नेहा का परिवार – Update 106 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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“जीजू यदि साली की मरवाते हुए उसकी चीखें ना निकलें , उसकी आँखों से आंसुओं की गंगा ना बहने लगे, उसकी सुबकियों के संगीत से वातावरण ना भर उठे और उसकी गांड से लाल खून का टीका जीजू के लंड पर ना लगे तो जीजू की ताकत की बस बेइज़्ज़ती ही तो होगी। इसी लिए जीजू आप दोनों सालियों की चीखों का संगीत बजवा दीजिये आज।” मैंने आदिल भैया को और भी चढ़ाया।
आदिल भैया हमारे बड़े भाई हैं और हमेशा अपनी छोटी बहनों की हिफाज़त करने की उनकी स्वाभाविक आदत शानू की बेहिचक चुदाई में बाधा बन सकती थी।
“शानू चल जीजू का लंड चूस और मेरी गांड के लिए तैयार कर ,” मैंने भौचक्की शानू को जगाया।
आदिल भैया ने अपना मेरे रति रस से लिसा चमकता लंड मेरी फ़ैली चूत से निकाला और घुटनो पर जाती शानू की ओर बढ़ा दिया। शानू ने बेहिचक मेरे रति रस से लिप्त जीजू को लंड को अपने नन्हे हाथों में संभाल कर चूसने, चूमने और चाटने लगी। शानू और मेरे दोनों नन्हे हाथ आदिल भैया के मोटे लंड की परिधि को पूरा मापने में असक्षम थे। हमारे परिवार की स्त्रियों के सौभाग्य में वृहत विकराल लण्डों का अधिशेष और प्राचुर्य था।
शानू के थूक ने जीजू के लंड के ऊपर मेरे चूत के रस का स्थान ले लिया। शानू ने अपने आप ही मेरे गदराये गोल चूतड़ों को चौड़ा कर मेरी गुलाबी नन्ही गुदा को जीजू के दीदार के लिए प्रस्तुत कर दिया। जीजू नीचे झुक कर मेरी गांड पूजा का निश्चय बना लिया। जीजू और शानू ने मेरे प्रभूत गदराये चूतड़ों को चूमना, काटना शुरू कर दिया। फिर दोनों ने बारी बारी से मेरी गुदा को चूमने चाटने लगे।
जीजू की जिव्हा मेरे गुदा द्वार के ऊपर प्यार भरी टकटकाहट देने लगी। जीजू की जीभ बेशर्मी से मेरे मलाशय के द्वार को खोलने के लिए उत्सुक थी। मेरी गांड का तंग छिद्र हार मान गया और मेरी गांड का छेद धीरे धीरे जीजू की जीभ के स्वागत के लिए ढीला हो कर फ़ैल गया। जीजू की जीभ की नोक मेरी गांड में प्रविष्ट हो गयी।
“हाय जीजू कितना अच्छा लग रहा है। ऐसे ही गांड चाटिये। जीजू और भी अंदर तक डालिये अपनी जीभ ,” मैं अपनी गांड से उपजे वासना के आनंद से डोलने लगी।
शानू ने अपनी जगह बदल कर मेरी चूत के ऊपर अपना मुंह जमा दिया। उसकी जीभ मेरी चूत से मेरी चुदाई की मलाई को चाटने लगी।
जीजू ने मेरे दोनों नितिम्बों को मसलते हुए मेरी गांड को अपनी जिव्हा से चोदने लगे। आखिर इसी गांड को वो थोड़ी अपने हाथी जैसे लंड से फाड़ने वाले थे।
मेरी सिस्कारियां स्वतः मेरे हलक से उबल कर स्नानगृह में गूंजने लगीं। तभी जीजू ने अपनी जीभ मेरी गांड से उठा कर अपनी तर्जनी झटके से जोड़ तक मेरी मलाशय की गुफा में ठूंस दिया। उन्होंने मेरे चूतड़ों को काटने के साथ साथ मेरी गांड को अपनी ऊँगली से चोदने लगे। शानू अब मेरे भगशिश्न को चूस और चुभला रही थी। दोनों ओर से वासनामय प्रेम का आक्रमण मेरे शरीर में सम्भोग की लालसा की आग लगाने लगा।
जीजू ने बिना हिचक अपनी मंझली ऊँगली को तर्जनी की मदद के लिए मेरी गांड में भेज दिया।
मैं अब बेहिचक सिसकने लगी। ” जीजू चोदिये मेरी गांड। ……उउउउग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग हाय शानू चूस ले , काट डाल मेरा क्लिट और ज़ोर से। …. उउउउन्न्न्न्न्न्न …… आअरर्र्र्र्र्र्र ,” मैं एक बार फिर से भरभरा के झड़ गयी।
आदिल भैया ने बेशक किसी लड़की की गांड भले ही ना मारी हो पर नसीम आपा की चुदाई तो हज़ारों बार की थी और उन्हें लड़कियों की चुदाई की बेसब्री का पूरा इल्म था। उन्हें मालूम था की अब मेरी गांड उनके कुंवारे के लिए तैयार थी।
आदिल भैया ने मेरी फड़कती गांड को मेरे दोनों चूतड़ों फैला कर अपने लंड के आक्रमण के लिए तैयार पाया।
शानू जल्दी से उठ कर मेरे पीछे चली गयी अपने जीजू की मदद करने के लिए।

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