नेहा का परिवार – Update 10 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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डाइनिंग-रूम मे सब बैठ चुके थे. मैं नानाजी के पास खाली कुर्सी पर बैठ गयी. थोड़ी देर मे मेरे नानाजी ने अपने प्यार भरी बातों से मुझे हंसा-हंसा कर मेरे टेट मे दर्द कर दिया. नानाजी ने मुझे मेरे हाथ से अपनी तरफ खींच कर अपनी गोद मे बैठा लिया. मैं छुटपन से खाने के वक़्त ज़िद कर के नानाजी और दादाजी की गोद मे बैठती थी. मेरी नयी उलझन भरी अवस्था मे नानाजी के विशाल शरीर की शरण में मुझे बहुत शांती का आभास हुआ. मैंने अपने नानाजी की गर्दन पे अपनी बाहें डाल दीं. मैं अपने हाल ही के यौन चरमोत्कर्ष की थकान और नानाजी की गोद के आश्वासनपूर्ण आश्रय के प्रभाव से बोझल हो गयी और मेरी दोनों आँखें नींद से भर गयी. मुझे तो पता नहीं चला पर मेरा बहुत मज़ाक बनाया गया पर मेरे नानाजी ने सबको चुप कर मुझे अपने बाँहों मे भर कर सोने दिया.
मेरी आँख जब खुली तो मैं फिर से अपने बिस्तर मे थी. मैं शर्म से लाल हो गयी. ज़ाहिर था की नानाजी ने मुझे बाँहों मे उठा कर मुझे मेरे बिस्तर में लिटा कर सोने के लिए छोड़ गये थे.
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मैं उठ कर मुंह धो कर परिवार की बड़ी बैठक में चली गयी. मनू भैया और नीलम भाभी अपने मधुमास [हनीमून] के लए विदा होने वाले थे. दोनों दो महीनों का पूरे संसार का चक्कर लगाने के लए रवाना हो रहे थे. भैया और भाभी ने मुझे गले लगा कर प्यार से चूमा.
सारे परिवार के लोग कई कारों में भरकर दोनों नवविवाहित जोड़े को विमानघर छोड़ने के लिए चल पड़े.
वापसी में मैं बड़े मामा की कार में थी. हम दोनों पीछे की सीट पर थे. ड्राईवर ने बीच का अपारदर्शी शीशा चड़ा रखा था.
मैं शर्म के मारे लाल हो गयी. बड़े मामा ने मुस्करा के मेरी तरफ देखा, “नेहा बेटा, क्या आप मेरी गोद में नहीं बैठेंगी?” बड़े मामा मुझे चिड़ा रहे थे.
“मामाजी, आप बहुत गंदे हैं,” मैं कृत्रिम उपहास भरे क्रोध से बोली, “आप मुझे कितना सता रहें हैं.”
बड़े मामा पहले हँसे फिर धीरे से बोले, “नेहा बिटिया, जितना भी आपको लगता है कि मैं सता रहां हूँ, मैं उससे ज्यादा यातना सह रहा हूँ. आपको देख कर मेरी इच्छा होती है कि आपके सारे कपडे फाड़ कर आपको बिस्तर पर पटक कर आपकी चूत में अपना खड़ा लंड घुसेड़ कर सारा दिन और सारी रात आपकी चूत और गांड मारूं.”
मेरी साँसे मानो मेरे नियंत्रण से बाहर हो गयीं. बड़े मामा के अश्लील सहवास के वर्णन से मेरी कामाग्नी फिर से जागृत हो गयी. मैं शर्म से लाल हो गयी और सिर नीचे झुका लिया. सदियों से स्त्री की इस अवस्था का आशय पुरुष की वासना के सामने आत्मसमर्पण करने के लए तैयार होने का था. बड़े मामा ने मेरी लाज भरी अवस्था का अर्थ भी मेरे समर्पण के निर्णय से संलग्न कर लिया.
बड़े मामा ने मुझे अपनी शक्तिशाली बाँहों में उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया. कुछ ही क्षणों में उनका खुला मुंह मेरे खुले मूंह पर कस कर चिपक गया. बड़े मामा की जीभ मेरे मूंह में सब तरफ हलचल मचा रही थी. मेरे मामा का थूक मेरे मुंह ने बह रहा था. मुझे अपने बड़े मामा का थूक सटकने में बहुत आनंद आया. उनके हाथ मेरे दोनों उरोज़ों को सताने में व्यस्त हो गये. मेरे गुदाज़ चूतड़ उनकी गोद में मचलने लगे.
‘बड़े मामा,आप कब तक मुझे ऐसे तरसाते रहेंगें?” मेरी कमज़ोर सी धीमी आवाज़ मेरे मुंह से मीठी सी शिकायत के साथ निकली.
“नेहा बेटा, जब आप हमें अपनी इच्छा के बारे में विश्वास दिला देंगें.” बड़े मामा ने ज़ोर से दोनों उरोज़ों को दबा कर मेरे नाक का चुम्बन ले लिया,” तब हम दोनों की यातना का समाधान हमारे पास है.”
“किस इच्छा का विश्वास चाहिए आपको?” मैं थोड़ा इठला के बोली. मैं अब बड़े मामा की वासना की शिकार हो चुकी थी. मैंने अब अपने आपको बड़े मामा के आगे सम्पर्पण करने का निर्णय ले लिया था.
“आप हमें बतायें, बेटा, हम किस इच्छा की बात कर रहें है?” बड़े मामा मेरे मुंह से खुले रूप से हम दोनों की कामवासना का विवरण सुनना चाहते थे.
मेरी शर्म के मारे आवाज़ ही नहीं निकली. बड़े मामा ने मेरे दोनों चूचियों को बहुत ज़ोर से मरोड़ दिया. मेरी हल्की सी चीख निकल गयी.
“नेहा बेटी, जब तक आप हमें नहीं बतायेंगें कि हम दोनों की इच्छा क्या हैं तब तक हम दोनों की यातना का कोई हल नहीं निकलेगा.” बड़े मामा ने मुझे बिलकुल निरस्त कर दिया.
मैं मारी आवाज़ में धीरे से बोली, “बड़े मामा आप हमें चोदना चाहतें हैं. आप हमारी चूत में अपना लंड डालना चाहतें हैं.”
बड़े मामा हल्के से हँसे, “नेहा बेटा, क्या आप यह सब नहीं करना चाहते?”
मेरे मस्तिष्क में तूफ़ान सा उठ चला, “बड़े मामा, हम भी आप से अपनी चूत मरवाना चाहते हैं. मुझे भी आपका लंड देखना है. मैं भी आपके लंड से अपनी चूत मरवाऊंगी.”
बड़े मामा ने मुझे अपनी बाँहों में भींच कर कार की सीट पर लिटा कर अपने नीचे दबा लिया. पूरे रास्ते बड़े मामा ने मुझे चूमा और मेरे दोनों उरोज़ों का बेदर्दी से मंथन किया.
“पर मामाजी हमें इस को करने का अ..अ… चोदने का मौका कैसे मिलेगा?” आखिर में मेरी वासना ने अगम्यागमन की सामाजिक-वर्जना के डर के ऊपर विजय पाली.
“नेहा बेटा, वो आप मुझ पर छोड़ दो. जब मैं आपको इशारा करूँ आप मेरी योजना को अपनी सहमती दे देना.” बड़े मामा ने मेरे उरोज़ों को मसलते और मेरे होठों को चूमते हुए मुझे विश्वाश दिया.
घर के नज़दीक पहुँच कर ही मामाजी ने मुझे अपनी सलवार-कुरता सँवारने दिया.
यदि कोई मेरी तरफ ध्यान दे रहा होता तो, कार में बड़े मामा ने मेरे साथ क्या किया, मेरा शर्म से लाल चेहरा उसकी सारी दास्तान बता रहा था.

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