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अकबर चाचू ने गुर्राहट की आवाज़ में कहा , “नेहा बेटी मुझे आपकी चूत तुरंत चाहिए। ”
मैं चाचू की हवस की नादीदी और बेसब्री से बहुत उत्तेजित हो गयी।
“चाचू मेरी चूत आपकी है। चोदिये इस निगोड़ी को। फाड़ डालिये अपने घोड़े जैसे लंड से। चाचू मेरी चूत मारिये। बहुत तरसा लिया आपने। ” मैं वासना के ज्वर में बिलख कर गुहार मारने लगी।
चाचू ने अपना भीमकाय लंड का सेब जैसा मोटा सुपाड़ा मेरी चूत के द्वार में फंसा कर एक दमदार धक्के से लगभग एक तिहाई लंड मेरी चूत में ठूंस दिया। मैंने अपने निचले होंठ को दांतों तले दबा लिया था। पर फिर भी मेरी चीख निकल गयी।
अकबर चाचू की की चार पांच इंचे भी मेरी चूत फाड़ने के लिए काफी थीं।
चाचू ने मेरे होंठों को अपने मुंह में फंसा कर एक और तूफानी धक्का लगाया और अपने महाकाय लंड को मेरी चूत में ठूंस दिया। मैं सुबक उठी। मेरा प्यार चाचू की हवस की बेसब्री से और भी प्रबल हो उठा।
“चाआआआ चूऊऊऊऊ मार डाला आपने मुझे धीरे चाचूऊऊऊ ,” मैं चीखे बिना ना रह पायी।
चाचू ने अपना आखिरी एक तिहाई लंड मेरी चूत में वहशी अंदाज़ में ठूंस कर मेरी चूत को बेसबरी से चोदने लगे।
शुक्र है की चाचू की कहानी और उनके लंड की मालिश के प्रभाव से मेरी चूर बहुत गीली थी। अन्यथा चाचू के विशाल दानवीय लंड से मेरी कमसिन चूत के चीथड़े उड़ जाते। अकबर चाचू अपने, हाथ भर से भी लम्बे और मेरी हाथ कोहनी [अग्रबाहु/फोरआर्म ] से भी मोटे लंड से मेरी कमसिन चूत को लम्बे सशक्त धक्कों से चोदने लगे।
मेरी सिस्कारियां चाचू के मुंह में दफ़न हो गयीं। मेरे नितिम्ब दर्द के बावजूद चाचू के लंड के स्वागत के लिए ऊपर नीचे होने लगे। चाचू का लंड मेरी गीली चूत में सटासट अंदर बाहर हो रहा था।
“नेहा बेटी बहुत दिनों की भूख है। शायद मैं जल्दी झड़ जाऊं। पर फ़िक्र मत करना दूसरी बार तुम्हे झाड़ झाड़ के बेहोश कर दूंगा ,” मुझे अकबर चाकू के ऊपर स्त्री और मातृत्व का मिला जुला प्यार आ रहा था।
“चाचू मैं तो आयी ही हूँ आपके लिए। जब मर्ज़ी हों झड़ जाइये। मेरी चूत अब आपकी है। ” मैं चाचू के मुंह में फुसफुसाई। चाचू ने अब घुरघुरा के मेरी चूत पर अपने महाकाय लंड का आक्रमण और भी तीव्र कर दिया। मैं भरभरा कर झड़ गयी। चाचू ने बिना धीमे हुए आधे घंटे से भी ज़्यादा मेरी चूत मारी और मैं हर कुछ मिनटों के बाद झड़ रही थी।
अचानक चाचू ने अपना लंड मेरी गीली लबालब रति रस से भरी चूत में निकाल लिया। जब तक मैं कुनमुना कर शिकायत करती अकबर चाचू ने मुझे गुड़िया की तरह उठा कर मेरी गांड को आसमान की तरफ उठा कर घुटनों और मुंह के बल पट लिटा दिया। चाचू अब मुझे घोड़ी या कुतिया के अंदाज़ में चोदने के इच्छुक थे।
मैंने अपने गाल मुड़ी बाँहों पे टिका कर गांड को चाचू के लिए हिलाने लगी।
चाचू ने बिना देर लगाये मेरी रति रस से लबालब गीली चूत में अपना लंड फंसा कर तीन ज़बरदस्त धक्कों से जड़ तक अपना विशाल लंड ठूंस दिया। मैं हलके से करही पर चाचू ने बिना हिचक मेरी चूत का मर्दन भीषण धक्कों से जो शुरू किया तो मैं आनंद के सागर में गोते खाने लगी।
“चाआआआ……..चूऊऊऊऊऊ …………. आआन्न्न्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …………..ह्हूऊऊन्न्न्न्न्न्न्न ……………आअन्न्न्न्न्न्न्न्न ,” मैं आनंद के अतिरेक से बिलबिला उठी। मेरे चरम-आनंद की तो मानों एक लम्बी कड़ी बन चली।

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