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जीजू ने आँख मार कर शानू और मुझे बधाई दी, “भाई आप दोनों कर दिया। मैं तो कायल आपकी तरतीब का। ” मैं मुस्कराई और धीमे बोलने इशारा करते हुए मुड़ गयी।
मैंने हलके क़दमों से चाचू के कमरे की ओर चल दी। मैंने खुले दरवाज़े से चाचू को कपडे उतारते हुए देखा। जैसे ही सिर्फ कच्छा पहने चाचू बिस्तर पे बैठे अपने मौजे उतरने के लिए मैं धड़धड़ाती कमरे में दाखिल हो गयी। मैंने ऐसा ज़ाहिर किया जैसे चाचू को सिर्फ कच्छे में देखना रोज़मर्रा की बात हो।
मैं दोनों टाँगे चाचू की जांघों के ऊपर डाल कर उनकी गोद में बैठ गयी। उनके जांघों के बीच में सोये अजगर का गांड नीचे मचलने लगा। मैंने दोनों बाहें चाचू की गर्दन डाल कर कहा, “चाचू, हमें आपको सुशी बुआ का बहुत ज़रूरी पैगाम देना है आपको। उन्होंने हमें जगह किया है की हम ना नहीं सुनेंगें। ”
चाचू मुस्करा कर बोले, “भाई ऐसा क्या पैगाम भेजा है सुशी भाभी ने। हम क्या कभी अपनी बीतय को ना कहेंगे ? ”
“चाचू सुशी बुआ तैयार कर के भेजा ही की हम आपका ख्याल उसी तरह रखें जैसा यदि वो यहाँ होतीं तो रखतीं। ” मैंने चाचू के गाल पर अपना गाल रगड़ते हुए कहा।
चाचू हक्केबक्के रह गए। वो कुछ देर हकलाते हुए कुछ भी नहीं बोल पाये।
“अरे नेहा बेटी सुशी भाभी का दिमाग हिल गया है। क्या भला ऐसी बातें बच्चों से कभी की जाती है। ” चाचू शर्म से लाल हो गए और मुझे वो प्यारे लगने लगे।
“कछु आप वायदा कर चुके है ना नहीं कहने का। और बच्ची नहीं रही। बड़े मामा, सुरेश चाचू ने मुझे बहुत कुछ सीखा दिया है। फिर आपकी भी तो ज़िम्मेदारी है की आप अपने बच्चियों को सब तरह से सीखा कर दुनिया के लिए तैयार कर दें। ” मैंने चाचू के होंठों को छुम लिया।
“नेहा बेटी क्या वाकई रवि और सुरेश ने तुम्हारी ….. आरर ……… मेरा मतलब है तुम्हारे साथ मर्द-औरत वाले काम किये हैं?” चाचू अभी भी शर्मा रहे थे ।
चाचू ने सुशी बुआ का लम्बा बहुत विस्तार से स्पष्ट और बयानी खत पड़ा तो उनकी मर्दानगी उठाने लगी। मैंने भी अपनी गांड हिला हिला कर उनके लंड को मसलने लगी। खत खत्म करते करते चाचू जुम्बिश मारने लगा।
“नेहा बिटिया आपके साथ तो सम्भोग करने का मौका तो खुदाई तोहफे जैसा होगा। पर क्या आप खुद चाहतीं है या सिर्फ सुशी भाभी के कहने पर …. ” चाचू ने खत बिस्तर पर रखते धीरे से पूछा। मैंने उनके लफ़्ज़ों को बीच में ही टोक कर अपने होंठों से इनके होंठ बंद कर दिए। कुछ देर में ही मेरी जीभ उनके होंठों को लिए खोलने के लिए बेचैन हो गयी, “चाचू क्या हमारे होंठ आपके सवाल का जवाब नहीं दे रहें हैं?” मैंने अपने होंठों को चाचू सटा कर फुसफुआया।
अचानक जैसे चाचू के सारे संशय, हिचक दूर हो गये. उन्होंने मुझे बाँहों में कर मेरे होंठों को चूसने लगे। उनकी जीभ लपक मेरे मुंह में में घुस गयी।
अकबर चाचू के जीभ मेरे मुंह के हर कोने और मोड़ का स्वाद चखने लगी। चाचू के गीले चुम्बन में इतना कामुकता का भावावेश था कि मेरी साँसे तेज़ हो गयी। मैंने भी चाचू की जीभ से अपनी जीभ बीड़ा दी। चाचू के हाथ मेरे गुदाज़ लगे। मेरे मुंह में उनका मीठा थूक भर गया और मैंने उसे सटक कर अपनी मीठी लार से उनका मुंह भर दिया। मेरी चूत में खुलबुली मचलने लगी। मुझे लगा कि यदि मैंने चाचू थीम किया तो मेरा खुद का सयंत्रण ख़त्म हो जायेगा।
अचानक चाचू ने लपक कर मेरी ब्रा को ऊपर कर मेरे गड्कते उरोज़ों को मुक्त कर दिया। जब तक मैं कुछ बोल पति उन्होंने एक को अपने बड़े मज़बूत हाथ से मसलने के साथ साथ दुसरे के चुचूक को अपने गीले गर्म मुंह में ले कर चूसने लगे। मेरी हालत बाद से बदतर हो चली। मेरी चूत में रति रास की गंगा बहने लगी।
“चाचू अभी नहीं। नीचे जीजू और शानू कहने पर हमारा इन्तिज़ार कर रहें होंगें। कहने के बाद मैं आपके कमरे में आ जाऊँगी। साडी रात मसलना आप मुझे। बिलकुल उफ़ नहीं करूंगी। जो मन चाहे आप वो कीजियेगा मेरे साथ। देखिएगा मैं एक कदम भी पीछे हटूँ तो।” मैंने चाचू के बालों में उँगलियाँ फिराते हुए उन्हें मनाया।
“नेहा बेटा तुम और शानू तो जुड़वां बहनों की तरह हो। शानू तुम्हे अकेला नहीं छोड़ेगी। यही थोड़ा सा मौका है।” आकबर चाचू की आदिम भूख देख कर मेरा मन भी हुआ की सब भूल कर उनकी क्षुदा मिटा दूँ। पर मुझे पूरे तरतीब का ख्याल भी तो रखना था।
कुछ सोच कर मैं बोली ,”चाचू , अब नहीं, शानू मेरे से चिपकी रहेगी। जीजू ने उसकी सील तोड़ दी है। आज रात को उसे जीजू से सारी रात चुदवाने के ख्याल के अलावा कोई और ख्याल नहीं आयेगा दिमाग में।”
चाचू थोड़ा सा झिझके फिर खुल कर हंस दिए , “आखिर नन्ही साली आ ही गयी अपने जीजू के नीचे। ”
” चाचू आप नहाइयेगा नहीं, मुझे सुगंध बहुत अच्छी लग रही है। रात में जब आप मुझे चोद कर पस्त कर देंगे तब इकट्ठे नहाएंगे।” मैंने चाचू को प्यार से चुम कर कहा।

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