शानू अब अपने जीजू के लंड को दिल लगा कर चूस रही थी और मैं अपनी जीभ से आदिल भैया की गांड मार रही थी। स्नानघर में दो अपरिपक्व कन्याओं के प्यार के आलोक में दमकते आदिल भैया की सिस्कारियां गूँज उठी।
आखिर में मर्द ही जल्दी मचाते हैं। लड़कियों में ना जाने कहाँ से धैर्य के जीवाणु बचपन से ही पनप जातें हैं।
आदिल भैया ने सिसकते हुए पुकार लगाई , “अब मुझे अपना लंड चूत में डालना है। नेहा अब रुका नहीं जा रहा। ”
मैंने उनके भूरे गांड के द्वार को आखिरी चुम्बन से शोभित कर चिढ़ाया , ” यह आपकी कुंवारी छोटी साली तो अपनी चूत आपके हाथी जैसे लंड से अभी तो नहीं मरवाएगी। पर यदि आप वायदा करे कि आज के दिन के सूरज के डूबने से पहले आप शानू की चूत के कौमार्य को विच्छेद कर उसकी चूत को फाड़ डालेंगे तो आपकी बड़ी साली की चूत और गांड आपकी सेवा में हाज़िर है। ”
शानू ने अचक कर अपने जीजू बनाम आदिल भैया के थूक से लिसे लंड को मुक्त कर जल्दी से बगल में खड़ी हो गयी ,” नेहा, पहले मैं देखूंगी कि तुम कैसे आदिल भैया ओह सॉरी …. जीजू के मोटे लंड को कैसे झेलती हो फिर ही मैं मुतमुईन हो पाऊँगी। हाय अल्लाह जीजू का लंड तो मेरे हाथ से भी बड़ा और मोटा है। ”
आदिल भैया ने अचम्भे से शानू की बात को अनसुना कर कहा ,”नेहा तुम अपनी गांड भी मरवाओगी ?”
“हाय मेरे राम आदिल भैया तो क्या आपने…… अभी तक नसीम आपा ने अपनी गांड नहीं सौंपी आपको ?” मैंने उनके थरथराते हुए दानवीय लंड को सहलाया अपने दोनों हांथों से। मेरे जीवन में अभी तक कोई भी लंड मेरे एक हाथ में नहीं समा सकता था। मेरी नन्ही उम्र में सारे लंड विकराल और दानवीय आकार के थे।
“नहीं, नेहा। नसीम ने अपनी गांड को एक खास मौके के लिए कुंवारी छोड़ रखा है। यदि तुम अपनी गांड मुझे मारने दो तो मैं वायदा करता हूँ कि तुम्हारी छोटी बहिन और मेरी छोटी साली की चूत की आज तौबा मचा दूंगा। ” आदिल भैया ने मेरे मोटे भारी पर अल्प-विकसित उरोज़ों को कस कर मसल दिया।
मैंने सिसकारते हुए उलहाना दिया, “आदिल भैय.……… जीजू यह तो मेरा सौभाग्य होगा कि मेरी गांड आपके लंड के लिए पहली गांड होगी। पर यदि आप मेरी छोटी बहिन के कुंवारेपन का मर्दन करने का वायदा करें तो मेरी गांड आपके लंड की गुलाम हो जाएगी। ”
“नेहा हमारा वायदा आपके हाथ में है ,” आदिल भैया ने अपने लंड को मेरे हाथों के बीच हचक कर हिलाया।
“देख शानू आज तेरी चूत की तौबा होने वाली है। गौर से देखना कैसे जीजू का हाथ भर का लंड तेरी चूत फाड़ेगा।” मैंने शानू के फड़कती चूचियों को बेदर्दी से मसल दिया।
“इसका मतलब है कि मेरी चूत के मसले में मेरी कोई भी राय नहीं है ,” शानू वैसे तो इतरा रही थी पर उसकी आँखों में आदिल भैया के लंड की प्यास साफ़ ज़ाहिर हो रही थी।
मैंने आदिल भैया की तरह अपने हाथों को दीवार पर जमा कर अपनी दोनों टाँगें चौड़ा कर आगे घोड़ी की तरह झुक गयी।
आदिल भैया ने अपने विकराल तनतनाते लंड को बड़ी मुश्किल से आसमान की ओर से आगे की तरफ झुकाया, “छोटी साली साहिबा गौर से देखिएगा। नेहा की चुदाई के बाद आपकी चूत की बारी है। ”
शानू आदिल भैया के लंड की विशालता से मेरे बारे में शायद घबरा रही थी ,” आदिल भैया मेरे प्यारे जीजू प्लीज़ आराम से नेहा की चूत मारिएगा। प्लीज़ उसको दर्द नहीं कीजिएगा। ”
मैं लगभग हंस दी थी पर हंसी दबा कर मैंने ज़ोर से कहा ,” अरे शानू जब तक मर्द का लंड लड़की की चीख ना निकाल दे तो किस काम का। आदिल भैया आपको कोई रोक टोक नहीं है। आज अपनी छोटी साली को दिखा दीजिये कैसे आपने हमारी नसीम आपा की चूत को पहली बार मारते हुए उनकी हालत ख़राब कर दी होगी। ”
आदिल भैया भी मेरे बात समझ गए ,” शानू रानी अब आप देखना कैसे लड़की की चूत को खुदा ने ऐसा बनाया है कि वो कैसा भी छोटा, मोटा पतला और लम्बा लंड हो उसे अपने अंदर ले लेती है।”
“जीजू अब आप अपने घोड़ी बनी साली की चूत का भी तो ख्याल रखिये। ” मैंने अपने भरे हुए गुदराज़ चूतड़ मटकाये।
आदिल भैया ने अपने मोटे सेब सामान सुपाड़े को मेरी चूत की दरार पे रगड़ा। मेरे रेशम जैसी झांटे मेरे रति रस से भीगी चूत के भगोष्ठों पे चुपक गयीं थीं।
नेहा का परिवार – Update 102 | Erotic Family Saga

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