सब लोग शीघ्र ही फिर से वार्तालाप में व्यस्त हो गए। मामा का बड़ा भारी मर्दाना हाथ अभी भी मेरी मोटी गुदाज़ जांघ पर रखा हुआ था। उन्होंने मेरी जांघ को धीरे-धीरे मसलना शुरू कर दिया। मेरी साँस मानो गले में अटक गयी। मैंने घबरा के अपने परिवार ले सदस्यों के चेहरों की तरफ देखा। सब मामा और मेरे बीच होती रास-लीला से अनभिज्ञ थे।
मामा के जादू भरे हाथ ने मेरी को रस से भर दिया। मुझे लगा की मेरा पेशाब निकलने वाला है। मैं शौचालय की तरफ के तरफ जाने के लए उठने लगी।
मामा जी ने धीरे से पूछा, “क्या हुआ बेटा?”
“मामाजी मुझे सू-सू करने जाना है।” मैंने पेशाब के लिए बचपन के नाम का उपयोग किया।
बड़े मामा ने ने मेरे गाल पर चुम्मी दे कर मेरी कुर्सी को पीछे खींच कर मुझे जाने की जगह दे दी। मेरे परिवार में सब लोग मुझे प्यार से कभी भी चूम लेते थे। पर अब मेरे दिल में बड़े मामा से चुदवाने की वासना का चोर बैठ गया था। मेरा मुंह शर्म से लाल हो गया। मई जल्दी से अपने कमरे की तरफ चल पड़ी।
मैंने अपने कुर्ते को अपनी कमर के इर्द-गिर्द खींच लिया। मैं मुश्किल से अपनी सलवार के नाड़े को खोल कर कमोड के अपर बैठने वाली थी की बड़े मामा ने स्नानगृह में प्रविष्ट हो कर मेरे गले से आश्चर्य की घुट्टी घुट्टी चीख निकाल दी, “बड़े मामा आप यहाँ क्या कर रहें है। किसी को पता चल गया तो?”
मैं बड़े मामा के अनपेक्षित आगमन के प्रभाव से भूल गयी थी की मेरी सलवार खुली हुई थी।
“हम अपनी नेहा बेटी को पेशाब करते देखने के लिए आयें हैं,” बड़े मामा के चेहरे पर मासूमियत भरी मुस्कान थी।
“बड़े मामा आप भी कैसे …मुझे कितनी घबराहट हो रही है,” मेरा पेशाब करने की तीव्र इच्छा गायब हो गयी।
“बेटा, पेशाब करने में क्या घबराहट?” बड़े मामा ने मेरी उलझन को नाज़रंदाज़ कर दिया।
मैं भी उनकी शरारत भरे व्यवहार से मचल उठी, “आप कितने शैतान हैं, बड़े मामा?”
बड़े मामा अब तक फर्श पर बैठ गए थे। उन्होंने धीरे से मेरी सलवार मेरे हाथों से ले कर मेरी भरी-भरी टांगों को निवस्त्र कर दिया।
उन्होंने मेरी सलवार के अगले भाग को बड़े प्यार से सूंघा। मैं खिलखिला के हंस पड़ी।
“बड़े मामा हमें आपके सामने सू-सू करते हुए शर्म आएगी,” मेरा मुंह शर्म से लाल होने लगा।
“नेहा बेटी, यदि मेरे सामने में पेशाब करने से इतनी उलझन होती है तो मुझसे अपनी चूत कैसे चुदवाओगी?” बड़े मामा अब अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर मेरी वासना को भड़काने के विशेषज्ञ हो गए थे।
मेरी साँसे तेज़-तेज चलने लगीं। मेरे हृदय की धड़कन पूरे स्नानघर में गूंजने लगीं। बड़े मामा ने मेरी कच्छी के सामने गीले दाग को घूर कर देखा। उनकी उंगलियाँ मेरी कच्छी के कमरबंद में फँस गयीं। मैं अब अपने आप को निसहाय महसूस करने लगी। मुझे बचपन से बड़ों के ऊपर अपनी जिम्मेदारी छोड़ने की आदत की वजह से मुझे बड़े मामा की हर इच्छा स्वीकार थी।
बड़े मामा ने मेरी कच्छी उतार कर उसके गीली भाग को अपने मुंह पर रख कर एक गहरी सांस ले कर प्यार से सूंघा। मैं ना चाहते हुए भी मुस्करा उठी और मेरी चूत फिर से रस से भर गयी।
“बड़े मामा, आप कितने गंदे हैं। मेरी गंदी कच्छी को क्यों सूंघ रहे हैं?” मैंने इठला कर बड़े मामा की ओर प्यार से देखा। उनके मेरी कच्छी को सूंघने से मेरी योनि में एक तूफ़ान सा भर उठा।
“बेटा, बहुत ही कम सौभाग्यशाली पिता को अपनी कुंवारी बेटी के चूतरस को सूंघने और चखने का सौभाग्य मिलता है। आप मेरी बेटी की तरह हो। मैं इस अवसर हाथ से जाने थोड़े ही दूंगा!” बड़े मामा ने मेरी कच्छी के गीले भाग को अपनी जीभ से चाट कर मुंह में भर लिया।
मैं वासना के ज्वार से कांप उठी।
बड़े मामा ने मेरी कच्छी को अपने कुर्ते की जेब में रख लिया।
“नेहा बेटा, मैं आपको पेशाब करते हुए देखने के लए बहुत ही उत्सुक हूँ।” बड़े मामा का मुंह मेरी गीली, रस से भरी चूत से थोड़ी ही दूर था।
मैं शर्म से लाल हो गयी। मुझे अपने बड़े मामा के सामने मूतने में बड़ी शर्म आ रही थी। बड़े मामा ने मेरे चूत को धीरे धीरे अपनी उँगलियों से सहलाना शुरू कर दिया। उनकी उंगली जैसे ही मेरे मूत्र-छिद्र पर पहुँची मेरा पेशाब करने की इच्छा फिर से तीव्र हो गयी।
“बड़े मामा, मेरा पेशाब लिकने वाला है,” मैं बिना जाने पहली बार सू-सू के जगह पेशाब शब्द का इस्तेमाल किया।
बड़े मामा ने फुसफुसा कर कहा, “बेटा, मैं आपके पेशाब की मीथी सुंगंधित धार का इंतज़ार कर रहा हूँ।”
मेरा मूत्राशय पूरा भरा हुआ था और अब मैं उसे बिलकुल भी रोक नहीं सकती थी।
मैंने अपने मूत्राशय को खोल दिया और मेरे छोटे से मुत्रछिद्र से एक झर्झर करती पेशाब की निकल पड़ी। मेरे सुनहरे गर्म पेशाब की गंध सस्नानगृह में फ़ैल गयी।
बड़े मामा का हाथ मेरे मूत्र की धार में था और पूरा मेरे पेशाब से भीग गया। बड़े मामा मेरी जांघें फैला कर मेरी मूतती हुई चूत को एकटक निहारने लगे। बड़े मामा ने अपना मेरे पेशाब से भीगे हाथ को प्यार से चाटा। मैं अब इतनी वासना की आंधी में उलझ गयी थी की मुझे बड़े मामा का मेरा पेशाब चाटना बुरा नहीं लगा। बड़े मामा ने अपना हाथ कई बार मेरे पेशाब में भिगो कर अपने मुंह से चाटा।
अंततः मेरे पेशाब की धार हल्की होने लगी। बड़े मामा ने गहरी सांस ले कर मेरे पेशाब की गंध को सूंघा। मैं हमेशा अपने पेट को कस कर जितना भी मूत्राशय में सू-सू बचा होता है उसे निकाल लेती हूँ। उस दिन मैंने जब अपने मूत्राशय को दबाया तो मेरी बचे हुए पेशाब की धार बड़ी ऊंची हो गयी और बड़े मामा के मुंह पर गिर पड़ी। बड़े मामा का मुंह मेरे पेशाब से भीग गया। बड़े मामा को बिलकुल भी बुरा नहीं लगा। आखिरकार मेरा मूत्राशय खाली हो गया। बड़े मामा ने बड़े प्यार से मेरी पेशाब से गीली चूत को चूम लिया/
“धत बड़े मामा, आप तो बहुत ही गंदे ….. ऊंह आप भी ना कैसी कैसी ….,” मैं शर्मा रही थी। मेरा दिल बड़े मामा की वासनामयी विचित्र इच्छायों से उत्तेजित हो कर तेज़ी से धक्-धक् कर रहा था।
“बेटा, आपका मूत्र तो अमृत की तरह मीठा और सुन्धित है। आज तो मैंने बस चखा है मैं तो दिल खोल कर अपनी बेटी का मूत्र्पान करने के दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ।” बड़े मामा ने प्यार से मेरी चूत को फिर से चूमा उन्होंने मेरी दोनों जांघें उठा कर अपने कन्धों पर रख ली। मैं कुछ भीना समझने के कारण बड़े मामा को सिर्फ प्यार से निहारती रही।
बड़े मामा मेरी पूरी खुली जांघों की बीच मेर्रे गीली चूत के ऊपर मुंह रख कर उसे ज़ोर से चूमने लगे। मेरे गले से ऊंची सिसकारी निकल पड़ी।
“बड़े मामा … आह आप क्या कर रहें हैं?” मैं बड़ी मुश्किल से बोल पाई।
बड़े मामा ने मुझे नज़रंदाज़ कर मेरी कुंवारी के गुलाबी अविकसित भगोष्ठों को अपनी जीभे से खोल कर मेरी चूत के संकरी दरार को ज़ोर से अपनी जीभ से चाटने लगे।
“बड़े मामा, मेरी चूत जल रही है। ओह … आह … ओह .. बड़े मामा .. आ …आ … उन्न .. उन्न …अं।” मेरे गले से वासना भरी सिसकारी निकलने लगीं।
बड़े मामा ने मेरी चूत को अपनी खुरदुरी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। उनकी जीभ मेरी चूत के निचले कोने से शुरू हो कर मेरे भग-शिश्न पर रुकती थी। उन्होंने कुछ ही क्षड़ों में मेरी चूत को वासना के अग्नि से प्रज्ज्वलित कर दिया।
मेरे दोनों हाथ स्वतः ही उनके घुंघराले घने बालों में समा गए। मैंने उनके घने बालों को मुठी में कस कर पकड़ लिया और उनका मुंह अपनी चूत में दबाने लगी।
“बड़े मामा, मेरी चूत आह … आह … ओह .. कितना अच्छा लग रहा है, बड़े मामा आह ..ऊंह .. ऊंह ….आन्न्ह …आन्नंह ….और चाटिये प्लीज़।” मैं अब वासना की आग में जल रही थी और अनर्गल बोलने लगी।
बड़े मामा अपनी जीभ से अब मेरे सख्त अविकसित किशमिश के दाने के आकार के अति-संवेदनशील क्लिटोरिस को चाटने लगे। उनकी भारी खुरदुरी जीभ ने जैसे हे मेरे भग-शिश्न को ज़ोर से चाटा मेरा रत-निष्पात शुरू हो गया।
“बड़े मामा मैं झड़ रही हूँ। आह .. आन्नंह ….ओह .. ओह … मा …मा ….. जी …ई … ई …. ऊउन्न्न्न्न्ह्ह्ह,” मैं ज़ोर से चीख कर झड़ने लगी। मेरा प्रचुर रति-रस ने मेरी चूत से झरने की तरह बह कर बड़े मामा के मुंह को भर दिया। बड़े मामा मेरे चूत के रस को प्यार से पी कर मेरी कुंवारी चूत को फिर से चाटना शुरू कर दिया।
मैं अब बिलकुल पागल हो गयी। मेरा कमसिन अविकसित शरीर इतनी तीव्र प्रचंड वासना को सम्भालने के लिए अत्यंत अपरिपक्व था। दूसरी और बड़े मामा सम्भोग के खेल में अत्यंत अनुभवी थे। मेरे शरीर को उन्होंने अपने प्रभुत्व में ले कर मेरी को अपनी जीभ से एक बार फिर से गर्म कर दिया।
मेरी सीत्कारी बार बार स्नानगृह में गूँज रहीं थीं।
मैं सिसकते हुए बड़े मामा के सर को अपने जांघों के बीच में ज़ोर से दबा रही थी। बड़े मामा ने मेरी जांघों को और ऊपर कर मेरे नितिम्बों को और खोल दिया। उनकी जीभ अचानक मेरे मलाशय के छिद्र पर पहुँच गयी। मेरी सांस बंद हो चली मुझे तो सपने में भी सोच नही आता की कोई किसी दुसरे के गुदा-छिद्र को चाटने की इच्छा कर सकता था।
बड़े मामा मेरे सामने संसर्ग के नए द्वार खोल रहे थे।
बड़े मामा ने अब अपनी जीभ की नोक से मेरी गुदा को करोदने लगे। मेरी गांड का छेद स्वतः फड़कने लगा। बड़े मामा ने थोड़ी देर ही में उसे चाट कर शिथिल कर दिया। अचानक उनकी जीभ की नोक मेरी गांड के छेद के अंदर प्रविष्ट हो गयी।
“बड़े मामा आप क्या कर रहें हैं? ओह .. ओह .. आन्न्ह … मेरी गा .. आंड … ओह … आन्न्न्ह्ह्ह …. ऒओन्न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह।” मेरे जलते हुए शरीर पर अब बड़े मामा का पूरा अधिकार था। मैंने अपने आप को बड़े मामा के हाथों पर छोड़ दिया।
बड़े मामा की जीभ मेरी गांड के छेद से लेकर चूत के ऊपरी कोने तक चाटने लगी। हर बार उनकी खुरदुरी जीभ मेरे संवेदनशील भग-शिश्न को ज़ोर से रगड़ देती थी। मैं एक बार फिर से झड़ने के द्वार पर खड़ी थी। मेरी चूत में एक विचित्र से दर्द उठ चला। उस दर्द ने एक अजीब सी जलन भी थी।
“बड़े मामा मुझे झाड़ दीजिये, ” मैं हलक फाड़ कर चीखी।
बड़े मामा ने तुरंत अपनी मोटी तर्जनी [इंडेक्स फिंगर] मेरी गांड में डाल केर मेरे जलते हुए भाग-शिश्न को अपने होंठों में कास कर पकड़ कर उसे झंझोंड़ने लगे। मैं चीख कर झड़ने लगी।
मेरा सारा शरीर अकड़ गया। मेरे पेट में दर्द भरी एंथन ने मेरी सांस रोक दी। मेरी चूत के बहुत भीतर एक नई दर्द भरी मरोड़ पैदा हो गयी थी।
मेरे कमसिन अपरिपक्व शरीर के अंदर उठे सारे दर्द एक जगह में मिल गए। वो जगह मेरी चूत थी।
मेरी ऊंची चीख से स्नानगृह की दीवारें गूँज उठीं। जब मेरा रत-निष्पति शुरू हुई तो मेरे सारे शरीर की मांस-पेशियाँ शिथिल पड़ गयीं। मेरा अकड़ा हुआ कमसिन शरीर बिलकुल ढीला हो कर बड़े मामा के ऊपर गिर गया। मेरे लम्बी साँसें मेरे सीने को ज़ोर से ऊपर-नीचे कर रहीं थें।
मेरी चूत में से रस बह कर बड़े मामा के मुंह में समा गया। मुझे लगा जैसे मेरी चूत में कोई पानी की नली खुल गयी थी।
मुझे पता नहीं मैं कितनी देर तक गहरी साँसे लेती शिथिल बड़े मामा की बाँहों में पड़ी रही। जब मुझे होश आया तो मैं मुस्करा कर बड़े मामा से लिपट गयी। बड़े मामा ने मेरे मुस्कुराते हुए मुंह पैर मेरे रस से भीगा अपने मुंह को लगा दिया। मेरे होंठों ने उनके होंठो पे लगे मेरे मीठे-नमकीन रति-रस को चखने लगे।
बड़ी देर तक बड़े मामा और मैं खुले मुंह से एक दुसरे के मुंह के अंदर का स्वाद अपनी जीभ से लेते रहे।
अंत म बड़े मामा धीरे से मुझसे अलग हुए और खड़े हो गए। उनका सफ़ेद कुरता किसी तम्बू की तरह ऊंचा उठा हुआ था।
“बड़े मामा, आपके पजामे में कुछ है?” मैंने शर्माते हुए कहा।
बड़े मामा ने मेरा छोटा नाजुक हाथ लेकर उसे अपने पजामे के ऊपर रख दिया। मेरा हाथ थरथराते एक मोटे खम्बे के ऊपर लगा था।
“नेहा बेटा, इस लंड को छू कर देख लो। एक दिन में यह आपकी चूत के अंदर जाने वाला है,” बड़े मामा ने धीरे से कहा और मुड़ कर मेरे स्नानगृह से बहर चले गए।
मैं गहरे वासनामयी सोंचों में डूबी कमोड पर बैठी रही। तब मुझे पता नहीं था की पुरुष के लंड कितने बड़े होते थे। मनु भैया का लंड जितना भी दिखा था मुझे तो बहुत मोटा लगा था। अंजू भाभी ने तो बताया था की मेरे परिवार के पुरुषों के लंड बहुत विशाल थे। मैं सोच में पड़ गयी की अंजू भाभी को सबके लंडों के बारे में कैसे पता चला?
मेरे हाथ ने बड़े मामा के पजामे में छुपे उनके लिंग को छुआ था वो तो मुझे बहुत ही भारी और मोटा लगा था।
मैं अब घबराने लगी। पर मेरी बड़े मामा के अश्लील शब्दों से जागृत वासना में कैसी भी भी कमी नहीं हुई। मैं अब बेचैनी से बड़े मामा के साथ संसर्ग के सपने देखने लगी।

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