तक लम्बे धक्कों से मेरी गांड मारते । कभी छोटे लेकिन भयंकर तेज़ धक्कों से गाड़ की चुदाई करते। इन धक्कों से मेरा पूरा शरीर हिल उठता। लेकिन उनके लंड का हर धक्का मेरे संवेदनशील चूचियों, चुचूकों और चूत को चटाई पर लगातार मसल रहा था।
अब मैं गनगना के लगातार झड़ रही थी ,” चाचू …….. हाय मम्मी…. ई…ई… मर गयी। … चोदिये… मेरी…गांड चाचू …….ज़ोर से चोदिये मेरी गांड ……. फाड़ डालिये मेरी गांड अपने मोटे लंड से …..पर मुझे फिर से झाड़ दीजिये। ”
मेरी सिस्कारियों से मिलीजुली ज़ोर से चुदने के गुहार चाचू को और भी उत्तेजित करने लगी। मुझे लगा की उनके धक्कों में और भी ताकत शुमार हो गयी थी।
चाचू ने बिना थके मेरी गांड की चुदाई बरक़रार रखी। कमरे मेरी सिस्कारियां गूँज रहीं थीं। चाचू अब जब ज़्यादा ताकत से अपना लंड ठूंसते तो उनके हलक से गुरगुराहट उबल जाती। मैंने निरंतर रति-निष्पति से भड़क उठी। मेरा शरीर कामवासना के अतिरेक से काम्पने लगा।
चाचू के मोटे लम्बे लंड से मेरी गांड की चुदाई की आवांजें कमरे में संगीत सा बजाने लगीं। चाचू लंड अब मेरे गांड रस से सन लस और भी चिकना गीला हो गया होगा और उनका लंड अब और भी आसानी से मेरी गांड का मर्दन कर रहा था। मेरी गांड में से अब फचफच फच फच की आवाज़ें निकलने लगीं।
न जाने कितनी देर तक मैं सिसक सिसक अनर्गल बोल बोल कर चाचू से चुदी। मेरी गांड में जब चाचू ने अपने गरम गरम वीर्य की पिचकारियाँ मारनी शुरू की तो एक घंटे से भी बहुत ऊपर तक वो मुझे चोद रहे थे। मेरी गांड उनके गरम गरम वीर्य की फुंहारों से चिहक गयी। मेरी चूत ने भी एक बार फिर से भरभरा के पानी छोड़ दिया।
चाचू ने मुझे अपने नीचे दबा के रखा और मेरे शिथिल निस्तेज शरीर के ऊपर पड़े रहे।

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