नेहा का परिवार – Update 119 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
Reading Mode

अकबर चाचू और शन्नो मौसी
***********************
मैंने रज्जो की गांड मारने के बाद अपने लंड को शन्नो के मुंह में ठूंस दिया। मुझे एतबार ही नहीं हुआ शन्नो में कितना बदलाव आ गया बिना ज़ोर ज़बरदस्ती किये। उस दिन रज्जो ने उसे मेरे लंड को चूसने के लिए मना लिया। अब हम दोनों को पता था कि किला फतह होने में देर नहीं है।
हमने उस दिन शन्नो को खूब खरीदारी कराई। हमने खाने के जगह भी उसकी पसंद पर छोड़ दी थी।
उस रात शन्नो खुद ही अपने कपडे उतार कर हमारे बिस्तर में चली आयी।
मैंने और रज्जो ने उसकी चूचियों और चूत को चूस कर उसे बहुत गरम किया पर झड़ने नहीं दिया। बेचारी तड़प तड़प कर झड़ने के लिए बेताब हो गयी।
“शन्नो यदि झड़ना है तो जीजू के लंड चुदवा ले ,”रज्जो ने उसकी उगती चूचियों की घुंडियों को मसलते हुए कहा।
मैं उसकी चूत की घुंडी को मसल रहा था।
आखिर में शन्नो ने वासना की आग में जलते हुए हामी भर ली। मैंने इशारा किया और रज्जो ने अपने भारी जांघे शन्नो के सर के दोनों ओर रख केर उसके मुंह को अपनी चूत से दबा लिया , “मेरी छुटकी बहन यदि मेरे खाविंद के लंड से चुदवाओगी तो कम से कम मेरी चूत तो चाट लो। ”
मैंने सही मौका देख कर शन्नो की चूत के ऊपर धावा बोल दिया। बेचारी के किशोरावस्था लगने में अभी कुछ महीनों के देरी थी। पर उसके कमसिन गरम चूत के गर्माहट मेरे लंड को जला रही थी।
मेरा लंड का मोटा सुपाड़ा जैसे ही उसकी कुंवारी चूत में दाखिल हुआ तो बिलबिला उठी शन्नो दर्द से। पर रज्जो ने उसे दबा कर मुझसे कहा ,” रुक क्यों गए आप। बिना रुके ठोक दीजिये पूरा लंड इसकी चूत में। दर्द तो होना ही है। जितनी जल्दी सारे दर्द का अहसास इसे हो जाये उतना अच्छा। ”
मैंने बेदर्दी से बिल्बलाती शन्नो की चूत में चार पांच धक्कों से अपना हाथ भर लम्बा बोतल जैसा मोटा लंड जड़ तक ठूंस दिया। शन्नो बेचारी की चीखें उसकी बड़ी बहन की चूत में डूब गयीं। उसका तड़पता बदन मैंने बिस्तर पे दबा दिया और दनादन उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा। मेरा लंड अब शन्नो की कुंवारी चूत के खून से लस कर चिकना हो गया। मैंने उसकी जांघों को अपनी बाजुओं पर टिका कर उसकी चूत को तूफानी अंदाज़ में चोदने लगा।
आधे घंटे के बाद शन्नो ने सुबकना बंद कर दिया और उसके कूल्हे मेरे लंड को लेने के लिए ऊपर होने लगे। रज्जो ने आँख मार कर मुझे और बढ़ावा दिया। मैंने शन्नो को अब बेहिचक सटासट धक्कों से चोदने लगा। शन्नो भी अब सिसकने लगी और रज्जो की चूत चाटने लगी।
मेरे लंड के अंदर बाहर आने जाने से शन्नो की चूत में से फचक फचक की आवाज़ें उसकी और रज्जो की सिसकारियों के साथ मिल कर एक नया गाना गुनगुनाने लगीं।
घंटे भर की चुदाई से शन्नो कई बार झड़ी और मैंने भी उसकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया। उस रात रज्जो ने मुझे शन्नो की चूत पांच बार मरवाई।
“एक बार इसकी चूत आपने पूरी तरह से खोल दी तो यह आपके लंड के बिना नहीं रह सकेगी ,” मैं अपनी नई बेगम के तर्क से लाजवाब था।
अगले दिन शन्नो दर्द के मारे बड़ी मुश्किल से चल पा रही थी। पर रज्जो के कहने पर मैंने उसे उस हचक हचक कर कई बार चोदा।
अगली रात शन्नो की गांड की बारी थी।
उस रात मैंने तीन बार शन्नो की चूत मारी। रज्जो ने जब मौका देखा तो मुझे इशारा दिया , ” अब यह थक कर चूर-क्जूर हो गयी है। यही मौका इसकी कुंवारी गांड फाड़ने का। चूं भी नहीं कर पाएगी। चलिए इसे अपने नीचे दबा कर इसकी गांड भी खोल दीजिये ,” रज्जो ने मुझे उकसाया।
मैंने पट्ट लेती नन्ही शन्नो को अपने नीचे दबा कर उसके चुत्तडों को फैला दिया। अपने मोटे लंड के सुपाड़े को एक ही धक्के से उसकी गांड के कुंवारे छेद में घुसेड़ दिया।
शन्नो बिलबिला उठी पर उसकी बड़ी बेहेन ने उसके चेहरे को अपने हाथों में भर कर चूमने लगी। उसकी चीखें कुछ हद तक रज्जो के मुंह से दब गयीं।
मैंने एक धक्के के बाद दूसरा धक्का लगाते हुए अपना पूरा लंड शन्नो की गांड में ठूंस दिया। बेचारी की आँखों से आंसू बह रहे थे। उसकी सुब्काइयां रज्जो के मुंह से दबे हुए भी कमरे में गूँज रहीं थीं।
मैंने दनादन शन्नो की कुंवारी गांड को वहशियों की तरह चोदने लगा। बड़ी देर बादना जाने की सुबकने की अव्वाज़ें सिस्कारियों में बदल गयीं।
एक घण्टे तक शन्नो की गांड का मलीदा बनाया मैंने उस रात। शन्नो आखिर में सिसकते हुए झड़ने लगी। जब लंड शन्नो की गांड से निकला तो रज्जो ने उसे अपने मुंह में ले कर प्यार से चूस कर साफ़ कर दिया।
“देख शन्नो अगले बार जब जीजू तेरी गांड मारेंगें तो तुझे उनका लंड साफ़ करना पड़ेगा। आज तो चलो मैं कर देतीं हूँ। ”
बेचारी शन्नो हांफने के अलावा कुछ नहीं बोल पाई।
अगले दिन शन्नो की चाल और भी ख़राब हो गयी।
शन्नो को इस बात का फख्र था कि मैंने उसकी गांड ईशा की गांड से पहले मार ली थी।
“जीजू , शुक्रिया। मैं ईशा को कभी भी भूलने दूंगी कि मेरी गांड ने आपका लंड उससे पहले ले लिया है। ”
बाकि का वक्त रज्जो और शन्नो को हर अंदाज़ में चोद चोद कर बड़े मज़े से गुजरा।
उसके बाद शन्नो और ईशा दोनों जब भी मौका मिलता चुदवाने के लिए हमारे घर आ जातीं। उनकी शादी के बाद भी सिलसिला रहा।
मज़े की बात तो यह है कि शादी के बाद भी शन्नो ज़्यादा बार चुदवाने आयी। जब रज्जो शानू और नसीम से पेट थी तो शन्नो तीन तीन महीने रूकती और जितनी बार मौका मिलता उतनी बार वो चुदवाने के लिए मचलती।
जब से रज्जो का इंतिक़ाल हुआ है तब से ईशा और शन्नो से मुलाकात नहीं हुई है पर उन दोनों से प्यार में कोई कमी नहीं हुई है।

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply